NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
अहमदाबादः जेएनयू में हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में एबीवीपी के सदस्यों का दख़ल
प्रदर्शन स्थल पर तैनात पुलिस ने कथित एबीवीपी सदस्यों को स्थल से जाने के लिए कहा। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो पुलिस ने तीन सदस्यों को हिरासत में ले लिया।
दमयन्ती धर
07 Jan 2020
Members of ABVP Interrupt Protest Against Violence

नकाबपोश गुंडों द्वारा जेएनयू परिसर के अंदर किए गए हमले के ख़िलाफ़ निंदा और विरोध प्रदर्शन करने के लिए छात्रों, प्रोफेसरों, थिएटर कलाकारों और कार्यकर्ताओं व समाजशास्त्री मनीषी जानी, मानवाधिकार कार्यकर्ता निर्झरी सिन्हा, विधायक जिग्नेश मेवाणी और मल्लिका साराभाई जैसे सैकड़ों लोग 6 जनवरी की शाम को अहमदाबाद स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम-ए) के सामने इकट्ठा हुए।

लगभग आधे घंटे के इस विरोध प्रदर्शन में क़रीब 10 या 12 युवाओं का एक समूह अपने हाथों में तख्ती लेकर सड़क के डिवाइडर पर (प्रदर्शन स्थल के दूसरी तरफ) इकट्ठा हो गए। इन तख्तियों पर लिखा था "कम्युनिस्ट गुंडों द्वारा जेएनयू में अघोषित आपातकाल किया गया है।" लाल आतंक को रोको। #लेफ्टअटैक्सजेएनयू #गुजरातअगेंस्टरेडटेरर”।
gujrat.JPG

पत्रकार जब जेएनयू में हुए हिंसा के खिलाफ इस विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे थे तब एबीवीपी के छात्र सीनेट का एक युवा सदस्य प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ा और पत्रकारों को सड़क पर जुटे लोगों को कवर करने के लिए कहा।

जिन पुलिसकर्मियों को विरोध स्थल पर तैनात किया गया था उन्होंने उन्हें जाने के लिए कहा और जब उन्होंने विरोध किया तो तीन लोगों को हिरासत में ले लिया।

डीसीपी प्रवीण मल ने कहा, "उन्हें हिरासत में लिया गया क्योंकि वे बिना अनुमति के इकट्ठा हुए थे।"

जब एबीवीपी के सदस्यों को तितर बितर कर दिया गया तो एक मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति ने प्रदर्शनकारियों के पास से गुजरते हुए "अमित शाह जिंदाबाद" का नारा लगाया। इसके बाद, एक व्यक्ति विरोध प्रदर्शन में घुस गया और जेएनयू के ख़िलाफ़ बोलने लगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को बुलाया जो उसे ले गई।

खास बात यह है कि जेएनयू में हिंसा के ख़िलाफ़ दो घंटे के लिए विरोध प्रदर्शन की अनुमति एक छात्र द्वारा मांगी गई थी और अहमदाबाद के विश्वविद्यालय पुलिस स्टेशन द्वारा इसकी अनुमति दी गई थी।

समाजशास्त्री, कार्यकर्ता और 1974 के नवनिर्माण आंदोलन की छात्र नेता मनीषी जानी जिनके आंदोलन ने गुजरात सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाई थी, वे कहती हैं, "एक समय था जब गुजरात में छात्रों का आंदोलन के चलते सरकार गिर गई थी। तब से राज्य में बहुत कुछ बदल गया है, खासकर युवाओं के लिए। शिक्षा के क्षेत्र का निजीकरण किया गया, फीस इतनी बढ़ गई कि यह मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के लिए मुश्किल हो गया। भले ही कोई परिवार अपने बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए भेजने की व्यवस्था कर लेता है लेकिन छात्रों पर बहुत दबाव होता है। इसके अलावा, दो दशक से अधिक के भाजपा शासन ने राज्य में हर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कुचल दिया है। इसमें छात्र नेताओं का चुनाव भी शामिल है। गुजरात में वे चयनित किए जाते हैं।” 

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Gujarat
Attack on JNU
ABVP Goons
BJP
Amit Shah
Narendra modi
JNU SOS
Gujarat Police
IIM-Ahmedabad

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Iran
    प्रबीर पुरकायस्थ
    ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा
    21 Feb 2022
    वाशिंगटन की मूर्खता सबसे कठोर परमाणु समझौते से बाहर निकलना था, जिस पर कोई देश भी सहमत हो सकता था। ईरान अभी भी उन पुरानी शर्तों में से अधिकांश को स्वीकार कर सकता है, लेकिन जो कुछ उन्नत क्षमताएं इसने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    इस साल रेड बुक्स डे (21 फ़रवरी) पर आप कौन-सी रेड बुक पढ़ेंगे?
    21 Feb 2022
    गोविंद पानसरे की हत्या के कुछ साल बाद, नयी दिल्ली स्थित लेफ़्टवर्ड बुक्स (एक प्रकाशन संस्थान) ने रेड बुक्स डे पर विचार करना शुरू किया। एक ऐसा दिन जब परिवर्तनवादी किताबों और उन्हें तैयार करने वाले…
  • vp
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों थे वी.पी सिंह गठबंधन की सरकार के मज़बूत स्तंभ
    20 Feb 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में नीलांजन बात करते हैं वरिष्ठ पत्रकार देबाशीष मुखर्जी से। देबाशीष ने हाल ही में ही वी पी सिंह पर एक किताब लिखी है. उन्होंने सिंह, गठबंधन सरकार और उसके महत्व…
  • punjab
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जनादेश 2022: पंजाब चुनाव में दिखे कई रंग, अगली सरकार ईवीएम में बंद
    20 Feb 2022
    पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए शाम पांच बजे तक 63 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जनादेश 2022:  तीसरे चरण की 59 सीटों के साथ यूपी की 172 सीटों का भविष्य ईवीएम में लॉक
    20 Feb 2022
    निर्वाचन आयोग की ओर से अभी शाम 5 बजे तक के आंकड़े जारी किए हैं। जिसके अनुसार शाम 5 बजे तक कुल औसतन मतदान 57.58% रहा। इनमें ललितपुर में सबसे ज़्यादा 67.38 प्रतिशत वोट पड़े जबकि सबसे कम कानपुर नगर में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License