NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
रुबेला से डर, लेकिन डॉक्टरों ने कहा- टीका पूरी तरह सुरक्षित
यूपी राज्य चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बच्चों की मौत और तबीयत खराब होने के सवाल पर न्यूज़क्लिक को बताया कि "बच्चों की मौत की कुछ और वजह हो सकती है; सिर्फ टीके की वजह से मौत होना संभव नहीं लगता।"
नवीन कुमार वर्मा
10 Dec 2018
rubella
Image Courtesy: Hindustan

मनुष्य विज्ञान और मेडिकल क्षेत्र में तेज़ी से तरक्की कर रहा है, परिणाम स्वरूप हम पुरानी बीमारियों पर विजय पाते जा रहे हैं लेकिन साथ ही नई-नई बीमारियां भी पैदा हो रही हैं। हर कुछ दिनों के बाद हम एक नये वायरस के बारे में सुनते हैं। अभी "निपाह" वायरस का डर लोगों के मन से उतरा नहीं था कि अब रुबेला ने लोगों को आतंकित कर रखा है। 

रुबेला से उत्पन्न डर का आलम यह है कि देश के कई राज्यों में बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। राज्य सरकारों द्वारा लोगों को रुबेला के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर और पीलीभीत के स्कूल में 2 बच्चों की रुबेला का टीका लगने के बाद हुई मौत के बाद रुबेला वैक्सीन से  संबंधित ऐसी कई घटनाएं लगातार सुनने में आ रही हैं। कहीं बच्चें टीके के बाद बेहोश हो रहे हैं तो कुछ चक्कर आने की शिकायत कर रहे हैं। तबीयत बिगड़ने के बाद 35 से ज्यादा छात्रों को शाहजहांपुर में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चों की तबीयत खराब होने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) का मीडिया से कहना है कि "ऐसी घटनाएं बच्चों को खाली पेट टीका देने के कारण हुई हैं। टीका देने से पहले कई एहतियात बरतने की जरूरत होती है। यह जांच का विषय है कि इन सभी जगहों पर एहतियात बरती गई या नहीं।"

वहीं जिला टीकाकरण अधिकारी ने मीडिया को बताया कि "रुबेला का टीका 100 फीसदी सुरक्षित है परंतु जो बच्चे बीमार हैं या जिनका बीमारी का कोई इतिहास रहा है उनको टीके से कुछ छोटी-छोटी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।"

जिस प्रकार रुबेला के टीकों से बच्चों की तबीयत खराब से लेकर मौत तक की खबरें आ रही हैं उससे माता-पिता संशय की स्थिति में हैं कि वे बच्चों को रुबेला का टीका लगवाएं या नहीं। आपको बता दें कि यूपी समेत कई राज्यों में ये टीकाकरण स्कूली स्तर पर तेज़ी से चलाया जा रहा है। स्कूलों में दिया जा रहा टीका बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक तो नहीं? ऐसे कई सवाल माता-पिता के मन में कौंध रहे हैं तो आईए जानते हैं रुबेला के बारे में।

क्या है रुबेला?

रुबेला एक संक्रामक रोग है। जो जीन्स रुबिवायरस के वायरस द्वारा होता है। हालांकि रुबेला को कभी-कभी “जर्मन खसरा” भी कहते हैं, परंतु रुबेला वायरस का खसरा वायरस से कोई संबंध नहीं है। यह रोग वर्तमान में सबसे अधिक तेजी से फैलने वाले रोगों में शामिल है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में वर्ष 2012 में लगभग एक लाख रुबेला मामले सामने आए। 2012 में सबसे अधिक मामलों वाले देशों में टिमोर-लेस्ट, मेसिडोनिया, थाइलैंड, ताजिकिस्तान और सीरिया जैसे देश शामिल हैं। 

लक्षण

अगर रुबेला के लक्षणों की बात करें तो रुबेला के मुख्य लक्षणों में शामिल हैं 100 डिग्री या उससे अधिक का बुखार, मिचली आना और प्रमुख रूप से गुलाबी या लाल चकत्तों के निशान उत्पन्न होते हैं। चकत्ते प्राय: चेहरे पर निकलते हैं, और नीचे की ओर फैलते जाते हैं। जो 1-3 दिनों तक रहते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 2-3 दिनों के बाद चकत्ते निकलते हैं।

रुबेला के लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं। इसकी जटिलताएं बच्चों की तुलना में वयस्कों में अधिक होती हैं, और इसमें अर्थराइटिस, एंसेफेलाइटिस और न्युराइटिस शामिल हैं। रुबेला विशिष्ट रूप से विकसित हो रहे भ्रूण के लिए खतरनाक होता है।

रोग का प्रमुख खतरा है कन्जेनिटल रुबेला सिंड्रोम (CRS) अर्थात् किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान रुबेला संक्रमण होने पर, यह संक्रमण विकसित हो रहे भ्रूण तक पहुंच सकता है। ऐसी गर्भावस्थाओं को सहज गर्भपात या अपरिपक्व जन्म का जोखिम होता है। यदि भ्रूण बच जाता है, तो बच्चे को भारी रूप से जन्म संबंधी विकृतियां हो सकती हैं, जिसमें बहरापन, आंखों की खराबी, हृदय संबंधी समस्याएं,  और अन्य असामान्यताएं हो सकती हैं। 

उपचार

अगर हम उपचार की बात करें तो रुबेला का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार टीकाकरण एक उपचार हो सकता है। रुबेला का टीका एक सक्रिय दुर्बलीकृत रुबेला वायरस पर आधारित है जिसका प्रयोग 40 वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। टीके की एक खुराक से जीवन भर प्रतिरक्षण प्राप्त किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश राज्य चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने न्यूज़क्लिक को बातचीत में बताया कि "रुबेला का टीका पूरी तरह सुरक्षित है। इससे किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं होता। माता-पिता को बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है।" 2 बच्चों की मौत और 25 बच्चों की तबीयत खराब होने संबंधित सवाल पर अधिकारियों ने बताया कि "बच्चों की मौत की कुछ और वजह हो सकती है ; सिर्फ टीके की वजह से मौत होना संभव नहीं लगता।"

ग्रेटर नोएडा के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. कमल भूषण ने न्यूज़क्लिक को बताया कि "रुबेला एक गंभीर बीमारी है जिसमें लापरवाही बरतने से रोगी की मौत तक हो सकती है। मगर रुबेला वैक्सीन की वजह से बीमारी को रोका जा सकता है। यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और माता-पिता को इसको लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।" 

 

rubella
rubella virus
rubella vaccine
rubella vaccine side effects
German measles
Healthcare in India
WHO

Related Stories

समझें: क्या हैं कोरोना वायरस के अलग-अलग वेरिएंट

कोरोना वैक्सीन से जुड़ी यह मूलभूत बातें जानिए और अफवाहों को कोसों दूर रखिए!

वैक्सीन युद्ध, आसियान और क्वॉड

ट्रांस फैट: ‘वसा’ परिवार की काली भेड़

कोरोना के इलाज को लेकर कैसी चल रही है दुनिया की लड़ाई?

कोरोनो वायरस की कितनी बड़ी कीमत चुकाएगी दुनिया?

लक्षण नज़र आने से पहले ही फैल चुका होता है कोरोना वायरस : अध्ययन

कोरोना वायरस अपडेट :  देश और दुनिया में इसको लेकर बृहस्पतिवार को क्या रहा घटनाक्रम ?

कोरोनावायरस : महामारी घोषित  

क्या सच में कोरोना वायरस से लड़ने में भारत गंभीर है?  


बाकी खबरें

  • Ashish mishra
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर हत्याकांड: 12 घंटे की लंबी (नाटकीय) पूछताछ के बाद आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी, कोर्ट ने जेल भेजा
    10 Oct 2021
    पुलिस का कहना है कि आशीष मिश्रा जांच में सहयोग नहीं कर रहा था, इसलिए उसे अरेस्ट कर लिया गया है। इसके बाद हत्यारोपी आशीष मिश्रा को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने आशीष मिश्रा को 14 दिन की…
  • Mental Health
    वर्षा सिंह
    गैर-बराबरी वाले समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय का मानसिक स्वास्थ्य
    10 Oct 2021
    “12-13-14 की उम्र में अपने शरीर और मन के बदलावों से गुज़र रहे ट्रांसजेंडर बच्चे को काउसिंलिंग की जरूरत होती है। परिवार सपोर्ट नहीं करता। हमारा स्वभाव, व्यवहार, अभिव्यक्ति अलग होते हैं। परिवारवाले…
  • BOOKS
    अजय सिंह
    समीक्षा: तीन किताबों पर संक्षेप में
    10 Oct 2021
    ‘गूंगी रुलाई का कोरस’, ‘पत्रकारिता का अंधा युग’ और ‘हवेली’ इन तीन किताबों पर वरिष्ठ कवि और लेखक अजय सिंह की संक्षिप्त टिप्पणी।
  • Squid Game
    मुकुल सरल
    Squid Game : पूंजीवाद का क्रूर खेल
    10 Oct 2021
    कुछ लोगों के पास इतना ज़्यादा है कि वे बोर होकर एक विद्रूप रचते हैं। दूसरे वो आम लोग हैं जो अपनी ज़िंदगी जीने के लिए क़र्ज़ के जाल में फंस गए हैं और उससे बाहर निकलने के लिए पूंजीवाद के हाथ के खिलौने…
  • beggars
    विजय विनीत
    पड़तालः स्मार्ट शहर बनारस में टूरिस्टों पर टूट पड़ते हैं भिखारी, दुनिया भर में बदनाम हो रहा ‘मोदी का क्योटो’ 
    10 Oct 2021
    भीख मांगना यूं तो क़ानूनन जुर्म है, लेकिन भीख अगर मजबूरी में मांगी जा रही है तो ऐसे व्यक्ति के प्रति सहानुभूति पूर्वक सोचने और उसके पुनर्वास के लिए काम करने की ज़रूरत है, लेकिन अगर भीख मांगना धंधा बन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License