NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शिक्षा को बचाने के लिए एसएफआई का अखिल भारतीय जत्था
बिना भेदभाव के वैज्ञानिक और गुणवत्त शिक्षा के लिए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया 4 सिंतबर से 15 सितंबर, 2018 में कश्मीर से कन्याकुमारी तक का एक अखिल भारतीय जत्था निकाल रही है|
मुकुंद झा
09 Sep 2018
SFI

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया (एसएफ़आई)  4 सिंतबर से 15 सितंबर, 2018 में पूरे देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक अखिल भारतीय जत्था निकाल रही है| ये जत्था मोदी सरकार की छात्र विरोधी नीतियों और उच्च शिक्षा को तबाह करने के प्रयास के खिलाफ है| 

ये जत्था देश के तकरीबन 22 राज्यों से हो कर गुज़रेगीI इसे चार भागों में बाँटा है- उत्तर भारत जत्था (जम्मू-कश्मीर, एचपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी), दक्षिण भारत जत्था (तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक), पूर्वी भारत जत्था (अगरतला, गुवाहाटी, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, ओडिशा) पश्चिम भारत जत्था (मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना)| ये चारों जत्थे एक ही समय पर पूरे देश में भ्रमण करेंगे|

दक्षिण भारत जत्था जो कन्याकुमारी से शुरू हुआ, वो अभी तक तमिलनाडु से होते हुए पुदुच्चेरी विश्विद्यालय पहुँच चुका है| उत्तर भारत जत्था शिमला से शुरू होकर अभी हिमाचल के विभिन्न जिलों में घूम रहा है| पश्चिम भारत जत्था मद्यप्रदेश से शुरू हुआ और गुजरात पहुँच चुका है| पूर्वी भारत जत्था त्रिपुरा के अगरतला से शुरू हुआ और असम होते हुए पश्चिम बंगाल पँहुच चुका है|

एसएफ़आई के मुताबिक छात्र सत्तारूढ़ सरकार के हमलों का सामना कर रहे हैं। सरकार संवैधानिक रूप से सुनिश्चित अधिकारों को कुचल रही है, छात्र विरोधी नीतियाँ अपना रही है, बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार ने सत्ता में आने के बाद शैक्षणिक संस्थानों को नष्ट करने की दिशा में पूरी शिद्दत से काम किया हैI

एसएफ़आई के इस अखिल भारतीय जत्थे के मुख्य मुद्दे निम्नलिखित है:-

भाजपा सरकार ने विश्वविद्यालयों और शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया

पिछले चार वर्षों में हमारे शैक्षणिक संस्थानों एचसीयू, जेएनयू, एफटीआईआई, आईआईटी मद्रास, बीएचयू, एएमयू पर आधिकारिक हमले हुए हैं- यह सूची काफी लंबी है। इन सभी मामलों में हमने सत्ताधारी सरकार द्वारा लोकतांत्रिक संस्कृति को नष्ट करने और असहमति की आवाज़ों को कुचलने के भरसक प्रयास देखे हैं। लेकिन, लोकतंत्र पर हमला केवल एक पहलू है।

ये मोदी की  सरकार लगातर शिक्षा का निजीकरण और व्यवसायीकरण कर रही है और भारतीय शिक्षा के संघीय चरित्र को नष्ट कर रही हैI साथ ही हिंदुत्व के एजेंडा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है| लगातार शिक्षा को एक व्यापार की वस्तु में बदल रही है। उदाहरण के लिए, सरकार ने हाल ही में जियो विश्वविद्यालय को "प्रतिष्ठा संस्थान" घोषित किया है, जो अभी तक स्थापित नहीं किया गया है। इस सरकार की नई शिक्षा नीति, निजीकरण, व्यावसायीकरण, सांप्रदायिकता और बहिष्कार को बढ़ावा दे रही है।

शिक्षा के बजट में कटौती

केंद्रीय सर्वेक्षण और राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च कुल सकल घरेलू उत्पाद का केवल 2.7% (2017-18 बजट अनुमानों के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार) है। बीजेपी सत्ता में आने के बाद से शिक्षा के लिए बजटीय आवंटन में गिरावट आई है। नतीजतन, सार्वजनिक वित्त पोषित शैक्षिक संस्थानों के लिए फंड के आवंटन में एक भारी कटौती हुई है। जिस कारण, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में भारत भर में व्यापक पैमाने पर सीट में कमी आई है, जो विश्वविद्यालयों में प्रवेश करने के लिए हजारों छात्रों, विशेष रूप से वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद कर रहा है।

नवउदारवाद और भाजपा शासन के तहत शक्ति का केंद्रीकरण

सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से खत्म करने की एक साज़िश की जा रही है। पिछले चार वर्षों में, सरकार के नीतिगत पक्षाघात ने सभी निर्णय लेने वाले निकायों को तोड़ने के प्रयासों को बढ़ावा दिया है, जिससे लोकतांत्रिक वार्ता को छोड़कर विभिन्न संस्थानों के हितधारकों को नज़रअंदाज कर दिया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूजीसी और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रशासन द्वारा अकादमिक या विशेषज्ञों के परामर्श के बिना ही नीति स्तर के निर्णय किए जा रहे हैं |

स्कूली  शिक्षा में निजीकरण को थोपा जा रहा

पिछले दो दशकों में सार्वजनिक क्षेत्र की शिक्षा को नष्ट करने और निजी संस्थानों के लिए मार्ग प्रशस्त करने के प्रयासों को देखा गया हैI  परन्तु पिछले चार वर्षों के दौरान यह एक  घातक स्तर पतक पहुँच गया है। राजस्थान सरकार ने पीपीपी मॉडल पर राजस्थान में 225 स्कूल चलाने का फैसला लिया है, जिसका मकसद सार्वजनिक क्षेत्र को निजी क्षेत्र के हाथों सौंपना है। मध्य प्रदेश सरकार ने 15,000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई है क्योंकि माना जाता है कि उनमें कम बच्चे पढ़ रहे हैं। इसी तरह, महाराष्ट्र में, राज्य सरकार ने 13,905 स्कूलों को बंद करने का फैसला किया है| यह कदम लोगों को निजी स्कूलों की ओर धकेल रहा है|

शिक्षा का वस्तुतिकरण 

सरकार विश्विद्यालय को अब अनुदान के स्थान पर HEFA के तहत ऋण देने की मंशा ज़ाहिर की हैI यह ऋण विश्विद्यालय को समय सीमा के भीतर चुकाना होगा| शैक्षणिक संस्थानों को औद्योगिक इकाइयों में परिवर्ती कर यह केवल मुनाफा कमाने की साज़िश है।

यूजीसी को खत्म करना

उच्च शिक्षा पर सबसे नया हमला उच्च शिक्षा आयोग (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का पुनर्मूल्यांकन) अधिनियम, 2018 का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव उच्च शिक्षा के वस्तुतिकरण की प्रक्रिया में तेज़ी लाने का एक और कदम है। एक तरफ, इससे उच्च शिक्षा में निजी खिलाड़ियों के हितों को साधा जा रहा है; दूसरी तरफ, वर्तमान शासन की वैचारिक आवश्यकताओं के लिए शिक्षण संस्थानों को केंद्रीकृत पकड़ को मज़बूत करने की कोशिश की जा रही हैI

शिक्षा का सांप्रदायिकरण

हिंदुत्व आरएसएस का मार्गदर्शक सिद्धांत है, शिक्षा का सांप्रदायिकरण बीजेपी की सरकार की नीतियों का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। दीनानाथ बत्रा जैसे लोगों को स्कूल पाठ्यक्रम बदलने के लिए स्वतंत्र कर दिया गया है। बीजेपी शासित राज्यों में, सांप्रदायिक ज़हर से किताबें पहले ही दूषित हो चुकी हैं।

एसएफ़आई  के राष्ट्रिय महासचिव विक्रम सिंह  के अनुसार “सभी जगहों पर छात्र समुदाय हमारे इस जत्थे का बड़े ही उल्लास के साथ स्वागत कर है| सभी जगहों पर हमें भरपूर समर्थन मिला रहा है और हम देश के अन्य राज्यों के छात्रों से भी अनुरोध करते हैं कि हमारे इस संघर्ष में शामिल हों”I

SFI
छात्र आन्दोलन
privatisation of university
privatization of education
modi model
modi sarkar

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

डीवाईएफ़आई ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया

दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

एलएसआर के छात्रों द्वारा भाजपा प्रवक्ता का बहिष्कार लोकतंत्र की जीत है

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे


बाकी खबरें

  • Olaf Scholz
    एम. के. भद्रकुमार
    मास्को की नपी-तुली कूटनीति काम कर रही है
    21 Feb 2022
    यूक्रेन पर रूसी हमले की संभावना सही मायने में कभी थी ही नहीं। हालांकि, अगर यूक्रेनी सेना अलगाववादी ताक़तों पर हमला करती है, तो डोनबास क्षेत्र में मास्को के हस्तक्षेप का होना सौ फ़ीसदी तय है।
  • sultanpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनावः सुल्तानपुर चीनी मिल राज्य सरकार की अनदेखी से हुई जर्जर
    21 Feb 2022
    "सुल्तानपुर चीनी मिल के सही ढ़ंग से न चलने की वजह से इस इलाके के गन्ने की उपज प्राइवेट क्रशर मशीन में किसान मजबूरन दे देते हैं जहां से उनको गन्ने की कीमत आधी या दो-तिहाई ही मिल पाती है।"
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में पीएम मोदी ने पार की चुनावी मर्यादा, जागो चुनाव आयोग
    21 Feb 2022
    आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अखिलेश यादव पर साधे गए निशाने पर बात की और उसको हास्यास्पद बताया। उसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी टिप्पणी की कैसे एक…
  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव चौथा चरण: लखीमपुर हिंसा और गोवंश से फ़सलों की तबाही जैसे मुद्दे प्रमुख
    21 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में तीन चरणों के चुनावों के बाद अब चौथे चरण के लिए जंग शुरू हो गई है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब अवध की चुनावी परिक्रमा लगातार जारी है। लेकिन चौथे चरण में अवध की वो सीटे भी हैं जहां…
  • Ballia
    विजय विनीत
    बलिया: ''सबके वोटे के चिंता बा, चुनाव बाद रसड़ा चीनी मिल के बात केहू ना करे ला''
    21 Feb 2022
    देसी चीनी और गुड़ के लिए मशहूर रसड़ा, कभी ''रसदा'' के नाम से जाना जाता था। रसड़ा इलाके में कई घंटे गुजारने के बाद हमें इस बात का एहसास हो चला था कि रसड़ा में हर आदमी की जुबां पर सिर्फ़ एक ही सवाल है…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License