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मोदी 2.0 की शपथ से पहले ही अल्पसंख्यकों पर हमले तेज़
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने नारे ‘सबका साथ-सबका विकास’ में इस बार सबका विश्वास भी जोड़ा है लेकिन फिलहाल तो उनके समर्थक ही उसे बेमानी करते नज़र आ रहे हैं।
मुकुंद झा
27 May 2019
Muslim Men
फोटो साभार: News18

23 मई को मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ जीत हासिल की लेकिन अभी उनकी सरकार ने औपचारिक रूप से शपथ भी नहीं ली है और हिंदूवादी दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े कथित धर्म और गौ-रक्षकों ने मुसलमानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। मध्य प्रदेश के सिवनी इलाक़े में महिला समेत तीन लोगों को बेरहमी से पीटते इन गौरक्षकों के बाद हरियाणा के गुड़गाँव में एक मुस्लिम युवक को धार्मिक टोपी पहनने पर बुरी तरह से पीटा गया और जय श्री राम का नारा लगाने को मजबूर किया गया। इसके अलावा, बिहार के बेगूसराय में भी एक मुस्लिम फेरीवाले मोहम्मद कासिम को उसका नाम पूछने के बाद पाकिस्तान जाने को कहा गया और गोली मार दी गई।

मोदी सरकार 2.0  ने अभी शपथ नहीं ली है लेकिन इस तरह की घटनाओं के बाद से सवाल उठ रहा है कि ये इस देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। क्योंकि प्रधानमंत्री ने अपने चुनाव के बाद संसद में अपने पहले भाषण में संविधान को नमन करते हुए कहा कि वह अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने की कोशिश करेंगे। लेकिन उनके समर्थको द्वार लगातार ऐसी घटनाएं की जा रही हैं और उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही तब मोदी  के कथनी और करनी में अंतर लगता है। उन्होंने अपने नारे ‘सबका साथ-सबका विकास’ में इस बार सबका विश्वास भी जोड़ा है लेकिन फिलहाल तो उनके समर्थक ही उसे बेमानी करते नज़र आ रहे हैं।

ये कोई पहला मामला नहीं है, जब किसी अल्पसंख्यक पर सरेआम ऐसे हमला हुआ है। चुनाव से पहले और बाद में मुस्लिमों पर हमले की कई खबरें कई जगहों से आ रही हैं।

बेगूसराय की घटना पर सीपीआई के नेता कन्हैया कुमार ने ट्वीट कर कहा कि "बेगूसराय में एक मुस्लिम फेरीवाले को पाकिस्तान जाने की बात कहते हुए गोली मार दी गई। इस तरह के अपराधों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे तमाम नेता व उनके राग दरबारी दोषी हैं जो दिन-रात सियासी फ़ायदों के लिए नफ़रत फैलाते हैं। अपराधियों को सज़ा दिलाने तक हम चैन से नहीं बैठेंगे।"

हरियाणा की पूरी घटना

हरियाणा के गुड़गांव में चार अज्ञात युवकों ने 25 वर्षीय एक मुस्लिम युवक की कथित तौर पर एक पारंपरिक टोपी पहनने पर पिटाई कर दी। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी। पीड़ित की पहचान बिहार निवासी मोहम्मद बरकत आलम के रूप में हुई है। वह गुड़गांव के जोकब पुरा इलाके में रहता है। रविवार को पुलिस को दी गई शिकायत में आलम ने आरोप लगाया कि सदर बाजार लेन में चार अज्ञात युवकों ने उसे टोका और उसके टोपी पहनने पर आपत्ति जताई।

सदर थाने में दर्ज प्राथमिकी में युवक ने कहा, ‘‘आरोपी ने मुझे धमकी दी, कहा कि इलाके में टोपी पहनने की अनुमति नहीं है। उन्होंने मेरी टोपी हटा दी और मुझे थप्पड़ मारा और मुझे भारत माता की जय बोलने को कहा।’’
उन्होंने बताया, ‘‘मैंने उनके निर्देश का पालन किया और भारत माता की जय कहा, उन्होंने मुझे जय श्री राम कहने को कहा जिससे मैंने इंकार कर दिया। इस पर, युवकों ने सड़क किनारे से एक लाठी उठाई और मुझे पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझे पैरों और पीठ पर मारा।’’

प्राथमिकी में आलम ने कहा कि घटना के वक्त वह सदर बाजार के एक मस्जिद में नमाज अदा कर घर लौट रहा था।

उन्होंने बताया कि मदद के लिए चिल्लाने की उसकी आवाज सुन कर उसके समुदाय के अन्य लोग उसकी मदद के लिए पहुंचे,जिसके बाद हमलावर घटनास्थल से फरार हो गये।

गुड़गांव शहर के एसीपी राजीव कुमार ने बताया, ‘‘हमें घटना की शिकायत मिली है। सदर थाने में धारा 153, 147, 149, 323 और506 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। हमने व्यक्ति का चिकित्सा परीक्षण भी कराया है।’’

मध्य प्रदेश की घटना

इससे पहले भी मध्य प्रदेश के सिवनी में 22 मई को कथित गोमांस को लेकर हुए विवाद में दो और लोगों को रविवार को गिरफ्तार किया गया। ये दोनों कथित तौर पर गोमांस बेचने वाले हैं। इसी के साथ इस संबंध में अब तक गिरफ्तार किये गए लोगों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। 22 मई की सुबह मंडला रोड स्थित डूंडा सिवनी थाना क्षेत्र में स्वयंभू गौरक्षकों ने कथित गोमांस ले जाने के संदेह में दो लोगों की कथित रूप से डंडे से पिटाई कर दी थी। इसमें एक महिला को उसके एक साथी द्वारा चप्पल से पिटवाया था। पीटने एवं पिटवाने के बाद स्वयंभू गौरक्षकों ने सोशल मीडिया पर 23 मई को इस घटना का एक वीडियो भी डाल दिया था, जिसके वायरल होने पर तीखी प्रतिक्रियाएं आई थीं।

मोदी जी जब संसद में खड़े होकर संविधान  को नमन करते हुए सबका साथ और सबका विकास की बात करते है, अल्पसंख्यकों खासतौर पर मुस्लिमो के विश्वास को जीतने की बात करते  है तो उम्मीद जगती है,लेकिन फिर जब इस तरह की घटना होती है। इस तरह की घटना करने वाले अधिकतर मोदी जी को अपना आदर्श और उनका समर्थक बताते है और उनपर गुंडों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, तब यह एक आपराधिक साज़िश से ज्यादा कुछ नहीं लगता है।

क्या मोदी कमजोर प्रधानमंत्री है!

इन सब घटनाओं पर प्रधानमंत्री जी के बोलने के बाद जब कोई कार्रवाई नहीं होती तब मन में शंका होती क्या सच में यह मज़बूत सरकार है या मज़बूर सरकार है? ऐसा इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि उन्होंने सार्वजानिक रूप से कई बार इन मामलों के लेकर आपत्ति जताई है लेकिन ऐसा लगता है कगि उनकी कोई सुन ही नहीं रहा है। क्योंकि कभी भी इन मामलो में कोई गंभीर कार्रवाई होती दिखी नहीं है। 

पिछले कार्यकाल में जब पूरे देश में गौरक्षा के नाम पर मुसलमानों पर हमले किये जा रहे थे। जब कई लोगों ने अपनी जान गँवा दी उसके बाद 13 जुलाई 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोमांस व्यापारियों, गोमांस के उपभोक्ताओं एवं डेयरी किसानों पर भीड़ द्वारा किए गए जानलेवा हमले की निंदा करते हुए कहा कि गौरक्षा के नाम पर लोगों की जान लेना अस्वीकार्य है। लेकिन इसके बाद भी जब अख़लाक़, जुनैद और रकबर खान जैसे मामलो में न्याय नहीं होता है। तब लगता है क्या इन मामलों पर कभी कड़ी कार्रवाई नहीं होगी?  क्या यह नफ़रत का सिलसिला जारी रहेगा।

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