NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
घटना-दुर्घटना
मुजफ्फरनगर दंगा और कुछ गंभीर सवाल
मुजफ्फरनगर में 2013 के दंगे से जुड़े मामलों में जो घटित हो रहा है वह पुलिस, प्रशासन और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Jul 2019
मुजफ्फरनगर दंगा
प्रतीकात्मक तस्वीर Image courtesy: Patrika

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुधवार को मुजफ्फरनगर दंगे के 20 और मामलों को वापस लेने की अनुमति दी है। इसके साथ मुजफ्फरनगर दंगे मामले में कुल वापस लिए गए मामलों की संख्या 74 हो गई। सरकार द्वारा जिन मामलों को वापस लेने की अनुमति दी गई है, वे पुलिस व जनता की तरफ से दर्ज किए गए हैं। 

ये सभी मामले आगजनी, चोरी व दंगे से जुड़े हैं और फुगना पुलिस थाने में दर्ज किए गए थे। इसमें से कुछ मामले भौराकलां, जनसठ, न्यू मंडी व कोतवाली पुलिस थानों में दर्ज किए गए थे। 

योगी सरकार बीते साल से मुजफ्फरनगर दंगे के मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया में है। लोकसभा चुनाव से पहले 8 मार्च तक सात आदेशों में 48 मामलों को वापस लेने की अनुमति दी गई। 

अदालत में पांच मामलों को निपटाया गया, जबकि एक मामले में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है। लोकसभा चुनावों के बाद तीन आदेश जारी किए गए, इसमें दंगों के 20 मामलों को वापस लेने की अनुमति दी गई। 

आपको बता दें कि दंगों के बाद पुलिस ने 500 से ज्यादा लोगों पर मामला दर्ज किया था।

हालांकि 74 मामलों को बंद करने की उत्तरप्रदेश सरकार की मांग के बावजूद उसे अदालत से अभी एक भी मामले को वापस लेने की अनुमति नहीं मिली है। 

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अमित कुमार सिंह के मुताबिक, ‘राज्य सरकार ने दंगे के कुल 74 मामलों को वापस लेने के लिए पिछले छह महीने में 10 अलग-अलग अधिसूचना जारी की।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि, सरकार को एक भी मामला वापस लेने की अनुमति नहीं मिली है।’जिला प्रशासन को करीब दो महीने पहले 20 मामले वापस लेने के अंतिम निर्देश मिले थे लेकिन सभी अनुरोध अदालत के सामने विचार के लिए लंबित है।

41 में से 40 मामलों में आरोपी हुए बरी

अभी हाल में इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने मुजफ्फरनगर दंगा मामले में बड़ा खुलासा किया था। अखबार ने बताया कि 41 में से 40 मामलों में आरोपी बरी हो गए। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मुजफ्फरनगर दंगों में पुलिस ने अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि हत्या में इस्तेमाल हथियारों को पुलिस ने कोर्ट में पेश नहीं किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 41 मामलों में फैसला सुनाया गया। इनमें से हत्या के सिर्फ एक मामले में सजा हुई। मुस्लिमों पर हमले के बाकी सभी मामलों में आरोपी बरी हो गए। आपको बता दें कि साल 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के सिलसिले में बीते दो सालों में चले हत्या के 10 मुकदमों में अदालतों ने सभी आरोपियों को छोड़ दिया है। 

रिपोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष के पांच गवाह कोर्ट में गवाही देने से इसलिए मुकर गए कि अपने संबंधियों की हत्या के वक्त मौके पर मौजूद नहीं थे। वहीं 6 अन्य गवाहों ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने जबरन खाली कागजों पर उनके हस्ताक्षर लिए है। इतना ही नहीं रिपोर्ट के मुताबिक, 5 मामलों में हत्या में इस्तेमाल हुए हथियार को पुलिस ने कोर्ट में पेश ही नहीं कर पाई।

साल 2017 के बाद दंगों से जुड़े 41 मामलों में मुजफ्फरनगर की स्थानीय कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इन 40 मामलों में आरोपी छूट गए हैं। सिर्फ एक मामले में सजा का एलान हुआ है। बता दें कि जिन 40 मामलों में जो आरोपी छूटे हैं उनके ऊपर मुस्लिम समुदाय पर हमले करने के आरोप थे।

इंडियन एक्सप्रेस ने जिला सरकार के वकील के हवाले से लिखा है कि चूंकि आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट गवाहों के बयानों पर आधारित थी और गवाह अदालत के सामने अपने बयानों से मुकर गए, इसलिए राज्य सरकार रिहा हुए आरोपियों के संबंध में कोई अपील नहीं करेगी।

गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान 65 लोग मारे गए थे। इसके खिलाफ सभी मुकदमों को पूर्व अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में दायर किया गया था। इनकी जांच भी अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई। हालांकि इनकी सुनवाई वर्तमान योगी सरकार के कार्यकाल में चल रही थी। जिसमें सभी को बरी किया गया है।

उठते सवाल

2013 में मुजफ्फरनगर दंगों में 65 लोगों की जान गई थी। बड़े पैमाने पर लोग हताहत हुए। दंगे के दौरान कर्फ्यू लगा दिया गया। सेना बुला ली गई। कर्फ्यू करीब 20 दिनों तक रहा था। 

जस्टिस विष्णु सहाय आयोग ने इस मामले में सरकार को क्लीन चिट दी, लेकिन तत्कालीन गृह सचिव, ज़िलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दोषी ठहराया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग का गठन 9 सितंबर 2013 को किया गया था।

इसका काम दंगे रोकने में हुई प्रशासनिक चूकों का पता लगाना था। इसके अलावा दंगा भड़काने में मीडिया और राजनेताओं की भूमिका की जांच भी करनी थी। आयोग को दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। इसकी कार्य अवधि सात बार बढ़ाई गई।

अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दंगों के दौरान दर्ज 74 मामलों को वापस ले रही है।  41 में से 40 मामलों में आरोपी बरी हो गए हैं। सरकार इन मामलों में आगे अपील भी नहीं करने के मूड में है। दोषी अधिकारियों पर अभी तक कोई खास कार्रवाई नहीं की गई है तो इससे साफ जाहिर हो रहा है कि मुजफ्फरनगर दंगे मामले में जो घटित हो रहा है वह सही नहीं है।

इस मामले में लोगों को न्याय मिले इस बात की सबसे ज्यादा जरूरत है। न्यू इंडिया के हुक्मरानों को यह बात समझनी होगी कि अल्पसंख्यक समुदाय की विश्वास न्यायिक प्रक्रिया में बना रहना इस देश के हित में है। इतने बड़े मामले में अगर पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो निसंदेह यह हमारे पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करेगा।

UttarPradesh
muzaffarnagar
muzaffarnagar riots
Yogi Adityanath
yogi government
BJP

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर


बाकी खबरें

  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    यूपी: योगी 2.0 में उच्च-जाति के मंत्रियों का दबदबा, दलितों-पिछड़ों और महिलाओं की जगह ख़ानापूर्ति..
    02 Apr 2022
    52 मंत्रियों में से 21 सवर्ण मंत्री हैं, जिनमें से 13 ब्राह्मण या राजपूत हैं।
  • अजय तोमर
    कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह
    02 Apr 2022
    भारी संख्या में दिहाड़ी मज़दूरों का पलायन देश भर में श्रम के अवसरों की स्थिति को दर्शाता है।
  • प्रेम कुमार
    सीबीआई पर खड़े होते सवालों के लिए कौन ज़िम्मेदार? कैसे बचेगी CBI की साख? 
    02 Apr 2022
    सवाल यह है कि क्या खुद सीबीआई अपनी साख बचा सकती है? क्या सीबीआई की गिरती साख के लिए केवल सीबीआई ही जिम्मेदार है? संवैधानिक संस्था का कवच नहीं होने की वजह से सीबीआई काम नहीं कर पाती।
  • पीपल्स डिस्पैच
    लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया
    02 Apr 2022
    इज़रायल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में और विदेशों में रिफ़्यूजियों की तरह रहने वाले फ़िलिस्तीनी लोग लैंड डे मनाते हैं। यह दिन इज़रायली क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ साझे संघर्ष और वापसी के अधिकार की ओर प्रतिबद्धता का…
  • मोहम्मद सज्जाद, मोहम्मद ज़ीशान अहमद
    भारत को अपने पहले मुस्लिम न्यायविद को क्यों याद करना चाहिए 
    02 Apr 2022
    औपनिवेशिक काल में एक उच्च न्यायालय के पहले मुस्लिम न्यायाधीश, सैयद महमूद का पेशेवराना सलूक आज की भारतीय न्यायपालिका में गिरते मानकों के लिए एक काउंटरपॉइंट देता है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License