NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
फिर हादसा, फिर मौतें : लगातार ख़तरनाक़ होती जा रही हैं दिल्ली की फैक्ट्रियां
मोतीनगर की घटना कोई पहली घटना नहीं है। हमने पिछले सालों में देखा किस तरह से दिल्ली कि फैक्ट्रियां मजदूरों का जीवन लील रही हैं। पिछले साल 2018 की बात करें तो दिल्ली में फैक्ट्रियों में लगी आग की वजह से 30 से ज़्यादा मज़दूरों की मौत दर्ज़ की गई।
मुकुंद झा
04 Jan 2019
मोतीनगर फैक्ट्री में विस्फोट
Image Courtesy: Patrika

राजधानी दिल्ली में गुरुवार रात एक फैक्ट्री में विस्फोट में सात लोग मारे गए जबकि आठ घायल हो गए। विस्फोट के चलते इमारत भी ढह गई। दिल्ली में मजदूरों कि ऐसे हादसों में मौत अब गंभीर होती जा रही है। नये साल की ये पहली घटना है लेकिन पिछले साल हमने देखा कि 30 से अधिक मजदूरों की मौत फैक्ट्रियों में आग या अन्य कारणों से हुई। यह तो केवल वो मौतें और हादसे थे जो सबके सामने आ पाए। 
गुरुवार, 3 जनवरी की घटना पश्चिम दिल्ली के मोतीनगर के सुदर्शन पार्क इलाके में हुई। यहां दो मंजिला इमारत वाली फैक्ट्री में सीलिंग वाले पंखों की पेंटिंग का काम होता था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कंप्रेशर के फटने से इमारत का एक हिस्सा ढहा जिस कारण मजदूरों कि मौत हुई।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त समीर शर्मा ने बताया, "मरने वालों की संख्या अब सात है। एक अन्य घायल शख्स ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।"

उन्होंने कहा कि मृतकों में से छह की पहचान हो गई है। घायलों में फैक्ट्री का मालिक अंकित गुप्ता भी शामिल है।

शर्मा ने कहा कि हरियाणा के रोहतक के रहने वाले गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

दमकल की आठ गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर पाया कि विस्फोट के कारण छत और इमारत का एक हिस्सा ढह गया है। डीएफएस के एक अधिकारी ने भी कहा कि विस्फोट के चलते यह हादसा हुआ। मलबे से कुल 15 लोगों को बचाया गया।

यह कोई पहली घटना नहीं है। हमने पिछले सालों में देखा किस तरह से दिल्ली कि फैक्ट्रियां मजदूरों का जीवन लील रही हैं। पिछले साल 2018 की बात करें तो दिल्ली में फैक्ट्रियों में लगी आग की वजह से 30 से ज़्यादा मज़दूरों की मौत दर्ज़ की गई।

2018 के हादसे

20 जनवरी को बवाना औद्योगिक क्षेत्र की एक अनाधिकृत पटाखा फैक्ट्री में लगी आग में 17 मज़दूर जलकर मर गये। मरने वाले मज़दूरों में सात महिलाएँ थीं जिनमें से एक गर्भवती भी थी।

10 फरवरी को करोलबाग की एक कपड़े बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगने से एक मज़दूर की मौत हुई।

7 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नरेला के भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र की एक जूते बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगी जिसमें दो मज़दूरों की मौत हुई।

9 अप्रैल को दो बच्चों समेत चार मज़दूर उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके की एक जूते बनाने वाली गैरकानूनी फैक्ट्री में लगी आग में जलकर मारे गयेI

17 अप्रैल को नवादा की एक बर्तन की फैक्ट्री में लगी आग में दो मज़दूर मारे गयेI 

22 अप्रैल को दिल्ली के उत्तर-पूर्वी ज़िले शहादरा के गाँधी नगर इलाके में स्थित एक जींस बनाने की फैक्ट्री में आग लगी।

19 नवंबर को करोल बाग की एक फैक्ट्ररी में आग लगने से चार मज़दूरों की मौत हो गई।

26 दिसंबर को दिल्ली के उत्तर पश्चिम इलाके में हेलमेट बनाने वाली एक फैक्ट्री में आग लगने से एक मज़दूर की मौत हो गई थी।

ये जितनी भी घटनाएँ हुई हैं ज्यादतर फैक्ट्रियाँ अनाधिकृत क्षेत्रों के अनियंत्रित छोटे औद्योगकि क्षेत्रों में स्थित हैं। ज़्यादातर यह क्षेत्र निम्न-मध्य वर्ग या झुग्गी-झोपड़ी के रिहायशी इलाकों में हैं।

चूँकि यह फैक्ट्रियाँ गैरकानूनी तौर से चलाई जा रही होती हैं इसलिए यहाँ आग से बचने के कोई प्रबंध नहीं होते, न ही किसी श्रम कानून का पालन किया जाता हैं। यहाँ काम करने की परिस्थितियाँ भी बहुत ही खराब होती हैं। मजदूर यहाँ अमानवीय माहौल में काम करते हैं।

इन फैक्ट्रियों में मालिक मजदूरों को अंदर लॉक कर देते हैं जिससे किसी को पता न चले कि अंदर काम चल रहा है क्योंकि अधिकतर फैक्ट्रियां अवैध होती हैं। सुल्तानपुरी और नवादा की फैक्ट्रियों में ऐसा ही हुआ था। जब सुल्तानपुरी स्थित फैक्टरी में आग लगी तो उस समय उसमें 40 मज़दूर थेI

बवाना की फैक्ट्री में मज़दूरों को कथित तौर पर 10 घंटे की शिफ्ट के लिए 200 रुपये प्रतिदिन तक ही मिलते थे। सुल्तानपुरी की जूते की फैक्ट्री में मज़दूरों से रोज़ 10-12 घंटे की शिफ्ट करवाई जाती थी और उन्हें पीस रेट पर भुगतान किया जाता था यानी एक जूते की जोड़ी के लिए 30 रुपये।

आख़िरकार ऐसी घटनाएँ क्यों बढ़ती जा रही हैं? सरकार इस मामले में कर क्या रही है?

सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू), का कहना है की, “ऐसी घटनाएँ प्रशासन कि लापरवाही से होती हैं। भ्रष्ट अधिकारी जिनकी जिम्मेदारी है कि वो फैक्ट्री का इंस्पेक्शन करें और नियमों का लागू कराएं लेकिन अधिकारी भ्रष्ट हैं और प्राय: नियमों के उल्लंघन को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।”  

यूनियनों कि मांग है कि , “यह गैरकानूनी फैक्ट्रियाँ या तो बंद कर दी जानी चाहिए या इन्हें कहीं और शिफ्ट कर दिया जाना चाहिए। राज्य सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी फैक्ट्री अधिकृत औद्योगिक क्षेत्र के बाहर नहीं चल रही हो।

मज़दूर संगठनों के सामने चुनौती है कि वे असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को लामबंद करें और इन मुद्दों को और तीखे तौर पर उठाये।

देश की दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर मज़दूर 8-9 जनवरी को मजदूरों के हालात को बेहतर करने, उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के साथ ही उनके काम करने की जगह भी सुरक्षित हो, ऐसी 12 सूत्रीय मांग लेकर हड़ताल पर जा रहे है।

Delhi
Blast in factory
Delhi’s factory Fire
workers dead
Workers Strike

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • RRB NTPC
    एम.ओबैद
    बिहार आरआरबी-एनटीपीसी छात्र आंदोलनः महागठबंधन माले नेता ने कहा- ये सरकार लोकतंत्र विरोधी है
    28 Jan 2022
    "सरकार चाहती ही है कि देश में रोजगार समाप्त हो। पीएम मोदी और उनके मंत्री और पूर्ववर्ती रेल मंत्री पहले कहते रहे हैं कि देश में निजीकरण ज़रुरी है और रोज़गार तो पकौड़ा तलना है। बीजेपी की पकौड़ा तलने की…
  • bsp
    भाषा
    यूपी में सपा समर्थकों में लाल टोपी का चलन बढ़ा, बिक्री में भी इज़ाफ़ा
    28 Jan 2022
    लखनऊ में प्रचार सामग्री बेचने वाले बता रहे हैं कि रैलियों व जुलूस पर चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण बैनर व पोस्टर उतने नहीं बिक रहे जितनी सपा की ‘लाल टोपी’। 
  • Google Airtel
    भाषा
    भारती एयटेल में एक अरब डॉलर का निवेश करेगी गूगल, 1.28 फीसदी हिस्सेदारी भी खरीदेगी
    28 Jan 2022
    इस करार में इक्विटी निवेश के साथ-साथ संभावित वाणिज्यिक समझौतों के लिए एक कोष भी शामिल है, जिसके तहत समझौतों को अगले पांच वर्षों के दौरान पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों पर मंजूरी दी जाएगी। गूगल यह निवेश…
  • akhilesh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिना कारण बताए मेरे हेलीकॉप्‍टर को रोका गया, यह भाजपा की साज़िश : अखिलेश यादव
    28 Jan 2022
    अखिलेश ने आज दोपहर पहले ट्वीट किया कि उनके हेलीकॉप्टर को दिल्ली में रोक कर रखा गया है, फिर करीब 40 मिनट बाद बताया कि वे उड़ान भरने जा रहे हैं। इसे उन्होंने कुछ इन शब्दों में कहा- "हम जीत की ऐतिहासिक…
  • Xiomara
    पीपल्स डिस्पैच
    होंडुरास: राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ज़ियोमारा कास्त्रो बनेंगी राष्ट्रपति
    28 Jan 2022
    पारंपरिक रूढ़ीवादी वर्गों द्वारा कास्त्रो के होंडुरास में बदलावों वाले प्रस्तावों को रोकने के लिए कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में कास्त्रो के शपथ ग्रहण से पहले तनाव बढ़ रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License