NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
उत्पीड़न
समाज
भारत
होली पर पुरुषों ने कमीज़ उतारकर महिला छात्रावास के इर्द-गिर्द की परेड: छात्राओं का आरोप
‘जेएनयू की महिलाओं’ द्वारा जारी एक वक्तव्य के मुताबिक, इन हॉस्टल में तैनात किसी सिक्योरिटी गार्ड ने इन अर्धनग्न पुरुषों को ऐसा करने से रोकने की कोशिश नहीं की और न ही इसकी शिकायत किए जाने पर उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की।
दित्सा भट्टाचार्य
07 Apr 2021
jnu
चित्र सौजन्य : विकिमीडिया कॉमन्स

ऐसा बताया जा रहा है कि 29 मार्च को होली के दिन नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय  के महिला छात्रावासों के पर्सियार में कुछ पुरुषों ने अपनी कमीजें उतारकर परेड की। जब यह हो रहा था तब इन हॉस्टलों के गेट पर तैनात किसी भी सिक्योरिटी गार्ड ने उन युवकों को रोकने की कोशिश नहीं की। 

 जेएनयू की महिलाओं’ द्वारा जारी एक वक्तव्य के अनुसार, “जब छात्राओं ने इस घटना पर अपना तीव्र रोष जाहिर किया तो अनेक पुरुष छात्रों ने, जो शायद उस परेड में शामिल थे, यह दावा किया कि “परेड का आयोजन इन छात्रावासों में रहने वाली लड़कियों के “दिल-बहलाव” के लिए किया गया था और अगर यह परेड छात्राओं को इतना ही नागवार गुजरा था तो उन्हें इसकी तुरंत शिकायत उन युवकों से करनी चाहिए थी।”

वक्तव्य में कहा गया है, “यह विश्वास करना मुश्किल है कि देश में सर्वाधिक राजनीतिक रूप से “प्रगतिशील” परिसर होने के बावजूद, यहां रहने वाले युवकों को यह समझाने की जरूरत है कि होली पर उनका यह प्रदर्शन किसी भी लिहाज से ‘दिल बहलाव’ नहीं था, बल्कि अपनी ताकत का एक आक्रामक और दहशत पैदा करने वाला प्रदर्शन था। उनका यह कृत्य किसी भी मायने में इस संस्थान में रहने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण होने का संकेत नहीं देता है।”

यह विश्वविद्यालय के इतिहास में  पहले कभी नहीं हुआ था कि इतने सारे  युवा पुरुषों के एक समूह ने अर्धनग्न हो कर  महिला छात्रावासों के परिसर में परेड की हो। इन हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने बताया कि इस घटना से वे खुद को काफी असहज महसूस करने लगीं हैं और अपनी निजता में हुई इस खुली घुसपैठ से खौफजदा हैं। 

इस घटना के एक दिन बाद,  यानी 30 मार्च को ‘जेएनयू की महिलाओं’ ने  इस परेड के वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल कर लिखा, “ कल होली के नाम पर जो कुछ हुआ, वह बेहद शर्मनाक,  घृणास्पद और असभ्य था। हम जेएनयू की महिलाएं, इन कृतियों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करती हैं और जेएनयू प्रशासन से अश्लीलता के सार्वजनिक प्रदर्शन और आपराधिक डर पैदा करने के ऐसे  कृत्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करती हैं।” छात्राओं ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इस घटना के बाद इसकी शिकायत हॉस्टल के सिक्योरिटी गार्डस से की थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जेएनयू की छात्राओं ने यह सवाल उठाया कि कैसे कोई आदमी या समूह नतीजों की परवाह किए बगैर अश्लीलता के ऐसे प्रदर्शनों में कैसे हिस्सा ले सकता है?  इन छात्राओं ने इसके लिए जीएससीएएसएच के विघटन को जिम्मेदार ठहराया। वक्तव्य में कहा गया है कि जेएनयू प्रशासन द्वारा जीएससीएएसएच को विघटित किए जाने के बाद से यह परिसर नैतिक वातावरण में छीजन का सामना कर रहा है। इस वजह से ही महिलाओं और दमित जेंडर के व्यक्तियों के सुरक्षित स्थानों में रोजाना ही अतिक्रमण होता है।”

वक्तव्य में कहा गया है, “अब समय आ गया है कि इस कैंपस में लैंगिक संवेदनशीलता में आ रही गिरावट को रोकने के लिए जेएनयू समुदाय द्वारा सचेत प्रयास किया जाए और ऐसे पुरुषों द्वारा सामूहिक रूप से दी जा रही धमकियों, उनकी तुच्छता और महिलाओं की गतिविधियों का लगातार मजाक उड़ाने तथा इस तरह के कृत्यों के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों पर अपनी विषाक्त मर्दानगी के प्रदर्शन के जरिये अपना प्रभुत्व स्थापित करने के प्रयासों को विफल करने के लिए काम करना चाहिए। 

 अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Shirtless-Men-Paraded-Women-Hostels-JNU-Holi-Women-JNU

JNU
GSCASH
women harrasment
Holi

Related Stories

जेएनयू में छात्रा से छेड़छाड़, छात्र संगठनों ने निकाला विरोध मार्च

कार्टून क्लिक : 'वीर' तुम बढ़े चलो...

बैलाडीला मामला : जांच टीम की सुरक्षा में गए जवानों ने की ग्रामीण महिलाओं से मारपीट?

मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामला : सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिये सीबीआई को दिए तीन महीने

रोहित वेमुला से लेकर डॉ. पायल तक : जातीय शोषण की अंतहीन कथा


बाकी खबरें

  • Yoweri Museveni
    सिलजा फ़्रोलिच
    अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं
    11 Jan 2022
    युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी पर फर्जी सोशल मीडिया एकाउंट्स के ज़रिये अपनी सत्ता को मज़बूत करने का आरोप है। लेकिन वे अफ़्रीका में अकेले नहीं हैं। क्या महाद्वीप में सोशल मीडिया लोकतंत्र के लिए…
  • Elizabeth Holmes
    प्रबीर पुरकायस्थ
    एलिज़ाबेथ होम्स फ़ैसला: अमरीका में ग्राहकों से ठगी जायज़, पर निवेशकों से झूठ नहीं चलेगा
    11 Jan 2022
    अमरीका का जाना-परखा न्याय यही कहता है, कि उपभोक्ता ठग होते हैं और उनको ठगने में कोई गुनाह नहीं है। लेकिन निवेशकर्ताओं के साथ ऐसा सलूक नहीं किया जा सकता है, वे बड़े धनपति जो हैं। 
  • covid
    दित्सा भट्टाचार्य
    भारत की कोविड-19 मौतें आधिकारिक आंकड़ों से 6-7 गुना अधिक हैं: विश्लेषण
    11 Jan 2022
    नए अध्ययन के मुताबिक भारत में 2020 में अपेक्षित मृत्यु दर से कम की तुलना में 2021 में उच्च कोविड मृत्यु दर इस विषय में और अधिक शोध की मांग करता है।
  • Anand
    सत्यम श्रीवास्तव
    मध्य प्रदेश आनंद विभाग: कर्मकांड और प्रचार से दूर 'आनंद' की हक़ीक़त
    11 Jan 2022
    हिंदुस्तान में यह पहली बार हुआ था कि किसी एक राज्य (मध्य प्रदेश) में अपने नागरिकों की खुशहाली को मापने और खुशहाली का प्रचार-प्रसार करने के लिए सांस्थानिक स्तर पर पहल की। लेकिन सरकार द्वारा किए गए काम…
  •  Kashmir’s apple industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    कश्मीर के सेब व्यापारी अपने भविष्य के लिए चिंतित, सरकार की तरफ़ से नहीं मिल रही मदद
    11 Jan 2022
    क़रीब 8,000 करोड़ के कश्मीर के सेब उद्योग को इलाक़े की अर्थव्यवस्था की बैकबोन माना जाता है, जिससे 30 लाख से ज़्यादा लोग जुड़े हुए हैं। मौजूदा समय में, #कश्मीरघाटी में 2,400 करोड़ तक की लागत के सेब का बाज़ार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License