NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
प्रधानमंत्री की वेटिकन यात्रा से पहले आई ईसाई समुदाय के खिलाफ़ हिंसा की ख़बर
क्या पोप और पीएम मोदी की मुलाकात के बाद भारतीय ईसाईयों के प्रति हिंसा और नफरत में कमी आएगी, जिसका सामना वे लंबे समय, खासकर 2014 के बाद से करते रहे हैं?
जॉन दयाल
30 Oct 2021
Modi

अब यह आधिकारिक हो चुका है। केरल कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ने पुष्टि की है कि पोप फ्रांसिस, जिन्हें दुनिया "होली फादर (पवित्र पिता)" के नाम से जानती है, वे इस शनिवार, 30 अक्टूबर को वेटिकन सिटी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर रहे हैं। रोम में एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने पहुंच रहे पीएम मोदी कि तरफ से एक शिष्टाचार अपील के बाद यह मुलाकात तय हुई है। कथित तौर पर 30 मिनट चलने वाली यह बैठक 8:30 PM पर चालू होगी।

अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडेन के साथ पोप की बैठक, महिलाओं को गर्भपात के अधिकार के मुद्दे के चलते दुनिया की नजरों में रही थी। भारत में कई राज्यों में ईसाई समुदाय के उत्पीड़न के चलते पीएम मोदी और पोप की मुलाकात पर भी दुनिया की नजर रहेगी। हाल में अपनी उम्र के नौवें दशक में चल रहे ईसाई फादर स्टेन स्वामी की कस्टडी में हुई मौत लोगों की याद से धुंधली नहीं हुई है। मोदी सरकार ने ही देश और दुनिया में भारत के मूल निवासियों (आदिवासियों) के अधिकार और सम्मान के लिए काम करने वाले वाले शख़्स के तौर पर पहचान रखने वाले स्टेन स्वामी को जेल में डाला था।

वेटिकन बहुत अच्छे तरीके से भारत में मानवाधिकार और धार्मिक स्थितियों से वाक़िफ है। यहां तक कि वेटिकन द्वारा प्रधानमंत्री की गुहार पर सहमति जताने से पहले ही, यूनिवर्सल कैथोलिक चर्च के मुख्यालय में स्थित सूचना पोर्टल पर कर्नाटक में चर्चों के सर्वे पर लंबी रिपोर्ट छप चुकी है। बंगलुरू के आर्कबिशप पीटर मचाडो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सर्वे की निंदा की थी, उनका कहना था कि इससे हिंसक उग्रपंथियों के हाथों उत्पीड़न को हवा मिलेगी।

चर्च ने खुद प्रधानमंत्री मोदी से उनकी शक्तियों का इस्तेमाल समुदायों, शैक्षणिक संस्थानों और चर्चों पर इन अतिवादी तत्वों की तरफ से हो रहे हमलों को रोकने के लिए करने की अपील की है। हाल में पीएम मोदी को एक ऐसा ही पत्र भोपाल के आर्कबिशप लियो कार्नेलियो ने लिखा था, जिन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री को ईसाईयों के खिलाफ़ बढ़ रही हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।"

इस बैठक के बाद भी किसी को भी भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के अचानक रुकने की उम्मीद नहीं है। भारत सरकार, मानवाधिकारों के मुद्दे पर अपनी अंतरराष्ट्रीय आलोचना को स्वीकार ही नहीं करती। वह अपने बचाव में लगातार कहती रही है कि भारत के पास एक सेकुलर संविधान है, देश में कोर्ट, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग जैसी संस्थाएं हैं, जो नागरिक अधिकारों की गारंटी देती हैं। भारत सरकार तो संयुक्त राष्ट्र की तरफ से आई उस आलोचना को भी नकार देती है, जिसमें कहा गया कि मोदी के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थानों को बहुत नुकसान पहुंचा है।

भारत में 1.3 अरब लोगों की आबादी में ईसाई आबादी करीब़ 2.3 फ़ीसदी है। यह आबादी गोवा, केरल और तीन छोटे पूर्वोत्तर राज्यों- नागालैंड, मिजोरम और मेघालस में राजनीतिक तौर पर प्रभावी है। इन राज्यों में बाकी की आबादी मुख्यत: हिंदू है। सिर्फ़ केरल में ही मुस्लिम अल्पसंख्यक भी एक प्रभावी तत्व हैं।

इस मुलाकात के बारे में ऐसे अनुमान भी लगाए गए हैं कि आने वाले गोवा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी कैथोलिक मतदाताओं को अपनी तरफ करना चाहते हैं, जिनकी राज्य में आबादी करीब एक चौथाई है। राज्य में बीजेपी कई सालों से सत्ता में है, लेकिन कांग्रेस, आप और तृणमूल कांग्रेस के इस बार लड़ाई में सामने होने के चलते, बीजेपी को उम्मीद है कि अगर कैथोलिक मतदाताओं को एक भी हिस्सा उसके खाते में आ गया, तो उसे सत्ता हासिल हो सकती है।

अंदरूनी लोग कहते हैं कि भारत सरकार ने वेटिकन में मुलाकात के लिए बहुत जोर लगाया था। केरल के बिशप ने इसमें अहम भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद सात सालों से प्रधानमंत्री मोदी कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ़ इंडिया (CBCI) की उन अपीलों को अनसुना कर रहे हैं, जिनमें वे पोप को भारत आने का न्योता देना चाहते थे। पोप भारत के पास श्रीलंका तक आ चुके हैं, वे भारत के ईसाई समुदाय से मिलने को आतुर भी बताए जाते हैं।

मोदी के नज़रिए से देखें, तो उनके लिए यह बेहद अजीब होगा कि वे तीन दिन तक रोम में रहें और वेटिकन में एक शिष्टाचार यात्रा तक ना करें, जो वास्तव में रोम की एक डिस्ट्रिक्ट से भी बड़ा नहीं है, हालांकि यह एक संप्रभु राज्य है, जिसके प्रधान पोप फ्रांसिस हैं। बीजेपी के कुछ मलयाली नेता, जिनमें एक राज्य के गवर्नर भी हैं, वे पीएम मोदी के कार्यालय और केरल चर्च के बीच मध्यस्थ हैं।

मोदी को अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की बात पर ध्यान देना चाहिए, जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से संयुक्त राष्ट्र की यात्रा के दौरान लोकतंत्र और मानवाधिकार की बात को उठाया था। पोप इतने प्रत्यक्ष नहीं हो सकते, लेकिन मानवाधिकार और अभिव्यक्ति व विश्वास के मामलों में उनकी धारणा जगजाहिर है। वे एक ईसाई हैं और उनका समुदाय विकास, अधिकार और न्याय के बारे में जुनूनी है। फादर स्टेन स्वामी, जिन्हें इस सत्ता ने गलत तरीके से जेल में डाल रखा था, वे भी एक ईसाई थे।

कई अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों में मानवाधिकारों को लेकर भारत का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, खासकर मुस्लिम और ईसाईयों के उत्पीड़न के संबंध में। भारतीय ईसाई समुदाय को यह उम्मीद नहीं है कि इस मुलाकात के बाद जमीनी स्तर पर या संघ के रवैये में कुछ बदलाव आ जाएगा। समुदाय को उम्मीद है कि न्यायिक प्रक्रिया सभी अल्पसंख्यकों के साथ-साथ दलित और आदिवासियों के अधिकारों का संरक्षण करेगी, जिनके लिए चर्च काम करते हैं।

सितंबर और अक्टूबर में ईसाई समुदाय पर सबसे क्रूर हमले किए गए, जबकि मुस्लिम समुदाय पर जारी वृहद स्तर के हमले जारी ही रहे।

भोपाल के आर्कबिशप ने दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी को 26 अक्टूबर को पत्र लिखा था। यह पत्र हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा प्रधानमंत्री की वेटिकन यात्रा की घोषणा के कई दिन बाद लिखा गया था। पत्र में लिखा गया, "हाल में कई लोगों और समूहों ने अल्पसंख्यक समूहों, खासकर ईसाईयों के खिलाफ़ नफरत तेज कर दी है।"

उन्होंने 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में दो कैथोलिक ननों के उत्पीड़न का उदाहरण दिया। जहां एक हिंदुत्ववादी भीड़ ने उर्सुलीन फ्रांसिशियन सिस्टर ग्रेसी मोटिएरो और रोशी मिंज को मऊ बस स्टेंड से नजदीकी पुलिस थाने पहुंचा दिया और उनके ऊपर अवैध धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगाया। उन्हें 6 घंटों तक बिना वारंट के पुलिस थाने में रखा गया। (सबरंग इंडिया ने ननों के बारे में उनके साथ इंटरव्यू में बात की थी।)

अपने खत में आर्कबिशप कार्नेलियो ने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के नफ़रती भाषण का भी जिक्र किया, जिन्होंने हिंदुओं को रिझाने के लिए एक भाषण में ईसाईयों और मुस्लिमों से दूर रहने को कहा था। शर्मा ने जोर देकर कहा कि इन समुदायों के साथ संपर्क हिंदुओं को बर्बाद कर देंगे। चुने हुए प्रतिनिधियों से इस तरीके की सार्वजनिक भाषणबाजी "अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ़ जानबूझकर सांप्रदायिक नफरत को हवा देने वाली होती है, जिसके बारे में सबको चिंता करने की जरूरत है।"

उन्होंने आगे कहा, "धार्मिक तौर पर बढ़ती कट्टरता और नफरत एक राष्ट्र के विकास के लिए खतरा होती है।"

कई ईसाई संगठन, जिनमें UFI, यूनाईटेड क्रिश्चियन फोरम और प्रोसेक्यूशन रिलीफ शामिल हैं, उन्होंनें 21 राज्यों में इस साल की शुरुआत से ईसाई समुदाय के खिलाफ़ हुए 305 हमलों की सूची बनाई है। इसमें बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है, जहां 66 घटनाएं हुईं। इसके बाद कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ है, जहां 47 घटनाएं हुईं। झारखंड में 30, बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में 26 घटनाएं हुईं। बीजेपी शासित एक और राज्य कर्नाटक में भी ईसाईयों के खिलाफ़ हमलों में वृद्धि आई है, जहां ऐसी 32 घटनाएं दर्ज की गईं।

क्या 30 अक्टूबर को पोप और प्रधानमंत्री की बैठक से हिंसा और नफरत में कुछ कमी आएगी, जिसका सामना भारतीय ईसाई करते रहे हैं, जिसमें 2014 के बाद से खासतौर पर इजाफा हो गया है।

साभार: सबरंग इंडिया

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

News of Anti-Christian Violence Precedes Modi in Vatican call

Anti-Christian violence
Narendra modi
Kerala Catholic Bishops Conference
national human rights commission
Christian community
united nation

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • covid
    भाषा
    ओमीक्रॉन को रोकने के लिए जन स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक उपाय तत्काल बढ़ाने की ज़रूरत : डब्ल्यूएचओ
    18 Dec 2021
    डब्ल्यूएचओ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें आगामी हफ्तों में और सूचना मिलने की संभावना है। ओमीक्रॉन को हल्का मानकर नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।’’
  • suicide
    भाषा
    प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियों में लगे श्रमिक ने की आत्महत्या
    18 Dec 2021
    पुलिस ने बताया कि फूलपुर थाना क्षेत्र के पिंडरा करखियांव में प्रधानमंत्री की रैली की तैयारी में लगे 36 वर्षीय विक्रम ने शुक्रवार रात ‘‘फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।’’
  • rumy
    अयसकांत दास , परंजॉय गुहा ठाकुरता
    रमी ऑनलाइन पर रार 
    18 Dec 2021
    वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक सिंघवी ऑनलाइन कार्ड गेम की वैधता को लेकर विवाद में उलझ गये हैं, यहां तक कि भारत सरकार इंटरनेट पर खेले जा रहे इस "जुआ" पर अपनी नीति को लेकर अपनी ज़िम्मेदारी से…
  • uttar pradesh
    लाल बहादुर सिंह
    उत्तर प्रदेश बदलाव के मुहाने पर : ध्रुवीकरण का ब्रह्मास्त्र भी बेअसर
    18 Dec 2021
    मोदी से अधिक शिद्दत से शायद ही किसी को एहसास हो कि UP हारने के बाद उनके लिए दिल्ली बहुत दूर हो जाएगी। इसीलिए जैसे वह गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ते थे, उसी अंदाज में de facto मुख्यमंत्री की तरह…
  • Minority Rights Day
    डॉ. राजू पाण्डेय
    अल्पसंख्यक अधिकार दिवस विशेष : मुस्लिम अधिकारों पर संकट
    18 Dec 2021
    विकास के हर पैमाने पर पिछड़े मुस्लिम समुदाय के लिए 2014 के बाद का समय बहुत कठिन रहा है। मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसा और नफ़रत का प्रसार भाजापा के राजकाज का केंद्र बिंदू है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License