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आंदोलन
अंतरराष्ट्रीय
थाईलैंड के प्रदर्शनकारियों पर योजनाबद्ध रैली से पहले सम्राट का अपमान करने का आरोप
15 प्रदर्शनकारियों को लेसे-मैजेस्टे आरोपों का सामना करने के लिए समन किया गया है। दोष सिद्ध होने पर 15 साल तक की जेल हो सकती है।
पीपल्स डिस्पैच
25 Nov 2020
thi

थाईलैंड की पुलिस ने घोषणा की है कि उसने थाई क्रिमिनल कोड के अनुच्छेद 112 के तहत लेसे-मैजेस्टे (सत्ता के ख़िलाफ़ अपराध) आरोपों का सामना करने के लिए बुधवार 25 नवंबर को 15 सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारियों को समन किया है। मंगलवार को दायर किए गए इस समन की घोषणा जनता के हाथो शाही गद्दी को सौंपने के लिए किंग वजीरालॉन्गकोर्न से आह्वान करने को लेकर योजनापद्ध प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले की गई। लगभग चार महीने के लंबे विरोध आंदोलन के सबसे प्रमुख लोगों को ये समन भेजा गया।

जिन लोगों को ये समन भेजा गया है उनमें मानवाधिकार वकील एनन नम्पा और छात्र कार्यकर्ता परित चिवारक, पानुपोंग चादनोक, तातेप रुनगप्राइकित्सेरे, पियारत चोंगथेप, पानुसाया सिथिजीरावट्टनाकुल, जुथाथिप सिरिकन और पसरावली थनाकितविबुलपुल शामिल हैं।

प्रदर्शन के दौरान राजा और शाही परिवार के सदस्यों के ख़िलाफ़ बयान देने को लेकर इन प्रदर्शनकारियों को 30 नवंबर तक इस समन का जवाब देने और अपने खिलाफ आरोपों को स्वीकार करने का समय दिया गया है। अनुच्छेद 112 के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 15 साल तक की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।

थाईलैंड में लेसे मैजेस्टे क़ानून इसके व्यापक दायरे और सजा देने वाले कड़े दंडों के लिए बदनाम है। इसके अलावा, आश्चर्यजनक रूप से दोषसिद्धी का उच्च दर और अनुच्छेद 112 के एक तिहाई से अधिक मामलों को सैन्य-नियंत्रित अदालतों द्वारा निपटाने की कोशिश की जाती है जो इस क़ानून को क्रमिक सैन्य शासन के हाथों का एक राजनीतिक उपकरण बनाता है।

नागरिकों के ख़िलाफ़ अनुच्छेद 112 का इस्तेमाल जुलाई 2017 के बाद से पहला ऐसा मामला होगा जिसे इस वर्ष जून में प्रधानमंत्री प्रयाग चान-ओ-चा की सरकार ने स्वीकार किया था कि एक नीति बनाई गई क्योंकि राजा के पास दया के अधिकार थे। इस सरकार ने निरंतर देशद्रोह जैसे दंडात्मक आरोपों के तहत कार्यकर्ताओं पर जुल्म ढ़ाया है। 20 नवंबर को प्रधानमंत्री ने इस नीति पर निर्णय वापस लिया और कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ "सभी कानूनों और अनुच्छेदों" का इस्तेमाल करेगी।

इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (एफआईडीएच) ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ लेसे-मैजेस्टे के इस्तेमाल की निंदा की। एफआईडीएच के महासचिव अदिलुर्रहमान खान ने कहा, "सैनिकों के अनावश्यक तथा असंगत इस्तेमाल के साथ शांतिपूर्ण लोकतंत्र-समर्थन प्रदर्शनों को रोकने में विफल करने के बाद थाई सरकार अब प्रदर्शनकारियों को चुप कराने के लिए लेसे-मैजेस्टे की का इस्तेमाल कर रही है।"

प्रारंभ में राजशाही की शक्तियों में बड़े सुधार का आह्वान करते हुए जुलाई महीने में थम्मासैट विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा आंदोलन शुरू किया गया था। छात्रों पर पुलिस दमन के बाद यह आंदोलन लोकतंत्र की वापसी और चान-ओ-चा सरकार के इस्तीफे के लिए एक राष्ट्रव्यापी आह्वान में बदल गया। ये सरकार 2014 के तख्तापलट के बाद पहली बार सत्ता में आया था।

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