NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजस्थान: लहसुन की ऊपज पर लागत से कम दाम मिलने पर 5 किसानों ने की आत्महत्या
पिछले साल जहाँ एक क्विंटल लहसुन की कीमत 2850 रुपये थी वहीँ आज लहसुन की कीमत 200 से 700 रुपये क्विंटल हो गयी है I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 May 2018
लहसुन

पिछले कुछ दिनों से राजस्थान से लगातार किसानों की खुद ख़ुशी की खबरें आ रही हैं I कल इस कड़ी में कोटा ज़िले के किसान हुकुमचंद मीणा का नाम भी जुड़ गया I हुकुमचंद मीणा के घर वालों के मुताबिक उन्होंने अपनी जान राज्य में लहसुन के दामों में भारी गिरावट की वजह से दी I उनके साले ने बताया कि एक रात पहले हुकुमचंद मीणा ने उन्हें फ़ोन किया और कहा कि उन्होंने ज़हर पी लिया है और वह उनकी बीवी और बच्चों का ख्याल रखें I इसके बाद हुकुमचंद बेहोशी की हालत में कोटा के ब्रिज नगर के खेत के पास मिले I उनकी मौत उसी दिन अस्पताल में हुई I

बताया जा रहा है कि लहसुन की कीमतों में लगातार गिरावट की वजह से हुकुमचंद की तरह ही पिछले कुछ दिनों में 4 और मौतें हुई हैं I

पिछले साल जहाँ एक क्विंटल लहसुन की कीमत 2850 रुपये थी वहीँ आज लहसुन की कीमत 200 से 700 रुपये क्विंटल हो गयी है I ये समस्या और भी भयावह रूप इसीलिए ले रही है क्योंकि इस साल लहसुन की बम्पर फसल हुई है I हालात ये हैं कि किसानों को लागत के आधे दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं I किसान नेताओं का कहना है कि सरकार ने एक क्विंटल लहसुन का दाम 3400 रुपये तय किया था लेकिन वह इस दाम पर लहसुन खरीद नहीं रही है I

वहीँ दूसरी तरह राजस्थान सरकार का कहना है कि ये मौतें लहसुन के दामों की वजह से नहीं हुई हैं I राजस्थान सरकार का कहना है Rajasthan State Co-operative Marketing Federation Ltd’s (RAJFED) के ज़रिये Market Intervention Scheme के अंतर्गत राजस्थान सरकार , किसानों से 3,256 रुपये पर एक क्विंटल लहसुन खरीद रही है I लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर ये योजना सच में किसानों तक पहुँच रही है तो फिर किसान आत्म हत्या क्यों कर रहे हैं ? मीडिया में कुछ रिपोर्टों के मुताबिक 12 मई तक RAJFED ने सिर्फ 1,482 मेट्रिक टन लहसुन ही किसानों से खरीदा जो कि उनके लक्ष्य का सिर्फ 1% है I वहीँ दूसरी लहसुन की उपज पिछले साल 3.77 लाख मेट्रिक टन से इस साल 7.7 लाख मेट्रिक टन तक बढ़ गयी है I

हुकुमचंद के घर वालों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हुकुमचंद ने RAJFED के अंतर्गत खुदको पंजीकृत कराया था लेकिन उसकी उपज बेचने की बारी उनकी मौत के बाद तक नहीं आयी I

हुकुमचंद की मौत के 12 घंटे बाद ही कोटा के पास बलदेवरा गाँव के 68 वर्षीय चतुर्वुज मीणा ने भी ज़हर खाकर आत्म हत्या कर ली I उनके घर वालों का कहना है कि उनकी मौत भी लहसुन के दाम तीव्रता से गिर जाने की वजह से हुई I रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अपनी भैंस बेचकर लहसुन की खेती की थी और दाम गिरजाने की वजह से उन्हें 60000 रुपये का भारी नुक्सान हुआ I लेकिन प्रशासन का कहना है कि मरने वाला शख्स किसान नहीं था और बताया जा रहा कारण गलत है I

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के राजस्थान महासचिव छगन चौधरी ने कहा “सरकार ने भाव तो बढ़ा दिया है लेकिन उन दामों पर खरीद नहीं कर रही है I किसानों को लागत से आधा मिल रहा है, यही आत्म हत्यायों का मुख्य कारण है I ये बात सच है कि राजस्थान में किसानों की आत्महत्या पहले कोई बड़ी समस्या नहीं थी I ऐसा इसीलिए क्योंकि यहाँ किसान बहुत विकट परिस्थितियों में जीता है और बहुत कम संसाधनों में खेती करता था I लेकिन पिछले कुछ सालों से कुछ इलाकों में खेती करने के लिए ज़्यादा संसाधन लगते हैं, ख़ासकर कपास और लहसुन की खेती में , इसीलिए किसान ठेके पर खेती करते हैं I यही वजह है कि जब नुकसान होता है तो किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाता है I”

राजस्थान में पिछले कुछ सालों से  किसान अखिल भारतीय किसान सभा कर्ज़ माफ़ी, लागत के डेढ़ गुना दाम की माँग , बिजली की बढती कीमतें के खिलाफ , किसानों की पेंशन और  स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को लागू कराने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं I पिछले साल सरकार ने किसानों की माँगे मान ली थीं लेकिन फिर सरकार पलट गयी , और किसानों ने फिर से इस साल इसके खिलाफ आन्दोलन किया I

लहसुन
लहसुन उपज
राजस्थान
MIS
CPI(M)
किसान

Related Stories

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

सिवनी : 2 आदिवासियों के हत्या में 9 गिरफ़्तार, विपक्ष ने कहा—राजनीतिक दबाव में मुख्य आरोपी अभी तक हैं बाहर

जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग

हिंदुत्व एजेंडे से उत्पन्न चुनौती का मुकाबला करने को तैयार है वाम: येचुरी

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

गैर-स्टार्टर स्मार्ट सिटी में शहरों में शिमला कोई अपवाद नहीं है

तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में चारों नगर निगमों में भारी जीत हासिल की

नया बजट जनता के हितों से दग़ाबाज़ी : सीपीआई-एम


बाकी खबरें

  • BJP
    अनिल जैन
    खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं
    01 May 2022
    राजस्थान में वसुंधरा खेमा उनके चेहरे पर अगला चुनाव लड़ने का दबाव बना रहा है, तो प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया से लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इसके खिलाफ है। ऐसी ही खींचतान महाराष्ट्र में भी…
  • ipta
    रवि शंकर दुबे
    समाज में सौहार्द की नई अलख जगा रही है इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा
    01 May 2022
    देश में फैली नफ़रत और धार्मिक उन्माद के ख़िलाफ़ भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मोहब्बत बांटने निकला है। देशभर के गावों और शहरों में घूम कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन किए जा रहे हैं।
  • प्रेम कुमार
    प्रधानमंत्री जी! पहले 4 करोड़ अंडरट्रायल कैदियों को न्याय जरूरी है! 
    01 May 2022
    4 करोड़ मामले ट्रायल कोर्ट में लंबित हैं तो न्याय व्यवस्था की पोल खुल जाती है। हाईकोर्ट में 40 लाख दीवानी मामले और 16 लाख आपराधिक मामले जुड़कर 56 लाख हो जाते हैं जो लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट की…
  • आज का कार्टून
    दिन-तारीख़ कई, लेकिन सबसे ख़ास एक मई
    01 May 2022
    कार्टूनिस्ट इरफ़ान की नज़र में एक मई का मतलब।
  • राज वाल्मीकि
    ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना
    01 May 2022
    “मालिक हम से दस से बारह घंटे काम लेता है। मशीन पर खड़े होकर काम करना पड़ता है। मेरे घुटनों में दर्द रहने लगा है। आठ घंटे की मजदूरी के आठ-नौ हजार रुपये तनखा देता है। चार घंटे ओवर टाइम करनी पड़ती है तब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License