NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
श्रम कानून के उल्लंघन की रिपोर्ट के साथ एक्टू ने जारी किया मज़दूरों का घोषणापत्र
एक्टू की प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे श्रम कानूनों के उल्लंघन पर विस्तार से चर्चा की गयी तथा मजदूरों का मांग-पत्र जारी किया गया। कहा गया कि 'अच्छे दिन' का वादा करके मोदी सरकार ने इस देश की मेहनतकश जनता को सिर्फ नोटबन्दी, महंगाई और बेरोजगारी की मार दी है।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Apr 2019
WORKERS CHATER

लोकसभा 2019  चुनावों से पहले दिल्ली में ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU) ने  श्रमिकों की मांगों के 13 बिंदु चार्टर के साथ दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम कानूनों के उल्लंघन पर एक रिपोर्ट जारी की। 

मंगलवार को दिल्ली के इंडियन वीमेन प्रेस कॉप्र्स में हुई एक्टू की प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे श्रम कानूनों के उल्लंघन पर विस्तार से चर्चा की गयी तथा मजदूरों का मांग-पत्र जारी किया गया। कहा गया कि 'अच्छे दिन' का वादा करके मोदी सरकार ने इस देश की मेहनतकश जनता को सिर्फ नोटबन्दी, महंगाई और बेरोजगारी की मार दी  है। 

इस मौके पर एक्टू दिल्ली के राज्य सचिव अभिषेक ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मज़दूरों से वादाखिलाफी की है। उनकी मज़दूर और गरीब विरोधी नीति कारण दिल्ली के मज़दूरों की हालत बद से बदतर हो गई है। मोदी सरकार ने मज़दूरों को  'अच्छे दिन' का वादा किया था लेकिन पिछले पाँच साल में  श्रम अधिकारों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन और श्रमिकों के अधिकारों में कटौती से  उनकी जिंदिगी और खराब हो गई है। नोटबन्दी और जीएसटी के झटके ने मज़दूरों और समाज के सबसे अधिक हाशिये वाले अन्य तबकों पर कहर ढाया  है। इधर दिल्ली में, निर्वाचित सरकार के पास श्रमिकों की दुर्दशा को ठीक करने के लिए कोई वास्तविक शक्तियां नहीं हैं। 

 अभिषेक ने दावा किया कि यही सब वजह हैं कि मज़दूरों ने  केंद्र में फासीवादी सरकार के खिलाफ वोट करने का संकल्प लिया है। ऐसे समय में जब कुछ मालिकों  के लाभ के लिए दर्जनों श्रमिकों को राष्ट्रीय राजधानी के कारखानों में जिंदा जला दिया जाता है, इस चार्टर को जारी करने ऐसे मज़दूरों को एकजुट होकर आवाज़ उठाना  जरूरी है। 

एक्टू दिल्ली के अध्यक्ष संतोष रॉय ने कहा, "देश ने पिछले पांच वर्षों में भयंकर अंधेरे का युग देखा है- अपने खान-पान तक के लिए लोग सड़कों पर दिन के उजाले में मारे गए हैं। सुरक्षा के लिए पूरी सरकारी मशीनरी तैनात है लेकिन दंगाइयों और नफरत फैलाने वालों के साथ। अंबानी और अडानी और अधिक अमीर हो रहे हैं, जबकि जनता बेरोजगारी और गरीबी के कारण पीड़ित है। क्रॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि "देश की मेहनतकश जनता को धर्म के नाम पर लड़ाने वाली भाजपा सरकार को देश का मज़दूर उखाड़ फेंकेगा."

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को एक्टू की दिल्ली सचिव श्वेता राज और अधिवक्ता सूर्य प्रकाश ने भी संबोधित किया। इस मौके पर विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के ट्रेड यूनियन नेता भी मौजूद थे।

 

इस मौके पर एक मज़दूर चार्टर जारी किया गया। जिसमें रखी गई मांगें इस प्रकार हैं: -

 

1. नफरत-हिंसा की राजनीति पर तुरंत रोक लगाओ, दंगाइयों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करो।

2. सभी के लिए सम्मानजनक रोज़गार की गारंटी करो। ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाओ।

3. महंगाई पर रोक लगाओ, सभी मज़दूरों के लिए आवास, जन परिवहन, स्वास्थ्य व शिक्षा की व्यवस्था करो। मेट्रो भाड़ा बढ़ोतरी वापस लो, पेट्रोल-डीजल, एल पी जी, के बढ़ते दाम पर रोक लगाओ।

4. श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी परिवर्तन वापस लो।

5. दिल्ली के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में तय न्यूनतम वेतन लागू करो। न्यूनतम वेतन 26, 000 प्रति माह करो।

6. सभी कारखानों का सर्वेक्षण करो, व सभी श्रम-कानून उल्लंघनों को संज्ञान में लो।

7. 45 दिनों के अंदर ट्रेड यूनियन पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरा करो। ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमला बन्द करो।

8. मजदूरों की स्थिति में सुधार के लिए श्रम अधिकारियों तथा श्रम मंत्रियों के साथ ट्रेड यूनियनों की नियमित बैठक बुलाई जाय।

9. श्रम-विभागों की स्थिति में सुधार लाया जाए, उन्हें और मजबूत किया जाए। श्रम-इंस्पेक्टर की तुरन्त बहाली हो और श्रम कानूनों के उल्लंघन पर रोक लगाई जाए।

10. मजबूर के लिए सुलभ तथा भ्रष्टाचार मुक्त श्रम विभाग हो।

11. श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन हो तथा उसका उल्लंघन करने पर कड़ी सज़ा दी जाए।

12. महिला मजदूरों के लिए सम्मानजनक रोजगार की गारंटी की जाए। महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पूर्ण व्यवहार तथा यौन-हिंसा की घटनाओं पर रोक लगाई जाए तथा सभी कार्य-क्षेत्रों में विशाखा जजमेंट का कड़ाई से पालन हो।

13. प्रवासी मजदूरों के साथ होने वाले भेदभाव पूर्ण व्यवहार पर रोक लगायी जाए तथा प्रवासी मजदूरों के पक्ष में बने कानूनों को कड़ाई से लागू किया जाए।

 

 

AICCTU
Delhi
workers charter
BJP
minimum wage
loksabha elcetion 2019

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!


बाकी खबरें

  • Yeti Narasimhanand
    न्यूज़क्लिक टीम
    यति नरसिंहानंद : सुप्रीम कोर्ट और संविधान को गाली देने वाला 'महंत'
    23 Apr 2022
    यति नरसिंहानंद और अ(संतों) का गैंग हिंदुत्व नेता यति नरसिंहानंद गिरी ने दूसरी बार अपने ज़मानत आदेश का उल्लंघन करते हुए ऊना धर्म संसद में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रती बयान दिए हैं। क्या है यति नरसिंहानंद…
  • विजय विनीत
    BHU : बनारस का शिवकुमार अब नहीं लौट पाएगा, लंका पुलिस ने कबूला कि वह तलाब में डूबकर मर गया
    22 Apr 2022
    आरोप है कि उनके बेटे की मौत तालाब में डूबने से नहीं, बल्कि थाने में बेरहमी से की गई मारपीट और शोषण से हुई थी। हत्या के बाद लंका थाना पुलिस शव ठिकाने लगा दिया। कहानी गढ़ दी कि वह थाने से भाग गया और…
  • कारलिन वान हाउवेलिंगन
    कांच की खिड़कियों से हर साल मरते हैं अरबों पक्षी, वैज्ञानिक इस समस्या से निजात पाने के लिए कर रहे हैं काम
    22 Apr 2022
    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाले लोग, सरकारों और इमारतों के मालिकों को इमारतों में उन बदलावों को करने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके ज़रिए पक्षियों को इन इमारतों में टकराने से…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    छत्तीसगढ़ :दो सूत्रीय मांगों को लेकर 17 दिनों से हड़ताल पर मनरेगा कर्मी
    22 Apr 2022
    मनरेगा महासंघ के बैनर तले वे 4 अप्रैल से हड़ताल कर रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ के 15 हज़ार कर्मचारी हड़ताल पर हैं फिर भी सरकार कोई सुध नहीं ले रही है।
  • ईशिता मुखोपाध्याय
    भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 
    22 Apr 2022
    राज्य के पास छात्रों और युवाओं के लिए शिक्षा और नौकरियों के संबंध में देने के लिए कुछ भी नहीं हैं। ऊपर से, अगर छात्र इसका विरोध करने के लिए लामबंद होते हैं, तो उन्हें आक्रामक राजनीतिक बदले की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License