NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
समाज
भारत
मुद्दा : दो क़दम आगे बढ़ाती महिलाएं, चार क़दम पीछे धकेलता समाज
हम आज भी अपने अस्तित्व बचाने की ही लड़ाई में बहुत पीछे छूटते पर जा रहे हैं। इस अजीब और भयावह विरोधाभास से एक स्त्री समाज रोज़ गुजर रहा है।
सरोजिनी बिष्ट
01 Aug 2019
women abuse
प्रतीकात्मक तस्वीर

अपने लंबे संघर्षों के बाद यदि हम यह आकलन करें आखिर हमने क्या खोया और क्या पाया तो एक तरफ तो यह आकलन हमें चांद की ऊंचाइयों तक ले जाता है और दूसरी तरफ हमें यह सोचने को मजबूर करता है कि हम आज भी अपने अस्तित्व बचाने की ही लड़ाई में बहुत पीछे छूटते पर जा रहे हैं। इस अजीब और भयावह विरोधाभास से एक स्त्री समाज रोज़ गुजर रहा है।

अभी कुछ दिन पहले ही दुनिया को अपनी ताकत दिखाते हुए हमने चंद्रयान 2 का सफल लांच किया। इस अभियान की चर्चा इस रूप में भी हुई की इसमें देश की दो महिलाओं ने भी अपनी दमदार भूमिका निभाई। पूरे देश ने उन महिलाओं को हाथों हाथ लिया और गर्व प्रदर्शित किया तो वहीं हिमा दास के आगे देश नतमस्तक हुआ। लेकिन देश जब एक ओर महिलाओं के संघर्ष को सलाम करता है तो उसी समय इन सुखद समाचारों के बीच एक ख़बर यह भी आती है की डायन बता समाज के ही लोगों ने महिला को मैला पिलाया या भीड़ ने उसकी हत्या कर दी तो वहीं समाज में महिलाओं की सम्मानजनक स्थिति की सत्यता पर भी वह ख़बर जोरदार प्रहार करती है जब भीड़ द्वारा एक अकेली असहाय महिला को अपनी कुंठा और आक्रोश का शिकार बनाते हुए सबके सामने नग्न अवस्था में पीटने की तस्वीर सामने आती है। 

पिछले दिनों राजस्थान के राजसमंद से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने महिला विरोधी समाज का चेहरा उजागर कर दिया। भीड़ द्वारा एक महिला को अर्द्धनग्न अवस्था में पीटते हुए गांव भर में घुमाया गया। जानकारी के अनुसार राजसमंद जिले के नाथद्वारा थाना इलाके के गांव उपली ओडन में एक युवती को युवक भगाकर ले गया था, जिसकी नाथद्वारा पुलिस थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई गई। 

15 दिन तक युवक-युवती का पता नहीं चलने पर युवती के परिजनों ने बुधवार रात को आरोपी युवक की मां से उनका पता लगाने की बात को लेकर घर में घुसकर मारपीट की। उसके कपड़े फाड़ दिए और फिर उसको अर्धनग्न अवस्था में चोटी पकड़ घसीटते-पीटते हुए गांव में घुमाया। उस वक़्त महिला घर में अकेली थी। पति की मृत्यु हो चुकी है और बेटा घर पर मौजूद नहीं था। जब ये सबकुछ हो रहा था और महिला वहां मौजूद भीड़ से मदद की गुहार लगा रही थी तो लोग बजाय मदद के वीडियो बनाने और तमाशा देखने में मशगूल थे। इस घटना ने महिला को काफी मानसिक आघात पहुंचाया। पर केवल उसके लिए ही नहीं यह हमारे लिए भी  मानसिक आघात से कम नहीं कि किस कदर लोग इंसान बनने की बजाय भीड़ में तब्दील होते जा रहे हैं। दो घंटे तक महिला को बन्धक बनाकर मानसिक और शारारिक प्रताड़ना दी जाती रही लेकिन बचाने के लिए कोई आगे नहीं आया।

इसी तरह की अमानुषता पिछले कुछ समय में झारखंड में भी दिखाई डी जहां एक के बाद एक डायन बता महिलाओं को मैला पिलाने की घटनाएं सामने आईं। इधर महिलाओं को मैला पीने में मजबूर किया जा रहा था और उधर देश की राजधानी में एक सिरफिरे ने अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की को इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्यूंकि उसने उसका प्रेम प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया था। वह लड़की पढ़ाई के साथ साथ अपने घर का खर्च चलाने के लिए नौकरी भी करती थी। उसके पिता हार्ट अटैक के कारण कुछ करने में असमर्थ थे इसलिए उसने परिवार की जिम्मेवारी अपने कन्धों पर ली लेकिन उसका संघर्ष एक पुरुषवादी अहम के आगे हार गया।

लड़के को उसका इनकार इतना नगवार गुजरा की बात हत्या तक पहुंच गई। पता नहीं हम आसमान के चांद को जीतने में कामयाब होंगे या नहीं पर हमारी धरती का समाज रह रहकर हमारे आगे कड़ी चुनौतियां पैदाकर हमें हराने की जुगत में लगा है और समाज से पहले जब बात परिवार पर आ जाती है तो संघर्ष, पीड़ा और गहन हो जाती है।  बिहार के शेखपुरा से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने इस सच को एक बार फिर उजागर किया कि अभी भी लोग किस कदर लड़का लड़की के भेद में जकड़े हुए हैं।

शेखपुरा की उस लड़की ने फर्स्ट डिवीजन में हाई स्कूल पास किया लेकिन किडनी की बीमारी ने उसे मौत के मुंह में लाकर खड़ा कर दिया। उसकी दोनों किडनियां बेकार हो चली है लेकिन माता पिता इसलिए उसे किडनी नहीं देना चाहते क्योंकि वह लड़की है तो उनकी सोच यहां तक आकर खत्म हो जाती है कि बीमार लड़की पर अथाह पैसा और किडनी बरबाद करने से क्या फायदा। हालांकि परिवार गरीब है लेकिन यदि दोनों में से कोई किडनी देने को तैयार होता है तो मदद को हाथ आगे आने को तैयार हैं पर एक गरीब पिता इस हिसाब का जोड़ लगाकर आगे बढ़ने की शायद हिम्मत नहीं जुटा पा रहा कि आज किसी तरह उसे बचा भी ले तो उसकी एक किडनी वाली बेटी से कौन विवाह करेगा और हो सकता है इस एवज में कल को उसे दान दहेज भी अपनी हैसियत से बढ़कर देना पड़े। 

इसमें दो मत नहीं कि इन अंतर्द्वंदों के चलते दो कदम आगे बढ़ता स्त्री समाज चार कदम पीछे धकेल दिया जा रहा है। कहीं वह शीर्ष पर है, जिसे स्वयं समाज भी स्वीकार कर रहा है और कहीं उसकी हैसियत इतनी भर कि उससे इंसान होने तक का दर्जा छीन लिया जाय। इतने बड़े अस्वभाविक अंतराल को खत्म करने के लिए अभी अनगिनत संघर्षों का दौर बाकी है पर यह हमारे पिछले संघर्षों का ही नतीजा है कि इतना होने के बावजूद महिला समाज न केवल अपना अस्तित्व बचाए हुए है बल्कि इस पितृसत्तात्मक समाज के आगे चुनौतियां भी पेश कर रहा है और इन्हीं चुनौतियों का उदाहरण है कि तेजाब से जलाई जाने वाली लड़कियां अब अपना मुंह ढककर जीवन व्यतीत नहीं करती बल्कि दुनिया को अपना चेहरा दिखाकर हिम्मत के साथ जीती हैं।

बलात्कार पीड़ित अब चुप रहकर नहीं बल्कि चुप्पी तोड़कर अपने खिलाफ़ हुई हिंसा को बयां कर रही हैं।  बलात्कारी कितना भी दबंग और रसूख वाला क्यों न हो उनको अदालत में घसीट रही हैं। शारीरिक मानसिक और यौनिक हिंसा की शिकार लड़कियां और महिलाएं न केवल बोल रही हैं बल्कि मीडिया में साक्षात आकर अपने खिलाफ हुई हिंसा के विरुद्ध मुखर भी हैं। तो शर्त इतनी भर है कि हमें इसी सामाजिक ताने बाने के साथ रहते हुए भी इसी ताने बाने से अलग राहें गढ़नी होंगी ताकि एक स्त्री समाज कम से कम अपने विरुद्ध खड़ी गैरबराबरी की दीवार को पूरी तरह ध्वस्त करने का जश्न मना सके।

(यह लेखिका के निजी विचार हैं।)

Chandrayaan-2
crimes against women
violence against women
exploitation of women
Rape And Murder Case
mob lynching
Rajasthan
Jharkhand
Delhi

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'


बाकी खबरें

  • ukraine russia
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर रूसी हमला जारी, क्या निकलेगी शांति की राह, चिली-कोलंबिया ने ली लाल करवट
    15 Mar 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में, वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यूक्रेन पर रूसी हमले के 20वें दिन शांति के आसार को टटोला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के साथ। इसके अलावा, चर्चा की दो लातिन…
  • citu
    न्यूज़क्लिक टीम
    स्कीम वर्कर्स संसद मार्च: लड़ाई मूलभूत अधिकारों के लिए है
    15 Mar 2022
    CITU के आह्वान पर आज सैकड़ों की संख्या में स्कीम वर्कर्स ने संसद मार्च किया और स्मृति ईरानी से मुलाकात की. आखिर क्या है उनकी मांग? क्यों आंदोलनरत हैं स्कीम वर्कर्स ? पेश है न्यूज़क्लिक की ग्राउंड…
  • yogi
    रवि शंकर दुबे
    चुनाव तो जीत गई, मगर क्या पिछले वादे निभाएगी भाजपा?
    15 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भले ही भाजपा ने जीत लिया हो लेकिन मुद्दे जस के तस खड़े हैं। ऐसे में भाजपा की नई सरकार के सामने लोकसभा 2024 के लिए तमाम चुनौतियां होने वाली हैं।
  • मुकुल सरल
    कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते
    15 Mar 2022
    क्या आप कश्मीर में पंडितों के नरसंहार के लिए, उनके पलायन के लिए मुसलमानों को ज़िम्मेदार नहीं मानते—पड़ोसी ने गोली की तरह सवाल दागा।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः खेग्रामस व मनरेगा मज़दूर सभा का मांगों को लेकर पटना में प्रदर्शन
    15 Mar 2022
    "बिहार में मनरेगा मजदूरी मार्केट दर से काफी कम है। मनरेगा में सौ दिनों के काम की बात है और सम्मानजनक पैसा भी नहीं मिलता है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License