NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
न्याय या भीड़ का न्याय ?
एक फेसबुक पोस्ट के बाद तूल पकड़ता मामला बहुत गंभीर और जटिल है. हमे गंभीरता से इसे परत-दर-परत समझना चाहिये
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Oct 2017
नारीवाद

23 अक्टूबर को राया सरकार नाम की एक महिला ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर तथाकथित यौन शोषण के आरोपियों की एक सूची जारी की. इस सूची में उन्होंने 61 प्रोफेसरों और शिक्षाविदों के नाम जारी किये हैं, जो विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं. राया सरकार का आरोप है कि ये सभी किसी न किसी तरह के यौन शोषण के मामले में संलिप्त हैं. उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में ये भी कहा कि इन सभी के खिलाफ उनके पास तथ्य हैं, जो उन्हें खुद पीड़िताओं ने दिए हैं. राया सरकार का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तुरंत ही वायरल हो गया और बहस का मुद्दा बन गया है. सरकार का कहना है कि इस सूची का मकसद इन लोगों की सच्चाई को सामने लाना है और जिससे आगे ऐसा ना हो.

Kafila.org में छपे एक स्टेटमेंट में कविता कृष्णन, निवेदिता मेनन , आयशा किद्वयी और महिला आनदोलन से जुड़ी कई महिलाओं ने कहा है कि इस पोस्ट को तुरंत हटाया जाना चाहिये, क्योंकि इस तरीके से महिला आन्दोलन का पूरा इतिहास ही अमान्य हो सकता है . साथ ही उनका ये भी कहना था कि यौन शोषण की सभी घटनाओं को समरूप मानकर एक ही श्रेणी में सूचीबद्ध करना एक ख़तरनाक प्रवर्ती है .

इस बयान के बाद ये बहस और तीखी हो गयी है. राया सरकार के पोस्ट के समर्थकों का मानना है कि जब यौन शोषण के खिलाफ प्रक्रिया इतनी ख़राब है तो पीड़िताओं के पास अपनी शिकायत इस तरह करने के बजाय और क्या चारा है. काफिला में नारीवादियों के बयान के बाद राया सरकार ने उनपर हमला बोल दिया है. राया ने कहा कि ये सवर्ण महिलायें अपने ब्राहमणवादी दोस्तों को बचाने की कोशिश कर रही है.कविता कृष्णन जो आल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमेन एसोसिएशन की नेता हैं ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि राया सरकार कोई कानूनी अधिकारी नहीं हैं जो यह तय करें कि कौन दोषी है और कौन नहीं. उन्होंने माना कि शिकायत करने के सिस्टम में बहुत खामियाँ हैं और ज्यादातर ये सिस्टम महिलाओं के खिलाफ ही खड़ा रहता है. पर उनका ये भी कहना था कि तथ्यों के बाहर आने से पहले ही किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए. कविता ने सारे नारीवादी आन्दोलन को ब्राहमणवादी कहे जाने पर भी चिंता जताई .

एक फेसबुक पोस्ट के बाद तूल पकड़ता मामला बहुत गंभीर और जटिल है. हमे गंभीरता से इसे परत-दर-परत समझना चाहिये. यौन शोषण समाज की एक भयानक समस्या है जिसकी जड़ें व्यवस्था के हर स्तर में पैठी हुई हैं. ये भी सच है कि ज़्यादातर ऑफिसों, कॉलेजों और बाक़ी संस्थानों में इसको मॉनिटर करने और महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने की जेंडर सेंसिटिव संस्थाएं नहीं है . यौन शोषण और बलात्कार के मामलों में किस तरह सार्वजनिक रूप से पीड़िता को ही दोषी ठहराया जाता है और एक सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार की धज्जियां उड़ाई जाती हैं , ये किसी से छुपा नहीं है. पर सवाल ये खड़ा होता है कि क्या तथ्यों के बाहर आये बिना दुनिया के सामने किसी को भी दोषी ठहराया जाना ठीक है ? क्या ठीक ढंग से जाँच किये बिना हम ये कह सकते हैं कि कोई दोषी है या नहीं ? क्या इस तरह नाम देने पर सवाल करने वालों को यौन शोषण का पक्षधर कहा जाना ठीक है? क्या ये कुछ कुछ भीड़ के न्याय की तरह नहीं है? ये बिलकुल संभव है कि सूची में शामिल लोग दोषी हों ,  पर सवाल ये है कि ये न्याय प्रक्रिया तय करेगी या ये सोशल मीडिया पर तय किया जायेगा ?      

राया सरकार
कविता कृष्णन
नारीवाद
भीड़ का न्याय

Related Stories


बाकी खबरें

  • अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में महत्वपूर्ण रमज़ान की नमाज़ को रोक दिया
    29 Apr 2022
    प्रशासन का कहना है कि प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जामिया में इबादत गुजारों के लिए व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद सामूहिक इबादत को रोकने का ये निर्णय लिया गया है।
  • लाल बहादुर सिंह
    किधर जाएगा भारत— फ़ासीवाद या लोकतंत्र : रोज़गार-संकट से जूझते युवाओं की भूमिका अहम
    29 Apr 2022
    गहराता रोज़गार संकट और कठिन होती जीवन-स्थितियां भारत में फ़ासीवाद के राज्यारोहण का सबसे पक्का नुस्खा है। लेकिन तमाम फ़ासीवाद-विरोधी ताकतें एकताबद्ध प्रतिरोध में उतर पड़ें तो यही संकट समाज को रैडिकल…
  • ज़ाहिद खान
    इरफ़ान ख़ान : अदाकारी की इब्तिदा और इंतिहा
    29 Apr 2022
    29 अप्रैल 2020 को हमसे जिस्मानी तौर पर जुदा हुए इरफ़ान ख़ान अपनी लासानी अदाकारी से अपने चाहने वालों के दिलो ज़ेहन में हमेशा ज़िंदा रहेंगे।
  • एजाज़ अशरफ़
    क्यों धार्मिक जुलूस विदेशी भूमि को फ़तह करने वाले सैनिकों जैसे लगते हैं
    29 Apr 2022
    इस तरह के जुलूस, मुसलमानों पर हिंदुओं का मनोवैज्ञानिक प्रभुत्व स्थापित करने और उन्हें अपने अधीन करने के मक़सद से निकाले जा रहे हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,377 नए मामले, 60 मरीज़ों की मौत
    29 Apr 2022
    दिल्ली में आज फिर कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई, दिल्ली में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,490 नए मामले दर्ज़ किए गए |
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License