NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!
मिर्ज़ा के इस शेर में ग़ालिब को शाहीन बाग़ और हम को मेनस्ट्रीम न्यूज़ चैनल पढ़ा जाए। नौ मई का दिन चैनलों और समर्थकों के लिए तय किया गया था जो रोज़ मुसलमान उत्पीड़न का नया नशा चाहता है। मगर हाय, यह हो न सका।
वसीम अकरम त्यागी
10 May 2022
shaheen bagh

थी ख़बर गर्म कि 'ग़ालिब' के उड़ेंगे पुर्ज़े 

देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ

मिर्ज़ा के इस शेर में ग़ालिब को शाहीन बाग़ और हम को मेनस्ट्रीम न्यूज़ चैनल पढ़ा जाए। नौ मई का दिन चैनलों और समर्थकों के लिए तय किया गया था जो रोज़ मुसलमान उत्पीड़न का नया नशा चाहता है। मगर हाय, यह हो न सका।

बीते कुछ वर्षों में भारतीय राजनीति ने कई घातक, जनविरोधी और हठी प्रयोग सीखे हैं। उन्हीं में एक नई तकनीक बुलडोज़र है। अदालत के बाहर लोगों को सबक़ सिखाने की इस असंवैधानिक ज़िद ने भाजपा शासित राज्यों में नियम, क़ानून तो ताक पर रखकर बुलडोज़र से लोगों को ‘सबक़’ सिखाया है। दिल्ली के जहांगीपुरी में हनुमान जयंती के अवसर पर हुई हिंसा के तुरंत बाद ‘अतिक्रमण’ हटाने के नाम पर जिस तरह बुलडोज़र चलाया गया, उसकी दहल दिल्ली के दूसरे इलाक़ों में महसूस की गई। जहांगीरपुरी के तुरंत बाद भाजपा नेताओं की तरफ से शाहीन बाग़ में बुलडोज़र चलाए जाने की मांग की जाने लगी, एमसीडी में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने ‘अपने’ नेताओं की इस मांग के मद्देनज़र, कालंदी कुंज, संगम विहार, ओखला के शाहीन बाग़ को अतिक्रमण मुक्त करने के लिये चिन्हित किया। शाहीन बाग़ का नाम आते ही मीडियो को मसाला मिल गया, टीवी पर बहस होने हुईं, तय हुआ कि 9 मई को शाहीन बाग़ में बुलडोज़र चलेगा। इस ख़बर के बाद शाहीन बाग़ में रोड पर पटरी लगाने वाले पटरीवालो ने अपना सामान समेट लिया, जिसकी वजह से अतिक्रमण हटाने बुलडोज़र को बैरग लौटना पड़ा। बिना किसी दुकान, मकान, को गिराए वापस लौटे बुलडोज़र के साथ ही शाहीन बाग़ में घटनास्थल पर मौजूद न्यूज़ चैनल्स के पत्रकारों के चेहरे मुरझा गए।

लगभग सप्ताह भर से ‘गोदी मीडिया’ के ऐंकर्स शाहीन बाग़ में बुलडोज़र चलाए जाने का इंतज़ार कर रहे थे। यही कारण था कि जैसे ही बुलडोज़र शाहीन बाग़ पहुंचा तो वहां पर पहले से मौजूद गोदी मीडिया के रिपोर्टर बुलडोज़र पर चढ़ गए, उन्होंने उछल-उछल कर ‘रिपोर्टिंग’ करना शुरू कर दिया, लेकिन जब एमसीडी को अतिक्रमण के नाम पर हटाने के लिये कुछ भी नहीं मिला तो एका-एक सबके चेहरे उतरते चले गए। उनकी वह खुशी काफूर हो गई जिसे उन्होंने सप्ताह भर से शाहीन बाग़ में चलने वाले बुलडोज़र की ख़ातिर रोके हुए था। अब सवाल है कि आख़िर गोदी मीडिया के ऐंकर्स और सत्ताधारी दल के नेता शाहीन बाग़ में बुलडोज़र चलता देखना क्यों चाहते हैं? इसका सीधा सा जवाब है कि शाहीन बाग़ मुस्लिम प्रतिरोध का चेहरा है। 2019-20 में जब बहुमत के नशे में चूर केंद्र सरकार द्वारा सीएए जैसा नस्लवादी क़ानून बनाया गया तब उस क़ानून के विरोध में शुरू हुए सीएए विरोधी आंदोलन ने शाहीन बाग़ को मुस्लिम प्रतिरोध का चेहरा बना दिया। उसी आंदोलन ने देशभर में सीएए विरोधी आंदोलन को एक दिशा दी, यही कारण था कि देश भर में सीएए विरोध के जहां भी धरना चल रहा था उसे शाहीन बाग़ का ही नाम दिया गया। फिर यूं हुआ कि 2020 में संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेता अमित शाह को कहना पड़ा कि बटन इतनी ज़ोर से दबाना कि करंट शाहीन बाग़ में लगे। भाषा हारते लोकतंत्र को शाहीन बाग़ ने सभ्य भाषा दी, हिंसा पर उतारू उग्र राष्ट्रवादियों को शाहीन बाग़ ने अहिंसा का रास्ता दिखाया, बहुमत के नशे में चूर होकर असंवैधानिक कृत्य करने वाली सरकार को शाहीन बाग़ ने संविधान का पाठ पढ़ाया। 

शाहीन बाग़ से मिले ये सबक़ सत्ताधारी दल और मीडिया चैनल्स की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं। यही कारण है कि किसी न किसी वजह से शाहीन बाग़ को निशाना बनाया जाता रहा है। 

ट्विटर पर शाहीन बाग़ के ख़िलाफ ट्रेंड चलते हैं। शाहीन बाग़ में घटित किसी अप्रिय घटना को बढ़ा-चढ़ा कर, मिर्च मसाला लगाकर परोसा जाता है। लेकिन तमाम दुष्प्रचार के बावजूद शाहीन बाग़ ने संवैधानिक दायरे से बाहर जाकर कोई क़दम नहीं उठाया। उधर भाजपा नेता कपिल मिश्रा बुलडोजर वापस लौटने की खीझ में मुस्लिम बस्तियों पर भड़ास निकालने लगे। कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया कि “जहां संविधान लागू ना हो, जहां कानून की ना चलती हो, जहां पुलिस की नो एंट्री हो जहां अवैध हथियार, अवैध धंधे और अवैध घुसपैठियों के अड्डे हो उसे क्या कहा जायेगा ये शाहीन बाग, जहाँगीर पुरी, सीमा पूरी जैसे इलाको को और क्या कहा जाए।” 

हिंदुत्तववादियों द्वारा मुस्लिम बस्तियों के बारे में अक्सर इस तरह की अनर्गल टिप्पणियां की जाती रही हैं। राजनीति में बुलडोज़र की ईजाद से पहले मुस्लिम बस्तियों को “मिनी पाकिस्तान” बताना आम बात थी, लेकिन अब मुस्लिम बस्तियों को अवैध धंधों और घुसपैठियों का अड्डा बताकर एक नया नैरेटिव सैट करने का षड़यंत्र किया जा रहा है। इस षड़यंत्र में भाजपा और उसके अनुषांगिक संगठनों समेत मीडिया भी शामिल है। शाहीन बाग़ जीता या नहीं मगर सत्ता का नशा जरूर हारा है जैसे वो एनआरसी विरोधी आंदोलन के दौरान रोज़ हार रहा था। शाहीन बाग़ अल्लामा इक़बाल के 'शाहीं' को ही चरितार्थ कर रहा है।

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा 

तिरे सामने आसमाँ और भी हैं

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

Shaheen Bagh
shaheen bagh bulldozer
shaheen bagh encroachment
MCD
delhi police
CPIM
BJP
AAP
Shaheen bagh citizens
CAA
Anti CAA Protest

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग


बाकी खबरें

  • workers
    सतीश भारतीय
    गुरुग्राम में बेरोजगारी, कम कमाई और बढ़ती महंगाई के बीच पिसते मजदूरों का बयान
    11 Jan 2022
    मजदूर वर्ग सरकार की योजनाओं का नाम तक नहीं बता पा रहा है, योजनाओं का लाभ मिलना तो दूर की बात है।
  • Swami Prasad Maurya
    रवि शंकर दुबे
    चुनावों से ठीक पहले यूपी में बीजेपी को बड़ा झटका, श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद तीन और विधायकों के इस्तीफे
    11 Jan 2022
    यूपी में चुनावी तारीखों का एलान हो चुका है, ऐसे वक्त में बीजेपी को बहुत बड़ा झटका लगा है, दरअसल यूपी सरकार में श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।
  • Schemes workers
    कुमुदिनी पति
    उत्तर प्रदेश में स्कीम वर्कर्स की बिगड़ती स्थिति और बेपरवाह सरकार
    11 Jan 2022
    “आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन चला रही हैं। पर तमाम वार्ताओं के बाद भी उनकी एक भी मांग पूरी नहीं की गई। उनकी सबसे प्रमुख मांग है सरकारी कर्मचारी का दर्जा।”
  • AKHILESH AND YOGI
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    80/20 : हिंदू बनाम हिंदू की लड़ाई है यूपी चुनाव
    11 Jan 2022
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ठीक ही कहते हैं कि यह 80 प्रतिशत बनाम 20 प्रतिशत की लड़ाई है। बस वे इसकी व्याख्या ग़लत तरीके से करते हैं। पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार त्रिपाठी का विचार-विश्लेषण
  • Cuba
    ऋचा चिंतन
    वैश्विक एकजुटता के ज़रिये क्यूबा दिखा रहा है बिग फ़ार्मा आधिपत्य का विकल्प
    11 Jan 2022
    दुनिया को बिग फ़ार्मा के एकाधिकारवादी चलन का एक विकल्प सुझाते हुए क्यूबा मुनाफ़े से कहीं ज़्यादा अहमियत लोगों को देता है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, राज्य से वित्त पोषित अनुसंधान को बढ़ावा देता…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License