NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सनातन संस्था बेनक़ाब, साधकों के ख़तरनाक मनसूबे कैमरे में क़ैद
सनातन संस्था के साधकों ने संगठन के संरक्षण में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की बात कबूल की है। इंडिया टुडे द्वारा प्रसारित एक वीडियो में इसे दिखाया गया है।
योगेश एस.
09 Oct 2018
sanatan sanstha

गोवा के पोंडा में सनातन संस्था का मुख्यालय सभी आतंकवादी गतिविधियों का केंद्र है। ये खुलासा इंडिया टुडे की एक जांच में हुआ है। इंडिया टुडे की जांच दल ने सनातन संस्था के दोनों साधक मंगेश दिनकर निकम और हरिभाऊ कृष्णा दिवेकर से हुई बातचीत को ख़ुफिया कैमरे में कैद कर किया है।दोनों को दस साल पहले वाशी और थाणे में बम विस्फोट के मामलों में अदालत ने बरी कर दिया था। दोनो ने कैमरा के सामने कथित घटना में बम प्लांट करने में सीधे तौर पर शामिल होने की बात स्वीकार की। निकम ने स्वीकार किया कि उसने मराठी नाटक 'आमही पचपुते’ देखने के लिए आए लोगों को डराने के लिए वाशी में विस्फोटक रखा था। सनातन संस्था के अनुसार इसमें ग़लत तरीक़े से हिंदू देवी-देवताओं को दर्शाया गया था, दिवेकर ने विस्फोटकरखने की बात क़बूल की।

https://www.newsclick.in/assassins-creed-hindutva-supporters-network-planned-several-more-killings

थाणे, पनवेल और वाशी में साल 2008 के बम हमलों के सिलसिले में निकम को सात साल पहले सुनवाई के दौरान अदालत ने बरी कर दिया था। इंडिया टुडे टीम के साथ बातचीत करते हुए निकम ने वाशी में बम रखे जाने को क़बूल किया और कहा, "मैं वाशी में था। मैंने इसे (आईईडी) रखा और बाहर आया। यही मेरी भूमिका थी।" 45 वर्षीय निकम ने यह भी कहा कि वह साल 2000 से एक संस्था साधक रहा है और उसने स्वीकार किया कि हमले की योजना महाराष्ट्र के पनवेल के संस्था में तैयार की गई थी। दिवेकर भी संस्था का साधक है और सबूत की कमी के कारण उसे बरी कर दिया गया था। उसने इंडिया टुडे टीवी की जांच टीम से स्वीकार किया कि उसके पास विस्फोटक थे- ऐसा हीकुछ जो कि आतंकवाद विरोधी दल (एटीएस) ने अपनी चार्जशीट में दर्ज नहीं किया था।

सनातन संस्थान की आतंकी गतिविधियां

एक हिंदू राष्ट्र बनाने को लेकर धार्मिक युद्ध के लिए 4 लाख कार्यकर्ताओं की सेना बनाने का दावा करने वाला ये आतंकी संगठन आतंकवादी गतिविधियों के कई मामलों में आरोपी रहा है। साल 1999 में हाइपोथेरेपिस्ट प्रशिक्षित जयंत बालाजी अठवाले द्वारा इस संस्था को स्थापित किया गया, उसने इसे "आध्यात्मिक" संगठन का नाम दिया।साल 2009 में आध्यात्मिकता के इस मुखौटा का उस समय पर्दाफाश हो गया जब संगठन का नाम साल 2009 के मडगांव विस्फोट में सामने आया था; तब से इससंगठन का नाम बम विस्फोटों और हत्याओं से जुड़े कई अन्य मामलों में सामने आया है। नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पंसारे, एमएम कलबुर्गि और गौरी लंकेश की राजनीतिक हत्याओं के मामले में सीबीआई, सीआईडी और कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के एसआईटी की चल रही जांच ने फिर से संस्थान को सुर्खियों में ला दिया है।

https://www.newsclick.in/hindutva-terror-story-common-link-between-four-murders

राजनीतिक संरक्षण पर सवाल

इसका नाम फिर से सामने आने के बाद, सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज़ हो गई है। सवाल यह है कि संगठन पर प्रतिबंध लगाना क्यासमाधान है। हालांकि, अभी तक कई सवाल क़ायम है कि संगठन के संस्थापक और पदाधिकारी की जांच क्यों नहीं की गई है; गोवा पुलिस के एसएचओ सीएल पाटिल, और एटीएस इंस्पेक्टर सलीम शेख ने इंडिया टुडे की जांच टीम के साथ बोलते हुए कैमरे के सामने कहा है कि संस्था को कुछ राजनेता सेराजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, नेताओं की पत्नी संस्था की साधक है और इस तरह जांच एजेंसियों पर दबाव बनता है।

https://www.newsclick.in/mgp-gives-clean-chit-sanatan-sanstha-cases-rationalists-murders

संस्था ने फिर नफरत पैदा करने वाले प्रचार शुरू किया

इस बीच, जब रिकॉर्ड किए गए वीडियो को इंडिया टुडे द्वारा प्रसारित किया गया, तो इस सनातन संस्था ने जांच दल के पत्रकारों की तस्वीरें प्रकाशित करके अपनी शैली में घृणित प्रचार शुरू किया।

आतंकी गतिविधियों को उजागर करने वाले पत्रकारों के ख़िलाफ़ सनातन संस्था का नफरत भरा प्रचार शुरू।

नफरत भरे पोस्ट को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया है जिसमें दावा किया गया है कि सनातन संस्थान के वकील संजीव पुनालेकर ने 27 सितंबर, 2018 को महाराष्ट्र सरकार को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में पुनालेकर ने कहा, "थाणे, वाशी और मर्गाओ बम विस्फोट के मामलों में बरी हुए कुछ लोगों से दो व्यक्तियों ने हाल ही में मुलाकात की और जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश की। कथित 'हिंदू आतंकवाद' के कई मामलों में आरोपी को बरी कर दिया गया है लेकिन मामले का समाधान करना अभी बाकी है। इसलिए सवाल उठता है कि इन मामलों के असली मास्टरमाइंड ने इन लोगों को जानकारी इकट्ठा करने के लिए भेजा है। इन व्यक्तियों के पास उक्त लोगों के पते और वर्तमान नंबर भी था। हिंदुओं के कपड़े पहने ये लोग पाकिस्तानी या आईएसआईएस आतंकवादी भी हो सकते हैं।"

यह पहली बार नहीं है जब इस संस्था ने उन लोगों के ख़िलाफ़ ऐसे घृणित प्रचार का सहारा लिया है जिन्होंने उन्हें बेनक़ाब करने की कोशिश की है। यह संस्था द्वारा झूठी कहानी बनाने और अपने अनुयायियों को उत्तेजित करने का एक प्रयास है जो अपने गुरू जयंत बालाजी अठवाले के निर्देशों पर काम करते हैं। अब सवाल यह है कि क्या जांच एजेंसियां और महाराष्ट्र, गोवा तथा कर्नाटक की सरकारें और केंद्र सरकार भी इस जांच को एक सबूत के रूप में मानेगी?

Sanatan sanstha
BJP
India today sting
hindutva terorr
expose

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर : रणनीतिक ज़ोजिला टनल के 2024 तक रक्षा मंत्रालय के इस्तेमाल के लिए तैयार होने की संभावना
    30 Mar 2022
    प्रोजेक्ट हैंडलर्स के मुताबिक़, ज़ोजिला टनल सहित पांचों टनल का काम सर्दियों के दौरान तेज़ किया गया है। यह रूट तय समय से एक साल पहले सितंबर 2025 में ही इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाएगा।
  • SC
    भाषा
    उच्चतम न्यायालय में चार अप्रैल से प्रत्यक्ष रूप से होगी सुनवाई
    30 Mar 2022
    शीर्ष अदालत में बुधवार को मामलों पर सुनवाई शुरू होने से पहले प्रधान न्यायाधीश ने यह घोषणा की।
  • Cartoonclick
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: चुनाव ख़तम-खेल शुरू...
    30 Mar 2022
    कहावत है कि ‘खेल ख़तम-पैसा हज़म’, लेकिन राजनीति के संदर्भ में इसे यूं भी कहा जा सकता है कि ‘चुनाव ख़तम-खेल शुरू...’ जी हां, तभी तो पांच राज्यों में चुनाव ख़त्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दामों में आग
  • sabarmati ashram
    तुषार गांधी
    मैंने क्यों साबरमती आश्रम को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है?
    30 Mar 2022
    साबरमती आश्रम महज़ बापू और बा का स्मारक ही नहीं है, बल्कि यह आज़ादी को लेकर किये गए हमारे अनूठे अहिंसक जनांदोलन, यानी सत्याग्रह का भी एक स्मारक है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,233 नए मामले, 31 मरीज़ों की मौत
    30 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 14 हज़ार 704 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License