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बड़े पैमाने पर दमन के बावजूद इंडोनेशिया के "ओम्निबस लॉ" के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन तेज़
प्रदर्शनकारियों पर इंडोनेशिया की पुलिस द्वारा कड़ी कार्रवाई के बाद अब तक क़रीब 6000 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है, जबकि लगभग 300 लोग आपराधिक कार्यवाही का सामना करेंगे।
पीपल्स डिस्पैच
14 Oct 2020
Omnibus

सोमवार 12 अक्टूबर को इंडोनेशिया के विभिन्न हिस्सों में हजारों ट्रेड यूनियनिस्ट, छात्रों और आम नागरिकों ने प्रदर्शन किया और रैलियां निकाली। जकार्ता में राष्ट्रपति भवन के बाहर एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जो एक प्रमुख ट्रेड यूनियन कन्फेडरेशन ऑफ इंडोनेशियन वर्कर्स वेलफेयर यूनियन (केएसबीएसआई) द्वारा आयोजित किया गया था। राष्ट्रपति भवन के बाहर हुए प्रदर्शन में लगभग 1,000 से अधिक लोग शामिल हुए।

केएसबीएसआई के प्रतिनिधियों ने कहा कि ये प्रदर्शन ट्रेड यूनियनों द्वारा राष्ट्रव्यापी आह्वान का एक हिस्सा था, जो व्यापक रूप से अलोकप्रिय नौकरी सृजन कानून को वापस लेने की मांग करता है जिसे ओम्निबस लॉ भी कहा जाता है। केएसबीएसआई द्वारा आयोजित राजधानी के मेडन स्क्वायर के पास एक रैली भी निकाली गई, जिसमें प्रतिभागियों ने विरोध के चिन्हों के साथ बाइक चलाईं।

इंडोनेशिया ट्रेड यूनियन कन्फेडरेशन (केएसपीआई) के अध्यक्ष इकबाल ने कोम्पस को बोलते हुए कहा, "मजदूर संघ और श्रमिक संविधान के अनुसार व्यवस्थित तरीके से विरोध जारी रखेंगे।" सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हिंसा के आरोपों पर उन्होंने आगे कहा, "हम अहिंसक हैं, लेकिन हमें विरोध प्रदर्शन करने से न रोकें। हम इस नौकरी क़ानून के ख़िलाफ़ अपना विरोध जारी रखेंगे।” 

ये कानून 5 अक्टूबर को नेशनल एसेंबली द्वारा पारित होने के बाद से केएसपीआई, केएसबीएसआई और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडोनेशियन वर्कर्स यूनियन (केएसपीएसआई) एक सप्ताह से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसे ओम्निबस लॉ कहा जाता है क्योंकि इसने कई सारे क़ानूनों को रद्द कर दिया है। इसे मामूली विचार-विमर्श के साथ रिप्रेजेंटेटिव काउंसिल (संसद के निचले सदन) के माध्यम से पारित कर दिया गया।

इस क़ानून ने प्रमुख श्रम सुरक्षा कानूनों को रद्द कर दिया है जिसमें फेडेरल मिनिमम वेजेज शामिल है। साप्ताहिक छुट्टियों और भुगतान वाली छुट्टियों को काफी कम कर दिया गया है साथ ही सेवेरेंस पे में कटौती की गई है और इसके अलावा निजी निवेश के लिए कई प्रदूषणकारी और खतरनाक उद्योगों को भी खोल दिया गया है। सरकार ने दावा किया कि इस क़ानून के माध्यम से यह लाखों नौकरियां पैदा करेगा, यहां तक कि देश एक COVID-19 के चलते हुई मंदी से भी परेशान है। ट्रेड यूनियनों ने इस दावों को चुनौती दी है।

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License