NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कानून
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फिलिस्तीन
फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक बंदी लोय अल-अश्क़र ने रिहाई पर हुए समझौते के बाद भूख हड़ताल ख़त्म की
इजरायल ने दो अन्य फिलिस्तिनियों-हिशाम अबू ह्वाश और निदाल बॉलआउट को हिरासत में रखा हुआ है और इस अवैध प्रशासनिक हिरासत के ख़िलाफ़ ये दोनों इस समय बंदी भूख हड़ताल पर हैं। वे क्रमश: 104 दिनों और 31 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
पीपल्स डिस्पैच
01 Dec 2021
palestine prisoner
फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक बंदी लोय अल-अश्क़र। (फ़ोटो: आईएमईएमसी डॉट ओआरजी)

फ़िलीस्तीनी प्रशासनिक बंदी लोय अल-अश्क़र ने रविवार, 28 नवंबर को 49 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल ख़त्म कर दी। पैलेस्टाइन प्रीजनर्स सोसायटी (PPS) के मुताबिक़, अल-अश्क़र ने अपनी रिहाई के सिलसिले में इजरायली जेल अधिकारियों के साथ एक समझौते पर पहुंचने के बाद अपनी भूख हड़ताल को स्थगित कर दिया। हाल के हफ़्तों में  इजरायली प्रशासनिक हिरासत में कई अन्य फ़िलिस्तीनी बंदियों ने लंबे समय तक भूख हड़ताल के बाद अपनी आज़ादी हासिल की है।

कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक इलाक़े स्थित तुलकरेम के पास के सिदा गांव के आठ साल के बच्चे के  45 वर्षीय पिता अल-अशकर को अक्टूबर 2021 में गिरफ़्तार किया गया था और अवैध प्रशासनिक हिरासत में रखा गया था, जिसके बाद उन्होंने तुरंत अपनी भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। इजरायल के अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें अपनी भूख हड़ताल ख़त्म करने के लिए मजबूर करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाये थे, लेकिन उनके संकल्प को तोड़ पाने में नाकाम रहे। अल-अश्क़र को इससे पहले भी इस्राइल कई बार क़ैद में रख चुका है। उन्होंने इजरायल की जेलों में कुल मिलाकर आठ साल से ज़्यादा समय बिताये हैं। 2005 में क़ैद के दौरान  इजरायली अधिकारी उनसे बेहद बेरहमी से पेश आये थे। इस दौरान उनके साथ बरती गयी बेरहमी से उनके बायें पैर में लकवा मार गया था। उनके भाई मुहम्मद अल-अश्क़र को 2007 में नेगेव डेज़र्ट जेल में रहने के दौरान इजरायली जेल अधिकारियों ने मार डाला था।

पिछले हफ़्तों में अपनी भूख हड़ताल को स्थगित कर देने वाले कई दूसरे फ़िलिस्तीनी बंदिंयों में कायद अल-फ़सफ़ौस, मिक़दाद अल-क़वासमेह, अला अल-अराज और अयाद अल-हरीमी हैं, जिन्होंने क्रमशः 131, 113, 103 और 61 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल ख़त्म की थी। स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं और उनकी लंबी भूख हड़तालों से पैदा होने वाले उनकी मौत के जोखिम को देखते हुए इजरायली अधिकारियों पर कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार समूहों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के पडते ज़बरदस्त दबाव के मद्देनजर उनकी रिहाई को लेकर बातचीत करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इज़राइल से अपनी हिरासत में सभी प्रशासनिक बंदियों को रिहा करने और बिना किसी आरोप या परीक्षण के प्रशासनिक हिरासत की अपनी अवैध नीति के इस्तेमाल को ख़त्म कर देने का लगातार आह्वान किया जाता रहा है। इस समय, तक़रीबन 4,650 फ़िलिस्तीनी इजरायली जेलों में बंद हैं, जिनमें से 520 को ऐसे गोपनीय साक्ष्यों के आधार पर प्रशासनिक हिरासत में रखा जा रहा है, जिन्हें उनके या उनके वकीलों के साथ साझा नहीं किया गया है।

दो और फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक बंदी- हिशाम अबू ह्वाश और निदाल बलआउट भी अपनी अवैध हिरासत के विरोध में भूख हड़ताल पर हैं। दोनों ने अपनी भूख हड़ताल के क्रमश: 104 और 31 दिन पूरे कर लिए हैं। ख़बरों के मुताबिक़, 39 साल के ह्वाश की तबीयत काफ़ी ख़राब है और उन्हें रामले जेल के मेडिकल क्लिनिक में रखा गया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि उनके स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति के बावजूद, जेल अधिकारियों ने अब तक उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए नज़दीकी अस्पताल में स्थानांतरित नहीं किया है। अक्टूबर 2020 से ह्वाश को कथित तौर पर छ:-छ: महीने के लगातार तीन प्रशासनिक हिरासत के आदेश जारी किए गए थे, और बाद में छह महीने के लिए एक और हिरासत के आदेश जारी कर दिये गये थे, जिसे बाद में हिरासत के विरोध में भूख हड़ताल शुरू करने के बाद इसे घटाकर चार महीने कर दिया गया था।

27 साल के बॉलआउट की भूख हड़ताल सार्वजनिक तौर पर तब तक सामने नहीं आयी थी, जब तक कि हाल ही तक इजरायली जेल अधिकारियों ने जानबूझकर इसे गुप्त नहीं रखा था। उनकी भूख हड़ताल की जानकारी तब सामने आयी थी, जब जेल अधिकारियों ने एक वकील को उनसे मिलने की इजाज़त दी थी।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://peoplesdispatch.org/2021/11/29/palestinian-administrative-detainee-loay-al-ashqar-ends-hunger-strike-after-securing-release/

Palestine
Israel Occupied Palestine
Israel
Administrative detention in Israeli prisons

Related Stories

क्या पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर के लिए भारत की संप्रभुता को गिरवी रख दिया गया है?


बाकी खबरें

  • सांप्रदायिक, राजनीतिक और पूंजीवादी विचारों के ख़िलाफ़ खड़े होने का समय: विजयन
    भाषा
    सांप्रदायिक, राजनीतिक और पूंजीवादी विचारों के ख़िलाफ़ खड़े होने का समय: विजयन
    23 Aug 2021
    समाज सुधारक एवं धार्मिक नेता श्री नारायण गुरू की 167वीं जयंती के अवसर पर फेसबुक पर एक पोस्ट में विजयन ने लिखा, ‘‘यह समय भाईचारा और समानता को कमजोर करने वाली सांप्रदायिक, राजनीतिक और पूंजीवादी…
  • तमिल फिल्म उद्योग की राजनीतिक चेतना, बॉलीवुड से अलग क्यों है?
    बी. सिवरामन
    तमिल फिल्म उद्योग की राजनीतिक चेतना, बॉलीवुड से अलग क्यों है?
    23 Aug 2021
    हाल ही में लाए गए सिनेमैटोग्राफ़ संशोधन विधेयक 2021 के विरोध में दो ध्रुवों पर खड़े कमल हासन और सूर्या एक साथ आ गए, इस घटना ने तमिल फिल्म जगत में चेतना की एक लहर दौड़ा दी है।
  • "वैज्ञानिक मनोवृत्ति" विकसित करने का कर्तव्य
    प्रशांत पद्मनाभन
    "वैज्ञानिक मनोवृत्ति" विकसित करने का कर्तव्य
    23 Aug 2021
    तर्कवादी सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की 8वीं पुण्यतिथि के बाद प्रशांत पद्मनाभन ने उनकी विरासत को याद करते हुए लिखा है कि "वैज्ञानिक मनोवृत्ति" क्या होती है और कैसे इसका विकास किया जा सकता है।
  • Kalyan Singh
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    पिछड़ों के सांप्रदायीकरण की योजना और दुविधा के प्रतीक थे कल्याण सिंह
    23 Aug 2021
    वास्तव में कल्याण सिंह पिछड़ा वर्ग की उस दुविधा के प्रतीक थे जिसके तहत कभी वह जाति के अपमान से छूटने और सत्ता पाने के लिए सांप्रदायिक होने को तैयार हो जाता है तो कभी हिंदुत्व की ब्राह्मणवादी योजना से…
  • अफ़ग़ानिस्तान से बाइडेन की नाकाम वापसी अमेरिका के दो दशकों के ग़लत क़दमों का सिला है
    सोनाली कोल्हटकर
    अफ़ग़ानिस्तान से बाइडेन की नाकाम वापसी अमेरिका के दो दशकों के ग़लत क़दमों का सिला है
    23 Aug 2021
    बाइडेन के अफ़ग़ानिस्तान से हटने की चौतरफ़ा आलोचना हो रही है। लेकिन, इन ज़्यदातर आलोचनाओं से असली बात ग़ायब हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License