NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या मायने हैं नौकरशाह अरविंद शर्मा के यूपी की राजनीति में आने के?
सियासी गलियारों में शर्मा के अचानक नौकरी छोड़कर राजनीति में प्रवेश, को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से पहले “राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक” की तरह देखा जा रहा है। 
असद रिज़वी
20 Jan 2021
arvind
यूपी बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह (बाएं) और डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा (दाएं) के साथ मध्य में पूर्व आईएएस अरविंद कुमार शर्मा। फोटो साभार : पत्रिका

मौसम का मिज़ाज भले ठंडा हो, लेकिन पूर्व आईएएस अरविंद कुमार शर्मा के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ग्रहण करते ही, उत्तर प्रदेश में पार्टी की आंतरिक राजनीति गरमा गई है।

सियासी गलियारों में शर्मा के अचानक नौकरी छोड़कर राजनीति में प्रवेश, को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से पहले  “राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक” की तरह देखा जा रहा है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के प्रस्तावित लखनऊ दौरे ने पार्टी में हलचल को और भी तेज़ कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के मऊ गोहना तहसील से सम्बंध रखने वाले शर्मा, प्रधानमंत्री मोदी के काफ़ी क़रीबी माने जाते हैं। जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय 1988 बैच के आईएएस शर्मा मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत थे। इसी लिए कहा जा रहा है कि, शर्मा प्रधानमंत्री मोदी की ‘गुजरात प्रयोगशाला’ का ही ‘ब्रांड’ हैं।

हालाँकि शर्मा के अचानक शामिल होने के कारण पर पार्टी में कोई औपचारिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है। शर्मा 14 जनवरी को पार्टी में आये और 18 जनवरी को उन्होंने 28 जनवरी को होने वाले एमएलसी चुनाव के लिए पर्चा भर दिया। विधानसभा में बीजेपी का पूर्ण बहुमत होने के कारण उनकी जीत भी निश्चित मानी जा रही है।

सियासत के जानकर कहते हैं कि,एक वरिष्ठ आईएएस जो केंद्र में सचिव के पद पर कार्यरत हो, उसका प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेना, केवल विधान परिषद का सदस्य बनने के लिए नहीं हो सकता है। इसके पीछे कोई बड़ी राजनीति है। लेकिन मोदी युग में पार्टी की बातें ज़्यादा बाहर नहीं आती है, इस लिए सिर्फ़ सूत्रों से ख़बरें मिल रही हैं।

शर्मा को पार्टी में लाने का गणित

प्रदेश बीजेपी में चर्चा है कि शर्मा को, पूर्वांचल के ‘भूमिहार समाज’ में पार्टी का चेहरा बना कर पेश किया जा सकता है। क्यूँकि भूमिहार समाज का नेतृत्व करने वाले मनोज सिन्हा को जम्मू-कश्मीर में जिम्मेदारी मिलने बाद से प्रदेश में पार्टी के पास इस समाज का कोई बड़ा नेता नहीं है।

हालाँकि सियासत के जानकार मानते हैं की पूर्व आईएएस शर्मा की सरकार और पार्टी दोनों में अहम भूमिका रहेगी। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई मुलाक़ात के दौरान इस बात का इशारा भी दे दिया था। यही वजह है कि शर्मा सियासत में आने के बाद से पार्टी के कई क़द्दावर नेताओ को अपनी कुर्सी ख़तरे में नज़र आ रही है।

पार्टी के सूत्र कहते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार में फ़रवरी में मंत्रिमंडल का विस्तार किया जायेगा। जिसके बाद शर्मा को मंत्रिमंडल में किसी पड़े पद पर जगह मिलेगी। माना यह जा रहा है कि मोदी के क़रीबी पूर्व आईएएस शर्मा को उप मुख्यमंत्री से कम का पद नहीं मिलेगा। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन मार्च 2017 में उप मुख्यमंत्री बने   डॉ. दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्या में से किसी एक का पद बदला जा सकता है।

चर्चा इस बात पर ज़्यादा हो रही है कि, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को विधान परिषद का सभापति बनाया जायेगा। बता दें कि 30 जनवरी को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 12 सदस्यों की सदस्यता समाप्त हो रही है, जिसमें सभापति रमेश यादव भी हैं।

उल्लेखनीय है कि 29 जुलाई 2017 को समाजवादी पार्टी के दो एमएलसी, बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह और बहुजन समाज पार्टी के एमएलसी ठाकुर जयवीर ने इस्तीफ़ा दे दिया था। जिससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके दोनो उप मुख्यमंत्री आसानी से विधान परिषद के सदस्य हो गये थे।

उत्तर प्रदेश की सियासत पर नज़र रखने वाले मानते हैं कि डॉ. दिनेश शर्मा जो लखनऊ के मेयर और लखनऊ विश्वविद्यालय में कामर्स के प्रोफ़ेसर रहे हैं, को उप मुख्यमंत्री पद से हटाकर सभापति बनाने की संभावना ज़्यादा है। जबकि केशव प्रसाद मौर्य की कुर्सी ज़्यादा सुरक्षित है। क्यूँकि वह प्रदेश के ओबीसी समाज में पार्टी के मज़बूत नेता है।

क्या ज़िम्मेदारी मिल सकती है शर्मा को

अरविंद कुमार शर्मा को बड़ा पद मिलेगा, लेकिन उनको क्या ज़िम्मेदारी मिलेगी इस पर सब से भी चर्चा है। पार्टी के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शर्मा को  गृहमंत्री, वित्त और कार्मिक और नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विभाग मिल सकते हैं। 

इस समय मुख्यमंत्री योगी के पास 26 से अधिक विभागों की ज़िम्मेदारी है। जिसमें गृहमंत्री और कार्मिक और नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी है। वित्त मंत्रालय का कार्यभार पार्टी के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार खन्ना के पास है। लेकिन अगर मुख्यमंत्री से गृहमंत्री और कार्मिक और नियुक्ति लिया जाता है तो, सियासी समीक्षको के अनुसार, योगी लिये बड़ा सियासी झटका होगा।

जेपी नड्डा का लखनऊ दौरा

अभी यह अटकलें चल ही रही थीं कि उत्तर प्रदेश सरकार और सत्ताधारी बीजेपी में क्या होने वाला है। ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के लखनऊ दौरे की ख़बर ने अटकलों का बाज़ार और गर्म कर दिया है। नड्डा 22-23 जनवरी को लखनऊ के दौरे पर आ रहे हैं। अपने दौरे के दौरान वह योगी सरकार के काम-काज का फीडबैक लेंगे। सूत्रों के अनुसार पार्टी अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश सरकार और पार्टी में, 2022 चुनाव के मद्देनज़र होने वाले संभावित, फेर-बदल पर, पार्टी आला कमान का फ़ैसला भी प्रदेश के नेताओ को सुना सकते हैं।

योगी का कार्यकाल मूल्यांकन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का मूल्यांकन राजनीति के जानकार दो हिस्सों में कर रहे हैं। एक है “शासन” (गवर्नन्स) और दूसरा है “हिन्दुत्व”।

कहा जा रहा है कि संघ, हिन्दुत्व को लेकर योगी से संतुष्ट है। क्यूँकि योगी ने हाल में ही, अंतरधार्मिक विवाह रोकने के लिये ‘उत्‍तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्‍यादेश, 2020’  बनाया, सीएए के आंदोलन को कुचलने की हर मुमकिन कोशिश की और असहमति की आवाज़ों को भी कमज़ोर करने का प्रयास किया।

इसके अलावा योगी द्वारा सामाजिक ध्रुवीकरण करने वाले भाषण भी संघ को रास आते हैं। यही वजह है की उनकी कुर्सी को सुरक्षित माना जा रहा है।

जबकि उनके विरोधी मानते हैं की वह एक कुशल शासक नहीं हैं। पार्टी के अंदर से बाहर तक उनके विरुद्ध आवाज़ें उठती रही हैं। स्वयं बीजेपी के 100 से अधिक विधायकों ने,18 दिसंबर 2019, को शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन, योगी सरकार के ख़िलाफ़ धरना दिया था।

राजनीतिक विश्लेषक इस बात को भी रेखांखित करते हैं कि गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज (2017) का हादसा जिसमें 60 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी, सोनभद्र में 17 जुलाई 2019,को हुआ क़त्लेआम, जिसमें ‘गोंड’ जाति के 10 लोगों की हत्या हुई और हाल में ही हुए ‘हाथरस कांड’ ने योगी सरकार को साख को ख़राब किया और इसके लिए मुख्यमंत्री ने सड़क से सदन तक विरोध का सामना किया। जिसका नकारात्मक असर पार्टी की छवि पर भी पड़ा है।

क्या कहते हैं सियासी समीक्षक

सियासत के जानकार कहते हैं कि पूर्व आईएएस शर्मा के बीजेपी में आने से सबसे ज़्यादा नुक़सान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हो सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ संपादक रह चुके अतुल चंद्रा कहते हैं कि इस बात में कोई संदेह नहीं की योगी आरएसएस के पसंदीदा मुख्यमंत्री हैं। यही वजह है की बीआरडी मेडिकल कॉलेज और हाथरस हादसे के बाद भी उनका पद सुरक्षित है।

अतुल चंद्रा के अनुसार 2022 चुनाव से पहले, शर्मा को उत्तर प्रदेश भेजकर, बीजेपी केंद्रीय प्रतिनिधित्व योगी का सियासी क़द कम करना चाहता है। ऐसा इसलिए भी है कि योगी अभी केंद्र की राजनीति की तरफ़ रुख़ ना करें।

वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि बीजेपी के केंद्रीय प्रतिनिधित्व को योगी के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। वरिष्ठ पत्रकार और बीबीसी में बतौर ब्यूरो चीफ़ रहे रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि उनको सूत्रों से मालूम हुआ कि पार्टी आलाकमान से योगी के विरोधियों ने शिकायत की है, कि विकास के लिए किया जा रहा कोई भी काम ज़मीन पर नज़र नहीं आ रहा है। जिसकी वजह से विधायकों से लेकर कार्यकर्ताओं तक में नाराज़गी है। बीजेपी के आला नेताओ से भी कहा गया है कि अगर हालात न सुधरे तो कार्यकर्ता चुनाव से पहले घर भी बैठ सकते हैं, जिससे बड़ा राजनीतिक नुक़सान होगा।

रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, कि उत्तर प्रदेश सरकार में क्या बदलाव होगा यह तो जेपी नड्डा के दौरे के बाद साफ़ होगा। लेकिन योगी की ही पार्टी में ऊपर बैठे लोग यह नहीं चाहते हैं कि हिंदुत्व की राजनीति में योगी उनसे आगे निकाल जाए और निकट भविष्य में केंद्र की राजनीति में उनकी भूमिका हो।

arvind sharma
Utter pradesh
Yogi Adityanath
politics of up
manoj sinha
bhumihar samaj
RSS
naredra modi

Related Stories

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?


बाकी खबरें

  • किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में करनाल में महापंचायत, अधिकारियों का घेराव
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में करनाल में महापंचायत, अधिकारियों का घेराव
    07 Sep 2021
    महापंचायत के लिए जमा हुए किसानों ने आईजी, एसपी और डीसी का घेराव किया। इसके बाद अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की पेशकश की। जिसपर किसानों की ओर से एक ग्यारह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाया गया। इस…
  • मुज़फ़्फ़रनगर: 2013 के दंगों के बाद किसान आंदोलन ने किया जाटों और मुसलमानों को फिर से एकजुट
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    मुज़फ़्फ़रनगर: 2013 के दंगों के बाद किसान आंदोलन ने किया जाटों और मुसलमानों को फिर से एकजुट
    07 Sep 2021
    मुजफ्फरनगर महापंचायत जाट-मुस्लिम एकता प्रदर्शित करने वाले संदेश देने में प्रतीकात्मक रूप से सफल रही।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: भूखे भजन न होय गोपाला लेकिन...
    07 Sep 2021
    जनता को रोज़ी-रोटी देने में नाकाम हमारी सरकारें, हमारे जनप्रतिनिधि जनता को पूजा-नमाज़ में ही उलझाए रखना चाहते हैं। शायद यही वजह है कि झारखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश और बिहार में भी विधानसभा में इबादत…
  • रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ रेल कर्मियों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कल!
    रौनक छाबड़ा
    रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ रेल कर्मियों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कल!
    07 Sep 2021
    “चेतावनी दिवस” के रूप में मनाए जाने वाले इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में देश के सभी 68 रेलवे मंडलों के रेलकर्मियों के भाग लेने की उम्मीद है। 
  • गुजरात: गन्ने के खेत में काम करने वाली आदिवासी महिलाओं की बंधुआ ज़िंदगी
    दमयन्ती धर
    गुजरात: गन्ने के खेत में काम करने वाली आदिवासी महिलाओं की बंधुआ ज़िंदगी
    07 Sep 2021
    दक्षिण गुजरात की आदिवासी महिलाओं की कहानी बेहद दर्दनाक है। वे यहां काम कर रहे 2.5 लाख गन्ना श्रमिकों की संख्या की तक़रीबन आधी हैं, लेकिन ये महिलायें चीनी उद्योग में आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License