NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
प्लास्टिक कचरे के खिलाफ सरकार की असंतुलित मुहिम
छोटे व्यवसायियों और आम लोगों को तो एकल उपयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल से रोका जा रहा है, लेकिन सवाल है कि क्या सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा पैदा करने वाले बड़े पूंजीवाले उद्योगों की मनमानी पर सरकार कोई सख्त कदम उठा पायेगी?
सरोजिनी बिष्ट
24 Sep 2019
single use of plastic
Image courtesy:India Today

इसमें कोई शक नहीं कि जो चीजें आज मानव जीवन के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में हमारे सामने हैं उनमें से एक प्लास्टिक कचरा भी है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एकल उपयोग (सिंगल यूज) प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम का आह्वान निस्संदेह एक सकारात्मक कदम कहा जायेगा। प्लास्टिक कचरे की स्थिति इतनी भयावह है कि इसे पर्यावरणीय इमरजेंसी मानते हुए तत्काल सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

जैसा कि बताया जा रहा है एकल उपयोग प्लास्टिक पर रोकथाम की सरकारी कार्य योजना आगामी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर सामने आयेगी। लेकिन अभी तक इस दिशा में जो सरकारी मुहिम चल रही है, वह पूरी तरह असंतुलन का शिकार दिखती है। छोटे व्यवसायियों और आम लोगों को तो एकल उपयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल से रोका जा रहा है, लेकिन सवाल है कि क्या सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा पैदा करने वाले बड़े पूंजीवाले उद्योगों की मनमानी पर सरकार कोई सख्त कदम उठा पायेगी?

सरकारी रुख को देखते हुए यह चर्चा जोरों पर थी कि आगामी 2 अक्टूबर से एकल उपयोग प्लास्टिक पर रोक लग जायेगी। आज ऐसे बहुत से उद्योग हैं जो प्लास्टिक पैकेजिंग पर निर्भर हैं। उनके बीच सुगबुगाहट शुरू ही हुई कि देश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इस सफाई के साथ सामने आ गये कि सरकार की योजना एकल उपयोग प्लास्टिक पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की नहीं, बल्कि इसे एक जनांदोलन का रूप देने की है। इस तरह उन्होंने साफ संदेश दे दिया है न तो एक्वाफिना, बिसलेरी जैसे बोतलबंद पानी पर कोई रोक लगेगी और न ही चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट की प्लास्टिक पैकेजिंग पर।

एकल उपयोग प्लास्टिक मुख्य रूप से दो तरह का है। एक जिसे रीसाइकिल किया जा सकता है और दूसरा जो रीसाइकिल नहीं हो सकता। बिस्कुट, नमकीन, केक, चिप्स, चॉकलेट जैसे खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग के लिए मल्टी लेयर्ड प्लास्टिक (एमएलपी) का इस्तेमाल होता है, जिसकी भीतरी सतह चांदी जैसी चमकीली होती है। एमएलपी में खाद्य पदार्थ लंबे समय तक सुरक्षित रखते हैं, लेकिन यह सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला प्लास्टिक है क्योंकि इसे रीसाइकिल नहीं किया जा सकता।

रीसाइकिल नहीं हो सकने के कारण कचरा चुननवाले भी इसे नहीं उठाते। जहां-तहां फेंके जाने के कारण नालियों से होते हुए यह नदी-नालों और समुद्र तक पहुंच कर गंभीर पर्यावरण संकट पैदा कर रहा है। 2011-12 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में हर दिन 25,490 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है, जिसमें एमएलपी का हिस्सा 1200 टन है। आम प्लास्टिक कैरीबैग पर रोकथाम की मुहिम की शुरुआत 20 साल पहले, 1999 में हिमाचल प्रदेश से हुई। इसके बाद वक्त के साथ अन्य राज्यों ने भी प्लास्टिक कैरीबैग को प्रतिबंधित करना शुरू किया। पूरा पालन न होने के बावजूद आज ज्यादातर राज्यों में यह प्रतिबंध लागू हो चुका है, जिसका सबसे ज्यादा असर फल-सब्जी व मांस-मछली विक्रेताओं और किराना दुकानदारों पर हुआ है।

समय-समय पर स्थानीय प्रशासन व नगर निकायों द्वारा इन दुकानों में छापामारी कर पॉलीथीन बैग जब्त किये जाते हैं। लेकिन इससे कहीं ज्यादा प्रदूषक एमएलपी पर हाथ डालने की किसी सरकार ने हिम्मत नहीं दिखायी, क्योंकि उसका इस्तेमाल उन उत्पादों में होता है जिन्हें पेप्सिको जैसी देश-दुनिया की सबसे शक्तिशाली कंपनियां बनाती हैं। और, मोदी सरकार के एकल उपयोग प्लास्टिक के खिलाफ 'जनांदोलन' में भी एमएलपी को छूट ही मिलती दिख रही है।

इन दिनों प्लास्टिक कचरे का एक और बड़ा स्रोत बनकर उभरी हैं फूड डिलीवरी कंपनियां। एक अध्ययन के मुताबिक, जोमैटो, स्विगी जैसी कंपनियों के कारण महीन में लगभग 22,000 टन प्लास्टिक कचरा निकल रहा है। इसके अलावा, फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के पार्सल से भी बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कचरा निकल रहा है। लेकिन इस विषय में भी सरकार की खामोशी ही दिखती है। कुल मिलाकर कहें तो एकल उपयोग प्लास्टिक के खिलाफ सरकारी मुहिम सर के बल खड़ी नजर आती है। प्लास्टिक कचरा रोकने की पहली जिम्मेदारी साधन संपन्न राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर डालनी चाहिए, लेकिन हो इसका ठीक उलटा रहा है। पेप्सिको के बजाय सब्जी दुकानदारों पर सबसे पहले गाज गिरायी जा रही है।

आम तौर पर पर्यावरणीय प्रश्नों और अर्थव्यवस्था के बीच हितों का टकराव माना जाता है। आर्थिक जगत में चर्चा है कि अगर सरकार एकल उपयोग प्लास्टिक पर सख्त हुई तो इसका अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। पहले से ही आर्थिक मोर्चे पर मंदी से जूझ रही सरकार इसे देखते हुए शायद कोई सख्त कदम ना ही उठाये। लेकिन यह भी सच है कि अगर एकल उपयोग प्लास्टिक पर सख्ती की जाये तो इसका फायदा लघु और कुटीर उद्योगों को मिल सकता है जो भारत में एक समय बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते रहे हैं।

प्लास्टिक के कप, प्लेट बंद होने से दोना-पत्तल, कुल्हड़ बनानेवालों को रोजगार मिलेगा। इसी तरह स्थानीय बेकरियों और कॉन्फेक्शनरियों के कारोबार में भी बड़ा उछाल आ सकता है। अब वक्त आ गया है कि पर्यावरण को अर्थव्यवस्था का दुश्मन मानने का नजरिया बदला जाये। लेकिन एक ऐसी सरकार जो बुलेट ट्रेन और मेट्रो के लिए मुम्बई के अति-संरक्षित जंगलों को काटने जा रही हो, उससे ऐसी कोई उम्मीद बेमानी लगती है।   

plastic
plastic wastage
Single use of plastic
Unbalanced campaign of government for plastic use
Narendera Modi
Environment
Environmental Pollution

Related Stories

नज़रिया : प्रकृति का शोषण ही मानव को रोगी बनाता है

तिरछी नज़र : ऐसे भोले भाले हैं हमारे मोदी जी...

उनके लिए सफाई या स्वच्छता का एक दिन या एक तारीख़ नहीं होती

बीच-बहस : भारत में सब अच्छा नहीं है, मोदी जी!

जब ‘हाउडी मोदी’ का मतलब हो गया ‘हाउडी ट्रंप’

जटिल है जनसंख्या नियंत्रण का प्रश्न

मोदी जी! हमें शब्दों से न बहलाइए, अपना इरादा साफ़ बताइए

मेरी नज़र से इतिहास के पन्ने’ - बीजेपी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी : कभी हाँ, कभी न

तो आईये पर्यावरण के लिए कुछ जवाबदेही हम भी तय करें...

जन संघर्षों में साथ देने का संकल्प लिया युवाओं ने


बाकी खबरें

  • sc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पीएम सुरक्षा चूक मामले में पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति गठित
    12 Jan 2022
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘‘सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता’’ और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा जांच की निगरानी करने की आवश्यकता है।
  • dharm sansad
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
    12 Jan 2022
    पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में 'धर्म संसद' के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी।
  • राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    विजय विनीत
    राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    12 Jan 2022
    "आरएसएस को असली तकलीफ़ यही है कि अशोक की परिकल्पना हिन्दू राष्ट्रवाद के खांचे में फिट नहीं बैठती है। अशोक का बौद्ध होना और बौद्ध धर्म धर्मावलंबियों का भारतीय महाद्वीप में और उससे बाहर भी प्रचार-…
  • Germany
    ओलिवर पाइपर
    जर्मनी की कोयला मुक्त होने की जद्दोजहद और एक आख़िरी किसान की लड़ाई
    12 Jan 2022
    पश्चिमी जर्मनी में एक गांव लुत्ज़ेराथ भूरे रंग के कोयला खनन के चलते गायब होने वाला है। इसलिए यहां रहने वाले सभी 90 लोगों को दूसरी जगह पर भेज दिया गया है। उनमें से केवल एक व्यक्ति एकार्ड्ट ह्यूकैम्प…
  • Hospital
    सरोजिनी बिष्ट
    लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़
    12 Jan 2022
    लखनऊ के साढ़ामऊ में स्थित सरकारी अस्पताल को पूरी तरह कोविड डेडिकेटेड कर दिया गया है। इसके चलते आसपास के सामान्य मरीज़ों, ख़ासकर गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। साथ ही इसी अस्पताल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License