NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई): इतने वर्षों बाद भी क्या हम इसके उद्देश्यों को पूरा कर पाए?
असमानताओं को दूर करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस अधिनियम को बनाया गया था परन्तु सरकारों की नाकामी के कारण अभी भी हम असमानता को दूर करने से लाखों कदम दूर हैं| इसके उदेश्य को पूरा करने के पर्याप्त प्रयासों की ज़रूरत है।
मुकुंद झा
08 Jun 2018
त्रीपुर
Image Courtesy: न्यूज़ मिनट

शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम को लागू इसलिए किया गया कि इससे सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सकेगी और इस प्रकार सामाजिक तथा आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को अलग-थलग करने में रोक लग सकेगी। परन्तु इतने वर्षों बाद भी क्या हम इसके उद्देश्यों को पूरा कर पाए हैं? शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के लागू होने के छह वर्ष बाद भी, कई निजी स्कूल छात्रों को अतिरिक्त शुल्क देने के लिए मजबूर करते हैं। जबकि इसके तहत किसी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क देने के लिए अभिभावक बाध्य नहीं हैं, खासतौर पर तहत ईडब्ल्यूएस कोटे से आर्थिक रूप से कमज़ोर नामंकित छात्रों को भी परेशान किया जाता है| जबकि इस अधिनियम में साफ है कि ईडब्ल्यूएस के छात्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना है|

इस तरह की खबर समय-समय पर आती रहती है कि निजी स्कूल ईडब्ल्यूएस कोटे के छात्रों को परेशान कर रही हैI कल भी इस तरह की खबर तमिलनाडु के तिरुपुर शहर से आई जहाँ एक छ: वर्षीय छात्र अपने अभिभावक के साथ स्कूल के बाहर हाथ में प्लेकार्ड लेकर खड़े थे, जिस पर लिखा था 'मुझे स्कूल के अंदर पढाई करने दें'|

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार छात्र का नाम गांधीजी है वो गांधी नगर, तिरुपुर में कांगु वेल्लार मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्र हैं। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत, कक्षा एलकेजी के लिए छात्र को दो साल पहले नामांकित किया गया था। इस कानून के तहत, वे निजी स्कूल जिन्हें सरकार से किसी भी तरह की सहायता नहीं मिलती, उनमें प्रवेश स्तर पर 25% सीटें गरीब परिवारों से आने वाले छात्रों को दी जानी होती हैं। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को बिना किसी शुल्क के निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाता है। यह शुल्क स्कूलों को सरकार की तरफ से मुहैया कराया जाता है।

लेकिन मंगलवार को, जब पलानी कुमार स्कूल में अपने बेटे को छोड़ने के लिए गए, तो उन्हें गार्ड ने अंदर जाने रोक दिया। स्कूल प्रशासन ने उनसे एलकेजी, यूकेजी और कक्षा 1 के लिए ‘एक्स्ट्राकरीकुलर शुल्क' के रूप में 20,000 रुपये से अधिक का भुगतान करने को कहा और फिर उनकी बाइक की चाबी भी ले ली है।

'एक्स्ट्राकरीकुलर' में लाइब्रेरी उपयोग, तमिल और अंग्रेजी हस्तलेखन, योग, शिक्षण सहायक उपकरण और टेबल टेनिस शामिल हैं। स्कूल का तर्क यह है कि सरकार उन्हें केवल शिक्षण शुल्क देती है न कि इन अतिरिक्त गतिविधियों के लिए शुल्क।

छात्र के अभिभावक का कहना है कि, “स्कूल के अधिकारियों ने फॉर्म पर भी हस्ताक्षर किए हैं कि वे आरटीई कोटा के तहत बच्चे से कोई शुल्क नहीं लेंगे। इन सारे कागज़ात पर हस्ताक्षर करने के बाद, वे बच्चे से शुल्क क्यों ले रहे हैं?"

इसके बाद प्रशासन का रैवया और भी हैरान करने वाला थाI मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बच्चे को स्कूल में जाने देने के लिए कहा परन्तु साथ ही अभिभावक को आदेश दिया कि वो स्कूल की बकाया राशि 60 दिनों के भीतर दें| अगर वो ऐसा नहीं कर सकते तो बच्चे को सरकारी स्कूल में भेज दें हम उसका ख्याल बहुत ही अच्छे से रखेंगे|

जबकि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम में साफ है कि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को अपने पड़ोस के स्कूलों में मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिलेगा। इसके लिए बच्चे या उनके अभिभावकों से प्राथमिक शिक्षा हासिल करने के लिए कोई भी प्रत्यक्ष फीस (स्कूल फीस) या अप्रत्यक्ष मूल्य (यूनीफॉर्म, पाठ्य-पुस्तकें, मध्यान्ह भोजन, परिवहन) नहीं लिया जाएगा। सरकार बच्चे को निःशुल्क स्कूलिंग उपलब्ध करवाएगी जब तक कि उसकी प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं हो जाती।

असमानताओं को दूर करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस अधिनियम को बनाया गया था परन्तु सरकरों की नाकामी के कारण अभी भी हम असमानता को दूर करने से लाखों कदम दूर है | इसके उदेश्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रयासों की ज़रूरत है ।

अधिकतर निजी स्कूल अफसरों की मिलीभगत से मनमानी करते हैं| जिस कारण जिन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए उन्हें लाभ नहीं मिलता| इनकी मनमानी को रोकने की आवश्यकता है| साथ ही कई बार सरकार के कारण भी इसके उद्देश्य को पूरा करने में रुकावट आती है| 

दिल्ली में हर वर्ष इस तरह की खबरें आती हैं कि निजी स्कूल किस तरह मनमानी से आरटीई कोटे के तहत फर्ज़ी पेपर से फर्ज़ी दाखिले लेते हैं| जिससे कि गरीब और पिछड़े बच्चों का हक़ मारा जाता है| हम ये जानते हैं कि ये सब बिना प्रशासन के मिलीभगत के संभव नहीं|

सरकारों को इस ओर गंभीरता से सोचना होगा केवल कागज़ों पर कानून बनाने से शिक्षा में समानता नहीं आ सकतीI इसके लिए वास्तविकता में मज़बूती से इस कानून को लागू करना होगा| मनमानी करने वाले निजी स्कूलों पर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए|

 

तमिलनाडु
RTE
ईडब्ल्यूएस
केंद्र सरकार
प्राथमिक शिक्षा

Related Stories

बाल अधिकार आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का परीक्षण किया, अल्पसंख्यक समूह की अगले क़दम की योजना

भारत का शिक्षा का अधिकार कानून वस्तुतः असफल साबित हो रहा है 

सरकार शिक्षा उपकर का 1.16 लाख करोड़ रुपया दबाए बैठी है

दिल्ली की स्कूली शिक्षा में बाधा बन रहा है "आधार कार्ड"

एक अध्ययन : क्या शिक्षा को जानबूझ कर बर्बाद किया जा रहा है?

देश के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता अपने निचले पायदान पर

दक्षिण दिल्ली में काटे जाएँगे 16,500 पेड़

तूतीकोरीन : आंदोलनकारियों की आवाज़ दबाना चाहती है सरकार ?

दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य की माँग पर जनता की राय

झारखंडः क्या 'पकरी बरवाडीह कोयला भंडार' की स्थिति तुतीकोरिन जैसी होगी?


बाकी खबरें

  • spain
    डीडब्ल्यू
    स्पेन : 'कंप्यूटर एरर' की वजह से पास हुआ श्रम सुधार बिल
    08 Feb 2022
    स्पेन की संसद ने सरकार के श्रम सुधार बिल को सिर्फ़ 1 वोट के फ़ासले से पारित कर दिया- विपक्ष ने कहा कि यह एक वोट उनके सदस्य ने ग़लती से दे दिया था।
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव 2022 : बदहाल अस्पताल, इलाज के लिए भटकते मरीज़!
    08 Feb 2022
    भारतीय रिजर्व बैंक की स्टेट फाइनेंस एंड स्टडी ऑफ़ बजट 2020-21 रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड सरकार के द्वारा जन स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च किया गया है।
  • uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    चमोली जिले का थराली विधानसभा: आखिर क्या चाहती है जनता?
    07 Feb 2022
    उत्तराखंड चुनाव से पहले न्यूज़क्लिक की टीम ने चमोली जिले के थराली विधानसभा का दौरा किया और लोगों से बातचीत करके समझने का प्रयास किया की क्या है उनके मुद्दे ? देखिए हमारी ग्राउंड रिपोर्ट
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    धर्म का कार्ड नाजी दौर में ढकेलेगा देश को, बस आंदोलन देते हैं राहत : इरफ़ान हबीब
    07 Feb 2022
    Exclusive इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने देश के Living Legend, विश्व विख्यात इतिहासकार इरफ़ान हबीब से उनके घर अलीगढ़ में बातचीत की और जानना चाहा कि चुनावी समर में वह कैसे देख रहे हैं…
  • Punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाबः बदहाल विश्वविद्यालयों पर क्यों नहीं बात करती राजनैतिक पार्टियाँ !
    07 Feb 2022
    पंजाब में सभी राजनैतिक पार्टियाँ राज्य पर 3 लाख करोड़ के कर्ज़े की दुहाई दे रही है. इस वित्तीय संकट का एक असर इसके विश्वविद्यालयों पर भी पड़ रहा है. अच्छे रीसर्च के बावजूद विश्वविद्यालय पैसे की भारी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License