NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
मुंबई: राम पुनियानी को जान का खतरा, दक्षिणपंथी गुंडों से मिली धमकी, FIR दर्ज
सांप्रदायिक सद्भावना के लिए सतत् प्रयासरत राम पुनियानी को 6 जून को अज्ञात लोगों ने फोन कर धमकी दी है और दुर्व्यवहार किया है।
सबरंग इंडिया
07 Jun 2019
Ram

मुंबई: प्रसिद्ध अकादमिक और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बंबर के पूर्व प्रोफेसर को अज्ञात गुंडों द्वारा धमकी मिली है। सांप्रदायिक सद्भावना के लिए सतत् प्रयासरत राम पुनियानी को 6 जून को अज्ञात लोगों ने फोन कर धमकी दी है और दुर्व्यवहार किया है। राम पुनियानी ने इस संबंध में मुंबई पुलिस के पास प्राथमिकी दर्ज कराई है। राम पुनियानी का तर्कवादी चिंतन और लगातार सांप्रदायिक सद्भाव के लिए अथक अभियान व इतिहास की एक समकालिक समझ कुछ लोगों को विचलित करती रही है ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें इसी कारण धमकाया जा रहा है। 

पहली कॉल उनके लैंडलाइन पर लगभग 8:30 बजे की गई, जिसे प्रोफेसर पुनियानी ने रिसीव किया। फोन करने वाला आक्रामत लहजे में अपमानजनक बात करते हुए आरोप लगा रहा था कि वे हिंदू विरोधी हैं। फोन करने वाले ने धमकी दी कि पुनियानी को अपनी गतिविधियों को रोकना होगा या परिणाम भुगतना होगा। फोन करने वाले ने कहा कि पुनियानी को 15 दिनों में यह सब छोड़ देना चाहिए। पांच मिनट बाद एक और फोन आया जिसे भी पूर्व प्रोफेसर ने खुद रिसीव किया। एक बार फिर बहुत आक्रामक और धमकी भरे लहजे का इस्तेमाल करते हुए फोन करने वाले ने पूछा कि क्या वह पुनियानी से प्रोफेसर ने उसे बताने से इंकार कर दिया और कॉलर को उलझा दिया, ऐसे में इस बार उसका नंबर पहचाना जा सकता था। प्रोफेसर पुनियानी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर यहां देखी जा सकती है:

Ram Punyani 2.jpg

Ram Punyani 3.jpg

सबरंग इंडिया से बात करते हुए, प्रोफेसर पुनियानी ने कहा, "यह बेहद चिंतित और परेशान करने वाला है। मेरा परिवार मेरी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। मुझे उम्मीद है कि अधिकारी इसे गंभीरता से लेंगे। यह पहली बार नहीं है जब मैंने इस तरह की धमकी का सामना किया है।"

प्रोफेसर पुनियानी को मिली धमकी को इसी साल मार्च में उनके साथ घटित हुई घटना के संबंध में देखा जा रहा है। मार्च में कथित तौर पर कुछ पुलिसकर्मियों ने सादा कपड़ों में उनके घर आकर उनके पासपोर्ट के संबंध में पूछताछ की थी। इस तरह की पूछताछ आमतौर पर वर्दीधारी पुलिसकर्मियों द्वारा की जाती है। प्रोफेसर पुनियानी सादा वर्दी में आए इन पुलिसकर्मियों के सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने में सफल रहे थे।

यह घटना इस तरफ इशारा करती है कि एक फासीवादी शासन में सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सरकार का प्रतिरोध करना कितना गंभीर हो गया है। गोविंद पानसरे, नरेंद्र दाभोलकर, गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी जैसे तर्कवादी सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्या इसका उदाहरण है जिन्हें दक्षिणपंथियों द्वारा मार डाला गया। अब राम पुनियानी की भी जान को खतरा है।  

मुंबई और भारत में कार्यकर्ताओं और लेखकों ने पूर्व प्रोफेसर राम पुनियानी को मिली धमकी की निंदा की है। पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सुपरकॉप जूलियो रिबेरियो ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है।

 

ram puniyan
Mumbai
death threat
attack on journalists
death of Journalist
patrakar

Related Stories

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक से ईडी कर रही है पूछताछ

यूपी में मीडिया का दमन: 5 साल में पत्रकारों के उत्पीड़न के 138 मामले

मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान

‘बुल्ली बाई’ ऐप मामला : मुंबई पुलिस ने एक और छात्र को गिरफ़्तार किया

पत्रकार हत्याकांड- कैसे मेडिकल माफिया का अड्डा बन गया छोटा सा कस्बा बेनीपट्टी?

बिहारः ग़ैर-क़ानूनी निजी क्लिनिक का पर्दाफ़ाश करने वाले पत्रकार की हत्या

गौमूत्र और गोबर पर की गई टिप्पणी राष्ट्र की सुरक्षा के लिए ख़तरा कैसे हो गई?

पत्रकार नेहा दीक्षित को मिलने वाली धमकियों का मतलब क्या है?

पीड़ित परिवार का आरोप- अर्नब की वजह से जांच को दबाया गया

दिल्ली दंगों से फैले ज़हर के शिकार हुए कारवां के तीन पत्रकार


बाकी खबरें

  • Sudan
    पवन कुलकर्णी
    कड़ी कार्रवाई के बावजूद सूडान में सैन्य तख़्तापलट का विरोध जारी
    18 Jan 2022
    सुरक्षा बलों की ओर से बढ़ती हिंसा के बावजूद अमेरिका और उसके क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र भी बातचीत का आह्वान करते रहे हैं। हालांकि, सड़कों पर "कोई बातचीत नहीं, कोई समझौता…
  • CSTO
    एम. के. भद्रकुमार
    कज़ाख़िस्तान में पूरा हुआ CSTO का मिशन 
    18 Jan 2022
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बुधवार को क्रेमलिन में रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ कज़ाख़िस्तान मिशन के बारे में कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीट ऑर्गनाइजेशन की “वर्किंग मीटिंग” के बाद दी गई चेतावनी…
  • election rally
    रवि शंकर दुबे
    क्या सिर्फ़ विपक्षियों के लिए हैं कोरोना गाइडलाइन? बीजेपी के जुलूस चुनाव आयोग की नज़रो से दूर क्यों?
    18 Jan 2022
    कोरोना गाइडलाइंस के परवाह न करते हुए हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से प्रचार में जुटे हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियों पर कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं लेकिन बीजेपी के चुनावी जुलूसों पर अब भी कोई बड़ी…
  • Rohit vemula
    फ़र्रह शकेब
    स्मृति शेष: रोहित वेमूला की “संस्थागत हत्या” के 6 वर्ष बाद क्या कुछ बदला है
    18 Jan 2022
    दलित उत्पीड़न की घटनायें हमारे सामान्य जीवन में इतनी सामान्य हो गयी हैं कि हम और हमारी सामूहिक चेतना इसकी आदी हो चुकी है। लेकिन इन्हीं के दरमियान बीच-बीच में बज़ाहिर कुछ सामान्य सी घटनाओं के प्रतिरोध…
  • bank
    प्रभात पटनायक
    पूंजीवाद के अंतर्गत वित्तीय बाज़ारों के लिए बैंक का निजीकरण हितकर नहीं
    18 Jan 2022
    बैंकों का सरकारी स्वामित्व न केवल संस्थागत ऋण की व्यापक पहुंच प्रदान करता है बल्कि पूंजीवाद की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License