NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
श्रीनगर: घेराबंदी के बीच कम्युनिटी स्कूल बने प्रतिरोध का रास्ता
एक अध्यापक ने कहा "हम बच्चों को न तो घर के अंदर बंद रहने देंगे और न ही उनके इर्द-गिर्द पनपे हालात में उन्हें उदास होने के लिए छोड़ेंगे।"
सुमेधा पाल
27 Sep 2019
Translated by महेश कुमार
srinagar amid locktown community

श्रीनगर का प्रतिष्ठित लाल चौक, जिसे प्रतिरोध के केंद्र के रूप में जाना जाता है; उसकी संकरी गलियों के एक सामुदायिक स्कूल है जिसे दज़गीर साहिब की एक छोटी सी मस्जिद में चलाया जा रहा है। भारत सरकार दावा कर रही है कि राज्य में स्कूल खुल गए हैं और सड़कों पर बसें चल रही हैं। एक शिक्षिका ज़कीरा ने कहा, “यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं है, जो सामान्य दिखता है। हम नहीं चाहते कि राज्य हमारे ऊपर इस तरह के 'सामान्य' हालात थोपे।"

इस दो कमरे के स्कूल को 15 अगस्त के कुछ समय बाद विभिन्न उम्र के 40 बच्चों को लेकर स्थापित किया गया था। ज़कीरा ने कहा, “राज्य चाहता है कि हमारे बच्चे अनपढ़ रहें और उनके भविष्य को अंधकार में धकेलना चाहता है और हमें वापस प्राचीन काल में ले जाना चाहता है। यह हमें स्वीकार नहीं है। स्कूलों को चालू रखना और इन बच्चों को पढ़ाना ही हमारे लिए प्रतिरोध का एक तरीक़ा है।”

sringar 2.PNG

ज़कीरा स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन तीन घंटे से ज़्यादा की यात्रा करती हैं। वह कहती हैं कि उनका भविष्य दांव पर लगा है और राज्य में घेराबंदी/तालाबंदी होने से नियमित रूप से कक्षा नहीं लग रही हैं जिसके कारण बच्चे बहुत पीड़ित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरे पास इन बच्चों के लिए सिर्फ़ और शिक्षक है, लेकिन फिर भी हम इन बच्चों को घर के अंदर बंद नहीं रहने दे सकते हैं और उनके इर्द-गिर्द पनपे हालत की वजह से उन्हेंं उदास रहने के लिए भी नहीं छोड़ सकते हैं।"

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें इस स्कूल को स्थापित करने में कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ा, तो ज़कीरा ने कहा कि बच्चों को उनके घरों से बाहर निकालना ही इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा थी। एक अन्य शिक्षक ने कहा, “हम माता-पिता से मिलने घर-घर गए और माता पिता से बच्चों को मस्जिद भेजने के लिए कहा ताकि वे दिन के समय पढ़-लिख सकें। उनका विश्वास हासिल करना बेहद मुश्किल था, क्योंकि ज़ाहिर तौर पर वे अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए काफ़ी भयभीत और चिंतित थे। उन्होंने हमसे पूछा कि अगर सुरक्षा बलों द्वारा हमला किया जाता है और हमारे बच्चों को कुछ हो जाता है, तो फिर हम क्या करेंगे?”

अंततः रशीदा (बदला हुआ नाम) एक 16 वर्षीय छात्रा सामुदायिक स्कूल में अपनी कक्षा में आने में कामयाब रही, उसने कहा, "यहाँ आना आज़ादी मिलने जैसा है और अपनी उम्र के बच्चों से बात करने और कुछ सीखने का मौक़ा मिला है। हम पाठ लेते हैं और गणित का अभ्यास करते हैं। यहां आने से पहले, ऐसा लग रहा था कि जैसे हम अपने ही घरों में क़ैद कर दिए गए हैं। मैं अभी भी घर के बाहर आने से डरती हूं क्योंकि हालात अभी भी सामान्य नहीं है, लेकिन मैं हर दिन यहां सीखने के लिए आती हूं, क्योंकि मैं एक डॉक्टर बनना चाहती हूं और जब मैं बड़ी हो जाऊँगी तो डॉक्टर बनकर आपने राज्य के लोगों की जान बचाने में के लिए काम करूंगी।”

शिक्षक ने न्यूज़क्लिक को बताया, “वे हमें बैठने के लिए कहते हैं तो हम बैठ जाते हैं। वे हमें खड़े होने के लिए कहते हैं और हम खड़े हो जाते हैं। हम भारत सरकार की इच्छा को पूरा करते-करते थक गए हैं और अब यह हमला हमें स्वीकार नहीं है। कश्मीर के मामले में, भारतीय संविधान में मौजूद न्याय और समानता के सभी गुणों को छोड़ दिया गया है।”

यह पहली बार नहीं है कि शिक्षकों ने स्वैच्छिक योगदान पर निर्भर होकर सामुदायिक स्कूल खोले हैं। वर्ष 2016 में, जब हिज़्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की हत्या के कारण तनाव बढ़ गया था तो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में इसी तरह के स्कूलों ने आकार ले लिया था। श्रीनगर में, और अधिक स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। ज़कीरा ने कहा, "एक अन्य स्कूल गोसाईया में खुलने जा रहा है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को शिक्षा मिल सके।"

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को 5 अगस्त को निरस्त करने के बाद से पूरे क्षेत्र में मुसलसल घेराबंदी देखी जा सकती है। भारत सरकार ने एक बार फिर से दावा किया है कि पिछले कुछ हफ़्तों से राज्य में सामान्य स्थिति लौट रही है जिसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई स्कूल पेन ड्राइव में शिक्षण सामग्री की पेशकश कर रहे हैं और साथ ही परीक्षा आयोजित कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों ने सरकार के इन दावों का खंडन किया है।

छात्रों सहित सभी के मुक्त आवागमन पर रोक लगने से घाटी में शिक्षा पर बड़े पैमाने पर प्रहार हुआ है। कॉलेजों के बंद होने से और संचार और परिवहन सुविधा के अभाव में, छात्रों के पास घर पर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। जिन लोगों ने कोचिंग क्लास और राज्य की परीक्षाओं के लिए मोटी रक़म चुकाई थी, उन लोगों को इसका कोई फ़ौरी समाधान नहीं मिला है। इसलिए, सामुदायिक स्कूल अब शिक्षा का एक अस्थायी प्रवेश द्वार बन गए हैं।

Jammu and Kashmir
Abrogation of Article 370
J&K Lockdown
Article 35A

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती

जम्मू-कश्मीर परिसीमन से नाराज़गी, प्रशांत की राजनीतिक आकांक्षा, चंदौली मे दमन


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 4,194 नए मामले, 255 मरीज़ों की मौत
    11 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.10 फ़ीसदी यानी 42 हज़ार 219 हो गयी है।
  • गोवा में फिर से भाजपा सरकार
    राज कुमार
    गोवा में फिर से भाजपा सरकार
    11 Mar 2022
    गोवा में कुल 40 विधानसभा सीटों पर मतदन हुआ था जिसमें से भाजपा ने 20 सीटों पर जीत दर्ज की है, कांग्रेस ने 11, गोवा फारवर्ड पार्टी एक सीट, महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के खाते में 2 सीटें, आम आदमी…
  • maduro
    तान्या वाधवा
    अमेरिकी सरकार के साथ बैठक के बाद मादुरो का विपक्ष के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का ऐलान
    11 Mar 2022
    राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की समाजवादी सरकार और विपक्ष के बीच संवाद प्रक्रिया अक्टूबर 2021 से रुकी हुई थी। इस बीच वेनेजुएला और अमेरिका के बीच के राजनयिक रिश्ते जनवरी 2019 से ही निलंबित थे।
  • wheat
    डैरियो सबाघी
    यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर गंभीर गेहूं संकट का सामना करता मध्य पूर्व
    11 Mar 2022
    मध्य पूर्वी और उत्तरी अफ़्रीकी देश रूस और यूक्रेन से किये जाने वाले गेहूं के आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। पहले से ही दबाव में रह रहे इस क्षेत्र में मौजूदा युद्ध से और भी गंभीर खाद्य संकट पैदा हो…
  • jandesh 2022
    भाषा सिंह
    त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल
    10 Mar 2022
    बात बोलेगी—ये चुनाव परिणाम यह संकेत साफ़ दे रहे हैं कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों तक राजनीतिक एजेंडा सेट करने में भाजपा के पास बढ़त है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License