NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
न्यूनतम वेतन मामला : मज़दूरों को सुप्रीम कोर्ट से ‘इंसाफ’ की उम्मीद
मज़दूरों को न्यूनतम वेतन देने के मामले में केजरीवाल सरकार के आदेश के खिलाफ मालिक वर्ग को दिल्ली हाईकोर्ट में तो जीत मिली, लेकिन मामला अब सुप्रीम कोर्ट में हैं, जिसपर मज़दूरों को बहुत उम्मीद है।
मुकुंद झा
24 Oct 2018
supreme court and mazdoor सांकेतिक तस्वीर

पिछले अगस्त की 4 तारीख को दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल सरकार द्वारा की गई मज़दूरों की 37% न्यूनतम वेतन बढ़ोतरी की अधिसूचना को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने मालिकों के पक्ष में फैसला देते हुए सभी श्रेणी के मज़दूरों की न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने वाले नोटिफिकेशन को संविधान के विरुद्ध बताया था जिसके बाद से ही मज़दूर संगठनों में इसको लेकर नाराजगी थी और दिल्ली सरकार व मज़दूर संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय किया  था। इसपर  कल मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने न्यूनतम वेतन के मामले में सुनवाई की। मालिकों के पक्षकार ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की जिस पर  कोर्ट  ने  अगली सुनवाई की तारीख 31 अक्टूबर तय कर दी है। इस मामले में  जज जल्दी सुनवाई के हक में दिखे। 

दिल्ली में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग मज़दूरों और मज़दूर संगठनों के लंबे संघर्ष के बाद मानी गई थी। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने तीन मार्च, 2017 को न्यूनतम वेतन वृद्धि की अधिसूचना जारी की थी। लेकिन ये बात कारोबारी और मालिक वर्ग को पसंद नहीं आई। इसके खिलाफ व्यापारी, पेट्रोल पंप मालिक और रेस्टोरेंट मालिक आदि दिल्ली हाईकोर्ट चले गए और उन्होंने इस अधिसूचना को ख़ारिज करने की माँग कीI व्यापारियों का कहना था कि सरकार की समिति ने उनका पक्ष जाने बिना ही फैसला ले लिया। समिति में PWD और DMRC के प्रतिनिधियों को रखने पर भी सवाल किए गए। 

मालिकों का यह कहना कि यह निर्णय एकतरफा है, इस पर मज़दूर संगठन सीटू (CITU) का कहना है कि मालिकों के 5 प्रतिनिधि न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति के सदस्य थे। उनको बात कहने का पूरा अवसर दिया गया था। DMRC व PWD दिल्ली में बड़े एम्पलायर हैं। जिसके तहत स्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ आउटसोर्सिंग के तहत हजारों की संख्या में अन्य कर्मचारी भी काम करते हैं, तो उच्च न्यायालय का यह कहा जाना कि इनके प्रतिनिधियों को रखा जाना गलत था, ये शिडियूल एम्पलाइमेंट में नही आते हैं, बिल्कुल निराधार है।

एक लंबी सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला दिया और तकनीकी आधार पर अधिसूचना को गलत मानते हुए रदद् कर दिया। दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि 'यह जल्दबाज़ी में लिया फैसला था और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन के कारण दुर्भाग्यवश इस संशोधन को रोकना पड़ा क्योंकि इससे संविधान का उल्लंघन हो रहा था।’ हालांकि दिल्ली सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम मज़दूरी भी खुद सरकार के वेतन आयोग द्वारा एक परिवार के गुजारे के लिए तय की गई आवश्यक न्यूनतम रकम के मुक़ाबले बहुत कम थी। 

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय के लिए जो एक अन्य आधार दिया था कि 'दिल्ली में न्यूनतम वेतन की दर को इसलिए नहीं बढ़ाया जा सकता क्योंकि दिल्ली में वेतन दर पड़ोसी राज्यों से ज़्यादा है।

एक फैक्ट्री मज़दूर ने कहा कि “ये कितनी हास्यास्पद बात है कि पड़ोसी राज्यों में मज़दूरी कम है तो दिल्ली में भी कम होनी चाहिए? इसके बजाय पड़ोसी राज्यों को भी मज़दूरी बढ़ाने के लिए क्यों न कहा जाना चाहिए? और किसी मामले में ऐसा तर्क सुना है? इस आधार पर तो आजकल दिल्ली में पेट्रोल–डीजल के दाम यूपी और हरियाणा से ज्यादा हैं उसे भी कम क्यों नही करा रही है?” मज़दूरों का यह भी कहना है कि दिल्ली में खाना-रहना भी तो दूसरों राज्यों से महंगा है।

दिल्ली का एक कटु सत्य यह भी है कि जो न्यूनतम वेतन मिल रहा है वो खुद में बहुत कम है परन्तु यह भी सत्य है की अभी जो न्यूनतम वेतन लागू है अधिकतर मज़दूरों को वो भी नहीं मिलता  है। आज भी मज़दूरों को 6,000 या 7,000 रुपये ही मजदूरी के रूप में मिलते हैं और इसी पर वह अपना जीवनयापन करने को मजबूर हैं।

इन सब आधार को लेकर दिल्ली सरकार ने इस मामले को आगे लड़ने का फैसला किया और 12 सितंबर को ये मामला सुप्रीम कोर्ट ले गई। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 23 अक्टूबर को इस मामले में सुनावाई करते हुए अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की है। मज़दूर संगठन सीटू भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अपनी तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रहा है। इस सबको लेकर दिल्ली के मज़दूरों को अब नये सिरे से इंसाफ की उम्मीद बंधी है। वे चाहते हैं कि इस पर निर्णय जल्द हो और उन्हें अपने जीवनस्तर में सुधार का अवसर मिले।

minimum wage
Supreme Court
Delhi High court
delhi govt
Arvind Kejriwal
labor
CITU

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?


बाकी खबरें

  • भाषा
    महाराष्ट्र : एएसआई ने औरंगज़ेब के मक़बरे को पांच दिन के लिए बंद किया
    19 May 2022
    महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रवक्ता गजानन काले ने मंगलवार को कहा था कि औरंगजेब के मकबरे की कोई जरूरत नहीं है और उसे ज़मींदोज़ कर दिया जाना चाहिए, ताकि लोग वहां न जाएं। इसके बाद, औरंगाबाद के…
  • मो. इमरान खान
    बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’
    19 May 2022
    रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदुत्ववादी भीड़ की हरकतों से पता चलता है कि उन्होंने मुसलमानों को निस्सहाय महसूस कराने, उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और उन्हें हिंसक होकर बदला लेने के लिए उकसाने की…
  • वी. श्रीधर
    भारत का गेहूं संकट
    19 May 2022
    गेहूं निर्यात पर मोदी सरकार के ढुलमुल रवैये से सरकार के भीतर संवादहीनता का पता चलता है। किसानों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने की ज़िद के कारण गेहूं की सार्वजनिक ख़रीद विफल हो गई है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन
    19 May 2022
    संयुक्त अरब अमीरात में प्रोटोकॉल की ज़रूरत से परे जाकर हैरिस के प्रतिनिधिमंडल में ऑस्टिन और बर्न्स की मौजूदगी पर मास्को की नज़र होगी। ये लोग रूस को "नापसंद" किये जाने और विश्व मंच पर इसे कमज़ोर किये…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 30 फ़ीसदी की बढ़ोतरी 
    19 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटो में कोरोना के 2,364 नए मामले सामने आए हैं, और कुल संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 31 लाख 29 हज़ार 563 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License