NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
"प्रधानमंत्री का इंटरव्यू पढ़ते समय गूगल भी करते रहें"
इस तरह से डेटा को वैधानिकता प्रदान की जाती है। कोई बयान दे देता है वही डेटा बन जाता है। सत्य जानने का कोई ज़रिया नहीं है। सत्य को सिर्फ आप झूठ के फटे कुर्ते से झाँकते हुए देख सकते हैं।
रवीश कुमार
17 Apr 2019
स्क्रीन शॉट

प्रधानमंत्री का इंटरव्यू पढ़ते समय गूगल भी करते रहें, मज़ा आएगा

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इंटरव्यू में प्रधानमंत्री से मेक इन इंडिया की असफलता पर सवाल पूछा गया है। जवाब में वे सफल बताने के लिए तीन चार उदाहरण देते हैं। भारत में रक्षा ज़रूरतों के सामान के उत्पादन के लिए भारतीय कंपनियों से क़रार किया गया। वाराणसी में डीज़ल इंजन और अमेठी में राइफ़ल के उत्पाद का उदाहरण देते हैं। बताते हैं कि जापान से कार की कंपनियाँ भारत आकर कार बना रही हैं और उसका उत्पादन कर रही हैं। 2014 से पहले मोबाइल फोन बनाने की दो फ़ैक्ट्री थी जो अब 268 हो गई है। प्रधानमंत्री ने मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट शब्द का इस्तमाल किया है।

पिछले साल 17 अक्टूबर को हिन्दुस्तान टाइम्स के विनीत सचदेव की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2014 में चीन से 6.3 अरब डॉलर का मोबाइल आयात किया था जो 2017 में घट कर 3.3 अरब डॉलर का हो गया। आपको लगेगा कि यह तो बड़ी कामयाबी है। लेकिन दूसरे आंकड़े बताते हैं कि मोबाइल का पार्ट पुर्ज़ा का आयात काफी बढ़ गया है। बना बनाया नहीं आ रहा है लेकिन जहां 2014 में पार्ट-पुर्ज़ा का आयात 1.3 अरब डॉलर का ही हुआ था वो अब 2017 में 9.4 अरब डॉलर का हो गया है। इस तरह 2014 से 2017 के बीच मोबाइल और मोबाइल पार्ट-पुर्ज़ा का कुल आयात 7.6 अरब डॉलर से बढ़कर 12.7 अरब डॉलर हो गया।

57129659_1099059243625555_6809115656428978176_o.jpg

31 मई 2018 के फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस में खबर छपी है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी का बयान है कि 2014 में मोबाइल बनाने वाली दो कंपनियाँ थीं जो अब 120 हो गई हैं।

25 अक्तूबर 2018 को रायटर के हवाले से इकोनोमिक टाइम्स में ख़बर छपी है कि पिछले चार साल में 120 से अधिक मोबाइल मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट के कारण साढ़े चार लाख नौकरियाँ पैदा हुई हैं। रायटर ने यह आँकड़ा इंडियन सेलुलर इलेक्ट्रोनिक्स एसोसिएशन के हवाले से दिया है।

22 नवंबर 2018 को इंडियन सेलुलर इलेक्ट्रोनिक्स एसोसिएशन का बयान छपा है कि भारत में 268 मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट हो गई हैं। साढ़े छह लाख से अधिक नौकरियाँ मिली हैं।

यानी 31 मई 2018 से 22 नवंबर 2018 के बीच 148 फैक्ट्रियां आ गईं ! और ढाई लाख नौकरियाँ बढ़ जाती हैं।

57574609_1099059220292224_7005744134027739136_o.jpg

27 अगस्त 2016 को रविशंकर प्रसाद का बयान छपा है कि पिछले एक साल में 37 मोबाइल मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट लगी हैं। इस औसत से अगले तीन साल में 100 यूनिट का हिसाब बनता है।

इस तरह से डेटा को वैधानिकता प्रदान की जाती है। कोई बयान दे देता है वही डेटा बन जाता है। सत्य जानने का कोई ज़रिया नहीं है। सत्य को सिर्फ आप झूठ के फटे कुर्ते से झाँकते हुए देख सकते हैं।

वैसे भारत मोबाइल फोन उत्पादन में दूसरे नंबर का देश बन गया है। इसका ज़िक्र हर जगह आया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जापान की कार कंपनी यहाँ आकर कार बना रही है। मोदी कार्यकाल में कौन सी जापान की कार बनाने वाली कंपनी आई है और उत्पादन कर रही है, इसकी जानकारी आप भी पता करें। डैटसन आई है मगर उसकी पेरेंट कंपनी निसान पहले से है। प्रधानमंत्री लिस्ट दे सकते हैं कि कौन कौन सी कंपनी जापान से भारत आई है। उनके मंत्री ही बता दें। मारुति सुज़ूकी पहले से है जिसने अपना उत्पादन घटा दिया है। मीडिया में ज़रूर इस बात की रिपोर्ट मिली कि भारत से कार का निर्यात अच्छा है। मगर इसमें जापान की कंपनी का क्या रोल है, इस पर और स्पष्टता की ज़रूरत है।

प्रधानमंत्री अपने इंटरव्यू में साफ़ साफ़ की जगह तथ्यों को यहाँ वहाँ से मिला जुलाकर बोलते हैं । उनके हर बयान की जाँच करेंगे तो महीना गुज़र जाएगा। दुख भी होता है कि ये सब करना पड़ता है। इसीलिए कहता हूँ कि अखबार पढ़ने का तरीक़ा बदल लें। अख़बार पढ़ने से पढ़ना नहीं आ जाता है। वैसे भी अख़बारों में इस तरह से कोई रिसर्च छापता नहीं है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और टीवी एंकर हैं। उनकी ये टिप्पणी उनके फेसबुक पेज से साभार ली गई है।)

Narendra modi
Modi government
Employment
unemployment
MAKE IN INDIA
2019 आम चुनाव
General elections2019

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़

कार्टून क्लिक: चुनाव ख़तम-खेल शुरू...

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक


बाकी खबरें

  • Michael Vaughan
    भाषा
    नस्लवाद के आरोपों के बाद वॉन बीबीसी के शो से बाहर
    06 Nov 2021
    वॉन बीबीसी फाइव लाइव्स के शो ‘ द टफर्स एंड वॉन क्रिकेट शो ’ पर पिछले 12 साल से विशेषज्ञ के तौर पर काम कर रहे थे।
  • UN Security Council
    एपी
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इथियोपिया में संघर्ष तत्काल रोकने की अपील की
    06 Nov 2021
    परिषद ने इथियोपिया में तेज होते संघर्ष के प्रसार को रोकने और युद्ध प्रभावित टिगरे क्षेत्र में भुखमरी से निपटने के लिए निर्बाध मानवीय सहायता की अपील की।
  •  fire in Ahmednagar government hospital
    भाषा
    अहमदनगर के सरकारी अस्पताल में आग लगने से कोविड के 10 मरीज़ों की मौत
    06 Nov 2021
    अहमदनगर के जिलाधिकारी राजेंद्र भोसले ने पुष्टि की कि सरकारी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में आग लगने से 10 मरीजों की मौत हो गई और एक मरीज की हालत गंभीर है।
  • liquid
    पुष्यमित्र
    शराबबंदी के बाद भी क्यों सूख नहीं रहे बिहार की ग्रामीण महिलाओं के आंसू?
    06 Nov 2021
    क्या बिहार में शराबबंदी फेल है? और फेल है तो क्या नीतीश कुमार का यह फैसला गलत था? इन दिनों मीडिया में ये सवाल हर तरफ हैं। मगर इस पूरे डिबेट से वे महिलाएं गायब हैं, जिनकी पहल पर राज्य में शराबबंदी…
  • Leela Devi
    राहुल कुमार गौरव
    बिहार: जिस ई-श्रम कार्ड को बनाने में ही भ्रष्टाचार हो रहा है वो करोड़ों असंगठित मजदूरों की ज़िंदगी में बदलाव कैसे लाएगा?
    06 Nov 2021
    सरकारी दस्तावेज़ बनवाने में भारत के ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त भ्रष्टाचार का चलन है। श्रम कार्ड बनवाने को लेकर बिहार में जिस तरह की लूट मची हुई है, उसका एक नमूना आप यहां पढ़ सकते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License