NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
खेल
महिलाएं
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
खेल जगत की गंभीर समस्या है 'सेक्सटॉर्शन'
एक भ्रष्टाचार रोधी अंतरराष्ट्रीय संस्थान के मुताबिक़, "संगठित खेल की प्रवृत्ति सेक्सटॉर्शन की समस्या को बढ़ावा दे सकती है।" खेल जगत में यौन दुर्व्यवहार के चर्चित मामलों ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा है, लेकिन यह समस्या अब भी गहरी है।
कलिका मेहता
24 May 2022
sport
खेल जगत में अक्सर सेक्सटॉर्शन (किसी कार्य के बदले यौन संबंधों की मांग) के मामले दबा दिेए जाते हैं।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट में खेल जगत में चिंताजनक तौर पर "सेक्सटॉर्शन (किसी व्यक्ति द्वारा अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर यौन संबंधों की मांग)" के बढ़ते मामलों का जिक्र किया गया है। जर्मन एथलीटों के सर्वे में रिपोर्ट ने पाया कि संगठित खेल की दुनिया में औसत तौर पर तीन में से एक से थोड़े ज़्यादा संख्या में एथलीटों ने बताया कि उन्हें कम से कम एक बार यौन हिंसा की स्थिति का सामना करना पड़ा है। भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाली ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने जर्मनी के अलावा रोमानिया, मेक्सिको और जिम्बाबवे पर ध्यान केंद्रित रखा है।

जिमनास्ट और फुटबॉल में सामने आए बहुचर्चित मामलों के चलते पता चला है कि यौन दुर्व्यवहार किस हद तक फैला हुआ है, लेकिन मोटे तौर पर इस मुद्दे पर खेल जगत में बहुत ज़्यादा मामले सामने नहीं आ पाते।

सेक्सटॉर्शन- किसी व्यक्ति द्वारा अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करते हुए यौन-लाभ उठाने की कोशिश है, यह यौन दुर्व्यवहार के साथ-साथ भ्रष्टाचार भी है, पर अब भी इसे व्यापक तौर पर पहचान मिलना बाकी है। 

शक्ति संतुलन

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल में शोध प्रमुख मेरी चेने ने डी डब्ल्यू से कहा, "मुझे यह देखकर हैरानी हुई कि खेल के क्षेत्र में वे सभी स्थितियां मौजूद हैं, जो सेक्सटॉर्शन को बढ़ाने के लिए जरूरी हैं।"

वे कहती हैं, "शक्ति का अंतर बहुत ज़्यादा है, कई बच्चे बहुत जोखिम भरी स्थितियों में हैं, खेल की प्रवृत्ति के चलते कई प्रशिक्षक और खिलाड़ी भावनात्मक और शारीरिक तौर पर बहुत करीब होते हैं।"

सिमोन बाइल्स उन कई अमेरिकी जिम्नास्ट खिलाड़ियों में से हैं, जिन्होंने यौन दुर्व्यहार पर खुलकर बोला है। 

मेरी चेने कहती हैं, "कुछ मामलों में यह संबंध आपके करियर को बनाने या बिगाड़ने की शक्ति रखता है और फिर वहां सिर्फ़ आम प्रशासनिक माहौल ही होता है, जो बहुत कमजोर है। इसके चलते बहुत विस्फोटक स्थितियां पैदा हो जाती हैं।"

तुलनात्मक तौर पर सेक्सटॉर्शन की नई परिभाषा के चलते, रिपोर्ट खेल में इकट्ठे किए गए यौन दुर्व्यवहार के आंकड़ों पर आधारित है, पूरी दुनिया में सभी तरह के खेलों में यह मामले बहुतायत में पाए गए।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने इसलिए खेल जगत में सेक्सटॉर्शन की जांच करने का फ़ैसला किया, क्योंकि यह विश्वास काफ़ी पुख़्ता है कि इस क्षेत्र में वास्तविक बदलाव का आधार बनाने की क्षमता है।

चेने कहती हैं, "हम मानते हैं कि खेल जगत का मूल्यों को गढ़ने में एक अहम किरदार है। सैद्धांतिक तौक पर खेल सामाजिक न्याय के बारे में है। यह निष्पक्ष खेल और प्रवीणता के बारे में है।"

"अगर खेल में यौन दुर्व्यवहार हो रहा है, जो सेक्सटॉर्शन के दो हिस्सों में से एक है, तो यह खेल जगत के मिशन का उल्लंघन करता है। खेल व्यापक तौर पर देखे जाते हैं, अगर हम इस मुद्दे को भी प्रमुखता से दुनिया के सामने लाना चाहते हैं और सेक्सटॉर्शन को भ्रष्टाचार का एक तरीका घोषित करवाना चाहते हैं, तो इसके लिए खेल जगत एक बेहतरीन उपकरण साबित हो सकता है।"

हालांकि कई मामले, जिनसे आंकड़े इकट्ठे किए गए थे, उनमें सेक्सटॉर्शन से महिला व पुरुष दोनों ही प्रभावित हुए थे, लेकिन रिपोर्ट, उन कई अध्ययनों द्वारा कही गई बात की पुष्टि करती है कि यौन दुर्व्यवहार को करने वाले ज़्यादातर अपराधी पुरुष होते हैं।

लैंगिक असमानता

अलग-अलग अध्ययनों में पुरुष यौन दुर्व्यवहारियों की हिस्सेदारी 96 से 100 फ़ीसदी के बीच है। टीआई आलोचना करते हुए इसे "हायपर-मस्कुलीन" संस्कृति करार देती है। इस संस्कृति के साथ-साथ महिला खिलाड़ियों के भुगतान और उनकी सार्वजनिक दृश्यता में पुरुषों की तुलना में कमी, ऊपर से ताकतवर पदों पर कुछ ही महिलाओं की तैनाती से खेल जगत में सेक्सटॉर्शन का मुद्दा और बढ़ जाता है।

चेने ने कहा, "महिलाओं के खेलों को पुरुषों के खेलों की तरह अहमियत नहीं दी जाती। यहां बहुत बड़ी मात्रा में भुगतान अंतर है, ऊपर से नेतृत्वकारी और प्रशासनिक भूमिकाओं में भी महिला खिलाड़ियों और महिलाओं का बहुत कम प्रतिनिधित्व है। यहां वह 'ओल्ड ब्वॉयज' नेटवर्क चलता है, जहां ताकतवर पदों पर दशकों से बैठे बूढ़े लोगों को स्थितियों को बदलने के लिए प्रोत्साहित नहीं हैं। इसलिए खेल जगत में अन्याय का यह ढांचा स्थिरता के साथ बना हुआ है।"

पेंग सुई के मामले ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान अपनी ओर खींचा है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल जर्मनी में खेल पर कार्यकारी समूह की अध्यक्ष सिल्विया स्चेंक ने एक वक्तव्य में कहा, "चीन की पेंग शुई से लेकर; जिन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी द्वारा किए गए दुर्व्यवहार को ढक दिया गया; अमेरिका की कायली मैकेंजी तक; जिन्हें खेल संगठन की तरफ से दिए गए प्रशिक्षक तरफ से दीर्घकालीन प्रताड़ना और दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा, अब उनके पास प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का मौका भी नहीं है; कई लोगों ने इस शोषणकारी व्यवस्था का दंश झेला है।"

जर्मन ओलंपिक स्पोर्ट्स कंफेडरेशन (डीओएसबी) द्वारा खेल में यौन हिंसा के खिलाफ़ सुरक्षा के लिए म्यूनिख घोषणा, 2010 के असफल होने के बाद बदलाव की कोशिशों में व्यापक दृष्टि की कमी रही है।

घोषणा की 15 बिंदुओं में, यौन हिंसा के निरोध को खेल अर्हताओं में अनिवार्य शीर्षक बनाने और नैतिक संहिता को अपनाने की बात शामिल थी। नौ साल बाद, एक अध्ययन से पता चलता है कि आधे से कुछ ज़्यादा राष्ट्रीय खेल संघों ने अपने नियमों में यौन दुर्व्यवहार के निरोध को शामिल किया है।

बचाव को मिलनी चाहिये सर्वोच्चता

इसके चलते डीओएसबी को ऐसी नीति पेश करने पर मजबूर होना पड़ा, जिससे खेल संघों को मिलने वाली सार्वजनिक वित्तीय मदद को सशर्त कर दिया गया और इस वित्तीय मदद को पाने के लिए, यौन दुर्व्यवहार के लिए निरोधक तरीकों को अपनाया जाना इन खेल संघों के लिए अनिवार्य बना दिया गया। 

लेकिन इसके साथ ही, खेल संगठनों के लिए कमज़ोर रिपोर्टिंग सिस्टम भी यौन दुर्व्यवहार के निरोध और इसके समाधान में प्रगति को बाधित करता है। स्चेंक ने एक वक्तव्य में कहा, "दुर्व्यवहार को रोकने के लिए, खेल संगठनों और सरकारों को कार्रवाई करनी ही चाहिए।"

"रक्षा का पहला तरीका, दुर्व्यवहार को होने से रोकना है, इसके लिए पारदर्शी संस्कृति, मजबूत निरोध ढांचा, जिसमें सेक्सटॉर्शन और दूसरे दुर्व्यवहारों के साथ-साथ लिंगभेद के व्यापक प्रभाव पर शिक्षा शामिल है।" 

तेज़ी से करें कार्रवाई

रिपोर्ट में कई सारे सुझाव दिए गए हैं और पहली बार ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने सेक्सटॉर्शन के मामले में निरोध पर जोर दिया है। हालांकि कई दीर्घकालीन सुझाव हैं, लेकिन चेने आपात स्तर पर बदलावों की जरूरत के लिए तेजी से शुरुआत करने की वकालत की।

"हमारे शोध के दौरान कई भयावह कहानियां सुनीं, कई सपनों को तोड़ दिया गया। यह सिर्फ़ यौन दुर्व्यवहार के बारे में नहीं है, यह इस बारे में भी है यौन दुर्व्यहार की शिकायतों को कैसे लिया जा रहा है और कैसे पीड़ितों को चुप करा दिया जाता है।"

चेने ने एक वक्तव्य में कहा, "अब चुप्पी की संस्कृति को बदलने और खेल में हर तरह के दुर्व्यवहार पर सजा देने का समय आ गया है। खेल संगठनों, सरकारों और नागरिक समाज को यौन दुर्व्यवहार को अब गंभीरता से लेना ही होगा और सेक्सटॉर्शन को रोकने के लिए तुरंत काम करना होगा।"

संपादन: मैट पियरसन

साभार: डी डब्ल्यू

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Sport's Serious Problem with 'Sextortion'


बाकी खबरें

  • Bhagat Singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    शहीद भगत सिंह के इतिहास पर एस. इरफ़ान हबीब
    27 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन ने बात की है इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब से भगत सिंह के इतिहास पर।
  • Raghav Chadha
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..
    27 Mar 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर एकबार फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • jaunpur violence against dalits
    विजय विनीत
    उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप
    27 Mar 2022
    आरोप है कि बदलापुर थाने में औरतों और बच्चियों को पीटने से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पहले उनके कपड़े उतरवाए गए और फिर बेरहमी से पीटा गया। औरतों और लड़कियों ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि वे…
  • सोनिया यादव
    अपने ही देश में नस्लभेद अपनों को पराया बना देता है!
    27 Mar 2022
    भारत का संविधान सभी को धर्म, जाति, भाषा, वेशभूषा से परे बिना किसी भेदभाव के एक समान होने की बात करता है, लेकिन नस्लीय भेद इस अनेकता में एकता की भावना को कलंकित करता है।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License