NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
सीएबी को लेकर सड़क से संसद तक हंगामा: त्रिपुरा में सेना तैनात, असम में भी अलर्ट
सेना के एक प्रवक्ता ने शिलांग में बताया कि सेना की एक-एक टुकड़ी को त्रिपुरा के कंचनपुर और मनु में तैनात किया गया है जबकि असम के बोंगाईगांव और डिब्रूगढ़ में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए एक अन्य टुकड़ी को तैयार रहने को कहा गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Dec 2019
assam

नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill : CAB) को लेकर आज, बुधवार को भी सड़क से लेकर संसद तक हंगामा और उबाल है। लोकसभा के बाद बुधवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश किया गया। इस बीच विरोधी प्रदर्शनों को देखते हुए त्रिपुरा में सेना बुला ली गई और असम में सेना की टुकड़ी को तैयार रखा गया है।

सेना के एक प्रवक्ता ने शिलांग में बताया कि सेना की एक-एक टुकड़ी को त्रिपुरा के कंचनपुर और मनु में तैनात किया गया है जबकि असम के बोंगाईगांव और डिब्रूगढ़ में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए एक अन्य टुकड़ी को तैयार रहने को कहा गया है।

बताया जा रहा है कि बढ़ते विरोध को देखते हुए त्रिपुरा के अलावा असम के भी कुछ हिस्सों में भी इंटरनेट बंद कर दिया गया है।

राज्यसभा में तीखा विरोध

इस बीच राज्यसभा में इस बिल को लेकर बहस जारी है। सोमवार देर रात लोकसभा में यह बिल पास होने के बाद बुधवार सुबह राज्यसभा में पेश किया गया।

राज्यसभा में विपक्ष ने नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को समानता के अधिकार सहित संविधान के मूल ढांचे के विरूद्ध करार देते हुए दावा किया कि यह उच्चतम न्यायालय में टिक नहीं पाएगा। हालांकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक राष्ट्र हित में है और इससे भारतीय मुसलमानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने उच्च सदन में इस विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए इस विधेयक को मोदी सरकार का ‘‘हिन्दुत्व का एजेंडा आगे बढ़ाने’’ वाला करार कदम देते हुए दावा किया कि यह प्रस्तावित कानून न्यायालय के कानूनी परीक्षण में नहीं टिक पाएगा।

चिदंबरम ने कहा कि सरकार इस विधेयक के जरिये संसद से एक ‘‘असंवैधानिक काम’’ पर समर्थन लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि संसद में निर्वाचित होकर आये सदस्यों का यह प्राथमिक दायित्व है कि वे कानून बनाते समय यह देखें कि यह संविधान के अनुरूप है कि नहीं।

चिदंबरम ने कहा कि वह इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि यह प्रस्तावित कानून न्यायालय द्वारा संविधान विरूद्ध करार दिया जाएगा।

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान वाले इस विधेयक को पेश करते हुए उच्च सदन में गृह मंत्री ने कहा कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों के पास समान अधिकार नहीं हैं।

शाह ने इस विधेयक के मकसद को लेकर वोट बैंक की राजनीति के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा ने 2019 के आम चुनाव के लिए अपने घोषणा पत्र में इसकी घोषणा की थी और पार्टी को इसी पर जीत मिली थी।

कांग्रेस के आनंद शर्मा ने भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा होने के कारण विधेयक को लागू करने की प्रतिबद्धता को ‘राजहठ’ करार देते हुये कहा, ‘‘किसी दल का घोषणापत्र संविधान से नहीं टकरा सकता, न ही उसके ऊपर जा सकता है। लेकिन हम सभी ने संविधान की शपथ ली है इसलिये हमारे लिये पार्टी का घोषणापत्र नहीं संविधान सर्वोपरि है।’’

तृणमूल कांग्रेस के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने नागरिकता संशोधन विधेयक का भारी विरोध करते हुए कहा कि यह भारत और बंगाल विरोधी है। उन्होंने कहा कि बंगालियों को राष्ट्रभक्ति सिखाने की जरूरत नहीं है और अंडमान की जेलों में बंद कैदियों में 70 प्रतिशत बंगाली थे।

उन्होंने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा और यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी जाएगा।

नागरिकता संशोधन विधेयक को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सलाह पर लाया गया एक कदम बताते हुए भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने विपक्ष को राजनीतिक हितों के बजाय राष्ट्र के हित साधने की नसीहत दी और दावा किया कि इससे पूर्वोत्तर की ‘‘सांस्कृतिक पहचान’’ को कोई खतरा नहीं पहुंचेगा।

सपा के जावेद अली ने इस विधेयक में 31 दिसंबर 2014 की तय समयावधि को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि 31 दिसंबर 2014 के बाद ऐसा क्या हो गया कि इन तीनों पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के साथ धार्मिक प्रताड़ना बंद हो गयी। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि इस समय सीमा के लिए उसे ऐसा क्या ‘‘इलहाम’’ हुआ है?
उन्होंने सुझाव दिया कि इस विधेयक में तीन देशों के बजाय पड़ोसी देश और धार्मिक अल्पसंख्यक लिखना चाहिए, इससे सारा विवाद खत्म हो जाएगा।

जद (यू) के रामचंद्र प्रसाद सिंह ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह सीधा विधेयक है लेकिन बात कुछ और ही हो रही है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेदों की बात हो रही है लेकिन वह भारतीय नागरिकों के लिए है। लेकिन यहां तो बात लोगों को नागरिकता देने की ही हो रही है।

माकपा सदस्य टी के रंगराजन ने विधेयक को संविधान विरोधी बताते हुए कहा ‘‘यह विधेयक भारत के बहुलतावाद पर चोट करता है। इसके जरिये मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाया जा रहा है। इसके लिए जो औचित्य दिया जा रहा है वह सही नहीं है।’’

उन्होंने सवाल किया ‘‘क्या मुस्लिम धार्मिक आधार पर प्रताड़ित नहीं हो सकते? पाकिस्तान में अहमदिया, म्यामां में रोहिंग्या और श्रीलंका में तमिल लोग धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं।’’

द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा ने कहा ‘‘बहुलतावाद और लोकतांत्रिक भारत में विश्वास करने वालों के लिए धर्म कभी कोई बाधा नहीं रहा। मुझे पूरा विश्वास है कि उच्चतम न्यायालय की कसौटी पर यह विधेयक खरा नहीं उतरेगा।’’
शिवा ने कहा ‘‘नागरिकता के लिए केवल तीन देशों को ही क्यों चुना गया? अफगानिस्तान अविभाजित भारत का हिस्सा नहीं था। अगर अफगानिस्तान को चुना गया तो भूटान, म्यामां और श्रीलंका को क्यों छोड़ दिया गया ? भूटान में ईसाई आज भी अपने घर पर ही प्रार्थना करते हैं। वह जब चर्च जाना चाहते हैं तो भारत आते हैं। ’’

सरकार पर ध्रुवीकरण और धर्म निरपेक्षता पर चोट करने का आरोप लगाते हुए शिवा ने कहा ‘‘यह पहलू क्यों नजरअंदाज किया गया कि भाषा, संस्कृति और अलग अलग आधार पर भी अत्याचार हो रहे हैं।’’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

 

CAB NRC
CAB
NRC
BJP
Assam
Tripura
Army
Parliament of India

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    यूपी: सत्ता के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाली महिलाओं का संघर्ष हार-जीत से कहीं आगे है
    12 Mar 2022
    इन महिला उम्मीदवारों की पहचान हार-जीत से अलग इनका संघर्ष है, जो हमेशा याद रखा जाएगा। बीते पांच सालों में सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि में भले ही कोई खासा बदलाव नहीं आया हो, लेकिन उनके ख़िलाफ़ आवाज़…
  •  Ukraine Crisis
    प्रभात पटनायक
    यूक्रेन के संकट का आईएमएफ कनेक्शन
    12 Mar 2022
    जिस आईएमएफ ने नियंत्रणात्मक व्यवस्था के लिए सुगमताकारक के रूप में अपनी शुरूआत की थी, वह उसी नियंत्रणात्मक व्यवस्था का विनाशक बन गया है और नवउदारवादी व्यवस्था को लाने का हथियार बन गया है।
  • एजाज़ अशरफ़
    धांधली जब लोगों के दिमाग़ के साथ हो जाती है, तभी उत्तर प्रदेश के नतीजे इस तरह आते हैं
    12 Mar 2022
    विपक्ष साल के सातों दिन और चौबीसो घंटे के लिए वैचारिक लड़ाई में लगे संघ को भारत के दिमाग़ी हेरफेर करने से रोक पाने में नाकाम रहा है। धांधली कभी उत्तर प्रदेश के किसी ईवीएम में नहीं हुई है,बल्कि धांधली…
  • covid
    दित्सा भट्टाचार्य
    भारत में 4 नहीं 40 लाख से अधिक कोविड मौतें हुईं हैं- लैंसेट स्टडी
    12 Mar 2022
    अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि भारत में दुनिया भर में कोविड के कारण सबसे अधिक मौतें हुई हैं, जो वैश्विक मौतों का 22 प्रतिशत है। 
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,614 नए मामले, 89 मरीज़ों की मौत
    12 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.09 फ़ीसदी यानी 40 हज़ार 559 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License