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कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र
अजय सिंह की कविता अपने तौर पर एक चेतावनी है। साफ़ चेतावनी। जिसे बुलंद आवाज़ में पढ़ा और समझा जाना चाहिए।
न्यूज़क्लिक डेस्क
11 May 2022
PROTEST

अजय सिंह हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि हैं। और बेहद बेबाक और बेख़ौफ़। वे सीधी ज़बान में अपनी कविता की जरिये आज की हिन्दुत्ववादी फ़ासीवादी राजनीति और उसके नये हथियार बुलडोज़र की सच्चाई हमारे सामने रख देते हैं। यह कविता अपने तौर पर एक चेतावनी है। साफ़ चेतावनी जिसे बुलंद आवाज़ में पढ़ा और समझा जाना चाहिए।

हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

 

ग़ौर से देखिये

यह ऐरा-गैरा बुलडोज़र नहीं

हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र है

इस्लामोफ़ोबिया के मंत्र से

यह चलता है

मुसलमानों के मकानों   दुकानों   ठिकानों

को बनाता है अपना निशाना

मुसलमानों की

आत्मा और देह को

ज़मींदोज़ करना

इसका मुख्य मकसद है

 

(कुछ अन्य लोग भी

कभी-कभार

इसकी चपेट में आ जाते हैं

लेकिन इसका मुख्य निशाना

मुसलमान हैं)

(कार्टून सतीश आचार्य। साभार ट्विटर)

जिस तरह नाज़ी जर्मनी में

यहूदी बस्तियों की निशानदेही कर

उनका सफ़ाया किया गया

जिस तरह इज़रायली यहूदीवाद

फ़िलिस्तीन में

फ़िलिस्तीनी जनता का

सफ़ाया कर रहा है

और भयानक हिटलरी अपराध कर रहा है

वैसा ही सलूक

हिंदुस्तान में

हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

मुसलमानों के साथ

करने जा रहा है

 

यह बुलडोज़र

अलग-अलग तरीक़े से

देश के कई हिस्से में चल रहा है

 

यह बुलडोज़र शाहीन बाग़ में चल रहा है

यह बुलडोज़र जहांगीरपुरी   खरगोन में चल रहा है

यह बुलडोज़र उत्तर प्रदेश के

कई शहरों में चल रहा है

यह बुलडोज़र

दिल्ली फ़रवरी 2020 में चल चुका है

यह बुलडोज़र कई सालों से

कश्मीर में चल रहा है

हज़ारों कश्मीरी नौजवान

हलाक कर दिये गये हैं

हज़ारों कश्मीरी नौजवान

ग़ायब कर दिये गये हैं

अनगिनत कश्मीरी औरतों ने

सैन्य बलात्कार झेला है

यह बुलडोज़र

गुजरात में

मुसलमान मछुआरों पर चल रहा है

यह बुलडोज़र

दिल्ली की सरहदों पर

किसान जत्थेबंदी को कुचलने के लिए दौड़ा था

यह बुलडोज़र

भीमा कोरेगांव में चल रहा है

और मुंबई की जेलों में

राजनीतिक बंदियों पर चल रहा है

यह बुलडोज़र

बस्तर   गढ़चिरौली  नियमगिरि   पत्थलगढ़ी

में चल रहा है

यह बुलडोज़र

लक्षद्वीप में चल रहा है

यह बुलडोज़र

देश का नया झंडा है

संविधान   पार्लियामेंट   अदालतें   समाचार माध्यम

स्वेच्छा से

इस बुलडोज़र के ग़ुलाम बन चुके हैं

अदालतें तो ख़ास तौर पर

इस बुलडोज़र ने

चमचमाती संवैधानिक संस्थाओं के

खोखलेपन और दोगलेपन को

उजागर कर दिया है

इस बुलडोज़र की आवाज़

हिंदू राष्ट्रवाद की शैतानी आवाज़ है

हिंदुस्तान को नेस्तनाबूद करनेवाली

शैतानी आवाज़ है

 

जो लोग यह समझते हैं

कि हम मुसलमान नहीं हैं

इसलिए इस बुलडोज़र से बच जायेंगे

वे मुगालते में न रहें

कल उनकी भी बारी आयेगी

कहीं ज्यादा हिंसक तरीक़े से

याद रखिये

नाज़ी जर्मनी में

हज़ारों-हज़ार ग़ैर-यहूदी जर्मन नागरिक

बहुत बर्बर तरीक़े से मार डाले गये थे

जो नाज़ीवाद के विरोधी थे

जो नाज़ीवाद की हां-में-हां नहीं मिलाते थे

हिंदू राष्ट्रवाद-विरोधियों के साथ

यही सलूक

हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र करेगा

असहमति व विरोध की हर आवाज़

को कुचलेगा

 

फ़िज़ाओं में चेतावनी गूंज रही हैः

मुसलमानों का जनसंहार करने की

तैयारी चल रही है

हिंदू राष्ट्रवाद-विरोधियों का जनसंहार करने की

तैयारी चल रही है

 

तो फिर करना क्या है?

 

वही—

जो शाहीन बाग़ की बहादुर औरतों और मर्दों ने

9 मई 2022 को किया

वही—

जो कम्युनिस्ट नेता बृंदा करात ने

कुछ दिन पहले किया

सड़क पर उतरकर

बुलडोज़र के सामने खड़ी होकर

उसे रोक देना

संदेश बहुत स्पष्ट हैः

हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र को

रोकने के लिए

हमें सड़क पर उतरना है

हर गली कूचे मुहल्ले को

लड़ाई का मैदान

बना देना है

 

  • अजय सिंह

(लखनऊः 10.5.2022)

 

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