NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
पीएमओ ने किसान-विरोधी कृषि निर्यात नीति को दी हरी झंडी
नई नीति के तहत भारत की कृषि को वैश्वीकरण की दौड़ में शामिल किया जायेगा, भले ही किसानों की आय, कर्ज़ और आत्महत्या के मुद्दे अब तक सुलझे नहीं हैं।
सुमेधा पाल
06 Oct 2018
Translated by महेश कुमार
Agricultural Export policy

कृषि संकट के गहराने के बीच, भारत सरकार 2022 तक किसानों की आय को "दोगुनी" करने के लिए एक किसान विरोधी कदम उठाने के लिए तैयार है। नई कृषि नीति, जिस पर पिछले एक साल से वार्ता हो रही है, वर्तमान में प्रधान मंत्री कार्यालय से अनुमती के बाद मंत्रियों के समूह के पास परामर्श के लिए भेजी गई और जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए उसे रखा जा सकता है। सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व समाजवादी पार्टी के विधायक डॉ सुनीलम ने कहा कि, "यह एक बेहद संवेदनशील परियोजना है जिसमें किसान फंस जाएंगे और आखिरकार आत्महत्या करने के अलावा उनके सामने कोई विकल्प नहीं होगा।"

'उदार' नीति जबकि किसानों के मुद्दे अनसुलझे है

इस कदम से मोदी सरकार भविष्य में ज्यादा बाजारों में निर्यात को सक्षम करने और स्थिरता लाने के लिए एक अधिक "उदार" कृषि व्यापार नीति बनाने की उम्मीद कर रही है। ऐसा कर, सरकार शायद भारत की कृषि को अचानक वैश्वीकरण के रास्ते पर ले जाने की  कठिनाइयों का गलत अनुमान लगा रही है क्योंकि किसानों की आय, ऋण और आत्महत्या के मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।

पिछले साल सरकार की किसानों की दुगनी आय (वॉल्यूम IV) रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की निर्यात नीति "कृषि व्यापार को बढ़ावा नहीं देती है बल्कि इसका प्रयोग सिर्फ घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है"। उदाहरण के लिए, गैर-बासमती चावल के निर्यात पर तीन साल के प्रतिबंध और चावल की बज़ार में भरमार के  कारण 2008-11 के दौरान "5.6 अरब डॉलर का नकारात्मक नुकसान" हुआ। सरकार ने दावा किया कि इस तरह के कदम व्यापार में व्यवधान और आयात करने वाले राष्ट्रों के लिए अप्रत्याशितता उत्पन्न कर रहे थे।

व्यापार प्रतिबंध कम, सूखे के दौरान भी निर्यात जारी रहेगा

उदार कृषि निर्यात व्यवस्था की दिशा में भारत के प्रस्तावित कदम से सरकार को कृषि वस्तुओं की स्थायी शुरुआती मात्रा तय करने की आवश्यकता होगी जो किसी भी प्रकार के व्यापार प्रतिबंध से मुक्त होगी। यदि इसे लागू किया जाता है तो यह पिछली नीतियों के मुकाबले एक बड़ा महत्वपूर्ण बदलाव होगा क्योंकि देश में खाद्यान्न आपूर्ति कम होने पर भी कृषि उत्पाद के निर्यात को एक निश्चित स्तर तक रखना होता है, उदाहरण के लिए सूखे के दौरान। अतीत में भारत ने कृषि निर्यात को रोक दिया था ताकि घरेलू कीमतों पर नज़र रखी जा सके। नई नीति इस दृष्टिकोण से प्रस्थान कर जाएगी और इसके क्या परिणाम होंगे लोग यह अनिश्चत है। अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के जसविंदर सिंह ने समझाया कि, "उदार नीति को बढ़ाना सिर्फ देश में कृषि संकट को और गहरा करेगा।" उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यही होगा क्योंकि किसानों को पूरा लाभ नहीं दिया जाएगा और भारतीय कृषि की प्रकृति को वैश्वीकरण बनाने के नाम पर वे केवल इसके प्यादे बन जाएंगे। नई कृषि निर्यात नीति के अंतर्गत लगातार निर्यात प्रतिबंधों से स्टेपल के अलावा अन्य वस्तुओं को मुक्त करने की संभावना है, जिसका अर्थ है कि प्रोसेस किया हुआ और ऑर्गेनिक भोजन अब पूरी तरह से विनियमित किया जाएगा और आसानी से निर्यात योग्य बनाया जाएगा।

‘किसानों पर बढ़ता बोझ’

डॉ सुनीलम ने कहा कि, "अंतर्राष्ट्रीय बाजार बहुत प्रतिस्पर्धी और अस्थिर है। इस प्रणाली में, ठेकेदारों के हाथों में भारी ताकत है।" भारतीय कृषि क्षेत्र वर्तमान में बाजार की खामियों, पारदर्शिता की कमी है और किसानों और ठेकेदारों के बीच एक समान सूचना नहीं होती, और बिचौलिए अक्सर व्यवस्था को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं। इस नीति को लागू करने का मतलब यह होगा कि किसानों को अंतर्राष्ट्रीय कीमतों और मांगों के बारे में जागरूक होना होगा जो उनके पर अतिरिक्त बोझ डालेगी।

घरेलू कीमतों पर नज़र रखने के लिए भारत ने पहले कृषि व्यापार को प्रतिबंधित करने के लिए नीतिगत उपायों का इस्तेमाल किया था। देश ने व्यापारियों के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य पेश किया, जिन्हे अक्सर अंतर्राष्ट्रीय कीमतों से अधिक रखा जाता है ताकि व्यापारियों को निर्यात करने के लिए हतोत्साहित किया जा सके। डॉ. सुनीलम ने "न्यूजक्लिक को बताया कि,"सरकार द्वारा इस कदम को उलटकर, नीति के खास पहलू में बद्लाव से प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा और खाद्य सुरक्षा को खतरा तो होगा, साथ ही राष्ट्रीय हितों से भी समझौता होगा।" उन्होंने इस कदम को केंद्र सरकार के इस कदम को "पूर्णत निरंकुशता से भरा बताया।"

उचित कार्यान्वयन के लिए सरकारी रणनीति में भारी कमी

यह नीति कृषि मंत्रालय और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण द्वारा पहचाने गए 50 से अधिक निर्यात उन्मुख कृषि समूहों के लिए नियमों को आसान बना देगी। इस प्रक्रिया की जल्दबाजी में शुरूआत को सरकार द्वारा बुरा विचार बताया जा रहा है। जसविंदर सिंह ने कहा कि, "उन्हें यानी सरकार को वर्तमान में एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) समेत जैसे कई मुद्दों को हल करना है। वे किसानों के लिए अच्छी कीमत कैसे सुनिश्चित करेंगे? कई रिपोर्टों ने हमारे एमएसपी मूल्यांकन को लेकर मौलिक समस्याओं की ओर इशारा किया है। इस नीति से घरेलू उत्पादन में भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हमें बहुत ज्यादा संदेह है कि यह नीति किसानों की कोई मदद करेगी, कई अंतर्राष्ट्रीय नियमों और कानून हैं और इस सरकार के पास स्पष्ट रूप से कार्य करने की रणनीति नहीं है।"

इसके अलावा, सरकार भूमि-पट्टे कानूनों को उदार बनाने और राज्यों के साथ समन्वय जैसे कई जटिल मुद्दों को भी हल करना होगा क्योंकि कृषि राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके शीर्ष पर, कई प्रतिद्वंद्वी वैश्विक उत्पादकों ने भारतीय सरकार के समर्थन और वैश्विक कृषि उत्पाद की कीमतों में गिरावट की शिकायत की है जो निर्यात संभावनाओं को कमज़ोर करते हैं। चूंकि किसान उत्पाद के लिए घरेलू कीमतों में गिरावट के साथ जुड़ा हुआ है, इसलिए मोदी सरकार का नया कदम परेशान किसान के लिए अंतिम झटका हो सकता है।

PMO
agricultural crises
farmers distress
BJP
Export Policy
agrarian crises

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • kashmir
    अनीस ज़रगर
    कश्मीर : पैगंबर की विवादित छवि पेश करने वाली किताब को अधिकारियों ने हटाया
    09 Dec 2021
    दिल्ली के जे सी प्रकाशन की सातवीं कक्षा की किताब का घाटी में विरोध हो रहा है।
  • ULTI GINTI
    सतीश भारतीय
    सतत सुधार के लिए एक खाका पेश करती अंशुमान तिवारी और अनिंद्य सेनगुप्ता की किताब "उल्टी गिंनती"
    09 Dec 2021
    अंशुमान तिवारी और अनिंद्य सेनगुप्ता का आकलन है कि भारत को 2020-21की नेगेटिव ग्रोथ के बाद मंदी से उभरने के लिए अगले एक दशक तक सालाना करीब 9 फ़ीसदी विकास दर की जरूरत है, जिसके लिए प्रत्येक वर्ष 37…
  • kisan
    विजय विनीत
    पूर्वांचल से MSP के साथ उठी नई मांग, किसानों को कृषि वैज्ञानिक घोषित करे भारत सरकार!
    09 Dec 2021
    एमएसपी में किसानों का दैनिक श्रम सिर्फ 92 रुपये आंका गया है। सरकार इन्हें अकुशल श्रमिक मानती है, जबकि खेतों में काम करने वाले सामान्य अकुशल श्रमिकों का मानदेय 274 मानदेय तय है और बाजार में कुशल…
  • Mangesh Dabral
    न्यूज़क्लिक टीम
    पुण्यतिथि पर विशेष: आज भी जल रही है मंगलेश डबराल की ‘कविता की लालटेन’
    09 Dec 2021
    वरिष्ठ कवि, लेखक, पत्रकार मंगलेश डबराल की आज पहली पुण्यतिथि है। पिछले बरस 9 दिसंबर 2020 को कोरोना ने उनकी जान ले ली। न्यूज़क्लिक के लिए वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने मंगलेश जी के घर जाकर उनकी पत्नी-…
  • Raoul Hedebouw
    पीपुल्स डिस्पैच
    राउल हेडेबौ बेल्जियम की वर्कर्स पार्टी के नए अध्यक्ष 
    09 Dec 2021
    पीटर मर्टेंस ने बेल्जियम के राष्ट्रपति पद से अपने 13 वर्षों के महत्त्वपूर्ण कार्यकाल के बाद वर्कर्स पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। उनके कार्यकाल के दौरान ही पार्टी यूरोप में प्रमुख मार्क्सवादी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License