NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पश्चिमी यूपी; आंकड़ों का विश्लेषण : गठबंधन को बड़ा फायदा
समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का गठबंधन इस क्षेत्र में निश्चित रूप से बीजेपी पर कड़ा दबाव बनाए हुए है, और इस तरह का दबाव बाक़ी पूरे राज्य में एक लहर पैदा कर सकता है जिसमें लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Apr 2019
elaction 2019

न्यूज़क्लिक द्वारा इकट्ठा किए गए चुनाव आयोग के आंकड़े जो 2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान जारी हुए थे, ये दर्शाते हैं कि तीनों विपक्षी पार्टियों को मिलने वाले वोट बीजेपी की आठ संसदीय सीटों में पांच के परिणाम को उलट सकते हैं। इन सीटों पर 11अप्रैल को मतदान हो रहा है। ये सीटे हैं ग़ाज़ियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, सहारनपुर, कैराना, मुज़फ़्फ़रनगर, बिजनौर, मेरठ और बागपत। बता दिया जाए कि 2014 में बीजेपी ने ये आठों सीटें जीती थीं। 

समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का गठबंधन इस क्षेत्र में निश्चित रूप से बीजेपी पर कड़ा दबाव बनाए हुए है, और इस तरह का दबाव बाक़ी पूरे राज्य में एक लहर पैदा कर सकता है जिसमें लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं। 

विभिन्न सामाजिक वर्गों का नेतृत्व करने के अलावा आम जनता में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार के ख़िलाफ़ बढ़ती हुई नाराज़गी ने इस गठबंधन को और मज़बूत किया है। बढ़ती बेरोज़गारी, फसल की कम होती कीमत, गन्ना किसानों का बढ़ता क़र्ज़,दलित समुदाय की नाराज़गी और बीजेपी की बाँटने वाली राजनीति ने उत्तर प्रदेश की कृषि-प्रधान भूमि की जनता को बीजेपी से दूर ले जाने का काम किया है। 

एक और न भुलाया जाने वाला सुबूत हमारे सामने कैराना में 2018 के उपचुनाव से आता है, जब रालोद के प्रत्याशी ने बीजेपी को कड़ी हार का सामना कराया था। तब इस गठबंधन का प्रयोग चल रहा था, और रालोद के प्रत्याशी को सपा और बसपा ने अपना समर्थन दिया था। बता दिया जाये कि 2014 के चुनावों में ये सीट बीजेपी पूरी शान से जीती थी। 

सिर्फ़ गणित ही नहीं, केमिस्ट्री भी

कई राजनीतिक विशेषज्ञों और फ़ील्ड रिपोर्टरों का मानना है कि सिर्फ़ गणित ही नहीं, केमिस्ट्री भी बीजेपी के विरोध में नज़र आ रही है। सरल शब्दों में कहें तो जनता की इस बढ़ती नाराज़गी की वजह से बीजेपी के वोटर इस दफ़ा गठबंधन के साथ आ जाएंगे, जिसे हराना वैसे भी मुश्किल लग रहा है। 

elaction 1_0.PNG

elaction 2_0.PNG

अगर हम ये अनुमान लगाएँ, कि बीजेपी के हिस्से से 2.5 प्रतिशत वोट गठबंधन के हिस्से में आ जाएँ, तो सत्ताधारी पार्टी इस क्षेत्र में महज़ दो सीटों पर सिमट कर रह जाएगी। ये दो सीटें- ग़ाज़ियाबाद और नोएडा (गौतम बुद्ध नगर)  विशिष्ट रूप से शहरी इलाक़े हैं, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अभी भी क़ायम है भले ही थोड़ी धुंधली क्यों ना हो। वास्तव में यहाँ पर भी कई स्थानीय निवासियों,ख़ास तौर पर ग्रामीण निवासियों का कहना है कि बीजेपी को यहाँ भी हार का सामना करना पड़ेगा। जेवर एयरपोर्ट और अन्य योजनाओं के लिए हुए भूमि अधिग्रहण और इन औद्योगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की असंतुष्टि को ग़ाज़ियाबाद   और नोएडा में बीजेपी की बढ़ती गिरावट की बड़ी वजह माना जा रहा है। 

हाल ही में इन क्षेत्रों में हुई दोनों  दलों की रैलियाँ भी मोदी की मौजूदगी के बावजूद बीजेपी के दुर्बल भाग्य को दर्शाती हैं। मोदी की रैलियाँ2014 के मुक़ाबले में काफ़ी छोटी और कम उत्साह वाली थीं। वहीं दूसरी तरफ़, बसपा की मायावती, सपा के अखिलेश यादव और रालोद के अजित सिंह की साझा रैलियों में भारी संख्या में जनता शामिल हुई है। 

elections 2019
2019 Lok Sabha elections
2019 Lok Sabha Polls
Western UP
BSP-SP alliance
BJP
Narendra modi
Yogi Adityanath
MAYAWATI

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • जितेन्द्र कुमार
    मुद्दा: बिखरती हुई सामाजिक न्याय की राजनीति
    11 Apr 2022
    कई टिप्पणीकारों के अनुसार राजनीति का यह ऐसा दौर है जिसमें राष्ट्रवाद, आर्थिकी और देश-समाज की बदहाली पर राज करेगा। लेकिन विभिन्न तरह की टिप्पणियों के बीच इतना तो तय है कि वर्तमान दौर की राजनीति ने…
  • एम.ओबैद
    नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग
    11 Apr 2022
    बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 ज़िलों के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुज़फ़्फ़रपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट…
  • रवि शंकर दुबे
    दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए
    11 Apr 2022
    रामनवमी और रमज़ान जैसे पर्व को बदनाम करने के लिए अराजक तत्व अपनी पूरी ताक़त झोंक रहे हैं, सियासत के शह में पल रहे कुछ लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को पूरी तरह से ध्वस्त करने में लगे हैं।
  • सुबोध वर्मा
    अमृत काल: बेरोज़गारी और कम भत्ते से परेशान जनता
    11 Apr 2022
    सीएमआईए के मुताबिक़, श्रम भागीदारी में तेज़ गिरावट आई है, बेरोज़गारी दर भी 7 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा ही बनी हुई है। साथ ही 2020-21 में औसत वार्षिक आय भी एक लाख सत्तर हजार रुपये के बेहद निचले स्तर पर…
  • JNU
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !
    11 Apr 2022
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दो साल बाद फिर हिंसा देखने को मिली जब कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संबद्ध छात्रों ने राम नवमी के अवसर कैम्पस में मांसाहार परोसे जाने का विरोध किया. जब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License