NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
फिर मॉरल पुलिसिंग : छात्राओं को घुटने से लंबा कुर्ता पहनने का आदेश, विरोध के बाद  सर्कुलर वापस
हैदराबाद के सेंट फ़्रांसिस कॉलेज के प्रशासन ने छात्राओं से कहा है कि वो घुटने से ऊपर कुर्ते न पहन कर आएँ, क्योंकि इससे मर्द शिक्षकों का ध्यान भटकता है। ये फ़ैसला ऐसे वक़्त में आया, जब छात्राओं के संघर्ष के बाद बीएचयू में एक शिक्षक को यौन उत्पीड़न का आरोपित होने की वजह से 'लंबी छुट्टी' पर भेज दिया गया है।
सत्यम् तिवारी
16 Sep 2019
protest
Image courtesy:News State

देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समय-समय पर 'ड्रेस कोड' के नाम पर महिलाओं पर नियंत्रण रखने का सिलसिला कई वक़्त से जारी है और इस समय ये और भी तेज़ हो रहा है। हमने देखा है कि दिल्ली, बनारस से लेकर हैदराबाद तक कैसे छात्राओं को तथाकथित शिष्ट कपड़े पहनने के लिए कहा जाता रहा है। इसी सिलसिले में एक और घटना सामने आई हैदराबाद से। हैदराबाद के सेंट फ़्रांसिस कॉलेज का एक वीडियो दो दिन से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें छात्राओं के कपड़े चेक किए जा रहे हैं, और जिनके कुर्ते घुटने से ऊपर हैं, उनको क्लास में जाने की इजाज़त नहीं दी जा रही है।

आपको बता दें, कि कुछ दिनों पहले सेंट फ़्रांसिस कॉलेज की छात्राओं के बीच एक व्हाट्सऐप मैसेज फैलाया गया था, जिसमें कहा गया था कि जो छात्रा घुटने से ऊपर कुर्ता पहन कर कॉलेज आएगी, उसे कॉलेज में घुसने की इजाज़त नहीं दी जाएगी। इसके मुताल्लिक़ एक सर्कुलर (Circular) भी कॉलेज की तरफ़ से लाया गया था। इसकी तमाम ख़राब वजहात में से एक वजह ये बताई गई है कि ऐसे कपड़ों से मर्द टीचरों का ध्यान भटकता है और ये कपड़े शालीन नहीं हैं।

कॉलेज प्रशासन के इस फ़ैसले का सोशल मीडिया पर देशभर में विरोध किया गया और कॉलेज की छात्राओं ने इस फ़रमान को महिला-विरोधी और पितृसत्तात्मक बताया है।

विरोध प्रदर्शन के बाद फ़ैसला वापस

इस फ़ैसले का विरोध करते हुए सोमवार को छात्राओं ने कैम्पस में विरोध प्रदर्शन किया और जिस समय जब ये ख़बर लिखी जा रही है, कॉलेज की सड़कों पर 150 से ज़्यादा छात्राएँ प्लेकार्ड (Placard) लिए खड़ी हैं।

Hyderabad: Students of St. Francis College For Women protest against the new rule under which the students have been ordered to wear 'kurtis' below knee length while shorts, sleeveless or other similar dresses are banned in the campus. #Telangana pic.twitter.com/x6luaPuvRE

— ANI (@ANI) September 16, 2019

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कॉलेज की प्रिंसिपल सिस्टर सैंड्रा ने छात्राओं से मुलाक़ात की है और अब प्रशासन ने इस सर्कुलर को वापस लेने का फ़ैसला लिया है। आपको बता दें कि कॉलेज में पहले से एक ड्रेस कोड लागू है जो कि अपने आप में आपत्तिजनक है लेकिन छात्राएँ इसका पालन करती थीं। कॉलेज के प्रोस्पेक्टस में ये बात लिखी है कि छात्राओं को लंबी शर्ट, पैंट ही पहन कर आना है और छोटे कपड़े जैसे शॉर्ट्स या बिना बाज़ू के कपड़े प्रतिबंधित हैं। इस ड्रेस कोड के बाद साल के बीच में एक अन्य ड्रेस कोड लेकर आना और उसके ऐसे महिला-विरोधी कारण बताने की वजह से छात्राओं में ग़ुस्सा पैदा हो गया था।

Protest

सेंट फ़्रांसिस कॉलेज की पूर्व छात्रा ज़ैनोबिया तुम्बी (Zanobia Tumbi) ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "कॉलेज की छात्राएँ पहले से ही ड्रेस कोड के नियमों का पालन करती थीं लेकिन सिस्टर सैंड्रा साल के बीच में एक नया नियम ले कर आई हैं, और आप वीडियो में देख सकते हैं कि जिनकी कुर्ती घुटनों से ऊपर थी, उनको कॉलेज में घुसने नहीं दिया गया और घर भेज दिया गया। ऐसे माहौल में कोई कैसे पढ़ाई कर सकता है? जिन छात्राओं के पास नए कपड़े ख़रीदने के पैसे नहीं हैं, वो क्या करेंगी?"

आपको बता दें कि सेंट फ़्रांसिस के कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं के कपड़े चेक करने के लिए सेक्युर्टी गार्ड भी रखे हैं, आप वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे छात्राओं को और उनके माँ-बाप का भी निरादर किया जा रहा है।

ये अकेली घटना नहीं है कि किसी कॉलेज ने शिष्टाचार के नाम पर ख़ास तरह के पितृसत्तात्मक संस्कार छात्राओं पर थोपने का काम किया है। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालयों के कई कॉलेजों में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जिसमें छात्राओं को एक तरह का ड्रेस कोड पालन करने के निर्देश दिये गए हैं। 4 साल पहले इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली के एक कॉलेज विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ़ प्रोफ़ेशनल स्टडीज़ में भी ऐसा ही फ़रमान लागू हुआ था जब छात्र-छात्राओं दोनों के लिए ही विशेष ड्रेस कोड निर्धारित किए गए थे। छात्रों ने तब भी विरोध किया था।

इस तस्वीर को थोड़ा ज़ूम आउट करके देखने की ज़रूरत है। आप उस वजह को देखिये जो लंबे कुर्ते पहनने के लिए दी गई है। सेंट फ़्रांसिस के प्रशासन ने कहा था कि छात्राओं के 'ऐसे' कपड़ों से मर्द टीचरों का ध्यान भटकता है। आज, जब हैदराबाद की इस घटना की बात हो रही है, उसी समय छात्राओं के संघर्ष के बाद बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एक शिक्षक को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। इस शिक्षक पर यौन उत्पीड़न का आरोप है। जिसकी शिकायत कई छात्राओं ने की है।

ये सिर्फ़ बीएचयू ही नहीं, जामिया, डीयू, जेएनयू, Symbiosis, जैसे बड़े विश्वविद्यालयों से पिछले समय में ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं, जब शिक्षकों पर छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न के तमाम आरोप लगे हैं।

ऐसे में सेंट फ़्रांसिस कॉलेज के प्रशासन को किस पर नियंत्रण रखना चाहिए? छात्राओं पर या शिक्षकों पर?

पितृसत्ता की इसी सोच के तहत कभी ड्रेस कोड, कभी हॉस्टल में आने-जाने का वक़्त नियंत्रित करके छात्राओं को 'संस्कारी' बनाने के नाम पर उन पर क़ाबू पाने की कोशिशें अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों ने समय-समय पर की हैं। और दूसरी तरफ़ यहीं प्रशासन यौन उत्पीड़न करने वाले शिक्षकों को बचाने की भी भरपूर कोशिशें करता दिखता है।

इसका दूसरा पहलू ये भी देखने को मिलता है कि छात्राएँ लगातार इन हरकतों का विरोध करती रही हैं। जैसा कि आज सोमवार को ही हैदराबाद में हुआ है, कि छात्राओं के विरोध के बाद कॉलेज प्रशासन उनके आगे झुकने को मजबूर हो गया है।

Moral policing
Hyderabad
St. Francis College
Gender Equality
male dominant society
dress code
patriarchal society
BHU

Related Stories

एमपी ग़ज़ब है: अब दहेज ग़ैर क़ानूनी और वर्जित शब्द नहीं रह गया

सवाल: आख़िर लड़कियां ख़ुद को क्यों मानती हैं कमतर

बीएचयू में कौन खड़ा कर रहा शायर अल्लामा इक़बाल के पोस्टर पर बितंडा?

आख़िर क्यों सिर्फ़ कन्यादान, क्यों नहीं कन्यामान?

ओलंपिक में महिला खिलाड़ी: वर्तमान और भविष्य की चुनौतियां

क्या दहेज प्रथा कभी खत्म हो पाएगी?

बोलती लड़कियां, अपने अधिकारों के लिए लड़ती औरतें पितृसत्ता वाली सोच के लोगों को क्यों चुभती हैं?

महिला दिवस विशेष: क्या तुम जानते हो/ पुरुष से भिन्न/ एक स्त्री का एकांत

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: क़ाफ़िला ये चल पड़ा है, अब न रुकने पाएगा...

विशेष: प्रेम ही तो किया, क्या गुनाह कर दिया


बाकी खबरें

  • मालिनी सुब्रमण्यम
    छत्तीसगढ़ : युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों ने अपने दु:खद अनुभव को याद किया
    09 Mar 2022
    कई दिनों की शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलने के बाद, अंततः छात्र अपने घर लौटने कामयाब रहे।
  • EVM
    श्याम मीरा सिंह
    मतगणना से पहले अखिलेश यादव का बड़ा आरोप- 'बनारस में ट्रक में पकड़ीं गईं EVM, मुख्य सचिव जिलाधिकारियों को कर रहे फोन'
    08 Mar 2022
    पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव परिणामों में गड़बड़ी की आशंकाओं के बीच अपनी पार्टी और गठबंधन के कार्यकर्ताओं को चेताया है कि वे एक-एक विधानसभा पर नज़र रखें..
  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    मालिक महान है बस चमचों से परेशान है
    08 Mar 2022
    भारत एक मौज के इस एपिसोड में संजय राजौरा आज बात कर रहे हैं Ukraine और Russia के बीच चल रहे युद्ध के बारे में, के जहाँ एक तरफ स्टूडेंट्स यूक्रेन में अपनी जान बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार से सवाल…
  •  DBC
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों की हड़ताल 16वें दिन भी जारी, कहा- आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए
    08 Mar 2022
    DBC के कर्मचारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।  ये कर्मचारी 21 फरवरी से लगातार हड़ताल पर हैं। इस दौरान निगम के मेयर और आला अधिकारियो ने इनकी मांग पूरी करने का आश्वासन भी दिया। परन्तु…
  • Italy
    पीपल्स डिस्पैच
    इटली : डॉक्टरों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ हड़ताल की
    08 Mar 2022
    इटली के प्रमुख डॉक्टरों ने 1-2 मार्च को 48 घंटे की हड़ताल की थी, जिसमें उन्होंने अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की और स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ चेतवनी भी दी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License