NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
मोदी सरकार के ख़िलाफ़ महिलाओं का घोषणापत्र
चार्टर के अनुसार समाज में विभाजन और घृणा को सत्ताधारी दल ने औपचारिक और अनौपचारिक रूप से समर्थन किया व उसे मज़बूत किया है। इसलिए सभी महिला संगठनों ने एक स्वर में इस सरकार को मनुवादी सरकार बताते सत्ता से बेदख़ल करने का संकल्प लिया है।
मुकुंद झा
15 Mar 2019
मोदी सरकार के ख़िलाफ़ महिलाओं का घोषणापत्र

नरेंद्र मोदी सरकार के पांच वर्षों के दौरान बढ़ी जातीय, सांप्रदायिक और लैंगिक, साथ ही संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पर वादाख़िलाफ़ी  समेत भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे अधिकारों पर हमले लगातर बढ़े हैं। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर कल 14 मार्च को महिलाओं ने राजनीतिक दलों के लिए 11-सूत्री मांगों का चार्टर प्रस्तुत किया।

चुनावी घोषणापत्र में इन मांगों को शामिल करने की मांग करते हुए, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एआईडीडब्ल्यूए) की महासचिव मरियम धावले ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा और इसके प्रति सरकार की निष्क्रियता बहुत चिंताजनक है।

FB_IMG_1552563776639.jpg

उन्होंने आगे कहा कि निर्भया फ़ंड का भी सरकार उपयोग नहीं कर रही है। इस फ़ंड के पैसों को किसी और की मदद ख़र्च किया जा रहा है। उस उद्देश्य के लिए नहीं किया जा रहा है जिसके लिए इसका गठन किया गया था। उन्होंने बताया की इस सरकार में लगातार लिंग अनुपात में गिरावट आई है, 17 राज्य ऐसे हैं जहाँ 2011 के सर्वे में जितना लिंग अनुपात था अब उसमें गिरावट आ रही है। लेकिन यह मोदी सरकार महिलाओं से संबंधित समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है बल्कि अपने झूठे प्रचार में व्यस्त है।

मांगों के संयुक्त चार्टर का मसौदा तैयार करने वाले संगठनों में विभिन महिला संगठन शामिल हैं:

अखिल भारतीय दलित महिला अधिकार मंच (एआईडीएमएएम), अखिल भारतीय जनवादी  महिला समिति (एआईडीडब्ल्यूए), अखिल भारतीय महिला संस्कृत संगठन (एआईएमएस), अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ (एआईपीडब्ल्यूए) गिल्ड ऑफ सर्विस, मुस्लिम महिला फ़ोरम (एमडब्ल्यूएफ़), नेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन विमेन (NFIW) और पुरोगामी महिला संगठन (PMS)। इन राष्ट्रीय महिला संगठनों के अलावा अलग-अलग राज्यों में कई राज्य स्तरीय महिला संगठन भी इसमें शामिल हैं।
संयुक्त चार्टर ने केवल करदाताओं को छोड़कर सभी को, विशेष रूप से एकल महिलाओं, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, विकलांगों, प्रवासियों और सड़क पर रहने वालों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न की न्यूनतम सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सार्वभौमिकरण करने की मांग की है।

रुश्दा जो एनएफ़आईडब्ल्यू का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, उन्होंने कहा, "सरकार द्वारा लाई गई सार्वजनक प्रणाली के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली और उज्ज्वला योजना 'सबसे बड़ी विफ़लता' हैं। आधार को बैंक खातों के साथ जबरन जोड़ने से हमारे मुद्दे हल नहीं होंगे और न ही बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ जैसे जुमले  सफ़ल होंगे। हम अपने मुद्दों को लेकर लड़ेंगे।

पुलवामा हमले के बाद भाजपा के 'अति राष्ट्रवाद' अभियान पर कटाक्ष करते हुए, पीएमएस की प्रतिनधि छाया ने कहा, “सरकार आज यह बताती है कि पाकिस्तान हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है, लेकिन इस शासन में हमारी महिलाओं की दयनीय स्थिति पाकिस्तान की ग़लती नहीं है! महिलाओं के ख़िलाफ़ इस तरह के जघन्य अपराधों के लिए कौन ज़िम्मेदार है और ऐसे अपराधी खुलेआम क्यों घूमते हैं? यह इसलिए है क्योंकि हमारी सरकार हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफ़ल रही है और इसके बजाय लोगों को जाति, वर्ग, समुदाय आदि पर विभाजित करने में व्यस्त है।"

चार्टर यह भी बताता है कि समाज के भीतर बढ़ती सांप्रदायिक और जातिगत कट्टरवाद की भयावह स्थिति में मोदी के चार साल में भरी वृद्धि हुई है। 
“यदि मोदी महिलाओं के मुद्दों को लेकर इतनी गंभीर हैं, तो ऐसा कैसे है कि उन्होंने ऐसे अपराधों के ख़िलाफ़ कड़े क़ानूनी उपायों को लाने के लिए कोई भी क़दम नहीं उठाया है? दमनकारी रीति-रिवाजों के लिए यह असहिष्णुता जो हिंदू महिलाओं को पीड़ित करती है, उसके ख़िलाफ़ वो मौन हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश द्वारा पहले ही अवैध बना दिए जाने वाले ट्रिपल तलाक़ को लेकर तलाक़शुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए मगरमच्छ के आंसू बहाने का पाखंड भाजपा करती है। वहीं सबरीमाला के मुद्दे पर महिलाओं के ख़िलाफ़ खड़ी होती है। चार्टर के अनुसार समाज में विभाजन और घृणा को सत्ताधारी दल ने औपचारिक और अनौपचारिक रूप से समर्थन किया व उसे मज़बूत किया है। इसलिए सभी महिला संगठनों ने एक स्वर में इस सरकार को मनुवादी सरकार बताते सत्ता से बेदख़ल करने का संकल्प लिया है।"
इसके साथ उन्होंने सभी राजनितिक दलों से उनके मुद्दों को प्रमुखता से अपने घोषणा पत्र में डालने की मांग की, इसके लिए सभी संगठन देश भर में प्रचार करेंगे। इस बार देश में धर्म निरपेक्ष सरकार बनाने की बात भी कही गई। 

AIDWA
Women Rights
violence against women
Narendra Modi Government
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान


बाकी खबरें

  • Ukraine Russia
    पार्थ एस घोष
    यूक्रेन युद्ध: क्या हमारी सामूहिक चेतना लकवाग्रस्त हो चुकी है?
    14 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न उस पवित्र गाय के समान हो गया है जिसमें हर सही-गलत को जायज ठहरा दिया जाता है। बड़ी शक्तियों के पास के छोटे राष्ट्रों को अवश्य ही इस बात को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि बड़े…
  • Para Badminton International Competition
    भाषा
    मानसी और भगत चमके, भारत ने स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 21 पदक जीते
    14 Mar 2022
    भारत ने हाल में स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय (लेवल दो) प्रतियोगिता में 11 स्वर्ण, सात रजत और 16 कांस्य से कुल 34 पदक जीते थे।
  • भाषा
    बाफ्टा 2022: ‘द पावर ऑफ द डॉग’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म
    14 Mar 2022
    मंच पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार देने आए ‘द बैटमैन’ के अभिनेता एंडी सर्किस ने विजेता की घोषणा करने से पहले अफगानिस्तान और यूक्रेन के शरणार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए सरकार पर निशाना…
  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक
    14 Mar 2022
    बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है।
  • indian railway
    बी. सिवरामन
    भारतीय रेल के निजीकरण का तमाशा
    14 Mar 2022
    यह लेख रेलवे के निजीकरण की दिवालिया नीति और उनकी हठधर्मिता के बारे में है, हालांकि यह अपने पहले प्रयास में ही फ्लॉप-शो बन गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License