रोज़गार पर नया डेटा दिखाता है कि कारखानों, भवन निर्माण और सेवा क्षेत्रों में नौकरियाँ और भी कम हुई हैं। इसके चलते लोगों को जबरन खेती की ओर लौटना पड़ रहा है।
रोज़गार पर नया डेटा दिखाता है कि कारखानों, भवन निर्माण और सेवा क्षेत्रों में नौकरियाँ और भी कम हुई हैं। इसके चलते लोगों को जबरन खेती की ओर लौटना पड़ रहा है। खेती में वैसे ही ज़रूरत से ज़्यादा लोग काम करते हैं और उससे ज़्यादातर किसानों की आम्दानी भी नहीं होती है। इसका मतलब खेती में बढ़ता रोज़गार एक तरह की 'डिस्गाइज्ड अनेम्प्लोयमेंट' यानि के छिपी हुई बेरोज़गारी है। मोदी सरकार गरीबों को काम तो नहीं दे पा रही, लेकिन अमीरों को लगातार कर में छूट देती जा रही है।
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