NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
बच्चों के दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले कीटनाशक को आखिरकार प्रतिबंधित किया जा सकेगा
अमेरिका में एक न्यायालय ने आदेश दिया है कि EPA को आवश्यक तौर पर विवादित कीटनाशक क्लोरोपायरिफोस पर प्रतिबंध लगाना होगा या फिर इसके सुरक्षित होने को साबित करना होगा।
रेनार्ड लोकी
15 May 2021
बच्चों के दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले कीटनाशक को आखिरकार प्रतिबंधित किया जा सकेगा

एक संघीय अपीलीय न्यायालय ने आदेश दिया है कि जब तक “पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी (EPA)” यह साबित नहीं कर देती कि क्लोरोपायरिफोस कीटनाशक का उपयोग सुरक्षित है, तब तक इसे प्रतिबंध किया जाना जरूरी है। क्लोरोपायरिफोस का कृषि फ़सलों में पिछले 50 सालों से खूब उपयोग होता आ रहा है। इसकी वज़ह से बच्चों में कई स्नायु विकास संबंधी दिक्कतें सामने आती हैं, जैसे, इस कीटनाशक की वज़ह से ऑटिज़्म, ADHD जैसी समस्याएं पैदा होती हैं, साथ ही गाड़ियों को चलाने की कुशलता और बौद्धिक क्षमता का ह्रास भी देखा गया है। 29 अप्रैल को 2-1 से दिए फ़ैसले में 9वें सर्किट के अमेरिकी अपीलीय न्यायालय ने आदेश दिया कि संघीय सरकार को 60 दिन के भीतर खाद्यान्न संबंधी क्लोरोपायरिफोस का सारा उपयोग रोकना होगा या फिर बताना होगा कि संबंधित मामलों में जनस्वास्थ्य के हिसाब से इसका उपयोग सुरक्षित है।

2007 में दाखिल किए गए "लीग ऑफ़ यूनाइटेड लेटिन अमेरिकन सिटीजन्स बनाम् रीगन" मामले में न्यायाधीश जेड राकॉफ़ ने लिखा, "EPA ने एक दशक से ज़्यादा वक़्त तक क्लोरोपायरिफोस के बुरे प्रभावों से संबंधित जानकारी को इकट्ठा किया है, संगठन लगातार इस नतीज़े पर पहुंचता रहा है कि कानून में जिस निश्चित्ता के पैमाने की जरूरत होती है, इस रिकॉर्ड के आधार पर अंतिम तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि क्लोरोपायरिफोस की मौजूदा मात्रा कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।" जेड रकॉफ़ ने यह भी कहा कि EPA द्वारा जांच में लिए गए ज़्यादा वक़्त के चलते अमेरिकी बच्चों की पूरी एक पीढ़ी क्लोरोपायरिफोस के ख़तरनाक प्रभावों की जद में आ गई।" ओबामा प्रशासन द्वारा ही नियुक्त किए गए न्यायाधीश जैकलीन न्गूयेन ने भी राकॉफ़ का समर्थन किया। 

राकॉफ़ ने एजेंसी से तुरंत इस केमिकल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहने से परहेज़ किया। लेकिन उन्होंने इतनी कड़ाई बरत दी कि इस केमिकल को बाज़ार में रखना बहुत मुश्किल हो गया। अपने नज़रिए में उन्होंने लिखा, "कीटनाशक को प्रतिबंधित करने या इन्हें नुकसानदेह ना होते के स्तर तक घटाने संबंधी कार्रवाईयों के बजाए, एक के बाद एक तरीके अपनाकर EPA अपने सांविधिक कर्तव्यों से बचता रहा. EPA को सबूतों के आधार पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और तुरंत क्लोरोपायरिफोस की मात्रा के स्तर में बदलाव करना चाहिए या इसे प्रतिबंधित करना चाहिए।" क्लोरोपायरिफोस से गर्भवती महिलाओं और उनके भ्रूण, युवा बच्चे और कृषि कामग़ार विशेष तौर पर ख़तरे में होते हैं। पहली बार इसका उपयोग 1965 में किया गया था।

“न्यूयॉर्क स्टेट अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स” के अध्यक्ष डॉ वारेन सीगल कहते हैं, “कुछ अध्ययनों में पता चला है कि मां के गर्भ में मौजूद बच्चे का अगर क्लोरोपायरिफोस से संपर्क हो जाए, तो इससे बच्चे के मस्तिष्क विकास में समस्या आती है। विज्ञान पूरी तरह स्पष्ट है, इस कीटनाशक को कई साल पहले ही प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए था।”

तीन न्यायाधीशों वाली पीठ में अलग विचार रखने वाले, जॉर्ड डब्ल्यू बुश द्वारा नियुक्त किए गए न्यायाधीश जे बायबी का कहना है कि कोर्ट के फ़ैसले से यह “सुनिश्चित” होगा कि EPA क्लोरोपायरोफिस के खाद्यान्न संबंधी आवेदनों को वापस लेने पर मजबूर हो जाए। बायबी का तर्क है कि उनके साथियों ने केमिकल के दोबारा परीक्षणों से जुड़े अधिकारों को “गलत समझा” है, जबकि पहले इसी केमिकल को इसी एजेंसी ने सही माना था। 

EPA फ़ैसले पर विचार कर रही है। एजेंसी ने एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा, “हम कृषि कामग़ारों और उनके परिवारों को मदद देने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस दौरान हम तय करते हैं कि देश की खेती के लिए कीटनाशकों का सुरक्षित ढंग से इस्तेमाल हो…. संघीय FIFRA एक्ट (इंसेक्टिसाइड, फंगीसाइड एंड रोडेंटिसाइड एक्ट) के तहत EPA अपने फ़ैसले लेने के प्रक्रिया में अच्छे विज्ञान का उपयोग करना जारी रखेगी।

यह फ़ैसला ट्रंप प्रशासन के उस फ़ैसले के दो साल बाद आया है, जिसमें उन्होंने ओबामा प्रशासन के दौरान विवादित कीटनाशकों पर प्रतिबंध के एक प्रस्ताव को रद्द कर दिया था। इस तरह ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण समूहों की चेतावनी के बावजूद इन विवादित कीटनाशकों को बाज़ार में रखने का फ़ैसला लिया था। जुलाई, 2019 में लिया गया ट्रंप प्रशासन का यह फ़ैसला डाउ केमिकल्स को बड़ा तोहफ़ा था, जो इस कीटनाशक का निर्माता है। यह एक लेन-देन का सौदा समझ आया था। क्योंकि 6 दिसंबर, 2016 के दिन, ट्रंप के राष्ट्रपति चुने के एक महीने के भीतर डाउ केमिकल्स ने उनकी विमोचन समिति को 1 मिलियन डॉलर दान में दिए थे। फिर 17 जनवरी, 2017 को ट्रंप के शपथ लेने से सिर्फ़ 3 दिन पहले डाउ ने EPA में ओबामा के दौर में कीटनाशक को प्रतिबंध करने वाले प्रस्ताव को खारिज़ करने के लिए आवेदन लगा दिया। 29 मार्च, 2017 को EPA प्रशासक स्कॉट प्रूइट ने इस प्रस्ताव को रद्द करने का ऐलान कर दिया। 
एक गैर-लाभकारी पर्यावरणीय समूह के अध्यक्ष केन कुक ने प्रूइट के फ़ैसले के बाद कहा, “अब हम जानते हैं कि ट्रंप और EPA का काम करने का तरीका क्या है। ट्रंप और उनके द्वारा EPA में नियुक्त राजनीतिक लोग दर्शाते हैं कि वे लोग वहां अमेरिका के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि प्रदूषणकर्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूद हैं। अगर आप भ्रष्ट घालमेल के लिए सबूतों की खोज कर रहे हैं, तो यहां यह आपके लिए प्रत्यक्ष मौजूद है।”

तो एक नया प्रशासन क्या बदलाव लाता है? अपने कार्यकाल के पहले दिन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए, EPA से क्लोरोपायरोफोस को प्रतिबंधित ना करने वाले ट्रंप प्रशासन के फ़ैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। इसकी बहुत कम संभावना है कि बाइडेन का EPA अब अपीलीय न्यायालय के फ़ैसले से संघर्ष करेगा। 

पर्यावरणीय और कृषि कामग़ारों ने कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है। यूनाइटेड फार्म वर्कर्स की अध्यक्ष टेरेसा रोमेरो ने फ़सैले पर कहा, “आज हम इस बड़ी जीत का जश्न उन पुरुषों और महिलाओं के साथ मिलकर मनाएंगे, जिन्होंने हमारी फ़सल की कटाई की है, जिन्होंने इस कीटनाशक पर प्रतिबंध के लिए लंबा इंतज़ार किया है। अब कृषि कामग़ारों और उनके परिवारों को यह चिंता नहीं करनी होगी कि इस कीटनाशक का उनकी जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ेगा।”

इस फ़ैसले से दूसरे कीटनाशकों, जैसे- निओनिकोटिनॉइड्स (जो मधुमक्खियों और कृषि में परागण करने वाले दूसरे जीवों के लिए घातक होते हैं) से जन स्वास्थ्य और पर्यावरण को होने वाले ख़तरों की तरफ़ भी ज़्यादा ध्यान केंद्रित हो सकता है। एक गैर-लाभकारी संगठन फ्रेंड्स ऑफ़ अर्थ ने एक आपात याचिका दाखिल की है, जिसमें अमेरिकी लोगों से अपने कांग्रेसी प्रतिनिधियों से “प्रोटेक्ट अमेरिकाज़ चिल्ड्रन फ्रॉम टोक्सिक पेस्टिसाइड एक्ट” को समर्थन देने की अपील करने के लिए कहा गया है। इस विधेयक को 2020 में सीनेटर टॉम उडाल और जो नेग्यूज़ (कोलरॉडो) ने पेश किया था।

इस विधेयक के ज़रिए FIFRA के तहत कीटनाशकों के वितरण, बिक्री और उपयोग के साथ-साथ कुछ बहुत ज़हरीले कीटनाशकों को प्रतिबंधित करने के विषय में EPA की शक्तियों को मजबूत किए जाने की बात है। इन ज़हरीले कीटनाशकों में नियोनिकोटिनॉइड्स, ओर्गेनाफॉस्फेट (फॉस्फोरस से बनने वाला कीटाणुमारक, जिसमें क्लोरोफायरिफोस भी शामिल है) और पैराक्यूआट शामिल हैं। पैराक्यूआट एक हर्बीसाइड है, जो श्वसन संबंधी बीमारियां फैलाता है, इस पर पहले ही 32 देशों में प्रतिबंध है।

क्या कीटनाशक वाकई जरूरी हैं? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि स्वाभाविक तौर पर फ़सलों के ऊपर ज़हरीले केमिकल के छिड़काव से नुकसान होता है, लेकिन कीटनाशकों को अगर ठीक ढंग से उपयोग किया जाए, तो इससे पर्यावरण के कुछ हिस्सों का संरक्षण किया जा सकता है। वर्जीनिया के फेरम कॉलेज में एग्रोनॉमी और एग्रीकल्चर साइंस के प्रोफ़ेसर टिम डरहम कहते हैं, “कीटनाशकों के ज़रिए हम बहुत छोटी सी ज़मीन पर भी अधिकतम उत्पादन कर सकते हैं। अगर हम कीटनाशकों को अलग कर देते हैं, तो हमें उसी काम को करने के लिए ज़्यादा बड़ी ज़मीनों की जरूरत होगी, फिर जिस ज़मीन पर ज़्यादा जैव विविधता रहेगी, उस पर ज़्यादा खतरा भी रहेगा। कृषि की अनिश्चित दुनिया में कीटनाशकों के ज़रिए निश्चित्ता आती है, जिससे वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहती हैं और किराना दुकानों में चीजों की कीमतें कम होती हैं।” डरहम, लांग द्वीप पर अपने परिवार की सब्ज़ियों की ज़मीन में हिस्सेदार भी हैं।

लेकिन जैविक खेती के कुछ पैरोकारों का कहना है कि केमिकल उपयोग पर आधारित पारंपरिक औद्योगिक कृषि दुनिया की पूरी आबादी के पोषण के लिए जरूरी नहीं है। बता दें जैविक खेती में कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता या फिर बेहद सीमित उपयोग होता है।
पेंसिल्वेनिया में जैविक कृषि शोध में सहायता देने वाला, कुट्जटॉउन स्थित गैर-लाभकारी संगठन रोडाल इंस्टीटयूट का कहना है, “यह मिथक कि जैविक खेती से दुनिया का पेट नहीं भरा जा सकता, झूठा है। जैविक खेती, पारंपरिक खेती से प्रतिस्पर्धा कर सकती है और प्रतिकूल मौसम में ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन भी कर सकती है। जैविक तरीकों का उपयोग करने वाले छोटे किसानों को पास वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाने की बहुत संभावना है और सिर्फ़ जैविक प्रक्रियाओं के ज़रिए ही सक्रिय ढंग से संसाधनों का पुनर्निर्माण और पर्यावरण की प्रदूषण व ज़हरीले अपशिष्ट पदार्थों से सुरक्षा होती है। एक स्वस्थ्य भविष्य के लिए, हम इससे कम में समझौता नहीं कर सकते।”

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

A Pesticide Linked to Brain Damage in Children Could Finally Be Banned

pesticides
Pesticide Pollution
Brain Damaged
Children
Environmental Protection Agency
EPA
FIFRA

Related Stories

तिरछी नज़र: प्रश्न पूछो, पर ज़रा ढंग से तो पूछो

यूनिसेफ रिपोर्ट: 80% भारतीय बच्चों ने माना कि महामारी के दौर में उनके सीखने का स्तर घटा

बच्चों और महिलाओं को कैसे मिले पोषण: देश में आंगनवाड़ी के 1.93 लाख पद खाली

दिल्ली में कोविड के कारण 2029 बच्चों ने माता-पिता दोनों या किसी एक को खो दिया: सर्वेक्षण

चिल्ड्रन ऑफ़ डार्कनेस : मैथिली शिवरामन

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर महामारी के दुष्प्रभाव 

कीटनाशक प्रदूषण के जोखिम की ज़द में विश्व के 64% कृषि क्षेत्र

दिल्ली की बस्तियों में 80 प्रतिशत छोटे बच्चे देखरेख और सुरक्षा से वंचित

हिमाचल प्रदेश : खेती में अलग तरह का बदलाव बना चिंता का कारण

बिहार : 14 दिन में 86 बच्चों की मौत और ‘सुशासन’ की कहानियां


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में क्यों पनपती है सांप्रदायिक राजनीति
    24 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले वहां सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत फिर से हो गयी है। सवाल यह है कि उप्र में नफ़रत फैलाना इतना आसान क्यों है? इसके पीछे छिपी है देश में पिछले दस सालों से बढ़ती बेरोज़गारी
  • night curfew
    रवि शंकर दुबे
    योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
    24 Dec 2021
    देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों…
  • kafeel khan
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोरखपुर ऑक्सिजन कांड का खुलासा करती डॉ. कफ़ील ख़ान की किताब
    24 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता डॉ कफ़ील ख़ान की नई किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy, A Doctor's Memoir of a Deadly Medical Crisis’ पर उनसे बात कर रहे हैं। कफ़ील…
  • KHURRAM
    अनीस ज़रगर
    मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की
    24 Dec 2021
    कई अधिकार संगठनों और उनके सहयोगियों ने परवेज़ की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को कश्मीर में आलोचकों को चुप कराने का ज़रिया क़रार दिया है।
  •  boiler explosion
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : दवाई बनाने वाली कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा, चपेट में आए आसपास घर बनाकर रह रहे श्रमिक
    24 Dec 2021
    गुजरात के वडोदरा में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसकी चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License