NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मुंबई महापंचायत: किसानों का लड़ाई जारी रखने का संकल्प  
राकेश टिकैत ने कहा, "उन्होंने हमें जातियों और धर्मों में तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने हमें देशद्रोही तक क़रार दिया और क्या-क्या नहीं किया। लेकिन,आख़िर में उन्हें हार माननी पड़ी।"
अमेय तिरोदकर
29 Nov 2021
Mumbai Mahapanchayat

मुंबई: संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आयोजित मुंबई महापंचायत में भाग लेने के लिए नासिक के वाणी से आये नौजवान किसान संतोष आरसद ने कहा, "हम यहां इसलिए आये हैं क्योंकि मोदी सरकार ने एमएसपी, बिजली विधेयक, 2020 को रद्द करने के साथ-साथ अजय मिश्रा के इस्तीफ़े को लेकर हमारी मांगों को स्वीकार नहीं किया है। जब तक ऐसा नहीं हो जाता, तब तक हम विरोध करते रहेंगे।"

जैसा कि हमें मालूम है कि इसी दिन सुधारक ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि भी थी, तो इस मौक़े पर महाराष्ट्र भर से हज़ारों किसान रविवार को मुंबई के आज़ाद मैदान पहुंचे थे।

ऑल इंडिया किसान सभा के नेता अशोक धवले ने बताया, "मोदी सरकार अहंकारी है। लेकिन, किसानों ने उन्हें अपनी जगह दिखा दी है। मुंबई के किसान मोदी सरकार के साथ-साथ उनके घनिष्ठ सहयोगियों से कह रहे हैं कि आपकी तानाशाही अब और बर्दाश्त नहीं की जायेगी। हमने आपको तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने की घोषणा करने के लिए मजबूर कर दिया है; हम आपको (एक और क़ानून को सुनिश्चित करने के लिए) एमएसपी लाने के लिए मजबूर कर देंगे, बिजली बिल को निरस्त कर देने और चार श्रम विरोधी बिलों को भी वापस ले लेने की लिए हम विवश कर देंगे।"

इस महापंचायत का आयोजन संयुक्त किसान मोर्चा, शेतकारी कामगार मोर्चा और राज्य के कई अन्य संगठनों की ओर से किया गया था। यह किसानों की ऐतिहासिक जीत का उत्सव था और साथ ही उन 700 किसानों को श्रद्धांजलि थी, जिन्होंने इन क़ानूनों को निरस्त किये जाने की लड़ाई में अपनी जान गंवा दी थी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के किसानों की अस्थि कलश यात्रा 27 अक्टूबर को शुरू हुई थी। रविवार को सभी अस्थि कलश आज़ाद मैदान लाये गये और बाद में मशहूर गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास अरब सागर में विसर्जित कर दिये गये।

भारतीय किसान संघ के नेता राकेश टिकैत ने कहा, "उन्होंने हमें जातियों और धर्मों में तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने हमें देशद्रोही तक क़रार दिया और क्या-क्या नहीं किया। लेकिन,आख़िर में उन्हें इसलिए हार मान लेनी पड़ी, क्योंकि किसान अपने लक्ष्यों को लेकर एकजुट थे और हम साहसपूर्वक आज भी लड़ रहे हैं। यूपी, हरियाणा और पंजाब के किसान साल भर आपके ज़बरदस्त समर्थन के लिए आभारी हैं। लेकिन, लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई है। मैं मोदी सरकार से एमएसपी के सिलसिले में की गयी मांग को भी स्वीकार करने की अपील करता हूं। क्योंकि, चुनाव से पहले आपने इसका वादा किया था।"

इस महापंचायत को प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन दिया। सीटू सदस्यों की एक इकाई नासिक से  101 गाड़ियों के साथ मुंबई पहुंची थी।

नासिक के एक सीटू नेता डीएल कराड ने कहा, "हम यहां किसानों के साथ एकजुटता दिखाने आये हैं। मोदी सरकार ने श्रमिकों के ख़िलाफ़ भी चार क़ानून लाये हैं। कृषि कानूनों वाली जीत के बाद इस मज़दूर विरोधी कानूनों के ख़िलाफ़ भी यह लड़ाई जारी रहेगी, हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक उन्हें उन्हें वापस लेने के लिए मजबूर नहीं कर दिया जायेगा।"

नेशनल अलायंस ऑफ़ पिपल मूवमेंट की विभिन्न इकाइयों ने भी इस महापंचायत में भाग लिया। मुंबई के 'घर बचाओ आंदोलन' के सदस्य दीपक सकपाल ने न्यूज़क्लिक को बताया, "हम यहां इसलिए खड़े हैं, क्योंकि किसान हमें खिलाते हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि किसानों के अधिकारों के लिए खड़े होना हमारा फ़र्ज़ है।"  

सर्वहारा जन आंदोलन की नेता, उल्का महाजन ने अपने भाषण में इस बात का दावा किया कि किसानों के इस विरोध ने मोदी सरकार और देश के लिए भाजपा की बड़ी योजना को नाकाम कर दिया है। महाजन ने कहा, "वे (भाजपा) चाहते हैं कि हम भयभीत, भूखे और भ्रमित रहें। एक बार जब कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में फंस जाता है, तो वही सबकुछ करता,जिसे उसे करने के लिए कहा जाता है। यह है फ़ासीवादियों का मॉडल। लेकिन, देश के किसानों ने दिखा दिया है कि इस मॉडल को निरंतर संघर्ष से हराया जा सकता है।"

ऑल इंडिया किसान सभा, महाराष्ट्र के महासचिव अजीत नवले ने बड़ी संख्या में मुंबई आने के लिए किसानों को धन्यवाद दिया। नवले ने कहा, "किसान अब जाग गये हैं। उन्होंने अपनी शक्ति का एहसास कर लिया है और जीतने तक लड़ने के लिए तैयार हैं। मोदी सरकार को समझ लेना चाहिए कि पिछले एक साल इस आंदोलन को तोड़ने की उसकी हर रणनीति नाकाम हो चुकी है। इसलिए, सरकार के लिए हमारी सभी छह मांगों को स्वीकार कर लेना ही बेहतर है..."

इस महापंचायत में बड़ी संख्या में महिलायें भी शामिल हुईं। इस विरोध का समर्थन करने को लेकर रायगढ़ के अलीबाग़ से आयी एक महिला सयाली पाटिल ने कहा: "महिलायें किसी भी घर की रीढ़ होती हैं। वे विरोध का समर्थन करने के लिए यहां इसलिए आ रही हैं, क्योंकि उनकी फ़सल की वाजिब क़ीमत नहीं मिलने से किसान ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उत्पादन लागत का 50 प्रतिशत भी नहीं मिल पा रहा है। इसीलिए एमएसपी की ज़रूरत है।"  

माकपा के पूर्व विधायक जेपी गवित ने कहा कि इन क़ानूनों को निरस्त करने का ऐलान एक और जुमला हो सकता है। गवित ने केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को संबोधित करते हुए कहा, "आप संसद में जब क़ानून वापस ले लेंगे, तभी किसान इस पर विश्वास कर पायेंगे। इसके अलावा, आपने 2014 में अच्छे दिनों को लेकर एमएसपी का वादा किया था, उसका क्या हुआ?"

इस महापंचायत को कांग्रेस, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ़ इंडिया और आम आदमी पार्टी का समर्थन प्राप्त था।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Mumbai Mahapanchayat: Farmers Resolve to Continue Battle

Mumbai Mahapanchayat
farmers' protest
Farm Laws Repealed
Labour Codes
CITU
AIKS
SKM
BKU
rakesh tikait

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

बेंगलुरु में किसान नेता राकेश टिकैत पर काली स्याही फेंकी गयी

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

किसकी मीडिया आज़ादी?  किसका मीडिया फ़रमान?

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

डीवाईएफ़आई ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर


बाकी खबरें

  • किसान संसद ने सर्वसम्मति से मोदी सरकार के ख़िलाफ़ पास किया अविश्वास प्रस्ताव, कॉरपोरेट छोड़ें भारत
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान संसद ने सर्वसम्मति से मोदी सरकार के ख़िलाफ़ पास किया अविश्वास प्रस्ताव, कॉरपोरेट छोड़ें भारत
    09 Aug 2021
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने 13 दिन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रही किसान संसद के आख़िरी दिन मोदी सरकार के ख़िलाफ़ पारित किये गये प्रस्ताव पर रिपोर्ट की। आज 9 अगस्त के ऐतिहासिक…
  • भारत बचाओ: जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत बचाओ: जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन
    09 Aug 2021
    कृषि कानून, लेबर कोड और देश में मौजूद तमाम अधिकारों पर जारी हमले के खिलाफ आज मज़दूर, किसान और तमाम जनसंगठन भारत बचाओ दिवस के तहत देश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं । पेश है न्यूज़क्लिक की दिल्ली से…
  • किसान संसद : महिला किसानों की ललकार, गद्दी छोड़े मोदी सरकार
    भाषा सिंह
    किसान संसद : महिला किसानों की ललकार, गद्दी छोड़े मोदी सरकार
    09 Aug 2021
    बात बोलेगी: महिला किसान नेताओं ने महात्मा गांधी द्वारा 1942 में 9 अगस्त को दिए गए ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के नारे को याद करते हुए ‘मोदी गद्दी छोड़ो, कॉरपोरेट देश छोड़ो’ के नारे के साथ मोदी सरकार के…
  • बच्चों को लॉन्ग कोविड होने की संभावना काफ़ी कम : लैंसेट अध्ययन
    संदीपन तालुकदार
    बच्चों को लॉन्ग कोविड होने की संभावना काफ़ी कम : लैंसेट अध्ययन
    09 Aug 2021
    द लैंसेट में छपे हालिया अध्ययन में बताया गया है कि कोविड से संक्रमित हुए बच्चे 1 हफ़्ते से भी कम समय में ठीक हो रहे हैं, और उनमें लॉन्ग कोविड होने की संभावना काफ़ी कम है।
  • नीरज चोपड़ा : एक अपवाद, जिसे हमें सामान्य बनाने की जरूरत है
    लेस्ली ज़ेवियर
    नीरज चोपड़ा : एक अपवाद, जिसे हमें सामान्य बनाने की जरूरत है
    09 Aug 2021
    नीरज चोपड़ा का स्वर्ण पदक एक जश्न का मौक़ा है, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि जब खेलों की बात होती है, तो हमें और क्या करने की ज़रूरत है। हमें बेहतर अवसंरचना, भीतरी इलाकों तक ज़्यादा नेटवर्किंग और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License