NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
समाज
भारत
राजनीति
पीने के लिए गटर का पानी : वडोदरा के अल्पसंख्यकों की ज़िंदगी बनी दोज़ख
एकतानगर रहीस एसोसिएशन की प्लॉट सं 287 में रह रहे लोग, ज्यादातर मुस्लिम और मराठा दलित हैं, उन्हें वीएमसी द्वारा स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर स्लम को खाली करने के लिए धमकाया जा रहा है, जबकि गुजरात उच्च न्यायालय ने दो साल पहले इस बस्ती को तोड़ने के आदेश पर रोक लगा दी थी।
उज्जवल कृष्णन
04 Jun 2019
Translated by महेश कुमार
Water

“हमने रोज़ा (उपवास) रखा है लेकिन हमें अभी पानी लाने के लिए जाना है। यहां पानी की आपूर्ति नहीं है। हमने निगम के लोगों के साथ ऐसा क्या किया है जो वे हम लोगों पर कोई तरस नहीं खाते हैं।” 45 वर्षीय जुबैदीन कादिर शेख ने कहा,“ पीने का पानी कैसे पिएं? .. मल जैसा गंदा पानी आता है।”

न्यूज़क्लिक ने ज़ुबेदाबेन से स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्र में मुलाकात की जहाँ वह सहायिका (सहायक) के रूप में काम करती हैं। पानी की कमी के कारण, वह कहती है, बच्चों के लिए भोजन पकाना भी काफी मुश्किल हो गया है।

जुबेदाबेन की तरह, सैकड़ों महिलाएँ अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी लेने के लिए एकतानगर रहीस एसोसिएशन की प्लॉट सर्वे संख्या 287 में जाती हैं (जिसे तोड़ा जाना है)।

Water 1.JPG

पानी लेने के लिए कई महिलाएं रोज यहां इकट्ठा होती हैं।

यहां से रो़ज पानी लेने वाली एक स्कूल जा रही किशोरी ज़ैनब सैयद हुसैन ने कहा कि उसे अपने घर में पानी की आपूर्ति करते तीन महीने हो गए हैं। उन्होंने कहा, "मैं सुबह से पानी भरना शुरू करती हूं और सभी डिब्बे भरने में मुझे दोपहर के 2 बज जाते है। बेशक हम गरीब हैं, लेकिन खुदा में हमारा विश्वास हैं। क्या हमें मूलभूत आवश्यकताओं का लाभ उठाने का अधिकार नहीं है? क्या हम जीवन भर ऐसा ही करते रहेंगे… इन हालात में हमें पढ़ाई करने का समय कैसे मिलेगा?”

शेख शहनाज़ बालम ने गुस्से में कहा, “इनके त्योहार में, दिवाली, होली में, सबमें पानी आता है… और हमें पीने तक का पानी नहीं मिलता है?कहां का सामाजिक इंसाफ है ये?"

Water 2.JPG

मकबूल दीवान के परिवार को उनके जन्म से तीन साल पहले सरकार द्वारा पानीगेट के बहमनपुरा से इस क्षेत्र में लाया गया था। अब 35 साल का वही मकबूल अपने पिता की तरह दिहाड़ी मजदूर है। उन्होंने बताया कि सड़क बनाने के लिए सैकड़ों घर ढहा दिए गए लेकिन वास्तव में वह सड़क आज़ तक नहीं बनी।

जैसे-जैसे वह हमें रास्ता दिखाता गया, लगभग 10-15 महिलाओं को पानी भरने के लिए कनस्तरों को ले जाते देखा गया। यह पूछने पर कि आप क्या करने जा रही हैं तो 85 वर्षीय खातुन बीबी ने कहा, “यहां तक कि निजी पानी का टैंकर भी यहां आने के लिए तैयार नहीं है। आज की रात हमारे लिए बुरी रात है। हम बच्चों को कैसे नहलाएंगे? रोजा है या नहीं, हमें पानी लाने आना पड़ता है।”

बिस्मिल्लाहबेन, 45, एक निजी सोसाइटी की ओर इशारा करते हुए बोली, जिसकी दीवार स्लम की परिधि के साथ साझा है, "पानी के लिए पैसा दो,सड़क की सफाई के लिए पैसा दो, मोटर के लिए पैसा दो ... क्या वे नहीं जानते कि हम गरीब हैं। अगर हमारे पास पैसा होता, तो हम क्या उस इमारत में नहीं रहते।”

Water 3.JPG

एकतानगर के निकटवर्ती स्लम क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में पानी की आपूर्ति होती है, वहां जहां हिंदू बहुसंख्यक रहते हैं। जबकि  सरकारी अधिकारी एकतानगर के इस सर्वेक्षण वाले भूखंड में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कभी नहीं आते हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली बोर्ड भी अपने बिलों के भुगतान के लिए सहज नहीं है। इस रिपोर्टर को बताया गया कि अगर बिजली बिल के भुगतान में पांच दिन की भी देरी होती है, तो बोर्ड बिजली के मीटर को हटाने में देरी नहीं करता है।

Water 4.JPG

वडोदरा नगर निगम भी यहां टैंकर नहीं भेजता है। एक सरकारी पानी का टैंकर एकतानगर के दूसरे हिस्से में देखा जा सकता था, लेकिन इस हिस्से की किसी भी झुग्गी में नहीं देखा जा सकता है। एक निजी टैंकर की कीमत 600 रुपये है और यह 3 से 5 सदस्यों वाले अधिकतम तीन परिवारों की बुनियादी पानी की जरूरत को पूरा कर सकता है।

शेहला बेन को अपने बच्चों के लिए भोजन तैयार करना है, इसलिए वह पानी लाने के लिए झुग्गी के आखिर में आती है। एक बोतल पानी या फिर एक कैन के लिए 10 रुपये लेते हैं। वह अपनी पीड़ा व्यक्त करती है, "मैं केवल 400 रुपये प्रतिदिन की पारिवारिक आय के साथ इसे कैसे वहन कर सकती हूं?"

“पुलिस हमें परेशान करती है। वे हमें झुग्गी को खाली करने के लिए कहते हैं, वे हमें धमकी देते हैं कि अंतिम आदेश आने पर वे हमें अपना सामान भी एकत्र करने की अनुमति नहीं देंगे। हमारे पास इस नश्वर शरीर को छोड़कर कौनसा ऐसा कीमती सामान हैं, जिसके भविष्य को लेकर डरा जाए, “एक और निवासी शबाना ने कहा।

एक अन्य गलियारे में, रुकसनाबेन को सिर पर कपड़े ढोते हुए देखा गया था। उसने कहा, “कपड़े धोने के लिए हमें इन कपड़ों के ढेर के साथ तीन से चार किलोमीटर की यात्रा करनी होती है। क्या अब हमें रमज़ान के पवित्र महीने में भी गंदा रहना होगा... पता नहीं क्यों खुदा इस तरह का दर्द दे रहा हैं।"

साहिरा बानो ने पानी में बिखरे कण के साथ पीला भूरा पानी दिखाते हुए कहा, “क्या इसे हम स्वच्छ पानी कहते हैं। पीने योग्य 25 लीटर पानी की कीमत 30 रुपये है। क्या हम इसे एक बड़े परिवार के लिए खरीद सकते हैं?”

नूरजहां बानो, 54, एक प्रकार के पक्षाघात से उबर रही हैं जो एक प्रकार का लकवा है। उनके पास अपने खुद के लिए पानी लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जब वह बात करती है तो वह अपने आंसू नहीं रोक पाती है। बानो ने दुख जताते हुए कहा, "मैं अपने सभी कामों के लिए अपने परिवार पर निर्भर नहीं रह सकती। मैं 4-5 लीटर पानी इकट्ठा कर लेती हूं, इसे पीने से पहले उबाल और छान लेती हूं।”

Water 5.JPG

न्यूजक्लिक ने इसके बाद अंबेडकरवादी मराठियों की कॉलोनी का दौरा किया, जो उसी सर्वेक्षण वाले भूखंड पर रह रहे थे जिसे ध्वस्त किया जाना है।

Water 6.JPG

अंबेडकरनगर की गली नंबर 41 में रहने वाले 35 वर्षीय रहमान ने कहा, “हमारा पूरा परिवार पिछले महीने इस दूषित पानी की वजह से बीमार पड़ गया था। यह न केवल गंदा है, बल्कि इसमें बदबू भी आती है। आप इस पानी से हाथ भी नहीं धो सकते हैं, अकेले पीने की बात तो छोड़ दें।"

लक्ष्मीबेन बालचंद्र भामरे, अन्य मराठी परिवारों के साथ, प्रतापनगर से चालीस साल पहले यहाँ आए थे क्योंकि उस जगह को तोड़ दिया गया था जहां वे रहते थे। लक्ष्मीबेन, जोकि अब 50 वर्ष की हैं, विस्थापन के बाद उनके खिलाफ बरती गई अनियमितताओं के नतीजों को भुगत रही हैं। उन्हे लगता है कि ये भेदभाव इसलिए है क्योंकि वे गुजराती नहीं हैं। उन्होने कहा, "समय के साथ हमारी स्थिति बिगड़ती जा रही है और निश्चित रूप से इसका कुछ न कुछ राजनीतिक कारण है।"

60 साल की कमलाबेन भामरे ने कहा, "चुनाव से दो दिन पहले [वडोदरा में 23 अप्रैल को लोकसभा के लिए मतदान हुआ था] पर पानी की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी गई थी, लेकिन चुनाव संपन्न होते-होते हालात बदल गए, और फिर से हमें हमारी दैनिक दिक्कतों के साथ छोड़ दिया गया।"

वडोदरा में अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता चिराग अली शाह ने वड़ोदरा नगर निगम (VMC) को कई आवेदन लिखे, लेकिन अपील सुनने वाले प्राधिकारी ने झुग्गी बस्तियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कोई जवाब नहीं दिया। शाह ने कहा, ''यहां स्ट्रीट लाइटों की भारी समस्या है। हम बिजली विभाग गए; उन्होंने हमारी दलील को सुना भी नहीं। वे हमें एक जगह से दूसरी जगह भेजते रहते हैं।”

कई बच्चे एक ढेर की ओर इशारा करते हैं। उनमें से एक कहता है, ''गटर का पानी घर में भरा रहता है, कोई साफ करने नहीं आता।"

Water 7.JPG

अन्य स्लम में किए गए सर्वेक्षण से पता चला कि वहां भी स्थिति समान ही है। 65 वर्षीय सबरीबेन शेख ने न्यूज़क्लिक को बताया कि अनियमित जलापूर्ति का मुद्दा दो दशकों से अटका है, लेकिन उन्होंने कभी भी इतने लंबे समय तक व्यवधान का सामना नहीं किया। उन्होंने कहा, "वीएमसी द्वारा हमें स्लम को खाली करने के लिए नोटिस दिए जाने के बाद, अब झुग्गीवासियों के लिए पानी का न मिलना एक सामान्य बात हो गयी है।"

नवंबर 2016 में, एकतानगर रहीस एसोसिएशन के प्लॉट सर्वे नंबर 287 को तोड़ने की सूचना दी गई थी। प्लॉट सर्वे संख्या 287 एकतानगर का सबसे बड़ा स्लम है। यहां अम्बेडकरवादी मराठियों और मुसलमानों की आबादी का बहुमत है। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने आपातकालीन सुनवाई के लिए गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। वडोदरा स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता मुनाफ पठान कहते हैं, "उच्च न्यायालय की छुट्टी की अवधि से ठीक पहले वीएमसी ने समाचार पत्र में एक संक्षिप्त नोटिस दिया ताकि कोई भी राहत पाने में सफल न हो सके। लेकिन सौभाग्य से हमारी याचिका पर एक आपातकालीन सुनवाई हुई और मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी ने वीएमसी को झुग्गी को न गिराने का आदेश दिया।"

रिट पिटीशन (PIL) पर दिए गए आदेश की न्यूजक्लिक ने समी़क्षा की और वडोदरा नगर निगम के तर्कों को दोषपूर्ण पाया। निगम ने तर्क दिया कि सभी भूखंड में रह रहे सभी निवासियों ने परिसर को खाली करने के लिए सहमति दे दी थी और  पुनर्वास होने तक 2,000 रुपये प्रति माह लेने पर भी सहमति दे दी थी। गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने बस्ती के तोड़ने के अभियान को तुरंत रोक दिया क्योंकि VMC का तर्क दोषपूर्ण साबित हुआ था। सभी झुग्गी बस्तियों में विध्वंस के लिए सहमति नहीं थी और न ही उन्हें पुनर्वास के लिए उचित आवंटन दिए गए थे।

न्यूजक्लिक ने VMC आयुक्त अजय भादू से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस रिपोर्टर को उपायुक्त शैलेश मिस्त्री के पास भेज दिया। मिस्त्री ने एकतानगर से संबंधित मुद्दों के बारे में पूछे जाने पर फोन काट दिया।

वीएमसी में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले विपक्षी नेता, चंद्रकांत श्रीवास्तव ने एकतानगर में इस तरह के किसी भी मुद्दे की जानकारी से इनकार कर दिया।

लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार हैं और एकेडेमिया.ड्यू में संपादक के रूप में कार्य करते हैं। वह भारत में सामाजिक असमानता और अधिकारों पर लिखते हैं।

water crises
ground water depletion
chennai water crisis
Vadodara
Gujarat
minorities
MINORITIES RIGHTS

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्ट: जल के अभाव में खुद प्यासे दिखे- ‘आदर्श तालाब’

‘हमें पानी दो, वरना हम यहां से नहीं हटेंगे’: राजस्थान के आंदोलनरत किसान

गुजरात के एक जिले में गन्ना मज़दूर कर्ज़ के भंवर में बुरी तरह फंसे

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर बार बार उठते सवाल

किसान आंदोलन:  महाराष्ट्र के किसान शाहजहांपुर बॉर्डर पर डटे, दिल्ली-जयपुर नेशनल हाइवे बंद

कोविड-19 लॉकडाउन : गुजरात में प्रवासी मज़दूरों पर दर्ज मामले ‘मानव अधिकारों का उल्लंघन हैं’

मज़दूरों की मौत पर जनता का राष्ट्रीय शोक, जीवन व आजीविका के लिए सरकार से जवाबदेही की मांग

ढाई दशक में सबसे बड़ा है टिड्डियों का हमला, किसानों को भारी नुकसान

ग्रामीण भारत में करोना-28: किसान अपनी फ़सल जानवरों को खिलाने पर मजबूर

गुजरात : कडी शहर में मज़दूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की क्या है हालत?


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License