NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
भारत
अर्थव्यवस्था
मुंबई बाढ़ः जलवायु परिवर्तन के चलते बारिश के पैटर्न में बदलाव
हम बारिश के पैटर्न में बदलाव देख रहे हैं। उदाहरण स्वरूप, किए गए विभिन्न अध्ययनों में सामने आया है कि 1950 और 2015 के बीच मध्य भारत में भारी बारिश में तीन गुना वृद्धि हुई है।
संदीपन तालुकदार
04 Jul 2019
मुंबई  बारिश
Image Courtesy: Mumbai My Love

भारी बारिश के चलते मुंबई जलमग्न हो गया है। इससे अब तक 30 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई है। 28 जून से मूसलाधार बारिश शुरू हुई जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ज्ञात हो कि 26 जून तक मुंबई को लगभग 70% कम बारिश का सामना करना पड़ा था। लेकिन 6 दिनों के भीतर ही इतनी बारिश हुई कि शहर में ठहराव स्थिति पैदा हो गई है।

2 जुलाई को मुंबई के कोलाबा स्टेशन पर 137.8 मिमी बारिश दर्ज की गई जबकि पूरे मुंबई में 1 जून से 1 जुलाई तक 433.7 मिमी बारिश हुई जिसका मतलब है कि शहर में एक ही दिन में एक महीने की एक तिहाई बारिश हुई। इसी तरह एक जुलाई को शहर में 92.6 मिमी वर्षा हुई वहीं डेढ़ दिन से भी कम समय में 230 मिमी हुई। यह दो दिनों में इस महीने की बारिश का 50% है।

मुंबई में ही सिर्फ़ इस तरह की बारिश नहीं हुई है; पालघर ज़िले में 1 जुलाई को 212 मिमी बारिश हुई जो एक दिन में होने वाली सामान्य वर्षा से काफ़ी ज़्यादा है। अन्य क्षेत्रों में रायगढ़, ठाणे और उपनगरीय मुंबई शामिल हैं जहाँ 90 मिमी से अधिक वर्षा हुई। विशेष रूप से ये क्षेत्र संयुक्त रूप से पश्चिमी महाराष्ट्र का छोटा हिस्सा है जहाँ इस तरह की भारी बारिश हुई है। हालांकि कई ज़िलों में बारिश की भारी कमी है, महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों में सूखे की स्थिति बनी हुई है।

क्या इस बारिश का कोई पैटर्न है? हाँ, एक पैटर्न है और भीषण सूखे के बाद भारी वर्षा होती है। इतनी ज़्यादा बारिश कि जब यह होती है तो बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसी ही स्थिति 2018 में भी हुई थी।

लेकिन मुंबई या इस मामले में भारत एकमात्र ऐसा देश नहीं हैं जहाँ बारिश के पैटर्न में बदलाव आया है।

विश्व भर में वर्षा के आंकड़ों की माने तो बारिश के दिनों की संख्या घट रही है जबकि थोड़ी अवधि के लिए अधिक वर्षा (10-15 सेमी/दिन) के मामलों में वृद्धि हो रही है। इससे पता चलता है कि कम समय में अधिक बारिश हो रही है। आंकड़ों के अनुसार वैश्विक वर्षा चाहे बारिश हो या बर्फ़ थोड़े समय के लिए ही होती है। मुख्य कारण मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन है जहाँ ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है।

ग्लोबल वार्मिंग के साथ बारिश की मात्रा में वृद्धि काफ़ी अपेक्षित घटना है क्योंकि गर्म हवा अधिक नमी को संग्रहीत करती है और यह विभिन्न जलवायु मॉडल द्वारा भी भविष्यवाणी की गई थी।

वर्ष 2017 में नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में मध्य भारत में अत्यधिक वर्षा होने का अनुमान लगाया गया था। सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज रिसर्च, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मीटोलॉजी, पुणे द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया है कि वर्ष 1950 और 2015 के बीच मध्य भारत में भारी बारिश में तीन गुना वृद्धि हुई है।

गांधीनगर स्थिति भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन में दक्षिण तथा मध्य भारत में भारी बारिश की इसी तरह की भविष्यवाणी की गई थी। वेदर एंड क्लाइमेट एक्सट्रीम में प्रकाशित इस अध्ययन ने भविष्यवाणी की कि एंथ्रोपोजेनिक वार्मिंग के कारण भारत 21वीं सदी के मध्य तक भारी बारिश का गवाह बनने जा रहा है।

 

Image removed.

ReplyForward

Mumbai Flood
Extreme Rainfall Events
floods
Rainfall
global warming
climate change

Related Stories

ग्लेशियर टूटने से तो आपदा आई, बांध के चलते मारे गए लोगों की मौत का ज़िम्मेदार कौन!

विकास के नाम पर हिमालय से खिलवाड़ का नतीजा है यह आपदा

आपदा के बाद मिले 3800 रुपये,  खेत में बचा दो बोरी धान

असम बाढ़ : एनआरसी का डर; डूबने के बावजूद घर छोड़ने को तैयार नहीं लोग

बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर, करीब 25 लाख लोग प्रभावित

नेपाल ने बाढ़ से बचाव में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मांगी मदद    

मुज़फ़्फ़रनगर : बारिश से मकान की छत गिरी, तीन बच्चों की मौत

मूसलाधार बारिश से मुम्बई बेहाल, महाराष्ट्र में मृतकों की संख्या 36 हुई

इंडोनेशिया में बाढ़-भूस्खलन से बिगड़े हालात, लोम्बोक द्वीप में भूकंप के झटके


बाकी खबरें

  • Sudan
    पवन कुलकर्णी
    कड़ी कार्रवाई के बावजूद सूडान में सैन्य तख़्तापलट का विरोध जारी
    18 Jan 2022
    सुरक्षा बलों की ओर से बढ़ती हिंसा के बावजूद अमेरिका और उसके क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र भी बातचीत का आह्वान करते रहे हैं। हालांकि, सड़कों पर "कोई बातचीत नहीं, कोई समझौता…
  • CSTO
    एम. के. भद्रकुमार
    कज़ाख़िस्तान में पूरा हुआ CSTO का मिशन 
    18 Jan 2022
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बुधवार को क्रेमलिन में रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ कज़ाख़िस्तान मिशन के बारे में कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीट ऑर्गनाइजेशन की “वर्किंग मीटिंग” के बाद दी गई चेतावनी…
  • election rally
    रवि शंकर दुबे
    क्या सिर्फ़ विपक्षियों के लिए हैं कोरोना गाइडलाइन? बीजेपी के जुलूस चुनाव आयोग की नज़रो से दूर क्यों?
    18 Jan 2022
    कोरोना गाइडलाइंस के परवाह न करते हुए हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से प्रचार में जुटे हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियों पर कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं लेकिन बीजेपी के चुनावी जुलूसों पर अब भी कोई बड़ी…
  • Rohit vemula
    फ़र्रह शकेब
    स्मृति शेष: रोहित वेमूला की “संस्थागत हत्या” के 6 वर्ष बाद क्या कुछ बदला है
    18 Jan 2022
    दलित उत्पीड़न की घटनायें हमारे सामान्य जीवन में इतनी सामान्य हो गयी हैं कि हम और हमारी सामूहिक चेतना इसकी आदी हो चुकी है। लेकिन इन्हीं के दरमियान बीच-बीच में बज़ाहिर कुछ सामान्य सी घटनाओं के प्रतिरोध…
  • bank
    प्रभात पटनायक
    पूंजीवाद के अंतर्गत वित्तीय बाज़ारों के लिए बैंक का निजीकरण हितकर नहीं
    18 Jan 2022
    बैंकों का सरकारी स्वामित्व न केवल संस्थागत ऋण की व्यापक पहुंच प्रदान करता है बल्कि पूंजीवाद की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License