NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
'हम जिसका चाहेंगे, उसका तख़्तापलट करेंगे': एलन मस्क और बोलिविया में लोकतंत्र का ख़ात्मा
पूरे बोलिविया में 27 जुलाई से लोकतंत्र की बहाली के लिए प्रदर्शन शुरू हो रहे हैं।
विजय प्रसाद, एलेजांद्रो बेजार्नो
30 Jul 2020
Musk

24 जुलाई, 2020 को टेस्ला के एलन मस्क ने ट्विटर पर लिखा कि अमेरिकी "सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक दूसरा प्रोत्साहन पैकेज लोगों के हित में नहीं है।" जिसके जवाब में किसी ने मस्क को लिखा, "आप जानते हो कि क्या लोगों के हित में नहीं है? अमेरिकी सरकार बोलिविया में इवो मोराल्स की सरकार का तख्तापलट करवा देती है, ताकि तुम लोगों को लीथियम मिल सके।" मस्क ने जवाब में लिखा,"हम जिसका चाहें, उसका तख्तापलट करवा सकते हैं। इस चीज को मान लो।"

मस्क यहां राष्ट्रपति इवो मोराल्स आयमा के बारे में बात कर रहे थे, जिन्हें उनके कार्यालय से अवैधानिक तरीके से नवंबर, 2019 में हटा दिया गया। मोराल्स ने तब चुनाव ही जीते थे। उनका नया कार्यकाल जनवरी, 2020 से शुरू होना था। अगर मोराल्स के चुनाव पर कोई आपत्ति भी थी,  तो भी न्यायोचित ढंग से उनका पुराना कार्यकाल नवंबर और दिसंबर, 2019 में जारी रहना था। इसके बजाए बोलिविया की फौज़ ने वहां के दक्षिणपंथ औऱ अमेरिका की मांग पर मोराल्स को धमकी दी, जिसके बाद मोराल्स मेक्सिको में निर्वासित हो गए, अब वे अर्जेंटीना में हैं।

फर्जीवाड़े के तथाकथित "सबूत" सिर्फ़ अति दक्षिणपंथियों और "ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स" की एक प्राथमिक रिपोर्ट में दिए गए थे। जब उन्हें हटा दिया गया, उसके बाद उदारवादी मीडिया ने अनैच्छिक तरीके से बताया कि मोराल्स के खिलाफ़ फर्जीवाड़े के कोई सबूत नहीं मिले। लेकिन बोलिविया के लिए तब तक बहुत देर हो चुकी थी, अब देश एक ख़तरनाक सरकार के हवाले हो चुका था, जिसने बोलिविया में लोकतंत्र की हत्या कर दी।

लीथियम के लिए तख़्तापलट

अपने 14 साल के कार्यकाल में मोराल्स ने बोलिविया की संपदा का वहां के लोगों द्वारा इस्तेमाल की लड़ाई लड़ी है। बोलिविया की बुनियादी जरूरतों की काफ़ी हद तक पूर्ति हुई है। साक्षरता दर बढ़ी और भुखमरी कम हुई है। बोलिवियाई संपदा का अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कॉरपोरेशन के हितों के बजाए, स्थानीय लोगों के हित में लाना, ला पेज़ स्थित अमेरिकी दूतावास के लिए अपमान भरी बात थी, तब दूतावास ने सेना के घिनौने तत्वों और अतिदक्षिणपंथ को साथ लेकर सरकार को उखाड़ फेंका। नवंबर, 2019 में यही हुआ।

भले ही मस्क की प्रतिक्रिया भले ही कितना भी असंयमित हो, लेकिन कम से कम वह ईमानदार है। उनकी कंपनी को कम कीमत पर उपलब्ध बोलिविया के लीथियम भंडार की बड़े समय से तलाश है। लीथियम बैटरियों में उपयोग होने वाला मुख्य तत्व है। इस साल की शुरुआत में मस्क और उनकी कंपनी ने कहा था कि वे ब्राज़ील में एक टेस्ला फैक्ट्री बनाना चाहते हैं, जिसमें बोलिविया से आने वाले लीथियम का उपयोग किया जाएगा। हमने उस घटना पर लिखी रिपोर्ट को "दक्षिण अमेरिका के लीथियम के लिए एलन मस्क किसी नव-विजेता की तरह बर्ताव कर रहे हैं", नाम दिया था। हमने उस रिपोर्ट में जो भी लिखा था, उसका सार इस एक ट्वीट में है, जहां दूसरे देशों के राजनीतिक जीवन के प्रति बेहद आक्रामकता दिखाई गई है। उस ट्वीट में मस्क की तरह के लोगों का वह लालच भी दिखाई देता है, जिसके तहत उन्हें लगता है कि संसाधनों पर उनका स्वाभाविक कब्ज़ा है।

मस्क ने अपना ट्वीट हटा दिया है। उसके बाद मस्क ने कहा कि उनका लीथियम ऑस्ट्रेलिया से आता है। लेकिन इससे मुद्दा ख़त्म नहीं हो जाता, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में भी लीथियम के खनन से पर्यावर्णीय नुकसान को लेकर चिंताएं जाहिर हो रही हैं।

लोकतंत्र का खात्मा

मोराल्स को हटाने के बाद, एक मामूली सी अतिदक्षिणपंथी राजनेता जेनिएन एनेज़ ने संवैधानिक प्रक्रिया को किनारे रखते हुए सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया। उन्होने अपनी राजनीति का चरित्र तब दिखाया, जब उन्होंने 15 नवंबर, 2019 को एक आदेश दिया, जिसके ज़रिए सेना को अपनी मनमानी करने की स्वतंत्रता मिल गई। यहां तक कि एनेज़ के साथियों को भी महसूस हुआ कि इस कदम के ज़रिए वे काफ़ी दूर तक चली गईं। जिसके बाद 28 नवंबर को इसे वापस ले लिया गया।

मोराल्स की पार्टी मूवमेंट फॉर सोशलिज़्म (MAS) के कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और उन्हें डराने धमकाने की प्रक्रिया नवंबर, 2019 में शुरू हुई थी, जो अब तक जारी है। 7 जुलाई, 2020 को सात अमेरिकी सीनेटर्स ने एक स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें कहा गया, "हम बोलिविया में अंतरिम सरकार द्वारा जारी मानवाधिकारों के उल्लंघन और नागरिक अधिकारों में कटौती से बहुत चिंतित हैं।" सीनेटर्स ने आगे कहा, "हमें डर है कि बोलिविया में नागरिक अधिकारों में आगे और भी ज़्यादा कटौती की जा सकती है और आने वाले चुनावों की वैधता ख़तरे में पड़ सकती है।"

लेकिन इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है कि क्योंकि एनेज़ की सरकार चुनाव न कराए जाने की मंशा बनाकर बैठी हुई लग रही है। सभी चुनावी अनुमानों के मुताबिक़, एनेज़ का आम चुनावों में हारना तय है। CELAG द्वारा हाल में कराए गए एक पोल के मुताबिक़, एनेज़ को 13।3 फ़ीसदी वोट ही मिलेंगे, जो मूवमेंट फॉर सोशलिज़्म के लुईस आर्स (41।9 फ़ीसदी) और केंद्रीय दक्षिणपंथ विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले कार्लोस मेसा (26।8 फ़ीसदी) से काफ़ी कम हैं। इस चुनाव को मई में हो जाना चाहिए था। लेकिन फिर इसे 6 सितंबर की तारीख़ पर आगे बढ़ा दिया गया था।  अब इसे एक और बार आगे बढ़ाकर 18 अक्टूबर कर दिया गया। इस पूरे साल बोलिविया में चुनी हुई सरकार नहीं होगी।

लुईस आर्स ने हाल में ओलिवर वर्गस को बताया, "हमें सजाओं का सामना करना पड़ता है, हमें निगरानी का सामना करना पड़ता है। हमें अपना कैंपेन चलाने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन यह तय है कि चुनाव हम ही जीतेंगे।"

CELAG अध्ययन में बताया गया कि 10 में से 9 बोलिवियन लोगों की कोरोना वायरस की आर्थिक मंदी में आय कम हुई है। इन आर्थिक कारणों और सरकार द्वारा MAS की प्रताड़ना के चलते 65।2 फ़ीसदी बोलिवियाई लोगों की एनेज़ सरकार को लेकर नकारात्मक धारणा है। यहां इस बात पर गौर फरमाना जरूरी है कि मोराल्स की पार्टी MAS की सकारात्मक नीतियों के चलते समाजवादी रुझान को बड़ा समर्थन हासिल है; बोलिविया के 64।1 फ़ीसदी लोग अमीरों पर कर लगाने का समर्थन करते हैं। सामान्य तौर पर बोलिवियाई लोग MAS और मोराल्स के संसाधन समाजवाद का समर्थन करते हैं।

कोरोनाशॉक और बोलिविया

एनेज़ की सरकार वायरस से निपटने में अक्षम साबित हुई है। एक करोड़ दस लाख लोगों के इस देश में कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 66,456 है। चूंकि कम मात्रा में टेस्टिंग की जा रही है, इसलिए संभावना है कि यह आंकड़ा और भी ज़्यादा बड़ा होगा।

हमारी कहानी में अब मस्क की वापसी होती है। इस साल की शुरुआत में 31 मार्च को बोलिविया के विदेश मंत्री केरेन लोंगारिक ने मस्क को एक चापलूसी भरा ख़त लिखा। ख़त में मस्क से उन "जरूरतमंद देशों के लिए वेंटिलेटर्स भेजने संबंधी सहयोग का मस्क द्वारा रखे गए प्रस्ताव" के बारे में पूछा गया था। लोंगारिक ने कहा,"अगर उन वेंटिलेटर्स को बोलिविया भेजना संभव ना हो, तो हम उन्हें मियामी में भी ले सकते हैं और जल्द से जल्द उन्हें यहां ला सकते हैं।" लेकिन ऐसा कोई भी वेंटिलेटर नहीं आया।

इसके बजाए सरकार ने एक स्पेनिश आपूर्तिकर्ता से 27,000 डॉलर प्रति वेंटिलेटर के हिसाब से 170 उपकरण खरीद लिए। बोलिविया के उत्पादकों ने कहा था कि वे एक हजार डॉलर प्रति वेंटिलेटर के हिसाब से आपूर्ति कर सकते हैं। इस घपलाकांड में एनेज़ सरकार के स्वास्थ्यमंत्री मार्सेलो नावाजस की गिरफ़्तारी हुई है।

मोराल्स

इवो मोराल्स ने बोलिविया में हुए तख़्तापलट के बारे में मस्क का ट्वीट पढ़ा और अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी के मालिक एलन मस्क का बोलिविया के तख़्तापलट के बारे में कहना है: 'हम जो चाहेंगे, वो करेंगे।' यह एक और सबूत है कि सैन्य तख़्तापलट बोलिविया के लीथियम के लिए किया गया है, जिसकी कीमत दो नरसंहार हैं। हम अपने संसाधनों की हमेशा रक्षा करते रहेंगे।"

यहां नरसंहार की बात पर गौर फरमाना जरूरी है। नवंबर में मेक्सिको सिटी में बैठकर मोराल्स, एनेज़ सरकार द्वारा उठाए गए उस कदम के गवाह बने, जिसमें कोचाबाम्बा से लेकर एल ऑल्टो तक युद्ध भेड़ियों को बोलिविया के लोगों के खिलाफ़ छोड़ दिया गया। मोराल्स ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "वह मेरे भाईयों और बहनों को मार रहे हैं। पुराने दौर की सैन्य तानाशाहियां यही चीज करती थीं।" एनेज़ सरकार, जिसे अमेरिका और एलन मस्क का पूरा समर्थन हासिल है, उसका यही चरित्र है।

पूरे बोलिविया में  27 जुलाई से लोकतंत्र की बहाली के लिए प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

‘We Will Coup Whoever We Want’: Elon Musk and the Overthrow of Democracy in Bolivi

bolivia
Bolivia Coup
Evo Morales
Elon Musk
Tesla

Related Stories

मस्क की बोली पर ट्विटर के सहमत होने के बाद अब आगे क्या होगा?

क्या चिली की प्रगतिशील सरकार बोलीविया की समुद्री पहुंच के रास्ते खोलेगी?

पत्रकारिता एवं जन-आंदोलनों के पक्ष में विकीलीक्स का अतुलनीय योगदान 

बोलिवियाई लोगों को तख्तापलट करने वाली नेता जीनिन आनेज़ के जेल से भागने की आशंका

बेज़ोस और मस्क : शुरूआत अंतरिक्ष में एक नये युग की या उस पर अवैध कब्जों की?

बोलिविया के तख़्तापलट में शस्त्र मुहैया कराने के मामले में अर्जेंटीना ने जांच शुरू की

बोलीविया सरकार ने इक्वाडोर द्वारा तख़्तापलट सरकार को हथियारों की आपूर्ति की जांच की

बोलिविया में तख्तापलट का नेतृत्व करने के लिए जीनिन अनेज गिरफ़्तार

साकाबा नरसंहार के एक साल बाद बोलीविया ने पीड़ितों को याद किया और न्याय की मांग की

बोलिवियाई लोगों ने एक विशाल रैली में ईवो मोरालेस का स्वागत किया


बाकी खबरें

  • Narendra Modi
    प्रभात पटनायक
    क्या मोदी का हिंदुत्व-कॉरपोरेट गठजोड़ दरक रहा है?
    20 Sep 2021
    मोदी की भूमिका एक ऐसे शख़्स की है, जिसने कॉरपोरेट पूंजी और आरएसएस के बीच रिश्ता बनवाया और कॉरपोरेट-हिंदुत्व गठजोड़ को पुख्ता किया। गंभीर संकट के दौर में बड़ा पूंजीपति वर्ग आम तौर पर फ़ासीवादी तत्वों…
  • SAARC
    पार्थ एस घोष
    भारत और अफ़ग़ानिस्तान:  सामान्य ज्ञान के रूप में अंतरराष्ट्रीय राजनीति
    20 Sep 2021
    भारत केवल घरेलू राजनीति में मशगूल रहने की बजाए, क्षेत्रीय सुरक्षा की चिंताओं का भी ध्यान रखे, और दक्षेस (SAARC) समूह को पुनरुज्जीवित करने के लिए अवश्य कोई रास्ता निकाले। 
  • cartoon
    शंभूनाथ शुक्ल
    पंजाब: कांग्रेस के दांव से बीजेपी भौंचक्की
    20 Sep 2021
    राहुल गांधी ने अपने एक ही फ़ैसले से भाजपा की बाज़ी पलट दी है। पंजाब में दलित मुख्यमंत्री देकर राहुल गांधी ने मोदी और योगी को बुरी तरह घेर लिया है।
  • Nationwide strike of scheme workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    24 सितंबर को स्कीम वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल, संयुक्त किसान मोर्चा ने किया समर्थन का ऐलान
    20 Sep 2021
    आंगनवाड़ी, आशा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मिड डे मील समेत अन्य स्कीम वर्कर्स ने 24 सितंबर को देशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल को देशभर के किसान संगठनों का भी साथ मिला है जबकि…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामले घटकर 0.95 फ़ीसदी हुए
    20 Sep 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,256 नए मामले दर्ज किए गए हैं।  इस तरह देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.95 फ़ीसदी यानी 3 लाख 18 हज़ार 181 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License