NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मुखर्जी नगर, दिल्ली: शहरीकरण से पैदा बदहाली का गढ़
शिक्षा की बदहाली में शहर की मदहोशी ऐसी है कि हर गांव का बाप अपने बच्चों को शहर कैसे भेजे, इस जुगत में लगा रहता है।
अजय कुमार
11 Aug 2018
मुखर्जी नगर

दो-तीन दिन पहले दिल्ली के नेहरू विहार के वर्धमान मॉल के पास कुछ स्थानीय लोगों  ने मिलकर एक छात्र को पीट दिया। छात्र जब पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाने जाता हैI पुलिस तमाम बहाने बनाकर एफआईआर लिखने से मना कर देती है। जब काफी छात्र एकजुट हो गए तब भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। पुलिस न तो उस अपराधी को पकड़ पाई है और न ही ऐसी कोई मंशा ही दिखा रही है। 

इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का प्रभाव अभी मद्धिम भी नहीं हुआ था कि कल यानी 10 अगस्त को नेहरू विहार के एक प्रोपर्टी डीलर ने फिर एक छात्र को बुरी तरीके से पीट दिया। छात्र जब पुलिस स्टेशन गया तो पहले की ही तरह एफआईआर लिखने से साफ मना कर दिया गया। छात्र जब एकजुट हुए तो पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठी चार्ज कर दिया, जिसमें कई छात्र बुरी तरह से  ज़ख्मी हो गए।

इस पूरे प्रकरण में पहला सबसे बड़ा मुद्दा है स्थानीय लोगों की गुंडागर्दी से छात्रों की सुरक्षा का। हाल की दो ताजी घटनाएँ इसकी गवाह हैं। इसके लिए प्रशासन क्या कर रहा है, स्थानीय समुदाय क्या कर रहा है? एक असुरक्षित माहौल में कोई कैसे रहेगा? और दोषियों पर अबतक क्या कार्यवाही क्यों नहीं हुई?

नेहरू विहार, मुखर्जीनगर, गांधी विहार जैसे इलाकों में लाखों विद्यार्थी रह रहे हैं। यहाँ किराये का पूरा कारोबार अवैध ढंग से चल रहा है, जिसपर लगाम कसने की आवश्यकता है। इस संबंध में छात्रों की मुख्य माँगें निम्नांकित हैं-

क) कमरा किराये पर लगाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और विधि सम्मत हो। कोर्ट से रेंट एग्रीमेंट बने जिसमें मकान का किराया, मकान का आकार, मकान में उपलब्ध सुविधाएँ, सुरक्षा राशि, ब्रोकरेज राशि सबका स्पष्ट जिक्र हो। 

ख) रूम रेंट के बदले में पक्की रसीद देना अनिवार्य हो। रसीद में मकान मालिक का पैन नंबर भी दर्ज हो ताकि किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा न हो पाए। रूम रेंट की राशि कैश की बजाय चेक या ऑनलाइन भुगतान के रूप में स्वीकार की जाए। 

ग) रूमरेंट मनमाना न हो। सर्किल रेट के हिसाब से किराया तय हो। बिना खिड़की वाले 25 गज के कमरों का किराया 10 हजार रुपये प्रतिमाह को आधा किया जाए। या सर्किल रेट के हिसाब से किराया तय हो जिससे 3-4 गुना अधिक किराया वसूला जा रहा है। 

घ) बिजली बिल के भुगतान में मकान मालिक दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित दर की बजाय 8 रुपये प्रति यूनिट से चार्ज करते हैं। यह व्यवस्था समाप्त हो और सरकारी दर से ही छात्रों को भुगतान की सुविधा मिले।

किराए पर रहने वाले लोगों की समस्या और सामाधान तो आपने पढ़ लिया। लेकिन इस सवाल का  भी जवाब ढूंढ़ने की कोशिश कीजिए कि ऐसी परेशानियाँ आखिरकार उपजती कैसी है? हम भावी पीढी  के नेताओं को इस समस्या के हल के संदर्भ में कैसे परखें। इस समस्या की असली जड़ शहरीकरण को विकास के मॉडल की तरह अपनाने से शुरू होती है। सरकार के इस नज़रिए से शुरू होती है कि हम कुछ लोगों का विकास करेंगे और उनकी विकास से रिसते हुए दबे कुचले लोगों का विकास होगा। हमारे विकास का मॉडल ट्रिकल डाउन इफेक्ट होगा।

सरकारी रिपोर्टें शहरीकरण को विकास का पर्याय मानती हैं। जबकि शहरों में माचिस की  डिब्बियों की तरह रहने के लिए मजबूर लोग, जिन तकलीफों से गुज़रते हैं, उन तकलीफों  का अंदाजा हम शहर की किसी भी झुग्गी और बस्ती के इलाके को देखकर लगा सकते हैं। इन इलाकों को देखने पर समझ में आता है कि शहरी चकाचौंध के तले सबसे अधिक जमात उन लोगों की रहती है जिनका जीवन गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार से अभी कोसों दूर है।

अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएँ नहीं पहुंचने की वजह से गांव, शहर की तरफ पलायन करते हैं। और हमारे देश की लोकप्रिय डेवलपमेंट मॉडल शहरों को ही विकास का पर्याय  मानने लगती  है। उन्हें लगने लगता है कि जमकर शहरीकरण हो, ताकि पकौड़ा बेचने वाली नौकरी सबको मिल जाए और बाकि सब अपने आप होता रहे।  शिक्षा की बदहाली में शहर की मदहोशी  ऐसी है कि हर गांव का बाप अपने बच्चों को शहर कैसे भेजे, इस जुगत में लगा रहता है। इस वजह से शहरों की इकोनॉमी में कोचिंग फैक्ट्री से लेकर रेंट फैक्ट्री का जन्म हुआ है। जितनी फर्जी कोचिंग फैक्ट्रियाँ हैं, उतनी ही फर्जी रेंट फैक्ट्रियाँ होती है। कोचिंगों से अध्ययन-अध्यापन का अर्थ बेकार होता है तो किराए के  घर की कमाई से मानव संसाधन का अर्थ।  

किराए पर घर दिलाने के लिए दलालों का जन्म हुआ है जो पूरी जिंदगी एक ऐसा काम करते हैं जिसकी उत्पादकता ज़ीरो होती है। इन गहराई तक पैठी जड़ों पर उगने वाले पेड़ पर मकान मालिकों, किरायेदार और प्रॉपर्टी डिलरों के बीच का तनाव शहरों में  चल रहे अन्याय के कारोबार का केवल एक पहलू है।

urbanisation
students' plight
mukherji nagar
Delhi

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

दिल्ली: केंद्र प्रशासनिक सेवा विवाद : न्यायालय ने मामला पांच सदस्यीय पीठ को सौंपा


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या हम कोविड-19 महामारी से मुक्ति की ओर हैं?
    28 Jan 2022
    आज हम डॉ. सत्यजीत के साथ कुछ महानगरों में ओमिक्रॉन संक्रमण के कम होते आँकड़ों के बारे में समझने की कोशिश करेंगे। पैंडेमिक (Pandemic) और एंडेमिक (Endemic) के बीच के फर्क पर भी सत्यजीत बात करेंगे। साथ…
  • Haryana Anganwadi Workers' Protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    हरियाणा: आंगनवाड़ी कर्मचारियों के आंदोलन के 50 दिन पूरे
    28 Jan 2022
    हरियाणा में 8 दिसंबर 2022 को शुरू हुआ आंगनवाड़ी कर्मचारियों के आंदोलन ने अपने 50 दिन पूरे कर लिए हैं. प्रदर्शन कर रही कर्मचारियों का आरोप है कि 2018 में प्रधानमंत्री द्वारा मानदेय बढ़ाने का वादा आज…
  • manik sarkar
    संदीप चक्रवर्ती
    त्रिपुरा : पूर्व सीएम माणिक सरकार ने मोदी-शाह पर लगाया राज्य के इतिहास से 'छेड़छाड़' का आरोप
    27 Jan 2022
    माणिक सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जनशिक्षा आंदोलन का अपमान किया है, जिस आंदोलन ने त्रिपुरा में रियासती हुकुमत के अंत का रास्ता तैयार किया था।
  • Public Safety Act
    अब्दुल हन्नान
    पब्लिक सेफ़्टी एक्ट: मनमुताबिक़ हिरासत में ली जाने की कार्रवाईयां जारी, नए कश्मीर में असहमति की कोई जगह नहीं
    27 Jan 2022
    कयूम की तरफ़ से जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट में रिट पेटिशन लगाई गई थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया था। इसके बाद पेटेंट अपील दाखिल की गई थी।
  •  रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा
    27 Jan 2022
    आंदोलनकारियों पर बर्बर पुलिसिया हिंसा के खिलाफ देशभर के छात्र लामबंद हो रहे हैं। इस बीच बुधवार की देर रात पटना के पत्रकार नगर थाने में पुलिस ने इस प्रदर्शन के पीछे कोचिंग संचालकों की भूमिका को मानते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License