NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
राजस्थानः एम्प्लॉयमेंट जेनेरेशन के मामले में स्थिति बेहद ख़राब
एनसीएस में पंजीकृत आंकड़ों के अनुसार इस राज्य से नौकरी तलाशने वालों की कुल संख्या 8,57,316 है, जबकि राज्य में नौकरी के लिए पदों की कुल संख्या (सभी क्षेत्रों में) केवल 12,854 है।
तारिक अनवर
08 Nov 2018
rajasthan elections 2018

वर्ष 2009-10 के दौरान बेरोज़गारी के मामले में राजस्थान का स्थान भारतीय राज्यों में से एक था। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से रोज़गार की स्थिति पर सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन एम्प्लॉयमेंट जेनेरेशन (नये रोज़गार पैदा करना) की बात करें तो इस राज्य की स्थिति बेहद ख़राब है। इसका अंदाज़ा विभिन्न संस्थानों की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है।

केंद्रीय श्रम तथा रोज़गार मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) के तहत पंजीकृत नौकरी तलाशने वालों की कुल संख्या 31 मार्च, 2018 तक राजस्थान में 8,57,316 है जबकि रिक्त नौकरियों की उपलब्ध कुल संख्या राज्य में (सभी क्षेत्रों) महज़ 12,854 है। इसका मतलब है कि राज्य कुल बेरोज़गारों में सिर्फ 1% को ही रोज़गार दे सकता है। यह राज्य में युवाओं की भयावह स्थिति की ओर इशारा करता है।

न्यूज़़क्लिक से बात करते हुए अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अमित ने कहा कि साल 2012 में राज्य में बेरोज़गारी दर 3.2% था जो साल 2015 में 7.1% हो गया। सेंटर फॉर मॉनीटरिंग द इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार साल 2018 में स्थिति उस वक़्त बेहद ख़राब हो गई जब बेरोज़गारी दर 7.7% तक बढ़ गई।

सीएमआईई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश व्यास कहते हैं कि श्रम भागीदारी - नियोजित या सक्रिय रूप से काम की तलाश करने वाले लोगों की संख्या - नोटबंदी के बाद लेबर पूल 41-42 प्रतिशत तक गिर गया, जो पहले लगभग 47 प्रतिशत था।

31 मार्च, 2017 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए राजस्थान के सामान्य तथा सामाजिक क्षेत्र पर भारत के नियंत्रक तथा महालेखापरीक्षक (सीएजी) की एक रिपोर्ट खुलासा करती है कि राजस्थान में चल रहे तीन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने 2014-17 के दौरान अपने प्रशिक्षण लक्ष्यों में आधा से भी कम हासिल किया।

कुल प्रशिक्षित युवाओं में से केवल एक तिहाई से कुछ अधिक युवाओं को ही नौकरी मिली। केवल 37.45 प्रतिशत प्लेसमेंट सत्य पाए गए।

राज्य के कौशल विकास की नोडल एजेंसी राजस्थान कौशल तथा आजीविका विकास निगम (आरएसएलडीसी) द्वारा संचालित ये तीन कार्यक्रम हैं: (ए) नियमित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम (आरएसटीपी) - जिसका उद्देश्य लोगों को स्व-रोज़गार के लिए प्रशिक्षण देना, (बी) एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम (ईएलएसटीपी) - युवाओं को विभिन्न कौशल क्षेत्र में प्रशिक्षित करना तथा (सी) पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयू-जीकेवाई) - ग्रामीण ग़रीबों के लिए एक केंद्र प्रायोजित कौशल योजना।

2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की आबादी में युवाओं का एक बड़ा हिस्सा है। राज्य की जनसंख्या का 55 प्रतिशत 25 साल से कम के युवाओं का है। और इसी जनगणना के अनुसार राज्य में 33 लाख बेरोज़गार युवा थे। राज्य में रोज़गार और आजीविका प्रदान करने के लिए कौशल विकास योजनाओं को प्रमुख के रूप में बढ़ावा दिया गया है।

वास्तव में सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014-17 के दौरान उक्त तीन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर 189.87 करोड़ रुपए ख़र्च किया गया था।

साल 2013 में अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने युवाओं को 15 लाख नौकरी देने का वादा किया था। जयपुर के एक्टिविस्ट कमल कुमार ने कहा, "सरकार अपना पांच साल पूरा करने जा रही है। भाजपा द्वारा किए गए 15 लाख नौकरियों के वादे का क्या हुआ?"

साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम

वर्तमान में राजस्थान में 90,000 से अधिक स्कूल, 64 इंजीनियरिंग कॉलेज, 40 पॉलिटेक्निक, 430 आईटीआई और 75 एमबीए संस्थानें हैं। पॉलिटेक्निक तथा आईटीआई में शिफ्ट सिस्टम चलाया जाता है। राज्य में 20,755 स्नातक इंजीनियरिंग सीट, 6,890 डिप्लोमा सीट, और 43,824 आईटीआई सीट हैं।


ये सीट महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सीटों की संख्या से काफी कम हैं।

इसके अलावा राजस्थान की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम है। राष्ट्रीय औसत 74.04 प्रतिशत की तुलना में इसकी साक्षरता दर 67.06 प्रतिशत है।

राइट टू एजुकेशन के एक्टिविस्ट मुकेश निर्वासित कहते हैं कि राज्य सरकार ने हजारों प्राथमिक विद्यालयों को उक्त क्षेत्रों में माध्यमिक विद्यालयों के साथ विलय करने के लिए बंद कर दिया है, लेकिन बच्चे ज़्यादा दूरी की वजह से उच्च विद्यालय जाने में असमर्थ हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस निर्णय ने गरीबों और हाशिए पर मौजूद बच्चों के लिए शिक्षा प्राप्त करने की पहुंच को कम कर दिया है।

वर्ष 2014 में वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने राज्य में 80,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में से 17,000 स्कूलों का अन्य स्कूलों में विलय कर दिया।

नामांकन की संख्या में कमी या आसपास के अन्य स्कूलों की उपस्थिति के चलते कई स्कूल बंद कर दिए गए, और उनके कर्मचारियों और छात्रों को स्थानांतरित कर दिया गया। सरकार के इस फैसले के विरोध के बाद लगभग 4,000 स्कूलों के विलय को रद्द कर दिया गया। लेकिन विलय की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

Rajasthan
rajasthan government
Rajasthan elections 2018
unemployment
BJP
Vasundhara Raje Government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • water rural india
    विक्रम सिंह
    सभी के लिए घर : एक बुनियादी जरूरत, लेकिन ग्रामीण भारत में ज़्यादातर लोगों के लिए दूर की कौड़ी
    07 Jan 2022
    आवास की समस्या हर इंसान की प्राथमिक चिंता है और किसी भी विकास मॉडल में यह केंद्र में होनी चाहिए। फिर भी, पिछली सरकारों के लिए आवास योजनाएं सिर्फ़ प्रोपगेंडा का साधन बन रहीं, जबकि आवासहीन लोगों की…
  • modi
    अजय कुमार
    लोग हिंदुत्व के झांसे में फंसे हैं और बैंक में रखी उनकी मेहनत की कमाई ल़ूटी जा रही है!
    07 Jan 2022
    बैंकों में जमा हमारी मेहनत की कमाई पर आखिरकार ब्याज बहुत कम क्यों मिलता है?
  • bulli bai
    गौरी आनंद, हिंदुजा वर्मा
    बुल्ली बाई और साइबर हिंसा : शक्ति असंतुलन का एक उदाहरण
    07 Jan 2022
    सभी उदाहरणों में, ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय की मुखर महिलाओं को सूचीबद्ध किया गया है, और उनकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई है। 
  • Bihar Municipal Elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार नगर निकाय चुनावः मेयर-डिप्टी मेयर और सभापति-उपसभापति का चुनाव अब मतदाता करेंगे
    07 Jan 2022
    इस बदलाव को लेकर नगरपालिका एक्ट में संशोधन का अध्यादेश राजभवन से विधि विभाग को भेज दिया गया है। पहले इनका चुनाव वार्ड पार्षदों के द्वारा किया जाता था।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    नीट-पीजी आरक्षण पर SC का फ़ैसला, एक दिन में 1 लाख से ज़्यादा कोरोना मामले और अन्य ख़बरें
    07 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे नीट-पीजी में आरक्षण का SC का फ़ैसला, कोरोना के मामले बेकाबू रफ़्तार से बढ़ते हुए और अन्य ख़बरों के बारे में।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License