NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी
ज़िला अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए स्वीकृत पद 1872 हैं, जिनमें 1204 डॉक्टर ही पदस्थापित हैं, जबकि 668 पद खाली हैं। अनुमंडल अस्पतालों में 1595 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 547 ही पदस्थापित हैं, जबकि 1048 पद खाली हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 May 2022
बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी

बिहार के चिकित्सा व्यवस्था की आए दिन पोल खुलती रहती है। नीतीश सरकार के विकास के बड़े दावों के बावजूद बहुत कुछ अब तक नहीं बदला है। अस्पताल की इमारतें जरूर बन गए हैं और इन अस्पतालों में इलाज के लिए मशीनें भी आ गई हैं लेकिन आज भी इलाज के अभाव में लोगों के मरने और इलाज के लिए लोगों की भटकने की खबरें राज्य में आम बात है। इतना ही नहीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रुरल हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2020-21 के मुताबिक बिहार में जिला और अनुमंडल स्तर के अस्पतालों में डॉक्टरों के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। सबसे ज्यादा पद अनुमंडलीय अस्पतालों में खाली हैं। ये आंकड़े 31 मार्च 2021 तक के हैं।

इन आंकड़ों के अनुसार राज्य में जिला अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए स्वीकृत पद 1872 हैं जिनमें 1204 डॉक्टर ही पदस्थापित हैं जबकि 668 पद खाली हैं। वहीं राज्य के अनुमंडल अस्पतालों की बात की जाए तो उनमें डॉक्टरों के 1595 पद स्वीकृत हैं जिनमें 547 ही पदस्थापित हैं जबकि 1048 पद खाली हैं।

इन अस्पतालों में पैरा मेडिकल स्टाफ की बात करें तो जारी आंकड़ों के मुताबिक इनके आधे से अधिक पद खाली हैं। राज्य के जिला अस्पतालों में पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए 8208 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 3020 स्टाफ ही पदस्थापित हैं इस तरह राज्य भर के जिलों में 5188 पद खाली हैं। वहीं अनुमंडल अस्पतालों में 4400 स्वीकृत पदों में केवल 1056 पैरा मेडिकल स्टाफ पदस्थापित हैं।इस तरह इस स्तर पर 3344 पद खाली हैं।

बिहार के ग्रामीण इलाकों में हेल्थ वर्कर (महिला)/एएनएम के आधे से अधिक पद खाली हैं। आंकड़ों के मुताबिक एएनएम के 45109 पद स्वीकृत हैं जिनमें 20403 ही पदस्थापित हैं। इस तरह 24706 पद खाली हैं। इन इलाकों के सीएचसी में स्पेशलिस्ट के 836 स्वीकृत पद हैं जिनमें केवल 106 डॉक्टर ही पदस्थापित हैं जबकि 730 पद खाली हैं। वहीं इस क्षेत्र के पीएचसी और सीएचसी में फार्मासिस्ट के 4126 स्वीकृत पदों में केवल 1077 पद ही भरे हैं जबकि 3049 पद खाली हैं। राज्य के ग्रामीण इलाकों में पीएचसी और सीएचसी में भारी संख्या में लैब टेक्निशियन के पद खाली हैं। 4331 स्वीकृत पदों में 979 पदों पर ही टेक्निशियन पदस्थापित हैं जबकि 3352 पद खाली पड़े हैं।

हालांकि बिहार में ग्रामीण क्षेत्र के सब सेंटर तथा पीएचसी में एएनएम की संख्या में वर्ष 2020 की तुलना में 2021 वृद्धि हुई है। वहीं पीएचसी में भी डॉक्टरों की संख्या में वर्ष 2021 में वृद्धि हुई है। वहीं सीएचसी में स्पेशलिस्ट की संख्या में गिरावट देखी गई है।

 

Bihar
doctors
District Hospitals
Sub divisional Hospital
Rural Health Statistic

Related Stories

बिहारः पिछले साल क़हर मचा चुके रोटावायरस के वैक्सीनेशन की रफ़्तार काफ़ी धीमी

बिहारः मुज़फ़्फ़रपुर में अब डायरिया से 300 से अधिक बच्चे बीमार, शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती

बिहार की राजधानी पटना देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

लोगों को समय से पहले बूढ़ा बना रहा है फ्लोराइड युक्त पानी

बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत

शर्मनाक : दिव्यांग मरीज़ को एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर पहुंचाया गया अस्पताल, फिर उसी ठेले पर शव घर लाए परिजन

नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग

बिहार में नवजात शिशुओं के लिए ख़तरनाक हुआ मां का दूध, शोध में पाया गया आर्सेनिक

बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाः मुंगेर सदर अस्पताल से 50 लाख की दवाईयां सड़ी-गली हालत में मिली

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Varanasi
    विजय विनीत
    बदहाली: रेशमी साड़ियां बुनने वाले हाथ कर रहे हैं ईंट-पत्थरों की ढुलाई, तल रहे हैं पकौड़े, बेच रहे हैं सब्ज़ी
    22 Sep 2021
    बनारस से ग्राउंड रिपोर्ट: विश्वविख्यात बनारस की रेशमी साड़ियों का ताना-बाना बिखर रहा है। इसी ताने-बाने में सिसक रही है बुनकरों की जिंदगी। जानने के लिए आपको लिए चलते हैं बनारस की संकरी गलियों में..
  • school
    सौम्या गुप्ता, सी. सरतचंद
    स्कूलों को वक़्त से पहले खोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए
    22 Sep 2021
    केवल स्कूलों को फिर से खोलने से असमान शिक्षा प्रणाली अधिक समान नहीं हो जाएगी जब तक कि सरकारें शिक्षा पर अपने ख़र्च को नहीं बढ़ाती हैं स्थिति में बदलाव लाना असंभव है। स्कूल खोलने से कोविड म्यूटेशन का…
  • SCO
    एम. के. भद्रकुमार
    ईरान की एससीओ सदस्यता एक बेहद बड़ी बात है
    22 Sep 2021
    तेहरान का एससीओ में ज़ोरदार स्वागत के साथ शामिल किया जाना और इस संगठन का जल्दबाज़ी के साथ विस्तार किया जाना दिखाता है कि बीजिंग और मॉस्को के बीच ज़बरदस्त तालमेल है।
  • यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    22 Sep 2021
    योगी जी का विकास का सारा जश्न दरअसल अर्थव्यवस्था के ध्वंस और कोविड से हलकान, हैरान-परेशान जनता को मुंह चिढ़ाने और उसके जले पर नमक छिड़कने जैसा है। कुछ विश्लेषकों ने ठीक नोट किया है कि "यूपी विकासोत्सव…
  • yogi
    अजय कुमार
    “कहां तो तय था चराग़ाँ….” CM योगी के वायदे और प्रति व्यक्ति आय में पिछड़ता यूपी
    22 Sep 2021
    अगर योगी सरकार अपने राजकाज में लोगों की भलाई का दावा कर रही है इसे परखने का सबसे शानदार तरीका ये है कि ये जाना जाए कि क्या वाकई लोगों की आमदनी बढ़ी है या नहीं?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License