NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मध्यप्रदेश : EOW ने 3800 करोड़ रुपये के ''बुंदेलखंड पैकेज घोटाले'' में जांच शुरू की
जांच रिपोर्ट में पता चला कि टनों पत्थरों की ढुलाई स्कूटरों से की गई। सिर्फ दो हफ्ते में ही सैकड़ों बकरियों की मौत हो गई। कागजों पर बने तालाब गायब हैं। इसके अलावा भी कई अनियमित्ताएं सामने आईं।
काशिफ काकवी
18 Feb 2020
Scam

भोपाल : शुक्रवार को मध्यप्रदेश आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 3800 करोड़ रुपये के बुंदेलखंड पैकेज में हुए घोटाले में 2 प्राथमिक जांच शुरू की हैं। यह पैकेज मनमोहन सिंह सरकार द्वारा 2009 में सूखे से निपटने के लिए राज्य में बुंदेलखंड के 6 जिलों को आवंटित किया गया था। EOW डॉयरेक्टर सुशोवन बनर्जी ने बताया कि सागर यूनिट ने अनियमित्ताओं के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर जांच शुरू की है। इसके तहत अधिकारियों, ठेकेदारों और फॉरेस्ट इनजीनियरिंग सर्विस डिपार्टमेंट के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है।

बनर्जी के मुताबिक़, ''यह जांच बहुआयामी होगी, जिसमें कई सरकारी अधिकारियों के खिलाफ़ मामले दर्ज किए जाएंगे। जल्द ही दस्तावेज़ और सबूत इकट्ठे किए जाएंगे और एफआईआर दाख़िल होगी।'' बनर्जी ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के वक्त निर्देशों के बावजूद मामला दर्ज न किए जाने की भी जांच होगी। 2009 में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए 7,266 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की जोरदार पैरवी की थी।

इसका मक़सद बुंदेलखंड के 13 जिलों में जल संकट का खात्मा करना था। इनमें से 6 जिले मध्यप्रदेश में हैं। मध्यप्रदेश के इन जिलों में छत्तरपुर को 918 करोड़ रुपये, सागर को 840 करोड़ रुपये, दमोह को 619 करोड़ रुपये, टीकमगढ़ को 503 करोड़ रुपये, पन्ना को 414 करोड़ रुपये और दतिया को 331 करोड़ रुपये दिए गए थे। बाकी सात जिले उत्तरप्रदेश में हैं। लेकिन योजना के तहत जारी किया गया पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।

अगर 2012 में टीकमगढ़ के रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट पवन घुवारा ने आवाज नहीं उठाई होती तो इस घोटाले का पता भी नहीं चलता। उन्हें गाड़ियों की संख्या और उनके रजिस्ट्रेशन नंबर में गड़बड़झालों के बाद घोटाले का शक हुआ था। घुवारा के आवाज उठाने के बाद, मनमोहन सिंह की केंद्र सरकार ने एक 3 सदस्यों वाले जांच दल को पन्ना भेजा था। इसी से घोटाले का पर्दाफाश हुआ था। घोटाले में पन्ना के वन विभाग ने मोटरसाइकिल, स्कूटर, कार और जीपों को जेसीबी और ट्रैक्टर बताया था।2014 में घुवारा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने बुंदेलखंड पैकेज के तहत मध्यप्रदेश को आवंटित पैसे की जांच का निर्देश दिया था।

घुवारा अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव हैं। उन्होंने बताया, ''मैं राहुल गांधी से मिला और उन्हें इसके बारे में बताया। 2019 में राहुल गांधी ने कमलनाथ जी से इस मामले में जांच करवाने की अपील की। दिग्विजय सिंह ने भी मुद्दे को उठाया था।''

स्कूटरों पर लादा गया टनों पत्थर?

कथित घोटाले में प्रमाणित और हस्ताक्षरित दस्तावेज़ों के ज़रिए पता चलता है कि कि पांच टन पत्थरों को स्कूटरों पर ढोया गया। इनमें यह भी बताया गया कि महज़ दो हफ्ते में इलाके की सैकड़ों बकरियों की मौत हो गई।2015 में तत्कालीन मुख्य सचिव ने ''मुख्य तकनीकी परीक्षण विभाग'' से घोटाले की जांच करने के लिए कहा। यह जांच 2017 तक चली, जिसके बाद इसे सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया गया। विभाग ने मामले में कार्रवाई की अनुशंसा की, लेकिन इसके बावजूद की कोई कदम नहीं उठाए गए।

350 स्टॉप डैम गायब: सरकारी जांच

सागर में किसानों को महज़ दो हफ्ते में सैकड़ों बकरियां बांट दी गईं। इन बकरियों को किसानों की बकरियों के ''मरने'' के बदले दिया गया था। घुवारा कहते हैं, ''वाकई वो बकरियां कभी दुनिया में थी या नहीं, कोई नहीं जानता''। सूत्रों का कहना है कि EOW जांच सागर से शुरू करेगा। राज्य सरकार को संबंधित 6 जिलों में 350 स्टॉप-डैम नदारद मिले हैं। नल जल योजना के तहत दिए गए 1,296 पानी के टैंकों में से 1,000 हैं ही नहीं। घुवारा का आरोप है कि ''निधि को पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने खुद के खातों में ज़मा कर लिया।''

जांच दल ने उत्तरी और दक्षिणी पन्ना वन क्षेत्रों के डिवीज़नल फॉरेस्ट ऑफिसर्स (DFOs) समेत कई अधिकारियों को समन जारी किया है। उत्तरी पन्ना वन क्षेत्र को 2009 से 2011 के बीच, बुंदेलखंड पैकेज के तहत वन क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए 12 करोड़ रुपये दिए गए। इसके तहत 82 तालाबों और 251 रिसाव टैंको का निर्माण किया जाना था। शिकायतकर्ता के मुताबिक़, वन और प्रशासनिक अमले के कुछ अधिकारियों ने आपराधिक षणयंत्र करते हुए इस पैसे के बड़े हिस्से का गबन कर लिया।

जब घुवारा ने पंजीकृत नंबरों के आधार पर जेसीबी मशीनों की खोज शुरू की, तो वह हैरान रह गए। सरकारी दस्तावेज़ों में जिन रजिस्ट्रेशन नंबरों को जेसीबी का बताया गया था, दरअसल वह नंबर कार, जीप और स्कूटरों के थे। कई रजिस्ट्रेशन नंबर तो आरटीओ ऑफिस में दर्ज भी नहीं थे। कई मामलों में चेक के बजाए नगद भुगतान किया गया।

घुवारा इन सभी दस्तावेज़ों के साथ हाईकोर्ट पहुंचे। तब मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अजय खानविलकर और जस्टिस संजय यादव की बेंच ने मुख्य सचिव को मामले में जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। घुवारा ने जो दस्तावेज़ जमा किए, वो बताते हैं कि जिन नंबरों के तहत दोपहिया वाहनों को दर्ज किया गया था, उन्हीं के ज़रिेए कई ट्रक निर्माण सामग्री को पहुंचाया गया।
 
मुख्य तकनीकी परीक्षण विभाग की जांच में सामने आए अहम तथ्य

- सागर जिले में 40.17 करोड़ रुपये की कीमत के 84 बांध बनाए गए। छत्तरपुर जिले में 29.77 करोड़ रुपये के 85 बांध बने, वहीं टीकमगढ़ जिले में 20.88 करोड़ रुपये से 65 बांध बनाए गए। दमोह में 18.55 करोड़ रुपये से 53 बांध, पन्ना में 15.78 करोड़ रुपये से 35 और दतिया में 11.98 करोड़ रुपये से 28 बांधों का निर्माण हुआ।

- इन सभी बांधों की कुल कीमत 210 करोड़ रुपये थी। आरोप है कि इन बांधों का सत्तर फ़ीसदी काम घटिया निर्माण सामग्री से पूरा किया गया। बांध बनाने के लिए मूल डिज़ाइन का पालन नहीं हुआ और बांध के नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेके दिए गए।

- वन विभाग ने गिट्टी और दूसरी निर्माण सामग्री को पहुंचाने के लिए मोटरसाइकिलों और स्कूटरों का उपयोग किया। कई जगह एक तालाब की खुदाई हुई, लेकिन दो तालाबों का भुगतान किया गया।

- पन्ना जिले में 9 जल परियोजनाओं के आकस्मिक निरीक्षण से भारी भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है।

- 23 गाड़ियां, जिन्हें ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन बताया गया था, वे मोटरसाईकिल, स्कूटर, ऑटो रिक्शा और कार निकलीं।

- 9 जल परियोजनाओं में से पांच का कभी निर्माण ही नहीं हुआ, जबकि इसके लिए जरूरी पैसे का भुगतान हो गया।

- कई साल पहले मर चुके व्यक्ति के नाम पर वाउचर्स के ज़रिए भुगतान कर दिया गया।

- सामग्री खरीदने के नियमों का उल्लंघन हुआ।

- जिन मोटरगाड़ियों से ट्रांसपोर्ट किया गया, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर को रिकॉर्ड किए बिना ही भुगतान कर दिया गया।

- टीकमगढ़, दमोह, छत्तरपुर और दतिया जिलों में करीब 60 फ़ीसदी पैसे का गबन किया गया।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

MP: EOW Begins Probe in 3800-crore ‘Bundelkhand Package Scam’

Bundelkhand Package Scam
Madhya Pradesh Scam
drought
Bundelkhand Drought
EOW Bundelkhand Scam Probe
BJP Scam

Related Stories

एक अध्ययन : आख़िर क्यों करते हैं किसान आत्महत्या?

"जीरो बजट कृषि" का विचार नोटबंदी की तरह घातक हैः राजू शेट्टी

बुंदेलखंड सूखा: तालाबों, कुओं को पुनर्जीवित करने के लिए बांदा के ग्रामीण कर रहे कड़ी मेहनत

मुंबई पानी-पानी तो दिल्ली में सूखा!

किसान एकबार फिर मुख्य विपक्ष की भूमिका में, 3 अगस्त को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

42 फीसदी भारत सूखे की चपेट में, 6 फीसदी इलाके में हालात ख़तरनाक़

महाराष्ट्र : बद से बदतर होते जा रहे हैं सूखे के हालात

भयावह जल संकट की चपेट में चेन्नई, पानी के बिना लोग बेहाल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : किसान योजना छोड़ रहे हैं, लेकिन प्रीमियम की उगाही बढ़ रही है

सूखाग्रस्त माराठवाड़ा के किसान चारा शिविरों की मांग क्यों कर रहे हैं ?


बाकी खबरें

  • Banaras
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : बनारस में कौन हैं मोदी को चुनौती देने वाले महंत?
    28 Feb 2022
    बनारस के संकटमोचन मंदिर के महंत पंडित विश्वम्भर नाथ मिश्र बीएचयू IIT के सीनियर प्रोफेसर और गंगा निर्मलीकरण के सबसे पुराने योद्धा हैं। प्रो. मिश्र उस मंदिर के महंत हैं जिसकी स्थापना खुद तुलसीदास ने…
  • Abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    दबंग राजा भैया के खिलाफ FIR ! सपा कार्यकर्ताओं के तेवर सख्त !
    28 Feb 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma Ukraine में फसे '15,000 भारतीय मेडिकल छात्रों को वापस लाने की सियासत में जुटे प्रधानमंत्री' के विषय पर चर्चा कर रहे है। उसके साथ ही वह…
  • रवि शंकर दुबे
    यूपी वोटिंग पैटर्न: ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा और शहरों में कम वोटिंग के क्या हैं मायने?
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में अब तक के वोटिंग प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को उलझा कर रख दिया है, शहरों में कम तो ग्रामीण इलाकों में अधिक वोटिंग ने पेच फंसा दिया है, जबकि पिछले दो चुनावों का वोटिंग ट्रेंड एक…
  • banaras
    सतीश भारतीय
    यूपी चुनाव: कैसा है बनारस का माहौल?
    28 Feb 2022
    बनारस का रुझान कमल खिलाने की तरफ है या साइकिल की रफ्तार तेज करने की तरफ?
  • एस एन साहू 
    उत्तरप्रदेश में चुनाव पूरब की ओर बढ़ने के साथ भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं 
    28 Feb 2022
    क्या भाजपा को देर से इस बात का अहसास हो रहा है कि उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहीं अधिक पिछड़े वर्ग के समर्थन की जरूरत है, जिन्होंने अपनी जातिगत पहचान का दांव खेला था?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License