NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
स्मृति शेष : ए के रॉय का होना और जाना...
भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) ने अपने शोक संदेश में कहा कि रॉय ने अपना पूरा जीवन मजदूर वर्ग के कल्याण के लिये समर्पित कर दिया। भाकपा माले ने उनके सम्मान में अपना झंडा झुका दिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Jul 2019
ए के रॉय नहीं रहे
फोटो साभार : प्रभात खबर

धनबाद से तीन बार के सांसद रहे मार्क्सवादी नेता ए के रॉय (अरुण कुमार रॉय) का निधन भारतीय राजनीति और मज़दूर आंदोलन के लिए एक बड़ी क्षति है।

मार्क्सवादी समन्वय समिति (एमसीसी) के संस्थापक रहे कॉमरेड राय ने 90 साल की उम्र में रविवार को धनबाद के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। बताया जाता है कि उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। वह अविवाहित थे।

एमसीसी के मुताबिक वरिष्ठ वाम नेता एवं सीटू झारखंड प्रदेश समिति के मुख्य संरक्षक को उम्र संबंधी दिक्कतों के कारण आठ जुलाई को यहां केंद्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था जिसके कारण उनका निधन हुआ।

पूर्व लोकसभा सांसद के निधन पर शोक जताते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि ‘‘रॉय के निधन से झारखंड में बड़ा शून्य पैदा हो गया है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि राजकीय सम्मान के साथ राय का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

रॉय ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) प्रमुख शिबू सोरेन तथा पूर्व सांसद विनोद बिहारी महतो के साथ 1971 में अलग राज्य के लिये आंदोलन शुरू किया था। झारखंड 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर नया राज्य बना।

रॉय 1977, 1980 और 1989 में अविभाजित बिहार के धनबाद लोकसभा सीट से जीते। इसके अलावा उन्होंने बिहार विधानसभा में 1967, 1969 और 1972 में सिंदरी सीट का प्रतिनिधित्व किया।

सोरेन ने कहा कि रॉय का निधन उनके लिये व्यक्तिगत क्षति है।

जेएमएम प्रमुख ने कहा, ‘‘हमने एक ‘आंदोलनकारी’ खो दिया। उन्होंने हमेशा मजदूरों के अधिकारों के लिये लड़ाई लड़ी। उनका निधन मेरे लिये व्यक्ति क्षति है।’’

भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) ने अपने शोक संदेश में कहा कि रॉय ने अपना पूरा जीवन मजदूर वर्ग के कल्याण के लिये समर्पित कर दिया।

इसके अनुसार, ‘‘उन्होंने मजदूरों के समर्थन में धनबाद में माफिया के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने सामाजिक बदलाव के लिये लड़ाई लड़ी। उनका निधन देश में मजदूर आंदोलन के लिये एक बड़ी क्षति है।’’

रॉय का जन्म सपुरा गांव में हुआ जो अब बांग्लादेश में है। उनके पिता शिवेंद्र चंद्रा रॉय वकील थे। उन्होंने 1959 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में एमएससी की और दो साल तक एक निजी कंपनी में काम किया। बाद में वह 1961 में पीडीआईएल सिंदरी में शामिल हो गए।

1966 में आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस की गोलीबारी के विरोध में आयोजित ‘बिहार बंद’ में हिस्सा लेने पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। तत्कालीन सरकार का विरोध करने के कारण प्रोजेक्ट्स एंड डेवलेपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल) प्रबंधन ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।

इसके बाद रॉय श्रमिक संघ में शामिल हुए और उन्होंने सिंदरी फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) और निजी कोयला खान मालिकों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। साल 1967 में उन्होंने माकपा की टिकट पर बिहार की सिंदरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत गए।

हालांकि बाद में उन्होंने माकपा से इस्तीफा दे दिया और अपनी मार्क्सवादी समन्वय समिति बनाई।

रॉय को उनके साथी और समर्थक ‘राजनीतिक संत’ बुलाते थे क्योंकि उनका बैंक खाता ‘शून्य बैलेंस’ ही दिखाता रहा।

रॉय पिछले एक दशक से धनबाद से 17 किलोमीटर दूर पथाल्दिह इलाके में एक पार्टी कार्यकर्ता के घर में रह रहे थे। इससे पहले वह यहां पुराना बाजार में टेम्पल रोड पर अपने पार्टी कार्यालय में रहे।

पूर्व एमसीसी विधायक आनंद महतो ने कहा, ‘‘वह देश के पहले सांसद थे जिन्होंने सांसदों के लिए 1989 में भत्ते एवं पेंशन बढ़ाने वाले प्रस्ताव का विरोध किया था हालांकि उनका प्रस्ताव गिर गया।’’

भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भाकपा माले उन्हें सलाम करती है व उनकी श्रद्धा में अपने झंडे को झुकाती है। झारखण्ड और पूरे भारत के वाम और लोकतान्त्रिक आन्दोलन में कामरेड एके राय का योगदान बहुमूल्य रहा है। उन्होंने धनबाद संसदीय क्षेत्र से 3 बार जीत हासिल की। झारखण्ड के कोयला मजदूरों के सबसे ऊँचे प्रतिमान थे। उनकी ईमानदारी और सादगी सबों के बीच चर्चित रही है। वे अंतिम समय तक धनबाद के मजदूर जनता का प्यार और उनकी देखभाल पर निर्भर रहकर अत्यंत गरीबी की हालत मे भी ख़ुशी-ख़ुशी जिंदगी जिए। वे लोकतान्त्रिक आन्दोलनों के अथक योद्धा बने रहे। उनके लिए सच्चे लोकतंत्र का मतलब था समाज के सबसे दबे-कुचले की मुक्ति।

एक ऐसे दौर में जब झारखण्ड और देश की जनता रघुवर दास और मोदी के नेतृत्व में संचालित भाजपा के निजीकरण की नीतियों के खिलाफ, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र में कटौती और उसपर हमले के खिलाफ संघर्ष कर रही है, उनकी अनुपस्थिति हमारे लिए अपूर्णीय क्षति है। वे हमारे लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे, उनकी यादें हमें रौशनी प्रदान करेगी और आनेवाली पीढ़ियों के लिए और क्रांति के लिए वे प्रेरणा श्रोत बने रहेंगें।

A. K. Roy
Arun Kumar Roy
Indian politician
member of parliament
Jharkhand
dhanbad
Marxist Co-ordination Committee
MCC
Workers leader

Related Stories

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन

झारखंड: केंद्रीय उद्योग मंत्री ने एचईसी को बचाने की जवाबदेही से किया इंकार, मज़दूरों ने किया आरपार लड़ाई का ऐलान

झारखंड विधान सभा में लगी ‘छात्र संसद’; प्रदेश के छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर


बाकी खबरें

  • Russia Draws Red Lines for US
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस ने अमेरिका के सामने खींची लाल लकीर 
    18 Oct 2021
    मान्यता देने से पहले हम कुछ क्षेत्रीय पहल की उम्मीद कर सकते हैं। मान्यता के लिए मानदंड आमतौर पर पूरे देश पर सरकार का प्रभावी नियंत्रण होना ज़रूरी होता है।
  • ald
    सरोजिनी बिष्ट
    आख़िर जनांदोलनों से इतना डर क्यों...
    17 Oct 2021
    लखीमपुर खीरी हत्याकांड के विरोध में, उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार से सवाल करने का दम रखने वाली संघर्षशील ताकतें लगातार सड़कों पर उतर रही हैं तो उनके ख़िलाफ़ संविधान के विरुद्ध जाकर बेहद दमनात्मक…
  • press freedom
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़ाद पत्रकारिता से सत्ता को हमेशा दिक्कत रही
    17 Oct 2021
    हाल के सालों में भारत में प्रेस की आज़ादी कमज़ोर होती गई हैI इतिहास के पन्ने के इस अंक में लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय ने पत्रकार मासूम मुरादाबादी और जयशंकर गुप्ता से खास चर्चा की जिसमें प्रेस की आज़ादी…
  • संदीपन तालुकदार
    चीन द्वारा चाँद से धरती पर लाए पत्थरों से सामने आया सौर मंडल का नया इतिहास
    17 Oct 2021
    वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह से एकत्र किए गए पत्थरों के नमूनों के निष्कर्षों को साझा किया है, जिससे इसके कुछ आवश्यक पहलुओं के बारे में नई चीज़ें पता चली हैं।
  • अज़हर मोईदीन
    केरल बीजेपी में बदलाव से भी नहीं कम हुए बढ़ते फ़ासले
    17 Oct 2021
    हाल ही में संगठनात्मक नेतृत्व में फेरबदल और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रत्याशियों की घोषणा ने भाजपा की केरल इकाई के भीतर दरार को और बढ़ा दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License