NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
नोटबंदी की मार से अब भी कराह रहे हैं छोटे कारोबारी, दुकानदार और मजदूर
इन लोगों से बातें करने पर पता चला कि भले ही कॉरपोरेट मीडिया में नोटबंदी की बरबादियों की कहानियां नहीं आ पा रही हों लेकिन अंदरखाने हालात गंभीर है। देश की आम जनता आगे कई साल तक नोटबंदी की मार से कराहती रहेगी I
सबरंग इंडिया
04 Nov 2017
नोट बंदी की मार

इस महीने 8 नवंबर को नोटबंदी को एक साल पूरा हो जाएगा। पिछले साल 8 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने अचानक रात एक टीवी प्रसारण में 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने का ऐलान कर दिया था और कहा था कि एनडीए सरकार ने यह कदम देश में काले धन पर लगाम लगाने, टेरर फंडिंग रोकने और नकली नोटों को सर्कुलेशन घटाने के लिए उठाया है। लेकिन सरकार के इस कदम ने पूरे देश में भारी अव्यवस्था फैला दी थी। इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था का दिवाला निकल गया। बड़ी तादाद में श्रमिकों, कारोबारियों और किसानों को अपने रोजगार और कमाई से हाथ धोना पड़ा। गंभीर बात यह है कि एक साल बीतने के बाद भी नोटबंदी का असर कायम है।

सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और असंगठित क्षेत्रों के कर्मियों पर हुआ। सबरंगइंडिया ने नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर ऑटो कंपोनेंट, रियल एस्टेट सेक्टर के कारोबारियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों से बात की। इन सभी का कहना है कि नोटबंदी का असर अब तक उनकी जिंदगी को प्रभावित कर रहा है।

एशिया के सबसे बड़े ऑटो पार्ट्स कंपोनेंट मार्केट कश्मीरी गेट के कारोबारी आलोक अग्रवाल कहते हैं कि नोटबंदी लागू होने के दूसरे दिन से ही बाजार से खरीदार गायब हो गए। कश्मीरी गेट से पूरे देश के ऑटो पार्ट बाजारों में माल जाता है। नोटबंदी के  बाद देश भर से जो ऑर्डर आता था वह भी अचानक बंद हो गया। हमलोग यह कयास लगा रहे थे कि लोग पुराने 500 और 1000 के नोट खपाने के लिए गाड़ियां खरीदेंगे लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। आलोक कहते हैं कि कारोबार इतना गिर गया कि उन दिनों को याद करते हुए सिहरन होती है। नोटबंदी ने हमें लगभग दिवालिया कर लिया। मैंने तो एक समय बचा-खुचा माल बेचकर इस धंधे से किनारा करने का सोच लिया था। अप्रैल तक मैं इस धंधे में घाटे से उबर नहीं सका था। अभी तक मेरी बिक्री की रिकवरी नहीं हो सकी है।

नोटबंदी से पूर्वांचल के थोक बाजार को भी भारी नुकसान हुआ था। बड़ी तादाद में थोक बाजार में सामाने बेचने वालों को अपनी दुकानें समेटनी पड़ी थीं और इन दुकानदारों में काम करने वाले सेल्समैन, सामान ढोने होने वाले और दुकानों के सामने धंधा-पानी करने वालों को भारी घाटा हुआ।

रियल एस्टेट सेक्टर पर भी नोटबंदी का गहरा असर दिखा था। हाल में टाइल्स बनाने वाली बड़ी कंपनी के एक आला अधिकारी ने सबरंगइंडिया से बातचीत में कहा कि इस साल नवरात्रि और दीवाली में ऑर्डर बिल्कुल गिर गया। अमूमन नवरात्रि और दिवाली में बिल्डर नए मकान ग्राहकों को सौंपते हैं। और इस दौरान फिनिशिंग के काम के लिए टाइलों की बिक्री बढ़ जाती है। लेकिन इस बार बड़ा स्टॉक यूं ही पड़ा हुआ है।

असंगठित क्षेत्र के जिन कर्मचारियों को बेरोजगार होना पड़ा वो अब भी इससे उबर नहीं पाए हैं। कइयों पर बेरोजगारी के दौरान भारी कर्ज लद गया, जिसे उतारने में भी उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है। कुछ को अभी भी रोजगार नहीं मिला है और कुछ वापस गांव चले गए हैं। नोएडा के अपार्टमेंटों में छोटे-मोटे ठेके लेकर घर रिपयेरिंग और निर्माण आदि का काम करने वाले रामकिशोर का कहना है कि पहले उसके साथ पांच-छह मजदूर काम करते थे लेकिन अब वह खुद अपनी पत्नी को साथ लेकर काम करते हैं। अभी भी काम की कमी है।

इन लोगों से बातें करने पर पता चला कि भले ही कॉरपोरेट मीडिया में नोटबंदी की बरबादियों की कहानियां नहीं आ पा रही हों लेकिन अंदरखाने हालात गंभीर है। देश की आम जनता आगे कई साल तक नोटबंदी की मार से कराहती रहेगी I

नोटबंदी
आर्थिक मंदी
नोटबंदी की मार
छोटे कारोबारी

Related Stories

नोटबंदी: वायू सेना ने सौंपा 29.41 करोड़ का बिल

अहमदाबाद के एक बैंक और अमित शाह का दिलचस्प मामला

कृषि उत्पादों की गिरती कीमतों से किसानों को भारी नुक्सान

नोटबंदी: अब तक की सबसे प्रतिक्रियावादी एवं तर्कहीन नीति (किताब से उद्धरण)

नोटबंदी की कहानी मीम्स की ज़बानी

नोटबंदी - भारत में आज तक का सबसे बड़ा घोटाला

जीएसटी मेक इन इंडिया या अनमेक इन इंडिया ?

नोटबंदी सबसे बड़ा मनी लांड्री घोटाला - अरुण शोरी

BJP के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने ही जेटली पर साधा निशाना, बोले- अर्थव्यवस्था को गड़बड़ कर दिया

मोदी सरकार में महंगाई बढ़ना शुरू, अब दिखा है नोटबंदी और जीएसटी का असली असर


बाकी खबरें

  • भाषा
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में फ़ैसला सुरक्षित
    06 May 2022
    अदालत ने बृहस्पतिवार को इस मामले की पोषणीयता पर फैसला सुरक्षित रखते हुए निर्णय सुनाने के लिए 19 मई की तिथि नियत की है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लंबे समय के बाद RBI द्वारा की गई रेपो रेट में बढ़ोतरी का क्या मतलब है?
    06 May 2022
    रेपो दरों में 40 बेसिस पॉइन्ट की बढ़ोतरी मतलब है कि पहले के मुकाबले किसी भी तरह का क़र्ज़ लेना महंगा होगा। अब तक सरकार को तकरीबन 7 से 7.5 फीसदी की दर से क़र्ज़ मिल रहा था। बैंक आरबीआई से 4.40 फ़ीसदी दर पर…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    WHO और भारत सरकार की कोरोना रिपोर्ट में अंतर क्य़ों?
    06 May 2022
    कोरोना में हुई मौतों पर डब्ल्यूएचओ ने रिपोर्ट जारी की है, जो भारत सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट से बिल्कुल अलग है।
  • भाषा
    पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार किया, हरियाणा में रोका गया क़ाफ़िला
    06 May 2022
    भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि पंजाब पुलिस द्वारा बग्गा के पिता को पीटे जाने के आरोप में राष्ट्रीय राजधानी के जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।
  • सारा थानावाला
    क्या लिव-इन संबंधों पर न्यायिक स्पष्टता की कमी है?
    06 May 2022
    न्यायालयों को किसी व्यक्ति के बिना विवाह के किसी के साथ रहने के मौलिक अधिकार को मान्यता देनी होगी। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License