NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
ओला उबर सेवाओं का इस्तेमाल आर्थिक मंदी की वजह नहीं - मारुती सुजुकी
कंपनी मारुति सुजुकी के मार्केटिंग और सेल्स डिपार्टमेंट के कार्यकारी निदेशक शशांक श्रीवास्तव ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि युवा आबादी में ओला, उबर सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ना आर्थिक मंदी का कोई ठोस कारण नहीं है बल्कि इसके विपरीत इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए एक विस्तृत अध्ययन किये जाने की जरूरत है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Sep 2019
automobile sector
Image courtesy: Sakshi

ऑटोमोबाइल सेक्टर की रफ्तार थम सी गई है। मांग कम होने के कारण कंपनियों ने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। अगस्त में लगातार दसवें महीने गाड़ियों की बिक्री नीचे गिरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 सितंबर, मंगलवार को इस संबंध में एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर बीएस6 और लोगों की सोच में आए परिवर्तन का असर पड़ रहा है,लोग अब गाड़ी खरीदने की बजाय ओला और उबर को तरजीह दे रहे हैं।

कंपनी मारुति सुजुकी के मार्केटिंग और सेल्स डिपार्टमेंट के कार्यकारी निदेशक शशांक श्रीवास्तव ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि युवा आबादी में ओला, उबर सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ना आर्थिक मंदी का कोई ठोस कारण नहीं है बल्कि इसके विपरीत इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए एक विस्तृत अध्ययन किये जाने की जरूरत है। भारत में कार खरीदने को लेकर धारणा में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया है और लोग अपनी इच्छा के तहत कार खरीदते हैं।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘मौजूदा मंदी के पीछे ओला और उबर जैसी सेवाओं का होना कोई बड़ा कारण नहीं है।  मुझे लगता है कि इस तरह के निष्कर्षो पर पहुंचने से पहले हमें और गौर करना होगा और अध्ययन करना होगा। ओला और उबर जैसी सेवायें पिछले 6-7 वर्षो में सामने आई हैं। इसी अवधि में आटो उद्योग ने कुछ बेहतरीन अनुभव भी हासिल किये हैं।  इसलिए केवल पिछले कुछेक महीनों में ऐसा क्या हुआ कि मंदी गंभीर होती चली गई? मुझे नहीं लगता कि ऐसा केवल ओला और उबर की वजह से हुआ है।

आपको बात दें कि  पिछले महीने बीते 21 साल में सबसे कम कारों की बिक्री हुई। वाहन निर्माताओं के संगठन सियाम (SIAM) के मुताबिक, घरेलू बाज़ार में इस महीने कारों की बिक्री में 41 फीसदी से ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई। सियाम के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में यात्री वाहनों की बिक्री एक साल पहले इसी माह की तुलना में 31.57 प्रतिशत घटकर 1,96,524 वाहन रह गई। एक साल पहले अगस्त में 2,87,198 वाहनों की बिक्री हुई थी।

भारतीय ऑटोमोबाइल विनिर्माता सोसायटी ने 9 सितंबर, सोमवार को आंकड़ें जारी किए। इसके अनुसार अगस्त 2019 में घरेलू बाजार में कारों की बिक्री 41.09 प्रतिशत घटकर 1,15,957 कार रह गई जबकि एक साल पहले अगस्त में 1,96,847 कारें बिकी थी।इस दौरान दुपहिया वाहनों की बिक्री 22.24 प्रतिशत घटकर 15,14,196 इकाई रह गई जबकि एक साल पहले इसी माह में देश में 19,47,304 दुपहिया वाहनों की बिक्री की गई। इसमें मोटरसाइकिलों की बिक्री 22.33 प्रतिशत घटकर 9,37,486 मोटरसाइकिल रह गई जबकि एक साल पहले इसी माह में 12,07,005 मोटरसाइकिलें बिकी थीं।

सियाम के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त माह में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 38.71 प्रतिशत घटकर 51,897 वाहन रही। कुल मिलाकर यदि सभी तरह के वाहनों की बात की जाये तो अगस्त 2019 में कुल वाहन बिक्री 23.55 प्रतिशत घटकर 18,21,490 वाहन रह गई जबकि एक साल पहले इसी माह में कुल 23,82,436 वाहनों की बिक्री हुई थी। ऑटो सेक्टर में मंदी साफ़ दिख रही है।  लेकिन इसके बावजूद भी सरकार इसे नकार रही है। और ऐसे तर्क दे रही है , जिससे भ्रम पैदा हो।  

economic crises
Indian Automobile Industry
Crisis in Automobile Industry
maruti suzuki

Related Stories

श्रीलंका का संकट सभी दक्षिण एशियाई देशों के लिए चेतावनी

रोहतक : मारुति सुज़ुकी के केंद्र में लगी आग, दो कर्मियों की मौत

रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध का भारत के आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

रोजगार, स्वास्थ्य, जीवन स्तर, राष्ट्रीय आय और आर्थिक विकास का सह-संबंध

भारत की महामारी के बाद की आर्थिक रिकवरी अस्थिर है

मोदी सरकार की राजकोषीय मूढ़ता, वैश्वीकृत वित्तीय पूंजी की मांगों से मेल खाती है

बढ़ती थोक महंगाई दर और बदहाल होती भारत की अर्थव्यवस्था 

मोदी सरकार जब मनरेगा में काम दिलवाने में नाकाम है, तो रोज़गार कैसे देगी?

नोटबन्दी के 5 साल: देश का हुआ बुरा हाल

आंदोलन: 27 सितंबर का भारत-बंद ऐतिहासिक होगा, राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस ने दिखाई झलक


बाकी खबरें

  • Lebanon
    पीपुल्स डिस्पैच
    लेबनान में ड्राइवरों और परिवहन कर्मचारियों को लेकर सरकारी उदासीनता के ख़िलाफ़ हड़ताल
    15 Jan 2022
    हड़ताली श्रमिकों ने कई प्रमुख राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया और सरकार से बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र ईंधन और दूसरी वस्तुओं पर दी जा रही पिछली सब्सिडी को बहाल करने की मांग की।
  • Akhilesh
    रवि शंकर दुबे
    स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कई विधायक सपा में शामिल, अखिलेश बोले ‘’हिट विकेट हो गए बाबा’’
    14 Jan 2022
    यूपी चुनाव से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी बिसात बिछा रही हैं, ऐसे में अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कई विधायकों को पार्टी में शामिल कराकर बीजेपी करारा झटका दिया है।  
  • nato
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमेरिका-नेटो के निशाने पर रूस, उक्रैन पर खलबली
    14 Jan 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने अमेरिका व रूस और नेटो पर रूस के शीर्ष नेताओं की बैठक, उक्रैन को लेकर चल रहे विवाद पर न्यूज़ क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की।…
  • Privatization
    न्यूज़क्लिक टीम
    बैंक निजीकरण का खेल
    14 Jan 2022
    बैंकों के निजीकरण के लिए तर्क दिया जाता है कि सरकारी बैंक ठीक तरह से काम नहीं कर रहे और वे नुकसान झेल रहे हैं हैं। आखिर क्यों सरकारी बैंक घाटे में चलते हैं? क्या है इसका कारण ? जानते हैं ऑनिंद्यो से
  • YATI NARSINGHANAND
    रवि शंकर दुबे
    यति नरसिंहानंद से क्यों डर रही है सरकार? आज भी खुलेआम दे रहा चुनौती
    14 Jan 2022
    डासना मंदिर का महंत यति नरसिंहानंद हरिद्वार संसद के बाद से अभी तक आज़ाद घूम रहा है और लगातार दूसरे धर्मों पर कीचड़ उछाल रहा है, ऐसे में सवाल है कि अभी तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, आखिर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License