NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मोदी के शासन में, अमीर ज़्यादा अमीर और गरीब ज़्यादा गरीब हो रहे हैं
देश की आधे से अधिक संपत्ति अब सबसे अमीर 1 प्रतिशत के पास चली गयी है जबकि तीन तिहाई संपत्ति शीर्ष 10 प्रतिशत के पास है।
सुबोध वर्मा
22 Oct 2018
rich

स्विट्जरलैंड स्थित निवेशक बैंक क्रेडिट सुइस द्वारा प्रकाशित नवीनतम वैश्विक संपत्ति अर्जित करने वालो पर जारी रिपोर्ट 2018 में देश के अभिजात वर्ग के बीच बहुत उत्सवपूर्ण स्थिति है। यह कहती है कि भारत में अब 343 डॉलर-करोड़पति हैं, यानी, जिनके पास दस लाख डॉलर से ज्यादा की सम्पत्ति है। यह लगभग 7 करोड़ रुपये है।

लेकिन इसी रिपोर्ट में चौंकाने वाले आँकड़े भी है: देश की कुल संपत्ति का लगभग 52 प्रतिशत अब आबादी के शीर्ष 1 प्रतिशत द्वारा नियंत्रित किया जाता है जबकि शेष 99 प्रतिशत को केवल 48 प्रतिशत धन पर संतुष्ट होना पड़ रहा है।आश्चर्यजनक बात यह है कि धन वितरण में यह असाधारण असंतुलन – जिसे अन्यथा असमानता के रूप में जाना जाता है - 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह ओर खराब स्थिति में पहुंच गया है। उस वर्ष में यह हिस्सा शीर्ष 1 प्रतिशत के पास कुल 49 प्रतिशत था और 2014 की क्रेडिट सुइस रिपोर्ट के अनुसार 99 के पास शेष संपत्ति का 51 प्रतिशत था।

यदि आपको लगता है कि अंतर बहुत अधिक नहीं है, तो इसे देखने का एक ओर तरीका यहां मौजूद है: जब  मोदी के शासन के तहत डॉलर करोड़पतियों की आबादी में 0.02 प्रतिशत से 0.04 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि उन वयस्कों की संख्या में जिनके पास 7 लाख रुपये  (10,000 डॉलर) से कम की सम्पत्ति थी उनकी आबादी का हिस्सा 94.5 प्रतिशत से घटाकर 90.8 प्रतिशत रह गया। नतीजतन, 77 करोड़ से अधिक ऐसे वयस्क हैं जिनके पास 7 लाख से भी कम की संपत्ति है और वयस्कों की कुल आबादी 85 करोड़ आंकी गयी है।
यह रिपोर्ट क्या दिखाती है कि वयस्कों की एक बहुत ही छोटी अल्पसंख्यक आबादी जो मुट्ठी भरहै  ने वास्तव में पिछले पांच वर्षों में काफी तरक्की की है, जबकि बाकी लोग, खासतौर पर गरीब, ज्यादा गरीब हुए हैं या वे उस ही स्थिति में रहे जिनमें वे थे।

यह तथ्य गिनी गुणांक नामक असमानता के एक उपाय में भी दिखाई देता है। 2014 में भारत का गिनी गुणांक 81.4 प्रतिशत से बढ़कर 2018 में 85.4 प्रतिशत हो गया है। ध्यान दें कि 100 प्रतिशत का गिनी गुणांक 'पूर्ण' असमानता का प्रतिनिधित्व करता है जबकि 0 कोई असमानता का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

ये सभी संख्या संपत्ति से से संबंधित है न कि आय से। यह उन सभी संपत्तियों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें व्यक्ति ने पिछले कुछ वर्षों में संचित या विरासत में प्राप्त किया हो। धन में वित्तीय संपत्तियां (जैसे शेयर और बांड), गैर-वित्तीय संपत्तियां (भूमि, घर) या ऋण शामिल हो सकते हैं। संपत्ति इस अर्थ से आय से संबंधित है कि यदि आपके पास उच्च आय है, तो आप जो धन जमा करेंगे क्योंकि आप जो कमाते हैं वह आप खर्च नहीं कर सकते हैं। इसके विपरीत, एक गरीब व्यक्ति अपनी अधिकांश आय वर्तमान खपत - भोजन, किराया, परिवहन इत्यादि पर खर्च करता है - और कोई धन नहीं जोड़ पाता है। क्रेडिट सुइस इस रिपोर्ट में आय ट्रैक नहीं करता है।

आय विश्व असमानता डेटाबेस (डब्ल्यूआईडी) नामक किसी अन्य डेटाबेस संस्था द्वारा ट्रैक की जाती है, जिसने हाल ही में रिपोर्ट जारी की है कि, भारत में, आबादी के नीचे तबके की 50 प्रतिशत की औसत मुद्रास्फीति समायोजित आय प्रति वयस्क प्रति वर्ष 45,000 रुपये प्रति वयस्क थी, जबकि उच्च 1 प्रतिशत की आय 33 लाख रुपये प्रति वर्ष प्रति वयस्क थी।भारत में जिनके पास धन होना चाहिए और जिनके पास नही होनी चाहिए के बीच आय की यह चौंका देने खाईं असमानता के पूरक है। बाद वाले ने पहले को स्थिर किया हुआ है - असल में, इस आय असमानता के कारण संपत्ति की असमानता बढ़ रही है।

इन रहस्योद्घाटनों ने निर्णायक रूप से मोदी सरकार के देश को चलाने के तरीके के बारे में सभी संदेह को हटा दिया है- इसने गरीबों को निचोड़कर कॉर्पोरेट संस्थाओं और बड़ी संपत्ति के मालिकों को फायदा पहुंचाया है। यह संभव है कि मध्यम वर्ग के भी कुछ वर्गों की आय में वृद्धि हो सकती है या संपत्ति की कीमतों या शेयर बाजार के जुए की वजह से उनकी संपत्ति में वृद्धि हो सकती है। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि मोदी ने अपने सबसे बड़े, सबसे आकर्षक वादे को धोखा दिया है - अच्छे दिन जल्द ही आ रहे हैं।
 
 

wealth inequality
global wealth report
Modi government
income inequality

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

महामारी के दौर में बंपर कमाई करती रहीं फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है


बाकी खबरें

  • Smriti Irani
    न्यूज़क्लिक टीम
    स्मृ‍ति ईरानी से सवाल पूछना कब से गुनाह हो गया?
    11 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं BJP नेता स्मृति ईरानी और एक कांग्रेस प्रवक्ता के बीच महंगाई पर हुए आरोप प्रत्यारोप पर।
  • पीपल्स डिस्पैच
    ग्रीस में प्रगतिशीलों ने ज़ेलेंस्की के नव-नाज़ियों के साथ संसद के संबोधन को ख़ारिज किया 
    11 Apr 2022
    यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के संबोधन के बाद ग्रीक संसद में नव-नाज़ी अज़ोव सैनिक के साक्ष्य की व्यापक रूप से निंदा की जा रही है। 
  • Shehbaz Sharif
    भाषा
    शहबाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री निर्वाचित
    11 Apr 2022
    तीन बार पूर्व प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज को 174 मत मिले जो 172 के साधारण बहुमत से दो ज्यादा है।  वह पाकिस्तान के 23वें प्रधानमंत्री हैं।
  • सोनिया यादव
    बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?
    11 Apr 2022
    सहसा के बाद अब बगहा में पंचायत का तुगलकी फरमान सामने आया है, जिसमें एक 14 वर्षीय नाबालिग से 3 बार दुष्कर्म करने वाले उसके बुजुर्ग पड़ोसी पर पंचायत ने  ₹ 2 लाख जुर्माना लगाकर मामला निपटाने का आदेश…
  • भाषा
    छत्तीसगढ़: खैरागढ़ विधानसभा सीट के लिए मंगलवार को मतदान, तैयारी पूरी
    11 Apr 2022
    जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के विधायक देवव्रत सिंह के निधन के बाद से रिक्त इस सीट के लिए 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला सत्ताधारी दल कांग्रेस, मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License