NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कानून
भारत
राजनीति
पेगासस जासूसी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई विशेषज्ञ समिति
पीठ ने कहा कि याचिकाओं में निजता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन जैसे आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच करने की ज़रूरत है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
27 Oct 2021
pegasus bench

नयी दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने इज़राइली स्पाईवेयर ‘पेगासस’ के जरिए भारतीय नागरिकों की कथित जासूसी के मामले की जांच के लिए बुधवार को विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि इस तीन सदस्यीय समिति की अगुवाई शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन करेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने विशेषज्ञों के पैनल से जल्द रिपोर्ट तैयार करने को कहा और मामले की आगे की सुनवाई आठ सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध की।

पीठ ने कहा कि याचिकाओं में निजता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन जैसे आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच करने की जरूरत है। 

ये याचिकाएं इज़राइल के स्पाइवेयर ‘पेगासस’ के जरिए सरकारी एजेंसियों द्वारा नागरिकों, राजनेताओं और पत्रकारों की कथित तौर पर जासूसी कराए जाने की खबरों की स्वतंत्र जांच के अनुरोध से जुड़ी हैं। 

केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें सरकार ने अपना एक्सपर्ट पैनल बनाने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा की सिर्फ बात करने से अदालत मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती। राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाने पर सरकार को हर बार छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह कमेंट इसलिए किया, क्योंकि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर affidavit में ज्यादा डिटेल देने से इनकार कर दिया था।

कोर्ट ने केंद्र की बीजेपी सरकार को इस मामले में कई फटकार लगाई है, आज भी कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार अपनी तरफ़ से स्थिति साफ़ कर देती तो हमारा बोझ हल्का होता।

पेगासस जासूसी विवाद का घटनाक्रम

पेगासस मामले से संबंधित घटनाक्रम इस प्रकार है:

18 जुलाई : विश्व स्तर पर कई समाचार संगठनों ने इजराइली कंपनी द्वारा बनाए गए स्पाइवेयर के जरिये भारत सहित दुनिया भर में पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, राजनेताओं की कथित जासूसी की खबर प्रकाशित की।

22 जुलाई: वकील एमएल शर्मा ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल कर अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल से मामले की जांच कराने की अपील की। 

27 जुलाई: पत्रकार एन राम और शशि कुमार ने मामले की स्वतंत्र जांच की अपील करते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

 5 अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई शुरू की।

 16 अगस्त: केंद्र ने एक संक्षिप्त हलफनामा दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि आरोप अनुमान और अपुष्ट मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं।

 17 अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया।

 13 सितंबर: उच्चतम न्यायालय ने आदेश सुरक्षित रखा।

 27 अक्टूबर: उच्चतम न्यायालय ने मामले की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की समिति नियुक्त की। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन इसके कामकाज की देखरेख करेंगे।

Spyware Pegasus
Pegasus Spying Scandal
Modi government
N. V. Ramana
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

एक्सप्लेनर: क्या है संविधान का अनुच्छेद 142, उसके दायरे और सीमाएं, जिसके तहत पेरारिवलन रिहा हुआ

राज्यपाल प्रतीकात्मक है, राज्य सरकार वास्तविकता है: उच्चतम न्यायालय

राजीव गांधी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

राजद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट: घोर अंधकार में रौशनी की किरण

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश

क्या लिव-इन संबंधों पर न्यायिक स्पष्टता की कमी है?

उच्चतम न्यायालय में चार अप्रैल से प्रत्यक्ष रूप से होगी सुनवाई


बाकी खबरें

  • दक्षिण अफ़्रीका के ट्रेड यूनियनिस्ट के हत्यारों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी
    पीपल्स डिस्पैच
    दक्षिण अफ़्रीका के ट्रेड यूनियनिस्ट के हत्यारों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी
    23 Aug 2021
    मालीबोंग्वे मडाजो जिन्होंने पांच खनन कंपनियों के 7,000 कर्मचारियों के हड़ताल का नेतृत्व किया था उनकी श्रम विवाद के बीच कमीशन फॉर कॉन्सिलिएशन, मेडिएशन एंड अर्बिट्रेशन (सीसीएमए) के दरवाज़े पर सरेआम…
  • कोरोना
    भाषा
    कोरोना अपडेट: देश में 25,072 नए मामले, 389 मरीज़ों की मौत
    23 Aug 2021
    करीब 160 दिन बाद उपचाराधीन मरीजों की संख्या सबसे कम दर्ज की गई है।
  • सुंदरवती महिला महाविद्यालय
    सोनिया यादव
    बिहार: चोटी के जरिये पितृसत्ता की बेड़ियों में नहीं बंधना चाहतीं भागलपुर कॉलेज की लड़कियां
    23 Aug 2021
    नए ड्रेस कोड के हर नियम पर छात्राओं की पूरी सहमति है लेकिन बालों में चोटी बांधने वाले फरमान पर उनमें भारी नाराजगी है। उनका मानना है कि यहां मामला मानसिकता का है, जो अब धीरे-धीरे मनुवाद की ओर ले जाने…
  • गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य को PASA के तहत डिटेंशन आदेश पारित करने से रोका
    सबरंग इंडिया
    गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य को PASA के तहत डिटेंशन आदेश पारित करने से रोका
    23 Aug 2021
    अदालत ने कहा कि नागरिकों को इस तरह से अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। जीएसटी अपराधों के ऐसे मामलों में, समान स्थिति वाले व्यापारियों के खिलाफ PASA नहीं लगाया जा सकता है।
  • sc
    भाषा
    वकीलों को वरिष्ठ का दर्जा देने संबंधी याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगा उच्चतम न्यायालय
    23 Aug 2021
    “वकीलों का दर्जा निर्दिष्ट समिति द्वारा दिए गए अंकों के आधार पर तय होना चाहिए और मतदान का सहारा केवल तब लिया जाना चाहिए जब कोई और रास्ता न हो। उच्च न्यायालय मतदान एक अपवाद के रूप में नहीं बल्कि एक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License