NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नागरिक अधिकार के पक्ष में आई मुंबई! तेलतुंबड़े और नवलखा के साथ एकजुटता
अब मुंबई जनवाद की रक्षा में खड़ी हो गई है और कई संगठनों ने मिलकर दोनों नागरिक अधिकार आंदोलनकारियों और जेल में बंद 9 अन्य लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Mar 2020
Translated by महेश कुमार
 तेलतुंबड़े और नवलखा
आनंद तेलतुंबड़े और गौतम नवलखा । चित्र सौजन्य: काउंटरक्यूरेंट्स

नई दिल्ली: नागरिक अधिकार आंदोलनकारी आनंद तेलतुंबड़े और गौतम नवलखा की 16 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम ज़मानत याचिका को ख़ारिज करने पर कई अधिकार संगठनों ने निंदा की है, और माना है कि इस फ़ैसले का आधार ‘कमज़ोर’ और काफ़ी ‘हल्के सबूत’ हैं।

मुम्बई राइज़ टू सेव डेमोक्रेसी (एमआरएसडी) ने अपने एक बयान में कहा है कि यह फ़ैसला लोगों को मौजूदा सरकार की "जनविरोधी नीतियों" का विरोध करने के मामले में "भय पैदा करेगा", और बयान में सबकी रिहाई के लिए संघर्ष जारी रखने और भीमा कोरेगांव में शांतिपूर्ण दलित-बहुजन जनता पर हुई हिंसा की सच्चाई को खोजने के संकल्प भी दोहराया गया है।

पूरा बयान  नीचे पढ़ें:

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आनंद तेलतुंबड़े और गौतम नवलखा की गिरफ़्तारी से पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज़मानत याचिका ख़ारिज करने पर एमआरएसडी का बयान

आनंद तेलतुंबड़े और गौतम नवलखा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की अस्वीकृति से मुंबई राइज़ टू सेव डेमोक्रेसी (एमआरएसडी) गहरी निराशा में है क्योंकि याचिका में 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव की हिंसा के संबंध में उनके खिलाफ दर्ज मामलों में अग्रिम जमानत की मांग की गई थी। अब तक उनकी गिरफ़्तारी नहीं हुई है। अगले तीन हफ़्तों में उनकी गिरफ़्तारी हो सकती है। इस मामले में जिन नौ अन्य कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को अभियुक्त बनाया गया है और जिन पर ग़ैरक़ानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धाराएं लगाई गई हैं, वे 2018 से जेल में क़ैद हैं।

शीर्ष अदालत का अंतरिम जमानत देने से इनकार करने का फैंसला खतरनाक है क्योंकि इन कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला बहुत ही कमज़ोर सबूतों पर आधारित है। इसके अलावा, विश्वसनीय खोजी पत्रकारों और तकनीकी विशेषज्ञों के साइबर फोरेंसिक विश्लेषण ने पुणे पुलिस द्वारा इन्हे फँसाने के लिए इस्तेमाल किए गए सबूतों को ख़ारिज कर दिया है। विश्लेषण से पता चलता है कि मामले के आरोपी नौ कार्यकर्ताओं में से एक जिनका नाम रोना विल्सन है, उनकी हार्ड डिस्क से कथित रूप से बरामद किए गए पत्र आदि के जरिए उन्हे और अन्य आरोपियों को पुलिस एक प्रतिबंधित राजनीतिक दल से जोड़ने के लिए उपयोग किए जाने की संभावना है ऐसा मालवेयर के माध्यम से किया जाएगा जो विल्सन के कंप्यूटर तक पहुंच की अनुमति देता है। यह स्पष्ट रूप से सबूतों के हेरफेर और मामले की मनगढ़ंत प्रकृति को इंगित करता है।

सरकार ऐसी कोई संभावना नहीं छोड़ना चाहती है जिससे कि सच्चाई सामने आए। जनवरी 2020 में, पुणे पुलिस ने आरोप पत्र दायर किया था और अब एक साल से अधिक समय के बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले को अचानक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भेज दिया है और इस तरह अब यह केस उस महाराष्ट्र में नवगठित महा विकास अघादी सरकार के गृह विभाग से निकालकर केंद्र के हाथ में चला गया है, जिसने केस की समीक्षा करने की बात कही थी, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने और कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मामलों को छोड़ने की घोषणा की थी।

जबकि केंद्र सरकार गढ़े गए केसों के आंधायम से ग्यारह बुद्धिजीवियों को फँसाने का पूरा प्रयास कर रही है, लेकिन मिलिंद एकबोटे और मनोहर भिडे के नेतृत्व में हिंदुत्व ब्रिगेड की भूमिका की जांच और उसके द्वारा भीमा कोरेगांव में दलितों पर किए गए हमलों को अंजाम देने में हुई हिंसा की जांच थम गई है। राज्य सरकार की एसआईटी को गठित करने में विफलता से पता चलता है कि हिंसा के असली अपराधियों को मुक़दमे से बचा लिया गया है।

केस में यह घटनाक्रम और देश में लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन के दो दिग्गजों की पूर्व-जमानत की अर्ज़ी को अस्वीकृति करना न सिर्फ चोंकाने वाला है, बल्कि सबूतों से छेड़छाड़ करना लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के लिए सरकार की हताशा को भी दर्शाता है और यह हिंदुत्व फासीवादी निज़ाम की जनविरोधी नीतियों और कार्यों का विरोध करने वालों के ख़िलाफ़ भय की भावना फैलाने की कोशिश है।

एमआरएसडी उन सभी ग्यारह कार्यकर्ताओं के प्रति अपनी एकजुटता का इज़हार करता है जो इस देश में मानवाधिकारों और लोगों के आंदोलनों के अथक रक्षक रहे हैं और जो अब इस षड्यंत्र के मामले में गलत तरीके से आरोपी बनाए गए हैं। हम भीमा कोरेगांव में शांतिपूर्ण दलित-बहुजन जनता पर हुई हिंसा के सच और उनकी रिहाई लिए संघर्ष जारी रखने के संकल्प को दोहराते हैं।

एमआरएसडी में शामिल संगठन:

पीपुल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज़ (PUCL), कमेटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ डेमोक्रेटिक राइट्स (CPDR), नेशनल ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव (NTUI), ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ़ इंडिया (TUCI), स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (SIO), अंबेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्कल (APPSC) ) - IIT मुंबई, साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट्स स्टूडेंट एसोसिएशन (COSTISA), लीफ़लेट, पुलिस रिफॉर्म्स वॉच, एनसीएचआरओ, बेबाक कलेक्टिव, फोरम अगेंस्ट अग्रेसन ऑपरेशन ऑफ वूमेन (FAOW), LABIA- ए क्वीर फेमिनिस्ट एलबीटी कलेक्टिव, जागृत कामगर मंच मच (JKM), मजलिस, मुस्लिम फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी (IMSD), वीमेन अगेंस्ट सेक्सुअल वायलेंस एंड स्टेट रेपरेशन (WSS), भारत बचाओ आंदोलन (BBA), इंडियन सोसियल एक्शन फॉरम (INSAF), पीपल्स कमीशन फॉर डेमोक्रेटिक स्पेश (PCSDS), ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (HRLN), कॉज़ वकीलों एलायंस, नेशनल एलायंस ऑफ़ पीपल्स मूवमेंट्स (NAPM), निवार हक सुरक्षा समिति, काश्तकारी संगठन - पालघर, सर्वहारा जन आंदोलन- रायगढ़, जागृत काश्तकारी संघटन, होमी भाभा रिसर्च सेंटर, सेंटजेवीयर्स और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Rejection of Pre-Arrest Bail to Teltumbde, Navlakha is ‘Alarming’, Based on ‘Thin Evidence’

Bhima Koregaon Case
MRSD
Anand Teltumbde
gautam navlakha
Dalit Rights
Democratic Rights
Supreme Court
NIA
Ekbote-Bhide

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल


बाकी खबरें

  • rbi
    भाषा
    चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान: आरबीआई
    08 Dec 2021
    आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा कि मुद्रास्फीति के अगले वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में नरम पड़कर पांच प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
  •  नगालैंड में मातम छाया, लोगों ने मारे गए आम नागरिकों की याद में शोक जताया
    भाषा
    नगालैंड में मातम छाया, लोगों ने मारे गए आम नागरिकों की याद में शोक जताया
    08 Dec 2021
    विभिन्न नगा संस्थाओं ने मृतकों के लिए पांच दिनों के शोक का आह्वान किया है, जो शुक्रवार को समाप्त होगा। नगा छात्र संघ ने मृतकों के लिए न्याय की अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल आवास के समक्ष धरना देने की…
  • राज्यसभा में उठी अफ़्सपा वापस लिए जाने की मांग
    भाषा
    राज्यसभा में उठी अफ़्सपा वापस लिए जाने की मांग
    08 Dec 2021
    एनपीएफ का कहना है कि सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार देश के और किसी भी हिस्से में नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि लागू किए जाने के दौरान भी इस कानून का व्यापक विरोध किया गया था।
  • रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021-22
    भाषा
    रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021, 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा : आयोजक
    08 Dec 2021
    रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार वर्ष 2021 और 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा। आयोजक और प्रकाशक पीटर बुंडालो ने यह जानकारी दी।
  • Ethiopia
    पवन कुलकर्णी
    टीपीएलएफ़ के पिछले महीने की बढ़त को रोकते हुए उत्तरी इथियोपिया का गृह युद्ध संघीय सरकार के पक्ष में बदला
    08 Dec 2021
    पश्चिमी और पूर्वी मोर्चे पर अपनी जीत के बाद संघीय सरकार और अम्हारन मिलिशिया के संयुक्त बलों ने डेसी और कोम्बोल्चा जैसे रणनीतिक तौर पर अहम शहरों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License