NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पंजाब की औरतें भी बनती जा रही हैं नशे की लत का शिकार
“…जो औरतें नशीले पदार्थों का सेवन कर रही हैं,वह इसपर पूरी तरह निर्भर हो जाती हैं, इसका सेवन करना मुश्किल से बंद करती है। ये किसी गुलाम की तरह इसका इस्तेमाल करती हैं। यह बहुत अधिक चिंताजनक है।”
अजय कुमार
10 Sep 2018
PUNJAB

हम सभी की जिंदगी के साथ एक किस्म का बिखराव, टूटन का हिस्सा भी चलता रहता है। जिनकी जंदगी में किसी से लगाव, अपनत्व और रचनात्मकता का रोमांच मौजूद रहता है,वह इस हिस्से से आसानी से निपटते रहते हैं लेकिन जिनकी जिंदगी में इसकी  गैरमौजूदगी रहती है,उनके लिए जीवन की अजीबो गरीब अड़चनों से निपटना बहुत मुश्किल हो जाता है। उनकी जिंदगी इन अड़चनों से निपटने के लिए तरह-तरह के तरीकों का ईजाद करती है, जिसमें सबसे आसान तरीका किसी किस्म के नशे का आदी बन जाना होता है। पंजाब के लोगों का एक बहुत बड़ा हिस्सा नशे का आदी  बन चुका है।   
 
द हिन्दू में विकास वासुदेव की एक सन्न कर देने वाली रिपोर्ट छपी है। इस रिपोर्ट में उन महिलाओं की जिंदगियों की दर्दनाक कहानी का ब्योरा दिया गया है जिन्होंने नशे की आदत के चलते अपनी जिंदगी  को बर्बाद कर लिया। चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन ने मार्च 2018 में पंजाब के लोगों के सेहत से संबंधित एपिडोमोलॉजी रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि पंजाब के  तकरीबन 40 लाख मर्दों ने कभी न कभी अपने जीवन में किसी नशे का सेवन किया है और तकरीबन एक लाख औरतों ने कभी न कभी अपने जीवन में नशे का सेवन किया है। मर्दों में नशे की लत छोड़ने की सम्भावना औरतों के मुकाबले अधिक है यानी कि औरतों में नशे की लत का जीवन भर बने रहने की संभावना अधिक है। 

पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन के मनोविज्ञान विभाग के डॉक्टर सुबोध का कहना है कि जो औरतें नशीले पदार्थों का सेवन कर रही हैं, वह इसपर पूरी तरह निर्भर हो जाती हैं, इसका सेवन करना मुश्किल से बंद करती है। ये किसी गुलाम की तरह इसका इस्तेमाल करती हैं। यह बहुत अधिक चिंताजनक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानदंडों के मुताबिक़ पंजाब के तकरीबन 202817 मर्द और 10658 औरत जीवन भर नशीले पदार्थों के सेवन में रहने के लिए आदि हो चुके हैं। डॉक्टर सुबोध कहते हैं कि बहुत सारी महिलाएं सामाजिक लांछन की वजह से सामने नहीं आती हैं।इसका साफ़ मतलब है कि नशे की लत से आदि हो चुकी महिलाओं की संख्या अधिक है,जो हमें दिखाई नहीं देती है।
 
''मेरी स्कूल जाने वाली बच्ची की वजह से मुझे नशीली दवाओं के बारें में पहली बार पता चला। सिर्फ तीन दिन के अंदर मुझे इसकी लत लग गयी''  यह शब्द 42 वर्षीय जसमीत के हैं । जसमीत जालंधर में रहने वाली एक घरेलू कामगार हैं। दिनभर घरों में काम करती थीं।  जीवन नीरस और मशीनी बन चुका था।  थकान और उबासी  का एहसास  हर वक्त होता  था। एक दिन उनकी लड़की ने उनसे कहा कि उसके पास एक ऐसी दवा है, जिससे थकान दूर हो जाएगी। इसके बाद जसमीत ने दवाई के नाम पर इंजेक्शन लेना शुरू किया। यह दवाई नहीं बल्कि हेरोइन का इंजेक्शन था। शुरुआत में जसमीत को इस दवा से बहुत अधिक राहत जैसा महसूस होता था। यह उनके बोरिंग काम को ताजगी भरने  का काम करने लगा। बाद में इस दवाई के डोज से शरीर अकड़ने लगा। लेकिन इस दवाई के रोजाना के एक डोज से जसमीत को दिनभर खुद को ऊर्जावान बनाये रखने में मदद मिलती थी और काम के बोझ में राहत का एहसास होता था।  उस समय जसमीत की मासिक कमाई 6 से 7 हजार रुपये थी। जसमीत  जब ड्रग्स की लत में डूब  गयी तो जसमीत की शारीरिक और मानसिक स्थिति बर्बादी के कागार पर जाने लगी।  जसमीत ने अपने घर के सामान को बेचना शुरू कर दिया। गहने बेचने से लेकर घर बेचने तक की नौबत आ गयी। जसमीत का पति ट्रक ड्राइवर है, हेरोइन की लत उसे भी लग चुकी है। अब हालत यह है कि जसमीत ,जसमीत के बेटी और जसमीत के पति तीनों नशीली दवाओं की आदत से छुटकारा पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। जसमीत और उनकी बेटी जालंधर से हर हफ्ते अपना इलाज कराने पंजाब के एकमात्र स्त्री नशा मुक्ति केंद्र कपूरथला जाती हैं और अपनी जिंदगी को नशे से मुक्त करने की जुगत में लगे हुए हैं।  पंजाब में सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या केवल 31 है लेकिन एकमात्र स्त्री नशा मुक्ति केंद्र केवल कपूरथला में है।
 
25 वर्षीय तारा एक शिक्षिका हैं। अपने दोस्तों की संगत में नशे की लत में पड़ती हैं। एक खुले और दिखावटी समाज में रूतबा पाने के लिए इस लत की शिकार बन जाती है। जब अपनी कमाई के पैसे ड्रग्स खरीदने में दिक्क्त आने लगी तो खुद एक ड्रग्स विक्रेता बन गई । इसके बाद तारा के साथ नारकीय जीवन की घटनाएं घटती हैं। जिनका जिक्र करना मुश्किल है। तारा के नशा मुक्ति में सहयोग करने वाले डॉक्टर भोला कहते हैं,औरतों के बीच ड्रग्स की लत की वजह से बुरे बर्ताव की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। सामाजिक लांछन और स्त्री नशा मुक्ति केंद्र के अभाव में ऐसी घटनाएं खुलकर सामने नहीं आ रही है। 
 
 नशा मुक्ति केंद्र के कॉउन्सलर मिंदर कहते हैं कि औरतों के साथ नशे की वजह से होने वाले बुरे बर्ताव की वारदात बढ़ती जा रही हैं।  कुछ साल पहले मुश्किल से ही किसी नशे की लत में पड़ चुकी औरत से पाला पड़ता था, लेकिन इधर के सालों में इस संख्या में भारी इजाफा हुआ है। नशे की लत में पड़ चुकी औरतें हर तरह की सामाजिक पृष्ठभूमि से सम्बंधित हैं। गरीब, अमीर, शिक्षित, अशिक्षित सभी वर्ग की औरतों का जुड़ाव नशे की लत से है। हालांकि सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में इलाज कराने वाली महिलाओं में सबसे अधिक संख्या गरीब और वेश्यावृत्ति से जुड़ी महिलाओं की है। अमीर घराने से जुड़ी महिलाएं प्राइवेट नशा मुक्ति केंद्र में इलाज करवाती हैं। इसके बाद उन महिलाओं की संख्या का कोई अता पता नहीं है जो समाज की दीवारें नहीं लांघ पाती हैं। जिनके साथ सामाजिक लांछना की हकीकत का डर चलता रहता है। एक औरत के लिए वह जिंदगी नरक के बरारबर होती है जब समाज उसे नशेड़ी मानकर बर्ताव करने लगता है। 
 
इन कहानियों से पंजाब की बदतरी का अंदाजा तो लगता ही है लेकिन साथ में उस क्रूरता का भी अंदाजा लगता है जो नशे की लत में जकड़ चुकी औरतों को सहन करनी पड़ती है। इससे निजात पाने का सबसे जरूरी तरीका तो यह है कि नशे के कारोबार पर हमला किया जाए ,इसे जड़ से खत्म करने की कोशिश की जाए। लेकिन केवल इसी जिम्मेदारी  से काम नहीं चलने वाला ,इसके साथ औरतों के लिए नशा मुक्ति केंद्र में इजाफा करना जरूरी है और एक इंसान के हिस्से में उन कामों को भी सौंपना होगा जिसमें रचनात्मकता का अंश होता है, उन लगावों की भी भागीदारी बढ़ानी होगी जिसमें दुनिया में उसका होना उसे  दुनिया के साथ अपनत्व का होना लगता रहे। 
 

punjab
drugs
Women
punjabi women

Related Stories

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश

5 वर्ष से कम उम्र के एनीमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, 67 फीसदी बच्चे प्रभावित: एनएफएचएस-5

त्रासदी और पाखंड के बीच फंसी पटियाला टकराव और बाद की घटनाएं

मोहाली में पुलिस मुख्यालय पर ग्रेनेड हमला

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे

मदर्स डे: प्यार का इज़हार भी ज़रूरी है


बाकी खबरें

  • Hijab controversy
    भाषा
    हिजाब विवाद: बेंगलुरु के कॉलेज ने सिख लड़की को पगड़ी हटाने को कहा
    24 Feb 2022
    सूत्रों के अनुसार, लड़की के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी पगड़ी नहीं हटायेगी और वे कानूनी राय ले रहे हैं, क्योंकि उच्च न्यायालय और सरकार के आदेश में सिख पगड़ी का उल्लेख नहीं है।
  • up elections
    असद रिज़वी
    लखनऊ में रोज़गार, महंगाई, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन रहे मतदाताओं के लिए बड़े मुद्दे
    24 Feb 2022
    लखनऊ में मतदाओं ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर वोट डाले। सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली बड़ा मुद्दा था। वहीं कोविड-19 प्रबंधन, कोविड-19 मुफ्त टीका,  मुफ्त अनाज वितरण पर लोगों की अलग-अलग…
  • M.G. Devasahayam
    सतीश भारतीय
    लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजाकर करती एम.जी देवसहायम की किताब ‘‘चुनावी लोकतंत्र‘‘
    24 Feb 2022
    ‘‘चुनावी लोकतंत्र?‘‘ किताब बताती है कि कैसे चुनावी प्रक्रियाओं की सत्यता को नष्ट करने के व्यवस्थित प्रयासों में तेजी आयी है और कैसे इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • Salempur
    विजय विनीत
    यूपी इलेक्शनः सलेमपुर में इस बार नहीं है मोदी लहर, मुकाबला मंडल-कमंडल के बीच होगा 
    24 Feb 2022
    देवरिया जिले की सलेमपुर सीट पर शहर और गावों के वोटर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। कोविड के दौर में योगी सरकार के दावे अपनी जगह है, लेकिन लोगों को याद है कि ऑक्सीजन की कमी और इलाज के अभाव में न जाने कितनों…
  • Inequality
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक असमानता: पूंजीवाद बनाम समाजवाद
    24 Feb 2022
    पूंजीवादी उत्पादन पद्धति के चलते पैदा हुई असमानता मानव इतिहास में अब तक पैदा हुई किसी भी असमानता के मुकाबले सबसे अधिक गहरी असमानता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License