NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
मानवाधिकार दिवस पर ब्रिटेन के कोर्ट ने जूलियन असांज के अमेरिका प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दी
ब्रिटिश हाई कोर्ट के फ़ैसले ने, इस साल जनवरी में डिस्ट्रिक्ट जज के उस फ़ैसले को पलट दिया, जिसमें असांज के प्रत्यर्पण को "दमनकारी" बताया गया था। नागरिक अधिकारों के पैरोकारों और असांज के समर्थक व परिवार वालों ने हाई कोर्ट के फ़ैसले की निंदा की है।
पीपल्स डिस्पैच
11 Dec 2021
Julian Assange
फ़ोटो- Wikileaks/Twitter

मानवाधिकार दिवस पर ब्रिटेन के एक कोर्ट ने विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज के अमेरिका को प्रत्यर्पण का रास्ता साफ कर दिया है। अमेरिका में असांज को जासूसी के आरोपों का सामना करना पड़ेगा। शुक्रवार, 10 दिसंबर को लंदन में हाई कोर्ट ने वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में जज वेनेसा बैरेस्टर के फ़ैसले को पलट दिया। जज वेनेसा ने असांज को प्रत्यर्पित करने की अमेरिकी अपील को खारिज कर दिया था।

हाई कोर्ट का फ़ैसला अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील की याचिका पर आया है, जो उन्होंने बरैटसेर के फ़ैसले के खिलाफ़ लगाई थी। फ़ैसला सुनाते हुए लॉर्ड जस्टिस टिमोथी होलरॉयड ने कहा कि फ़ैसला असांज की मानसिक हालात को मद्देनज़र रखते हुए, यहां तक सीमित था कि "क्या डिस्ट्रिक्ट जज यह खोजने में गलत थीं कि उनका प्रत्यर्पण दमनकारी साबित होगा।"

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जज बरैटसेर को अपना तात्कालिक विचार अमेरिका को बताना था और उन्हें वहां जेल की स्थितियों के बारे में अपनी सफ़ाई पेश करने के लिए वक़्त देना था। इस सफाई में असांज की हिरासत की स्थितियों का जिक्र भी किया जाता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वो अमेरिका द्वारा किए गए वायदे कि असांज को स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव मीजर्स (एसएएम) में नहीं रखेगा, इस वायदे पर विश्वास करता है। बता दें यह व्यवस्था एक विवादास्पद गिरफ़्तारी का तरीका है, जहां व्यक्ति को अकेला रखा जाता है।

बरैटसेर द्वारा जनवरी में दिया गया फ़ैसला इसी चिंता पर आधारित था कि असांज को अमेरिका में एसएएम जैसी सुविधाओं में रखा जाएगा। बरैटसेर ने कहा कि इन चिंताओं को देखते हुए असांज का प्रत्यर्पण एक दमनकारी कार्य होगा, असांज की टीम ने जो चिकित्सकीय सबूत रखे थे, उनमें भी बताया गया था कि अगर प्रत्यर्पण होता है, तो असांज द्वारा खुदकुशी किए जाने का जोखि़म है, वह पहले ही बहुत सारी मानसिक समस्याओं से गुजर रहे हैं।

संभावना है कि असांज की टीम हाई कोर्ट के फ़ैसले को ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी, यह मामला ब्रिटेन के गृह सचिव के पास जाएगा, जो पहले भी अमेरिकी की प्रत्यर्पण की मांग को 2019 में खारिज कर चुके हैं।

फिलहाल असांज को बेलमार्स की उच्च सुरक्षा वाली जेल में रखा गया है। यह हिरासत उन्हें न्यायिक हिरासत के तहत मिली है, जबकि उनके ऊपर न तो कोई आरोप लगाए गए हैं और न ही उन्हें दोषी ठहराया गया है। एक बार अगर उनका प्रत्यर्पण हो जाता है, तो उन्हें कुख्यात जासूसी कानून में संघीय "ग्रांड ज्यूरी" के सामने पेश होना होगा, जहां उनके ऊपर सरकारी कंप्यूटरों को हैक करने का आरोप होगा।

अधिकार समूहों, पत्रकारों और जूलियन असांज के समर्थकों ने हाई कोर्ट के फ़ैसले की जमकर आलोचना की है। रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (आऱएसएफ) की यूके ब्यूरो निदेशक रेबेका विंसेंट ने कहा, "यह बेहद शर्मनाक घटनाक्रम है, जिसके प्रभाव ना सिर्फ़ असांज की मानसिक हालत पर होगा, बल्कि पत्रकारिता और प्रेस की आजादी के लिए भी यह घातक है।"

आरएसएफ के महासचिव क्रिस्टोफे डेलॉयर ने कहा, "हम ब्रिटेन हाईकोर्ट के आज के फ़ैसले की निंदा करते हैं, जिसमें उनके अमेरिका प्रत्यर्पण को अनुमति दी गई है। यह सभी गलत चीजों के लिए ऐतिहासिक तौर पर कुख्यात होगा। हमें पूरा विश्वास है कि जूलियन असांज को पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए निशाना बनाया गया है।"

विकीलीक्स की मुख्य संपादक क्रिस्टीन ह्राफंस्सॉन ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार दिवस पर खोजी पत्रकारिता को अंधेरे में ढकेल दिया और असांज का उत्पीड़न जारी रखा।" वहीं असांज की साथी स्टेला मोरिस ने इस फ़ैसले को बेहद अन्यायपूर्ण बताते हुए असांज के उत्पीड़न में अमेरिकी कार्रवाईयों को याद दिलवाया।

मोरिस ने कहा, "यह निष्पक्ष कैसे हो सकता है, यह सही कैसे हो सकता है, यह संभव कैसे हो सकता है कि जूलियन को उसी देश भेज दिया जाए, जिसने उसे मारने की साजिश रची।"

फ़ैसले से सीधी रिपोर्टिंग करने वाले केविन गोस्जतोला ने इस फ़ैसले को वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता के लिए ख़तरा करार दिया। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति बाइडेन का प्रशासन तार्किक तौर पर लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सिद्धांतों का समर्थन करते हुए ठीक इसी दौरान एक प्रकाशक, जूलियन असांज के प्रत्यर्पण की मांग नहीं कर सकता, जबकि इस कदम का वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता संगठनों ने विरोध किया है।"

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Espionage ActJulian Assange
Julian Assange extradition trial
Kristinn Hrafnsson
Press freedom
Reporters Without Borders
Stella Moris
Vanessa Baraitser
wikileaks

Related Stories

धनकुबेरों के हाथों में अख़बार और टीवी चैनल, वैकल्पिक मीडिया का गला घोंटती सरकार! 

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

इज़रायल को फिलिस्तीनी पत्रकारों और लोगों पर जानलेवा हमले बंद करने होंगे

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

भारत में ‘वेंटिलेटर पर रखी प्रेस स्वतंत्रता’, क्या कहते हैं वैकल्पिक मीडिया के पत्रकार?

प्रेस स्वतंत्रता पर अंकुश को लेकर पश्चिम में भारत की छवि बिगड़ी

Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर

प्रेस फ्रीडम सूचकांक में भारत 150वे स्थान पर क्यों पहुंचा

नागरिकों से बदले पर उतारू सरकार, बलिया-पत्रकार एकता दिखाती राह


बाकी खबरें

  • J&K
    अनीस ज़रगर
    परिसीमन आयोग के जम्मू क्षेत्र पर ताजा मसौदे पर बढ़ता विवाद
    11 Feb 2022
    जम्मू के सुचेतगढ़ और आरएस पुरा इलाकों में पहले ही विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जा चुके हैं, जहाँ दो विधानसभा क्षेत्रों का विलय प्रस्तावित किया गया है।
  • hijab vivad
    भाषा
    हिजाब विवाद: कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के ख़िलाफ़ शीर्ष अदालत में याचिका दायर
    11 Feb 2022
    एक छात्र द्वारा दायर याचिका में हिजाब मामले की सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय के निर्देश के साथ ही तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष चल रही कार्यवाही पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। अपील में दावा…
  • गोवा ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना लॉकडाउन से संकट में आए टैक्सी चालकों का मुद्दा चुनाव से ग़ायब
    मोहम्मद ताहिर
    गोवा ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना लॉकडाउन से संकट में आए टैक्सी चालकों का मुद्दा चुनाव से ग़ायब
    11 Feb 2022
    "सरकार से कुछ सब्सिडी की मांग की थी। सरकार की तरफ से पांच हज़ार रूपये देने का वादा भी किया गया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला।"
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 58,077 नए मामले, 657 मरीज़ों की मौत
    11 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.64 फ़ीसदी यानी 6 लाख 97 हज़ार 802 हो गयी है।
  • MNREGA
    दित्सा भट्टाचार्य
    विशेषज्ञों के हिसाब से मनरेगा के लिए बजट का आवंटन पर्याप्त नहीं
    11 Feb 2022
    पीपल्स एक्शन फ़ॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी (PAEG) के मुताबिक़ वित्तीय साल 2022-23 के बजट में नरेगा के लिए जो राशि आवंटित की गयी है, उससे प्रति परिवार महज़ 21 श्रमदिवस का काम ही सृजित किया जा सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License