NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
नेपाल
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी : पहली वर्षगांठ के मौके पर समाजवाद पर ज़ोर
पार्टी ने सार्वजनिक संगठनों के नेतृत्व की घोषणा के साथ एकीकरण प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह अपनी राजनीतिक और वैचारिक धारणा की समीक्षा भी करेगी।
प्रशांत आर.
18 May 2019
Nepal

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने 17 मई यानी शुक्रवार को अपने गठन की पहली वर्षगांठ मनाई। इस दौरान पार्टी के बड़े संगठनों के प्रमुखों की घोषणाएं की गई। इस पार्टी का गठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के विलय के बाद 17 मई 2018 को किया गया था।

भविष्य में पार्टी अपनी राजनीतिक और वैचारिक धारणा को लेकर बड़ी घोषणा कर सकती है। सूत्रों के अनुसार ये पार्टी पीपल्स डेमोक्रेसी में पीपल्स मल्टी-पार्टी डेमोक्रेसी और पीपल्स डेमोक्रेसी ऑफ ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी के दो घटक दलों के विचार का समावेश कर सकती है। यह शब्दावली में बदलाव कहीं से ज़्यादा है। पीपल्स डेमोक्रेसी पर आधारित एक कार्यक्रम की स्वीकृति के साथ नीति निर्माण में विशेष रूप से भूमि सुधार, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और क्रांतिकारी प्रक्रिया जैसे मुद्दों में उल्लेखनीय बदलाव हो सकता है। हालांकि इस नई धारणा को स्वीकार करने के साथ संविधान में निहित समाजवाद के निर्माण के लिए कड़े सुधारों के माध्यम से बहुत कुछ नेतृत्व की क्षमता पर निर्भर करेगा।

17 मई को सार्वजनिक बैठक में पार्टी के शीर्ष नेता पार्टी अध्यक्ष प्रचंड और के.पी.ओली (जो देश के प्रधानमंत्री भी हैं), वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। यह बैठक महान कम्युनिस्ट नेता मदन भंडारी और जिबाराज आश्रित की शहादत की बरसी पर भी आयोजित की गई थी। वर्ष 1993 में एक रहस्यमय दुर्घटना में दोनों नेताओं की मृत्यु हो गई थी, जिसका आरोप साम्राज्यवादी ताकतों पर लगाया जाता है।

शीर्ष नेतृत्व की घोषणा और जन संगठनों की केंद्रीय समितियों का विस्तार एकीकरण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। पिछले साल केंद्रीय समिति, स्थायी समिति और नई पार्टी के सचिवालय की घोषणा की गई थी। बाद में प्रांतीय और ज़िला समितियों की घोषणा की गई। पोलित ब्यूरो की रचना का विवरण अभी तक घोषित नहीं किया गया है। पार्टी के संगठनात्मक पदानुक्रम में पोलित ब्यूरो केंद्रीय समिति से ऊपर है और स्थायी समिति तथा सचिवालय से नीचे है।

शुक्रवार को हुई बैठक में बोलते हुए नेताओं ने नेपाल के संदर्भ में कम्युनिस्ट सिद्धांतों को स्वीकार करने के मदन भंडारी की वसीयत को श्रद्धांजलि दी। प्रचंड ने किसी भी प्रकार की हठधर्मिता और साम्यवाद के लिए घिसी पिटी दृष्टिकोण से बचने की भंडारी की क्षमता के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा नेतृत्व को इस एकीकरण प्रक्रिया को उसके सही निष्कर्ष तक ले जाने के लिए यही रुख अपनाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि साम्राज्यवादी ताकतों ने महसूस किया था कि नेपाल के कम्युनिस्ट एकजुट थे और जब तक "हम लोगों और अपनी विचारधारा के प्रति वफादार हैं, कोई भी हमें हरा नहीं सकता है।"

ओली ने सरकार की उपलब्धियों के बारे में चर्चा की जिसमें भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और रोज़गार में सुधार के प्रयास शामिल हैं। उन्होंने संसद के समक्ष प्रस्तुत नीति और कार्यक्रम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार के आलोचक जो इन नीतियों के खिलाफ तर्क देने में असमर्थ थे वे बेबुनियाद आरोपों से लोगों को भ्रमित कर रहे थे।

कुछ संगठन जिनके नेताओं की घोषणा की गई थी उनमें नेपाल दलित मुक्ति संगठन (वंचित जातियों की मुक्ति के लिए संगठन), यूथ फेडरेशन जनरल फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस, ऑल नेपाल नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन और ऑल नेपाल पीजैंट्स फेडरेशन शामिल हैं।

democracy in nepal
Madhav Kumar Nepal
Communist Party Of Nepal
Communist Party of Nepal (Unified Marxist-Leninist)
communist party of nepal maoist
Nepal

Related Stories

कार्टून क्लिक: चीन हां जी….चीन ना जी

नेपाल की अर्थव्यवस्था पर बिजली कटौती की मार

नेपाल ने अमेरिका के MCC अनुदान समझौते को विरोध प्रदर्शनों के बीच दी मान्यता, अब आगे क्या?

नेपाल: राष्ट्रपति विद्या देवी ने कहा- उच्चतम न्यायालय नहीं पलट सकता उनका फ़ैसला

नेपाल में झारखंड के 26 मजदूर कोरोना जैसी बीमारी से ग्रस्त, वापस लाने के लिए बस की व्यवस्था की गई

अध्ययन के मुताबिक महामारी के दौरान बलात्कार के मामलों में बढ़ोत्तरी संभव

पड़ोसी देशों में चीन की बढ़ती उपस्थिति पर विदेश मंत्रालय का रवैया अदूरदर्शी : समिति

चीन के नेपाल मिशन की बढ़ती लोकप्रियता

चीन का ‘स्वास्थ्य रेशम मार्ग’ दक्षिण एशिया में दिखायी पड़ने लगा है

नेपाल में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक सोमवार तक टली, ओली के भविष्य पर होना था फ़ैसला


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    भारतीय रंगमंच का इतिहास वर्ग संघर्षों का ही नहीं, वर्ण संघर्षों का भी है : राजेश कुमार
    10 Apr 2022
    आज विपक्ष की तरह रंगमंच भी कमजोर हो गया है। शहरी रंगमंच इतना महंगा हो गया है कि सरकारी ग्रांट या अनुदान लेना उसकी मजबूरी हो गयी है। जो प्रतिरोध की धारा से जुड़ कर नाटक कर रहे हैं, उन पर सत्ता का दमन…
  • bhasha
    न्यूज़क्लिक टीम
    “नंगा करने का दुख है लेकिन सच्ची पत्रकारिता करने का फ़ख़्र”: कनिष्क तिवारी
    09 Apr 2022
    ख़ास बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने मध्यप्रदेश के सीधी ज़िले के पत्रकार कनिष्क तिवारी से बातचीत की और उनकी पीड़ा को जाना। कनिष्क तिवारी वही पत्रकार हैं, जिन्हें एक अन्य पत्रकार और कई…
  • sdmc
    न्यूज़क्लिक टीम
    CR Park: SDMC मेयर के बयान के बाद मछली विक्रेताओं पर रोज़ी रोटी का संकट?
    09 Apr 2022
    दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मेयर के बयान के बाद दशकों से मछली बेच रहे विक्रेताओं के लिए रोज़ी रोटी का संकट पैदा हो गया है. विक्रेता आरोप लगा रहे है कि वे SDMC और DDA की बेरुख़ी का शिकार हो रहे है जबकि…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पत्रकार-पत्रकारिता से नाराज़ सरकार और राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार
    09 Apr 2022
    भारत प्रेस फ्रीडम की रिपोर्ट में उन देशों में शामिल है जहाँ पर पत्रकारों की हालत बहुत खराब मानी जाती है। हाल ही के दिनों में हुई कुछ घटनाएं इस रिपोर्ट को सही साबित करती हैं. पिछले कुछ दिनों में…
  • सोनिया यादव
    यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं
    09 Apr 2022
    पुलिस की मौजूदगी में मुस्लिम महिलाओं को सरेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत बजरंग मुनि दास अभी भी पुलिस की गिरफ़्त से बाहर है। वहीं उसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्र और नागरिक समाज के लोग दिल्ली…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License